3 - यह दीप अकेला / मैंने देखा, एक बूँद (Yeh Deep Akela / Maine Dekha, Ek Boond) - Class 12 - Antara 2
- 2 days ago
- 10 min read
Updated: 2 days ago

यह दीप अकेला / मैंने देखा, एक बूँद (Yeh Deep Akela / Maine Dekha, Ek Boond)
Class 12 - Hindi Elective (Antara Bhag 2) |
Poet: सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' (Sacchidananda Hirananda Vatsyayan 'Agyeya')
1. कवि परिचय (Literary Profile)
साहित्यिक विशेषताएँ (Literary Traits): अज्ञेय जी 'प्रयोगवाद' (Experimentalism) और 'नई कविता' के शलाका-पुरुष माने जाते हैं। उनके साहित्य में व्यक्ति-स्वातंत्र्य (Individual Freedom), बौद्धिकता और 'क्षण के महत्त्व' का आग्रह है। वे मनोविश्लेषणवाद और अस्तित्ववाद से प्रभावित थे। उन्होंने हिंदी काव्य-भाषा को नए उपमान और प्रतीक दिए।
प्रमुख रचनाएँ (Key Works):
काव्य: 'तार सप्तक' (संपादक), 'आँगन के पार द्वार', 'कितनी नावों में कितनी बार' (ज्ञानपीठ पुरस्कार), 'हरी घास पर क्षण भर'।
उपन्यास: 'शेखर: एक जीवनी', 'नदी के द्वीप'।
2. पाठ/कविता का सार (Executive Summary)
(क) यह दीप अकेला (Yeh Deep Akela)
प्रतिपाद्य (Central Theme): यह कविता 'व्यष्टि' (Individual) के 'समष्टि' (Society) में विलय की बात करती है। 'दीप' व्यक्ति का प्रतीक है जो स्नेह और गर्व से भरा है, लेकिन अकेला है। 'पंक्ति' समाज का प्रतीक है। कवि का मानना है कि व्यक्ति की सार्थकता अकेलेपन में नहीं, बल्कि समाज के साथ जुड़ने में है।
English Explanation: This poem symbolizes the relationship between the individual (Lamp) and society (Row). The lamp represents a talented, proud, and love-filled individual. However, its true purpose and strength are realized only when it merges with the row (society). It emphasizes the integration of the self into the collective.
Key Points:
दीप (व्यक्ति) स्नेह, गर्व और मद से भरा है, पर एकाकी है।
उसे पंक्ति (समाज) को सौंपने से उसकी शक्ति सार्वभौमिक हो जाएगी।
व्यक्ति का समाज में विलय ही उसकी पूर्णता है।
(ख) मैंने देखा, एक बूँद (Maine Dekha, Ek Boond)
प्रतिपाद्य (Central Theme): यह कविता 'क्षण के महत्त्व' (Importance of the Moment) और जीवन की नश्वरता को रेखांकित करती है। समुद्र से अलग हुई एक बूँद का क्षण भर के लिए सूर्य के प्रकाश में चमकना यह दर्शाता है कि जीवन लंबा होने के बजाय सार्थक होना चाहिए। उस एक क्षण में बूँद अपनी नश्वरता के दाग से मुक्त हो जाती है।
English Explanation: This poem explores the philosophy of the "moment" and mortality. A drop separates from the vast ocean and momentarily glows in the setting sun. This brief moment of individuality and enlightenment is more valuable than a vast but unconscious existence. It signifies liberation from the fear of death through a moment of meaningful existence.
Key Points:
समुद्र (विराट्/ब्रह्म) से बूँद (जीव/व्यक्ति) का अलग होना।
ढलते सूरज की आग (ज्ञान/सत्य) से बूँद का रंग जाना।
नश्वरता (Mortality) के बोध से मुक्ति।
2.1 पद्यांश अनुवाद (Line-by-Line Translation)
(क)
यह दीप अकेला
पंक्ति (Original Line) | हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning) | English Translation |
यह दीप अकेला स्नेह भरा, है गर्व भरा मदमाता, पर इसको भी पंक्ति को दे दो। | यह दीपक (व्यक्ति) तेल (स्नेह/प्रेम) से भरा है और अपनी लौ पर गर्व करता हुआ मस्ती में जल रहा है। फिर भी, इसे कतार (समाज) में रख दो ताकि इसकी सार्थकता बढ़ जाए। | This lamp is alone, filled with oil (love), proud and intoxicated; yet, give it to the row (society). |
यह जन है-गाता गीत जिन्हें फिर और कौन गाएगा? | यह वह व्यक्ति है जो ऐसे मौलिक गीत गाता है जिन्हें इसके सिवा कोई और नहीं गा सकता (इसकी प्रतिभा अद्वितीय है)। | This is the person singing songs that no one else will sing again. |
पनडुब्बा-ये मोती सच्चे फिर कौन कृती लाएगा? | यह उस गोताखोर (पनडुब्बा) के समान है जो विचारों के सागर से सच्चे मोती (मौलिक विचार) निकालकर लाता है। | He is the diver—who else (skilled one) will bring out these true pearls? |
यह समिधा-ऐसी आग हठीला बिरला सुलगाएगा। | यह हवन की लकड़ी (समिधा) जैसा है जो क्रांति या बदलाव की ऐसी आग सुलगा सकता है जो कोई और नहीं कर सकता। | This is the sacrificial wood—rare is the stubborn one who will kindle such a fire. |
यह अद्वितीय-यह मेरा यह मैं स्वयं विसर्जित- | यह व्यक्ति अनोखा (अद्वितीय) है। यह 'मैं' (अहंकार) का भाव है जो अब स्वेच्छा से स्वयं को त्यागने/विसर्जित करने को तैयार है। | This is unique—this is 'mine', this is 'I', self-surrendered. |
यह मधु है-स्वयं काल की मौना का युग-संचय, | यह उस शहद (मधु) के समान है जिसे समय रूपी मधुमक्खियों ने युगों तक मौन रहकर इकट्ठा किया है। | This is honey—the accumulated collection of eras by the silence of Time itself. |
यह गोरस-जीवन-कामधेनु का अमृत-पूत पय, | यह जीवन रूपी कामधेनु का पवित्र अमृत जैसा दूध (गोरस) है। | This is the milk product (Goras)—the nectar-pure milk of the life-Kamadhenu. |
यह अंकुर-फोड़ धरा को रवि को तकता निर्भय, | यह वह अंकुर है जो धरती का सीना चीरकर बाहर निकला है और निडर होकर सूरज को देख रहा है (प्रगतिशील है)। | This is the sprout—breaking through the earth, fearless, staring at the sun. |
यह प्रकृत, स्वयंभू, ब्रह्म, अयुतः इसको भी शक्ति को दे दो। | यह स्वभाविक (प्रकृत), स्वयं उत्पन्न (स्वयंभू) और ब्रह्म स्वरूप है, सबसे अलग (अयुत) है। इसे शक्ति (समाज/परम सत्ता) को सौंप दो। | This is natural, self-born, Brahma, detached; give this too to the Power (Shakti). |
यह वह विश्वास, नहीं जो अपनी लघुता में भी काँपा, | यह वह दृढ़ विश्वास है जो अपनी छोटापन (लघुता) देखकर भी कभी डगमगाया नहीं। | This is that faith, which did not tremble even in its smallness. |
वह पीड़ा, जिस की गहराई को स्वयं उसी ने नापा; | यह वह पीड़ा है जिसकी गहराई को केवल भुगतने वाले ने ही मापा है। | That pain, the depth of which only he himself has measured. |
कुत्सा, अपमान, अवज्ञा के धुँधुआते कडुवे तम में | निंदा (कुत्सा), अपमान और उपेक्षा के कड़वे धुएँ और अंधेरे में भी... | In the smoky bitter darkness of slander, insult, and scorn... |
यह सदा-द्रवित, चिर-जागरूक, अनुरक्त-नेत्र, | ...यह हमेशा दया से पिघला हुआ (द्रवित), हमेशा जागरूक और प्रेम से भरी आँखों (अनुरक्त-नेत्र) वाला है। | ...It is always compassionate (melted), eternally vigilant, with affectionate eyes. |
उल्लंब-बाहु, यह चिर-अखंड अपनापा। | यह अपनी उठी हुई बांहों (उल्लंब-बाहु) से सबको अपनाने को तैयार है। इसका अपनापन कभी न टूटने वाला (अखंड) है। | With raised arms, this represents eternal, unbroken belongingness. |
जिज्ञासु, प्रबुद्ध, सदा श्रद्धामय, इसको भक्ति को दे दो- | यह जानने की इच्छा रखने वाला (जिज्ञासु), ज्ञानी (प्रबुद्ध) और श्रद्धा से भरा है। इसे भक्ति (समष्टि) को समर्पित कर दो। | Curious, enlightened, always full of reverence; give this to Devotion. |
(ख)
मैंने देखा, एक बूँद
पंक्ति (Original Line) | हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning) | English Translation |
मैंने देखा एक बूँद सहसा उछली सागर के झाग से; | कवि कहते हैं कि मैंने देखा कि समुद्र के झाग से अचानक एक बूँद अलग होकर ऊपर उछली। | I saw a drop suddenly leap from the foam of the ocean; |
रंग गई क्षणभर ढलते सूरज की आग से। | वह बूँद केवल एक क्षण के लिए ढलते हुए सूरज की लालिमा (आग) से रंग गई (चमक उठी)। | It was colored for a moment by the fire of the setting sun. |
मुझ को दीख गयाः सूने विराट् के सम्मुख | उस दृश्य को देखकर मुझे उस निर्जन विशालता (विराट्/समुद्र) के सामने यह सत्य दिख गया... | I realized: In front of the silent vastness... |
हर आलोक-छुआ अपनापन है उन्मोचन | ...कि प्रकाश (ज्ञान/सत्य) से छुआ हुआ हर क्षण, अपनापन या अस्तित्व का बोध... | ...Every light-touched sense of belonging is a liberation... |
नश्वरता के दाग से! | ...हमें मिट जाने (नश्वरता) के कलंक या डर से मुक्त (उन्मोचन) कर देता है। | ...From the stain of mortality! |
3. कठिन शब्दार्थ (Glossary)
शब्द (Word) | अर्थ (Hindi Meaning) | English Context |
मदमाता | मस्ती से भरा हुआ / अहंकारी | Intoxicated / Proud |
पनडुब्बा | गोताखोर (पानी में डुबकी लगाने वाला) | Diver |
समिधा | यज्ञ की लकड़ी | Sacrificial wood |
बिरला | कोई एक / बहुत कम | Rare / Unique |
अयुतः | दस हजार (यहाँ अर्थ: असंबद्ध/सबसे अलग) | Detached / Distinct |
कुत्सा | निंदा / बुराई | Slander / Vilification |
उल्लंब-बाहु | ऊपर उठी हुई भुजाओं वाला | One with raised arms |
उन्मोचन | मुक्ति / बंधन ढीला करना | Liberation / Release |
नश्वरता | नाशवान होना / मृत्यु | Mortality |
विराट् | अत्यंत विशाल (ब्रह्म/ईश्वर) | Vast / Infinite (The Absolute) |
4. साहित्यिक विश्लेषण (Literary Analysis)
(क) यह दीप अकेला
भाव पक्ष (Thematic Aspect): यह कविता 'प्रयोगवाद' (Experimentalism) का उत्कृष्ट उदाहरण है। इसमें व्यक्ति (व्यष्टि) और समाज (समष्टि) के संबंधों का दार्शनिक चिंतन है।
कला पक्ष (Artistic Aspect):
प्रतीक योजना (Symbolism):
दीप = स्नेह और प्रतिभा संपन्न व्यक्ति (Individual).
पंक्ति = समाज (Society).
पनडुब्बा = विचारशील व्यक्ति/कवि।
अलंकार:
मानवीकरण: दीप को 'गर्व भरा', 'मदमाता' कहना।
रूपक: 'जीवन-कामधेनु', 'अमृत-पूत पय'।
भाषा: तत्सम प्रधान खड़ी बोली।
(ख) मैंने देखा, एक बूँद
भाव पक्ष (Thematic Aspect): इसमें 'क्षणवाद' (Philosophy of the Moment) की प्रधानता है। कवि के अनुसार, जीवन की सार्थकता उसकी लंबाई (दीर्घजीविता) में नहीं, बल्कि क्षण भर के लिए मिली गहन अनुभूति (Enlightenment) में है।
कला पक्ष (Artistic Aspect):
बिंब (Imagery): दृश्य बिंब (Visual Imagery) - "उछली सागर के झाग से", "रंग गई... सूरज की आग से"।
दर्शन: बूँद (आत्मा) का सागर (परमात्मा) से अलग होकर अपना अस्तित्व बनाना और फिर उसी में विलीन हो जाना।
5. काव्यांश आधारित प्रश्न (Extract-Based Competency)
संदर्भ 1 (यह दीप अकेला):
"यह मधु है-स्वयं काल की मौना का युग-संचय, यह गोरस-जीवन-कामधेनु का अमृत-पूत पय, यह अंकुर-फोड़ धरा को रवि को तकता निर्भय"
'मधु' और 'गोरस' किसके प्रतीक हैं?
उत्तर: 'मधु' (शहद) समय द्वारा संचित ज्ञान और अनुभवों का प्रतीक है। 'गोरस' (दूध/दही) जीवन रूपी कामधेनु से प्राप्त पवित्र भावनाओं और संस्कारों का प्रतीक है।
'अंकुर' की क्या विशेषता बताई गई है?
उत्तर: अंकुर को 'निर्भय' और 'प्रगतिशील' बताया गया है। वह कठोर धरती को फोड़कर बाहर आता है और सीधे सूर्य (तेज/सत्य) की ओर देखता है। यह व्यक्ति की जिजीविषा (will to live) और साहस को दर्शाता है।
कवि इन सबको 'पंक्ति' को क्यों देना चाहता है?
उत्तर: क्योंकि ये सभी गुण (ज्ञान, पवित्रता, साहस) व्यक्ति में निहित हैं। यदि व्यक्ति समाज (पंक्ति) से जुड़ जाएगा, तो इन गुणों का लाभ पूरे समाज को मिलेगा और व्यक्ति का जीवन सार्थक हो जाएगा।
संदर्भ 2 (मैंने देखा, एक बूँद):
"सूने विराट् के सम्मुख हर आलोक-छुआ अपनापन है उन्मोचन नश्वरता के दाग से!"
'सूने विराट्' का क्या आशय है?
उत्तर: 'सूने विराट्' का आशय असीम और निर्जन 'ब्रह्म' या 'ईश्वर' (या विशाल संसार) से है, जिसके सामने मनुष्य का अस्तित्व बहुत छोटा है।
'नश्वरता के दाग' से मुक्ति कैसे मिलती है?
उत्तर: जब व्यक्ति (बूँद) क्षण भर के लिए ही सही, ज्ञान या सत्य (सूर्य का प्रकाश) के संपर्क में आता है, तो वह क्षण उसे अमरत्व का अनुभव करा देता है। सार्थक जीवन जीकर ही नश्वरता के भय (दाग) से मुक्ति मिलती है।
'आलोक-छुआ अपनापन' का अर्थ स्पष्ट करें।
उत्तर: इसका अर्थ है - प्रकाश (ज्ञान) से प्रकाशित निजता। जब व्यक्ति अपने क्षणिक अस्तित्व को पहचान कर उसे अर्थपूर्ण बना लेता है।
6. पाठ्यपुस्तक प्रश्नोत्तर (Textbook Q&A)
A. बोधात्मक प्रश्न (Short Answer)
प्रश्न 1: 'दीप अकेला' के प्रतीकार्थ को स्पष्ट करते हुए यह बताइए कि उसे कवि ने स्नेह भरा, गर्व भरा एवं मदमाता क्यों कहा है?
उत्तर: 'दीप' व्यक्ति का प्रतीक है। 'स्नेह भरा' इसलिए है क्योंकि उसमें तेल (प्रेम) है। 'गर्व भरा' इसलिए क्योंकि वह अपनी रोशनी से अंधकार दूर कर रहा है, और 'मदमाता' इसलिए क्योंकि उसे अपनी शक्ति और सत्ता का अहंकार है।
प्रश्न 2: 'गीत' और 'मोती' की सार्थकता किससे जुड़ी है?
उत्तर: 'गीत' की सार्थकता 'गायक' (जन) से है जो उसे गाता है, और 'मोती' की सार्थकता 'पनडुब्बा' (गोताखोर) से है जो उसे गहराई से निकालकर लाता है। भाव यह है कि सृजनकर्ता के बिना सृजन का महत्व नहीं, लेकिन सृजनकर्ता का महत्व भी तभी है जब वह समाज के सामने आए।
प्रश्न 3: 'सागर' और 'बूँद' से कवि का क्या आशय है?
उत्तर: 'सागर' समष्टि (समाज/ईश्वर/विराट्) का प्रतीक है और 'बूँद' व्यष्टि (व्यक्ति/आत्मा) का प्रतीक है। बूँद का सागर से अलग होना व्यक्ति का स्वतंत्र अस्तित्व बनाना है।
B. विश्लेषणात्मक प्रश्न (Long Answer)
प्रश्न 4: यह दीप अकेला है 'पर इसको भी पंक्ति को दे दो' के आधार पर व्यष्टि का समष्टि में विलय क्यों और कैसे संभव है?
उत्तर: व्यष्टि (व्यक्ति) सर्वगुण संपन्न होने के बावजूद अकेला है, उसकी शक्ति सीमित है। जब वह अपने अहंकार (मद) का त्याग करके स्वेच्छा से समष्टि (समाज/पंक्ति) में मिल जाता है, तब उसकी शक्ति अनंत हो जाती है। यह विलय 'आत्म-विसर्जन' और 'समर्पण' के माध्यम से ही संभव है। जैसे दीप पंक्ति में मिलकर 'दीपावली' बन जाता है।
प्रश्न 5: 'यह अद्वितीय यह मेरा यह मैं स्वयं विसर्जित' - पंक्ति के आधार पर व्यष्टि के समष्टि में विसर्जन की उपयोगिता बताइए।
उत्तर: व्यक्ति का 'अहं' (मैं) उसे समाज से अलग रखता है। जब व्यक्ति यह महसूस करता है कि उसका 'अद्वितीय' होना समाज के काम आ सकता है, तो वह अपने 'अहं' का विसर्जन कर देता है। इसकी उपयोगिता यह है कि इससे समाज समृद्ध होता है और व्यक्ति का एकाकीपन समाप्त होकर उसे व्यापक अस्तित्व मिलता है।
प्रश्न 6: 'क्षण के महत्त्व' को उजागर करते हुए 'मैंने देखा, एक बूँद' कविता का मूल भाव लिखिए।
उत्तर: कविता का मूल भाव यह है कि जीवन की सार्थकता वर्षों की गिनती में नहीं, बल्कि उन क्षणों में है जब हम पूर्णता से जीते हैं। बूँद का क्षण भर के लिए सूर्य की आग में चमकना यह बताता है कि 'नश्वर' शरीर लेकर भी यदि हम एक क्षण के लिए भी 'सत्य' या 'परम तत्व' को छू लें, तो हमारा जीवन सफल और अमर हो जाता है।
7. अभिव्यक्ति और माध्यम (Creative Writing Connection)
संबंधित आलेख विषय: "अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता: संगठन में शक्ति है" या "जीवन में एक पल का महत्त्व"
मुख्य बिंदु:
व्यक्ति और समाज का अटूट रिश्ता (दीप और पंक्ति)।
सहयोग और समर्पण की भावना।
समय का सदुपयोग - एक सार्थक पल सौ साल के निरर्थक जीवन से बेहतर है।
8. परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण कथन (Key Quotes)
"यह दीप अकेला स्नेह भरा, है गर्व भरा मदमाता, पर इसको भी पंक्ति को दे दो।" (व्यक्ति और समाज के संबंध पर उत्तर लिखने के लिए)
"रंग गई क्षणभर, ढलते सूरज की आग से।" (जीवन की क्षणभंगुरता और सार्थकता के लिए)
"हर आलोक-छुआ अपनापन है उन्मोचन, नश्वरता के दाग से!" (मुक्ति और ज्ञान के संदर्भ में)
9. सामान्य त्रुटियाँ (Common Student Errors)
वर्तनी (Spelling): 'अज्ञेय' (सही), 'अगेय' (गलत)। 'सच्चिदानंद' (सही), 'सचिदानन्द' (गलत)। 'व्यष्टि-समष्टि' (सही)।
अवधारणा (Concept): छात्र अक्सर 'दीप' को केवल 'दीपक' समझते हैं, जबकि वह 'प्रतिभाशाली व्यक्ति' का प्रतीक है। 'बूँद' को केवल पानी की बूँद न समझें, वह 'आत्मा' या 'व्यक्ति' है।
10. विगत वर्षों के बोर्ड प्रश्न (PYQs)
प्रश्न 1 (लघु - 2 अंक): 'यह दीप अकेला' कविता में 'दीप' को 'स्नेह भरा' क्यों कहा गया है?
उत्तर: दीप में तेल होता है जो उसे जलने की शक्ति देता है। उसी प्रकार, मनुष्य में 'स्नेह' (प्रेम) होता है जो उसे जीवित रखता है और दूसरों के लिए प्रकाश (त्याग) करने की प्रेरणा देता है।
प्रश्न 2 (लघु - 2 अंक): 'मैंने देखा, एक बूँद' कविता में 'ढलते सूरज की आग' का क्या प्रतीक है?
उत्तर: 'ढलते सूरज की आग' ज्ञान, सत्य या दिव्य प्रकाश का प्रतीक है। जैसे आग बूँद को चमका देती है, वैसे ही ज्ञान का एक क्षण मनुष्य के नश्वर जीवन को प्रकाशित और सार्थक कर देता है।
प्रश्न 3 (दीर्घ - 5 अंक): अज्ञेय की कविता 'यह दीप अकेला' के आधार पर 'लघु मानव' के महत्त्व पर प्रकाश डालिए।
उत्तर: अज्ञेय ने व्यक्ति को 'लघु मानव' माना है (अकेला दीप)। वह छोटा है, लेकिन ऊर्जा, स्नेह और गर्व से भरा है। वह 'पनडुब्बा' है जो मोती लाता है, वह 'समिधा' है जो आग सुलगाता है। समाज की महानता इन्ही 'लघु मानवों' के सहयोग और समर्पण पर टिकी है। अतः लघु होते हुए भी व्यक्ति का महत्त्व असीम है।
About BhashaLab
BhashaLab is a dynamic platform dedicated to the exploration and mastery of languages - operating both online and offline. Aligned with the National Education Policy (NEP) 2020 and the National Credit Framework (NCrF), we offer language education that emphasizes measurable learning outcomes and recognized, transferable credits.
We offer:
1. NEP alligned offline language courses for degree colleges - English, Sanskrit, Marathi and Hindi
2. NEP alligned offline language courses for schools - English, Sanskrit, Marathi and Hindi
3. Std VIII, IX and X - English and Sanskrit Curriculum Tuitions - All boards
4. International English Olympiad Tuitions - All classes
5. Basic and Advanced English Grammar - Offline and Online - Class 3 and above
6. English Communication Skills for working professionals, adults and students - Offline and Online
Contact: +91 86577 20901, +91 97021 12044
Mail: info@bhashalab.com
Website: www.bhashalab.com



Comments