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    1 - देवसेना का गीत / कार्नेलिया का गीत (Devsena Ka Geet / Cornelia Ka Geet) - Class 12 - Antara 2

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    Updated: 2 days ago

    देवसेना का गीत / कार्नेलिया का गीत (Devsena Ka Geet / Cornelia Ka Geet)

    Class 12 - Hindi Elective (Antara Bhag 2) |

    Poet: जयशंकर प्रसाद (Jaishankar Prasad)


    1. कवि परिचय (Literary Profile)

    • साहित्यिक विशेषताएँ (Literary Traits): जयशंकर प्रसाद 'छायावाद' (Chhayavad) के प्रवर्तक और प्रमुख स्तंभ माने जाते हैं। उनके साहित्य में राष्ट्रीय जागरण, प्राचीन भारतीय संस्कृति का गौरव और मानवीय संवेदनाओं (प्रेम, करुणा, त्याग) का अत्यंत सूक्ष्म चित्रण मिलता है। वे इतिहास और कल्पना का अद्भुत समन्वय करते हैं।

    • प्रमुख रचनाएँ (Key Works):

      • नाटक: स्कंदगुप्त ('देवसेना का गीत' का स्रोत), चंद्रगुप्त ('कार्नेलिया का गीत' का स्रोत), ध्रुवस्वामिनी।

      • काव्य: कामायनी (महाकाव्य), आँसू, लहर, झरना।

    2. पाठ/कविता का सार (Executive Summary)

    (क) देवसेना का गीत

    • प्रतिपाद्य (Central Theme): यह गीत नाटक 'स्कंदगुप्त' से लिया गया है। इसमें हूणों के आक्रमण से पीड़ित और प्रेम में असफल देवसेना जीवन के अंतिम पड़ाव पर अपनी वेदना (pain) और त्याग का चित्रण करती है। वह अपनी 'आशा' को बावली कहती है और स्कंदगुप्त के देर से मिले प्रेम प्रस्ताव को ठुकरा देती है।

    • English Explanation: This poem depicts Devsena at the twilight of her life, recalling the pain of her unrequited love for Skandagupta. It is a song of tragic resignation where she bids farewell to her desires and sorrows with dignity.

    • Key Points:

      • देवसेना का संघर्ष और एकाकीपन (Loneliness)।

      • स्कंदगुप्त के प्रति प्रेम और उसकी विफलता।

      • जीवन की सांध्य बेला में मोह का त्याग।

    (ख) कार्नेलिया का गीत

    • प्रतिपाद्य (Central Theme): यह गीत नाटक 'चंद्रगुप्त' से है। सिकंदर के सेनापति सेल्युकस की बेटी कार्नेलिया सिंधु नदी के तट पर बैठकर भारत के प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक महानता (Cultural Greatness) का गुणगान करती है।

    • English Explanation: Sitting by the river Indus, Cornelia admires the natural beauty and cultural generosity of India. She describes India as a land where even strangers find a home and nature dances in joy.

    • Key Points:

      • भारत का प्राकृतिक सुषमा (Natural Beauty)।

      • 'वसुधैव कुटुम्बकम' और अतिथि सत्कार की भावना।

      • ज्ञान (उषा) का उदय सर्वप्रथम भारत में होता है।



    2.1 पद्यांश अनुवाद (Line-by-Line Translation)

    (क) देवसेना का गीत

    पंक्ति (Original Line)

    हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

    English Translation

    आह! वेदना मिली विदाई!

    जीवन के अंतिम समय में विदा लेते हुए मुझे केवल पीड़ा (वेदना) ही मिली है।

    Ah! In my farewell, I have received only pain and agony.

    मैंने भ्रम-वश जीवन संचित, मधुकरियों की भीख लुटाई।

    प्रेम के भ्रम में जीकर मैंने जो अभिलाषाएँ इकट्ठी की थीं, उन्हें अब मैं भिक्षा (भीख) की तरह त्याग रही हूँ।

    Under the illusion (of love), I gathered hopes, which I am now giving away like alms.

    छलछल थे संध्या के श्रमकण, आँसू-से गिरते थे प्रतिक्षण।

    जीवन की शाम (बुढ़ापा) थकान से भरी है। थकान के कारण पसीने की बूँदें आँसुओं की तरह हर पल गिर रही हैं।

    The twilight of my life was filled with fatigue; drops of sweat fell like tears every moment.

    मेरी यात्रा पर लेती थी, नीरवता अनंत अंगड़ाई।

    मेरी जीवन यात्रा में केवल 'खामोशी' (सन्नाटा) ही मेरी साथी थी, जो अनंत तक मेरे साथ चलती रही।

    On my journey, only infinite silence accompanied me, stretching endlessly.

    श्रमित स्वप्न की मधुमाया में, गहन-विपिन की तरु-छाया में,

    जैसे कोई थका हुआ यात्री घने जंगल में पेड़ की छाया में सुखद सपने देख रहा हो...

    Like a tired traveler dreaming sweet dreams in the shade of a tree in a dense forest...

    पथिक उनींदी श्रुति में किसने, यह विहाग की तान उठाई।

    ...उस अर्ध-निद्रा में यह विहाग राग (विरह गीत) छेड़कर किसने बाधा डाली? (स्कंदगुप्त का प्रस्ताव अब अच्छा नहीं लगता)।

    ...Who has disturbed the sleepy ears of the traveler by raising this melody of Vihag?

    लगी सतृष्ण दीठ थी सबकी, रही बचाए फिरती कबकी।

    जवानी में सबकी प्यासी (तृष्णा भरी) नजरें मुझ पर थीं, जिनसे मैं खुद को बचाती फिरती थी।

    Everyone's thirsty gaze was fixed on me, and I kept trying to save myself from them.

    मेरी आशा आह! बावली, तूने खो दी सकल कमाई।

    हे मेरी पागल आशा! तेरे कारण ही मैंने अपने जीवन की सारी सुख-शांति (कमाई) खो दी है।

    Oh, my mad hope! Because of you, I have lost all my life's earnings.

    चढ़कर मेरे जीवन-रथ पर, प्रलय चल रहा अपने पथ पर।

    मेरे जीवन रूपी रथ पर स्वयं 'प्रलय' (विनाश) सवार है और वह अपने रास्ते पर बढ़ रहा है।

    Destruction has mounted my chariot of life and is moving along its path.

    मैंने निज दुर्बल पद-बल पर, उससे हारी होड़ लगाई।

    मैं जानती हूँ कि मैं कमजोर हूँ, फिर भी मैंने प्रलय से मुकाबला (होड़) किया है, जहाँ मेरी हार निश्चित है।

    Despite my weak footing, I competed with it, knowing I was destined to lose.

    लौटा लो यह अपनी थाती, मेरी करुणा हा हा खाती।

    (संसार/स्कंदगुप्त से) अपना यह प्रेम वापस ले लो। मेरी करुणा अब चीत्कार कर रही है, मैं इसे नहीं सँभाल सकती।

    Take back this trust (love) of yours; my compassion is crying out in pain.

    विश्व! न सँभलेगी यह मुझसे, इससे मन की लाज गँवाई।

    हे संसार! यह प्रेम अब मुझसे नहीं सँभलेगा। इसी के कारण मैंने अपने मन की लज्जा खो दी थी।

    O World! I cannot handle this anymore; because of this, I have lost my dignity.

    (ख) कार्नेलिया का गीत

    पंक्ति (Original Line)

    हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

    English Translation

    अरुण यह मधुमय देश हमारा!

    हमारा यह भारत देश सूर्य की लालिमा (अरुण) से युक्त और मिठास (मधुमय) से भरा हुआ है।

    This implies our saffron/reddish-glow sweet country!

    जहाँ पहुँच अनजान क्षितिज को मिलता एक सहारा।

    यहाँ दूर-दराज के अनजान क्षितिज (अजनबियों) को भी आश्रय/सहारा मिलता है।

    Where even the unknown horizon finds a support/shelter upon reaching here.

    सरस तामरस गर्भ विभा पर, नाच रही तरुशिखा मनोहर।

    लाल कमलों (तामरस) और पेड़ों की चोटियों पर सूर्य की किरणें नाचती हुई प्रतीत होती हैं।

    The beautiful treetops seem to be dancing on the glow of the juicy red lotus.

    छिटका जीवन हरियाली पर-मंगल कुंकुम सारा!

    हरियाली पर सूर्य का प्रकाश ऐसा लगता है जैसे किसी ने पवित्र मंगल कुमकुम बिखेर दिया हो।

    It looks as if auspicious Kumkum has been scattered over the lush greenery of life.

    लघु सुरधनु से पंख पसारे-शीतल मलय समीर सहारे।

    पक्षी छोटे इंद्रधनुष (सुरधनु) जैसे पंख फैलाकर मलय पर्वत की सुगंधित हवा के सहारे...

    Spreading wings like small rainbows, supported by the cool sandalwood breeze...

    उड़ते खग जिस ओर मुँह किए-समझ नीड़ निज प्यारा।

    ...जिस दिशा की ओर मुँह करके उड़ते हैं, वही यह प्यारा भारत देश है (जिसे वे अपना घर मानते हैं)।

    ...The direction towards which the birds fly, considering it their beloved nest.

    बरसाती आँखों के बादल बनते जहाँ भरे करुणा जल।

    यहाँ के लोगों की आँखों में करुणा के बादल रहते हैं, जो दूसरों के दुख में आँसू बनकर बरसते हैं।

    Clouds of rainy eyes become filled with waters of compassion here.

    लहरें टकराती अनंत की पाकर जहाँ किनारा।

    विशाल समुद्र की भटकती लहरें भी भारत के तट पर आकर किनारा (शांति) पाती हैं।

    Where the waves of the infinite ocean collide, finally finding a shore.

    हेम कुंभ ले उषा सवेरे-भरती ढुलकाती सुख मेरे।

    प्रात:काल (उषा) सूर्य रूपी स्वर्ण कलश (हेम कुंभ) में सुख भरकर लाती है और भारत पर लुढ़का देती है।

    The dawn takes the golden pot (sun) and pours out happiness for me in the morning.

    मदिर ऊँघते रहते जब-जगकर रजनी भर तारा।

    यह तब होता है जब रात भर जागने के बाद तारे मस्ती में ऊँघ रहे होते हैं (छिपने वाले होते हैं)।

    When the stars, having stayed awake all night, are drowsily nodding off.

    3. कठिन शब्दार्थ (Glossary)

    शब्द (Word)

    अर्थ (Hindi Meaning)

    English Context

    मधुकरियाँ

    पके हुए अन्न की भिक्षा

    Alms / Beggar's food

    विहाग

    अर्द्धरात्रि में गाया जाने वाला राग (वियोग सूचक)

    Midnight melody (melancholic)

    प्रलय

    विनाश / सृष्टि का अंत

    Doomsday / Catastrophe

    थाती

    अमानत / धरोहर

    Trust / Deposit

    तामरस

    तांबे जैसा लाल रंग / लाल कमल

    Red Lotus / Copper red

    मलय समीर

    मलय पर्वत (दक्षिण) से आने वाली सुगंधित हवा

    Sandalwood breeze

    हेम कुंभ

    सोने का घड़ा (सूर्य का प्रतीक)

    Golden Pot (Metaphor for Sun)

    मदिर

    मस्ती पैदा करने वाला / नशीला

    Intoxicating

    4. साहित्यिक विश्लेषण (Literary Analysis)

    (क) देवसेना का गीत (Poem)

    • भाव पक्ष (Thematic Aspect): इसमें 'वियोग श्रृंगार' और 'करुण रस' (Pathos) की प्रधानता है। यह एकतरफा प्रेम की पीड़ा और जीवन संघर्ष में मिली हार को दर्शाता है।

    • कला पक्ष (Artistic Aspect):

      • अलंकार:

        • रूपक (Metaphor): "जीवन-रथ" (Life's chariot), "श्रमित स्वप्न"।

        • मानवीकरण (Personification): "नीरवता अनंत अंगड़ाई", "आशा आह! बावली"।

      • भाषा: तत्सम प्रधान खड़ी बोली (Sanskritized Hindi)।

      • बिंब (Imagery): "संध्या के श्रमकण" (Visual imagery of sweat/tears)।

    (ख) कार्नेलिया का गीत (Poem)

    • भाव पक्ष (Thematic Aspect): देश-प्रेम (Patriotism) और प्रकृति चित्रण। भारत की समन्वयवादी संस्कृति और उदारता (Generosity) का वर्णन।

    • कला पक्ष (Artistic Aspect):

      • अलंकार:

        • उपमा (Simile): "लघु सुरधनु से पंख पसारे" (Wings like small rainbows)।

        • मानवीकरण: "उषा सवेरे... भरती ढुलकाती सुख"।

      • बिंब (Imagery): चाक्षुष बिंब (Visual Imagery) - नाचती तरुशिखा, हेम कुंभ।

      • शैली: गेयता (Musical/Lyrical flow).

    5. गद्यांश/काव्यांश आधारित प्रश्न (Extract-Based Competency)

    संदर्भ 1 (देवसेना का गीत):

    "चढ़कर मेरे जीवन-रथ पर, प्रलय चल रहा अपने पथ पर। मैंने निज दुर्बल पद-बल पर, उससे हारी होड़ लगाई।"

    1. जीवन-रथ में कौन सा अलंकार है और यह क्या दर्शाता है?

      • उत्तर: यहाँ 'रूपक अलंकार' है। यह देवसेना के संघर्षपूर्ण जीवन को एक युद्ध रथ के समान दर्शाता है जिस पर विनाश सवार है।

    2. 'हारी होड़ लगाई' का आशय स्पष्ट करें।

      • उत्तर: देवसेना जानती है कि भाग्य (प्रलय) के सामने उसकी हार निश्चित है, फिर भी वह संघर्ष कर रही है। यह उसकी अदम्य जिजीविषा (will to live/fight) को दिखाता है।

    3. कवयित्री ने अपने पैरों को 'दुर्बल' क्यों कहा है?

      • उत्तर: क्योंकि वह वृद्धावस्था में है और जीवन भर के दुखों ने उसे शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर कर दिया है।

    संदर्भ 2 (कार्नेलिया का गीत):

    "बरसाती आँखों के बादल, बनते जहाँ भरे करुणा जल। लहरें टकराती अनंत की, पाकर जहाँ किनारा।"

    1. 'बरसाती आँखों के बादल' किस विशेषता को इंगित करते हैं?

      • उत्तर: यह भारतीयों की संवेदनशीलता और 'करुणा' (Compassion) को दर्शाता है। यहाँ लोग दूसरों के दुख में द्रवित हो जाते हैं।

    2. अनंत लहरों को किनारा मिलने का क्या अर्थ है?

      • उत्तर: इसका अर्थ है कि भारत शरणार्थियों और भटकते हुए लोगों (अजनबियों) को भी आश्रय और सुरक्षा प्रदान करता है।

    3. काव्यांश की भाषागत विशेषता लिखिए।

      • उत्तर: भाषा लाक्षणिक और लयात्मक है। 'करुणा जल' में रूपक अलंकार है।


    6. पाठ्यपुस्तक प्रश्नोत्तर (Textbook Q&A)

    A. बोधात्मक प्रश्न (Short Answer)

    • प्रश्न 1: "मैंने भ्रमवश जीवन संचित, मधुकरियों की भीख लुटाई" पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।

      • उत्तर: देवसेना स्वीकार करती है कि उसने जवानी में स्कंदगुप्त के प्रेम के भ्रम में जो अभिलाषाएँ पाली थीं, अब जीवन के अंत में वह उन्हें भिक्षा की तरह त्याग रही है। उसकी सारी उम्मीदें अब व्यर्थ हो गई हैं।

    • प्रश्न 2: कवि ने आशा को बावली (Crazy) क्यों कहा है?

      • उत्तर: आशा तर्कहीन होती है। विपरीत परिस्थितियों और स्कंदगुप्त के प्रेम की असफलता के बावजूद आशा ने देवसेना के मन में झूठी उम्मीद जगाए रखी, जिससे उसे अंत में दुख ही मिला। इसलिए इसे 'बावली' कहा गया है।

    • प्रश्न 3: 'उड़ते खग' और 'बरसाती आँखों के बादल' में क्या विशेष अर्थ व्यंजित होता है?

      • उत्तर: 'उड़ते खग' भारत को अपना घर मानने वाले शरणार्थियों का प्रतीक है, और 'बरसाती आँखों के बादल' भारतीयों की करुणा और दयालुता का परिचायक है।

    • प्रश्न 4: "लघु सुरधनु से पंख पसारे" में कौन सा अलंकार है?

      • उत्तर: यहाँ 'उपमा अलंकार' (Simile) है। पक्षियों के रंग-बिरंगे पंखों की तुलना छोटे इंद्रधनुष से की गई है।

    B. विश्लेषणात्मक प्रश्न (Long Answer)

    • प्रश्न 1: 'कार्नेलिया का गीत' कविता में प्रसाद ने भारत की किन विशेषताओं की ओर संकेत किया है?

      • उत्तर: प्रसाद जी ने भारत को प्राकृतिक सुषमा का देश बताया है जहाँ सूर्योदय मधुर होता है। सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यहाँ की सांस्कृतिक उदारता है—यह देश अजनबियों (अनजान क्षितिज) को सहारा देता है और यहाँ करुणा का वास है। यह ज्ञान (उषा) की भूमि है।

    • प्रश्न 2: देवसेना की हार या निराशा के क्या कारण हैं?

      • उत्तर: देवसेना की निराशा के मुख्य कारण हैं: (1) हूणों के आक्रमण में अपने परिवार (भाई बंधुवर्मा) और राज्य का विनाश। (2) स्कंदगुप्त के प्रति उसका एकतरफा प्रेम, जो जवानी में उसे नहीं मिला। (3) जीवन भर के संघर्ष के बाद अंत में मिला अकेलापन और खालीपन।

    • प्रश्न 3: "मैंने निज दुर्बल पद-बल पर, उससे हारी होड़ लगाई" में निहित व्यंजना स्पष्ट कीजिए।

      • उत्तर: यह पंक्ति देवसेना के साहस और त्रासदी दोनों को व्यक्त करती है। 'दुर्बल पद-बल' उसकी शारीरिक कमजोरी और असहायता को दिखाता है, जबकि 'हारी होड़' यह बताती है कि परिणाम (विनाश) जानते हुए भी उसने नियति से संघर्ष किया। यह उसके चरित्र की दृढ़ता है।

    • प्रश्न 4: 'जहाँ पहुँच अनजान क्षितिज को मिलता एक सहारा' पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।

      • उत्तर: इसका आशय 'वसुधैव कुटुम्बकम' की भावना से है। भारत की सीमाएँ केवल भौगोलिक नहीं हैं, बल्कि यह मानवता का आश्रय स्थल है। यहाँ दूर देशों से आए अपरिचित व्यक्तियों को भी अपनापन और सुरक्षा मिलती है।

    • प्रश्न 5: "हेम कुंभ ले उषा सवेरे-भरती ढुलकाती सुख मेरे" का काव्य-सौंदर्य लिखिए।

      • उत्तर: यहाँ 'उषा' (सुबह) का मानवीकरण एक पनिहारिन के रूप में किया गया है जो सूर्य रूपी सोने के घड़े (हेम कुंभ) से पृथ्वी पर सुख और प्रकाश लुढ़का रही है। यह एक अत्यंत मोहक 'चाक्षुष बिंब' (Visual Image) है जो भारत की समृद्धि और ज्ञानोदय को दर्शाता है।

    7. अभिव्यक्ति और माध्यम (Creative Writing Connection)

    • संबंधित आलेख विषय: "अतिथि देवो भव: भारतीय संस्कृति का मूल मंत्र"

    • मुख्य बिंदु:

      • कार्नेलिया का गीत और शरणार्थियों को आश्रय देने की भारतीय परंपरा।

      • विश्व बंधुत्व की भावना (Universal Brotherhood).

      • आज के दौर में सहिष्णुता और करुणा की आवश्यकता।

    8. परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण कथन (Key Quotes)

    1. "अरुण यह मधुमय देश हमारा! जहाँ पहुँच अनजान क्षितिज को मिलता एक सहारा।" (भारत की उदारता पर उत्तर लिखने के लिए)

    2. "मैंने भ्रम-वश जीवन संचित, मधुकरियों की भीख लुटाई।" (पश्चाताप और त्याग के लिए)

    3. "मुझसे हारी होड़ लगाई।" (संघर्ष और जिजीविषा के लिए)


    9. सामान्य त्रुटियाँ (Common Student Errors)

    • अवधारणा (Concept): छात्र अक्सर 'देवसेना' (दुख/वियोग) और 'कार्नेलिया' (उत्साह/देशप्रेम) के भावों को मिला देते हैं। याद रखें: देवसेना = स्कंदगुप्त नाटक; कार्नेलिया = चंद्रगुप्त नाटक।

    • वर्तनी (Spelling): 'जयशंकर' (सही), 'जाशंकर' (गलत)। 'कार्नेलिया' (सही), 'कारनेलिया' (गलत)। 'मधुकरियाँ' का अर्थ 'शहद' नहीं, 'भिक्षा' है।

    10. विगत वर्षों के बोर्ड प्रश्न (PYQs)

    • प्रश्न 1 (लघु - 2 अंक): 'देवसेना का गीत' में 'आशा' को 'बावली' क्यों कहा गया है? (2019, 2022)

      • उत्तर: आशा तर्कहीन होती है। जब प्रेम मिलने की कोई संभावना नहीं थी, तब भी आशा ने देवसेना को भ्रम में रखा, जिससे अंततः उसे दुख ही मिला। इसलिए उसे 'बावली' कहा गया है।

    • प्रश्न 2 (लघु - 2 अंक): 'कार्नेलिया का गीत' में 'उड़ते खग' किसका प्रतीक हैं? (2020)

      • उत्तर: 'उड़ते खग' उन शरणार्थियों या प्रवासियों का प्रतीक हैं जो शांति और सुरक्षा की तलाश में भारत आते हैं और इसे अपना घर (नीड़) मानते हैं।

    • प्रश्न 3 (दीर्घ - 5 अंक): 'कार्नेलिया का गीत' के आधार पर भारत की प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विशेषताओं का वर्णन कीजिए। (2023)

      • उत्तर: (1) प्राकृतिक: मधुर सूर्योदय, लाल कमलों पर नाचती किरणें, सुगंधित मलय समीर। (2) सांस्कृतिक: करुणा (बरसाती आँखों के बादल), अजनबियों को सहारा (अनजान क्षितिज), और ज्ञान का प्रसार (उषा)।

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