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    4. मेरा भला करने वालों से बचाएँ - Mera Bhala Karne Walon Se Bachayein - Class 11 - Yuvakbharati

    • 1 day ago
    • 5 min read

     लेखक: डॉ. राजेंद्र सहगल | विधा: व्यंग्य


    १. शब्दार्थ और मुहावरे (Glossary with English Context)

    क. शब्दार्थ (Word Meanings)

    शब्द (Word)

    अर्थ (Hindi)

    अर्थ (English Context)

    विडंबना

    उपहास / विसंगति

    Irony


    पाखंड

    ढोंग

    Hypocrisy


    मोहभंग

    भ्रांति निवारण

    Disillusionment


    मर्मांतक

    मर्म को भेदने वाला

    Heart-rending / Piercing


    साध्य

    लक्ष्य

    Goal / Objective


    विवरण

    वर्णन / ब्योरा

    Description / Details


    दायरा

    गोलघेरा

    Range / Circle


    समवेत

    एक साथ

    Collective / Simultaneous


    तुरुप का पत्ता

    आखिरी दाँव

    Trump card


    निष्क्रियता

    जड़ता

    Inactivity


    ख. मुहावरे (Idioms)

    मुहावरा (Idiom)

    अर्थ (Meaning)

    वाक्य प्रयोग (Sentence Usage)

    सोने पर सुहागा

    किसी अच्छी चीज में और निखार आना

    खबर के साथ मनोरंजन मिल जाए तो यह सोने पर सुहागा है।


    टस-से-मस न होना

    विचलित न होना

    दुकानदार के बार-बार बोलने पर भी बबलू अपनी जगह से टस-से-मस न हुआ।


    दीवाला पिटना

    दिवालिया होना

    इतना सस्ता माल बेचकर दुकानदार अपना दीवाला पिटवा रहा था।


    नतमस्तक होना

    श्रद्धा से सिर झुकाना

    लेखक उस महान व्यापारी के सामने नतमस्तक हो गया।


    होश उड़ जाना

    घबरा जाना

    सेल के विज्ञापन देखकर ग्राहकों के होश उड़ जाते हैं।

    २. परिचय और सारांश (Introduction & Summary)

    लेखक परिचय: डॉ. राजेंद्र सहगल जी का जन्म २४ अगस्त १९५३ को हुआ। आपने बैंक में उपप्रबंधक के रूप में कार्य किया और आकाशवाणी के लिए विभिन्न विषयों पर फीचर लेखन भी किया।


    केंद्रीय भाव (Central Idea - Bilingual):

    • हिन्दी: आधुनिक उपभोक्तावादी संस्कृति में 'मुफ्त' और 'फायदे' के नाम पर ग्राहकों को ठगने वाली प्रवृत्तियों पर कड़ा प्रहार किया गया है।


    • English: This satire criticizes modern consumerism, where customers are often trapped by misleading offers under the guise of 'freebies' and 'benefit'.


    सारांश (Summary): प्रस्तुत व्यंग्य 'मेरा भला करने वालों से बचाएँ' में लेखक ने आज के बाजारवाद पर तीखा कटाक्ष किया है। लेखक का मानना है कि आज हर कोई हमारा 'भला' करना चाहता है—चाहे वह स्लिमिंग सेंटर हो, बैंक हो या सेल लगाने वाला दुकानदार। ये लोग 'एक पर एक मुफ्त' का लालच देकर ग्राहकों को ऐसी चीजें खरीदने पर मजबूर कर देते हैं जिनकी उन्हें आवश्यकता ही नहीं होती।


    लेखक अपने अनुभवों के माध्यम से बताते हैं कि कैसे अखबार के साथ आने वाले ढेरों पेंफलेट, क्रेडिट कार्ड के झाँसे और सेल फोन की हीनता ग्रंथि समाज को प्रभावित कर रही है। मॉल में सस्ता माल बेचने वाला व्यापारी खुद को 'भारत माँ का सपूत' बताकर अपना मुनाफा कमाता है। अंत में लेखक अपील करता है कि उसे इन 'भला करने वालों' से बचाया जाए, क्योंकि घोषित शत्रुओं से तो बचा जा सकता है, पर इन फायदा पहुँचाने का मुखौटा पहनने वालों को पहचानना बहुत मुश्किल है।


    ३. HSC गद्य आकलन (Prose Pattern)


    कृति १: आकलन (Global Understanding - 2 Marks)

    • प्रश्न १: लेखक की चिंता करने वाले किन्हीं चार घटकों के नाम लिखिए।

      • उत्तर: (१) स्लिमिंग सेंटर (२) बैंक (३) योग संस्थान (४) टीवी चैनल।


    • प्रश्न २: लेखक का योग के प्रति मोहभंग होने का क्या कारण था?

      • उत्तर: योग संस्थान वालों द्वारा योग के बहाने केवल दुनियादारी की बातें करना और चुटकुले सुनाकर समवेत स्वर में ठहाके लगाना।


    • प्रश्न ३: अखबार के दफ्तर से आए दो युवाओं का असली मकसद क्या था?

      • उत्तर: विदेशी बैंक के साथ काँट्रेक्ट के चलते क्रेडिट कार्ड बनवाने का लक्ष्य पूरा करना।


    • प्रश्न ४: ब्यूटी पार्लर वाले ने पैर के नाखून काटने को क्या नाम दिया?

      • उत्तर: 'पैडीक्योर' और इसके लिए उसने १०००/- रुपये लिए।


    • प्रश्न ५: सेल फोन के कारण लोग किस ग्रंथि से मुक्त हुए हैं?

      • उत्तर: हीनता की ग्रंथि (Inferiority Complex) से।


    कृति २: शब्द संपदा (Vocabulary - 2 Marks)

    • प्रश्न १: 'प्र' उपसर्ग लगाकर दो शब्द बनाइए।

      • उत्तर: (१) प्रहार (२) प्रभाव।


    • प्रश्न २: 'ता' प्रत्यय लगाकर दो शब्द बनाइए।

      • उत्तर: (१) मनुष्यता (२) संवेदनशीलता।


    • प्रश्न ३: 'वि' उपसर्गयुक्त शब्द पाठ से ढूँढ़कर लिखिए।

      • उत्तर: विवरण, विस्मय।


    कृति ३: अभिव्यक्ति (Personal Response - 2 Marks)


    प्रश्न १: मुफ्त में मिलने वाली चीजों के प्रति लोगों की मानसिकता को स्पष्ट कीजिए। 


    उत्तर:

    मनुष्य स्वभाव से ही लाभ का इच्छुक होता है। जब भी बाजार में 'एक पर एक मुफ्त' या 'भारी छूट' जैसे विज्ञापन दिखते हैं, तो लोग अपनी तर्कशक्ति खो देते हैं। उन्हें लगता है कि मुफ्त में चीज पाकर वे अपना फायदा कर रहे हैं, जबकि असल में वे दुकानदार की मार्केटिंग चाल का शिकार हो जाते हैं। 'मुफ्त' के चक्कर में लोग अक्सर गैर-जरूरी सामान खरीदकर अपने घर का कचरा बढ़ा लेते हैं। यह मानसिकता दर्शाती है कि ग्राहक आज वस्तुओं के मूल्य से अधिक विज्ञापनों के प्रलोभन पर विश्वास करने लगा है।


    ७. व्याकरण (Grammar Corner with Explanations)

    उपसर्ग (Prefixes):

    • वि + करण = विवरण


    • नि + उत्तर = निरुत्तर


    •  + चंभित = अचंभित


    प्रत्यय (Suffixes):

    • भारत + ईय = भारतीय


    • समझ + दारी = समझदारी


    • भाव + इक = भावावेश (आवेग) / सामयिक 


    रस (Ras): १. वीर रस: "साजि चतुरंग सैन, अंग में उमंग धरि । सरजा सिवाजी, जंग जीतन चलत है।" २. करुण रस: "अवला जीवन हाय ! तुम्हारी यही कहानी, आँचल में है दूध और आँखों में पानी ।" ३. भयानक रस: "उधर गरजती सिंधु लहरिया, कुटिल काल के जालों-सी ।"


    ८. पिछली बोर्ड परीक्षाओं में पूछे गए प्रश्न


    प्रश्न १: पाठ के आधार पर ग्राहकों की वर्तमान स्थिति का चित्रण कीजिए।  उत्तर: आज का ग्राहक विज्ञापनों और प्रलोभनों के जाल में बुरी तरह फँसा हुआ है। वह सेल, डिस्काउंट और फ्री की चीजों के पीछे भागता है। व्यापारी अपनी चालाकी से ग्राहकों को अहसानमंद महसूस कराते हैं, जबकि अंततः आर्थिक नुकसान ग्राहक का ही होता है।


    प्रश्न २: डॉ. राजेंद्र सहगल जी की किन्हीं दो साहित्यिक कृतियों के नाम लिखिए। उत्तर: (१) 'असत्य की तलाश' (२) 'धर्म बिका बाजार में'।


    प्रश्न ३: 'मुलतानी मिट्टी' बेचने वाले के बहाने व्यापारी मानसिकता को स्पष्ट कीजिए।

    उत्तर: व्यापारी हर परिस्थिति को भुनाना जानता है। वह खुद को देश भक्त या जन सेवक बताकर खराब माल भी ग्राहकों को थमा देता है।


    प्रश्न ४: फिल्म देखते समय टिकट के साथ खाने का सामान बेचने के पीछे क्या तर्क दिया जाता है?  उत्तर: यह तर्क दिया जाता है कि तीन घंटे की फिल्म में कोई भूखा नहीं रहेगा और यह स्कीम 'जन कल्याण' के लिए लाई गई है।


    प्रश्न ५: 'व्यंग्य' विधा की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं?  उत्तर: अतिशयोक्ति, विडंबना, विसंगतियाँ और आक्रोश प्रदर्शन इसके प्रमुख अंग हैं। इसका उद्देश्य समाज का मजाक उड़ाना नहीं, बल्कि पाठकों को एक स्पष्ट दृष्टिकोण देना है।


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