5 - वसंत आया / तोड़ो (Vasant Aaya / Todo) - Class 12 - Antara 2
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वसंत आया / तोड़ो (Vasant Aaya / Todo)
Class 12 - Hindi Elective (Antara Bhag 2) |
Poet: रघुवीर सहाय (Raghuvir Sahay)
1. कवि परिचय (Literary Profile)
साहित्यिक विशेषताएँ (Literary Traits): रघुवीर सहाय 'नई कविता' (Nayi Kavita) के प्रमुख कवि और पत्रकार थे। उनकी कविताएँ 'दूसरा सप्तक' में संकलित हैं। वे अखबार की खबरों में छिपी मानवीय पीड़ा को व्यक्त करने वाले कवि माने जाते हैं। उनकी भाषा में अनावश्यक शब्दों का प्रयोग नहीं होता और वे 'भयाक्रांत अनुभव की आवेगरहित अभिव्यक्ति' (Dispassionate expression of fearful experience) के लिए जाने जाते हैं।
प्रमुख रचनाएँ (Key Works):
काव्य संग्रह: सीढ़ियों पर धूप में, आत्महत्या के विरुद्ध, हँसो हँसो जल्दी हँसो, लोग भूल गए हैं (साहित्य अकादमी पुरस्कार)।
2. पाठ/कविता का सार (Executive Summary)
(क) वसंत आया (Vasant Aaya)
प्रतिपाद्य (Central Theme): यह कविता आधुनिक मनुष्य के प्रकृति से टूटे हुए रिश्ते पर व्यंग्य करती है। आज मनुष्य को वसंत ऋतु के आने का पता प्रकृति के परिवर्तनों (फूल, हवा, पत्ते) से नहीं, बल्कि कैलेंडर और दफ्तर की छुट्टी से चलता है। यह कविता हमारी संवेदनहीनता और मशीनी जीवनशैली को उजागर करती है।
English Explanation: This poem satirizes modern man's disconnection from nature. The poet laments that today, we realize the arrival of spring not through the blooming flowers or changing winds, but through calendars and office holidays. It highlights the artificiality of modern life.
Key Points:
प्रकृति में वसंत के लक्षण (पीले पत्ते, गरम हवा, चिड़िया की कूक) दिखाई दे रहे हैं।
कवि को वसंत का ज्ञान 'कैलेंडर' और 'छुट्टी' के प्रमाण से हुआ।
बौद्धिक ज्ञान (Intellectual knowledge) ने अनुभवजन्य ज्ञान (Experiential knowledge) की जगह ले ली है।
(ख) तोड़ो (Todo)
प्रतिपाद्य (Central Theme): यह एक उद्बोधनपरक (Exhortatory) कविता है। इसमें कवि 'सृजन' (Creation) के लिए भूमि (धरती) और मन दोनों को तैयार करने का आह्वान करता है। जैसे खेती के लिए बंजर धरती और पत्थरों को तोड़ना पड़ता है, वैसे ही मन में सृजन करने लिए 'ऊब' (Boredom) और 'खीज' (Frustration) को तोड़ना आवश्यक है।
English Explanation: This is a call to action for creativity. The poet draws a parallel between cultivating land and cultivating the mind. Just as one must break rocks and barren soil to sow seeds, one must break the boredom, frustration, and false bonds within the mind to create something new (poetry/art).
Key Points:
पत्थर और चट्टानें 'बाधाओं' के प्रतीक हैं।
झूठे बंधन तोड़ने से ही हम धरती (यथार्थ) को जान पाएंगे।
मन की 'ऊब' और 'खीज' सृजन में बाधक हैं, इन्हें 'गोड़ना' (Digging/Cultivating) जरूरी है।
2.1 पद्यांश अनुवाद (Line-by-Line Translation)
(क) वसंत आया
पंक्ति (Original Line) | हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning) | English Translation |
जैसे बहन 'दा' कहती है | जैसे कोई छोटी बहन अपने बड़े भाई को प्यार से 'दा' (दादा) कहकर पुकारती है... | Just as a sister calls out 'Da' (brother)... |
ऐसे किसी बँगले के किसी तरु (अशोक?) पर कोई चिड़िया कुऊकी | ...वैसे ही किसी बंगले के पेड़ (शायद अशोक?) पर बैठकर किसी चिड़िया ने मीठी आवाज़ (कूक) निकाली। | ...Similarly, a bird chirped on a tree (Ashoka?) in some bungalow. |
चलती सड़क के किनारे लाल बजरी पर चुरमुराए पाँव तले | सड़क के किनारे बिछी लाल बजरी पर चलते हुए मेरे पैरों के नीचे सूखे पत्ते चरमराए (टूटने की आवाज़)। | While walking on the red gravel by the roadside, dry leaves crunched under my feet. |
ऊँचे तरुवर से गिरे, बड़े-बड़े पियराए पत्ते | ऊँचे पेड़ों से बड़े-बड़े पीलापन लिए हुए (पियराए) पुराने पत्ते गिर रहे थे (पतझड़ का संकेत)। | Large yellowed leaves fell from the tall trees. |
कोई छह बजे सुबह जैसे गरम पानी से नहाई हो- | सुबह 6 बजे की हवा ऐसी लग रही थी जैसे वह अभी-अभी गरम पानी से नहाकर आई हो (हवा में ठंडक कम और हल्की गर्माहट थी)। | The wind at 6 AM felt as if it had just bathed in warm water. |
खिली हुई हवा आई, फिरकी-सी आई, चली गई। | हवा खिली हुई और ताजगी भरी थी, वह फिरकी (घूमने वाला खिलौना) की तरह गोल घूमती हुई आई और चली गई। | The blossoming wind came, spun like a top (firki), and went away. |
ऐसे, फुटपाथ पर चलते चलते चलते। कल मैंने जाना कि वसंत आया। | इस प्रकार, फुटपाथ पर चलते-चलते (प्रकृति के इन संकेतों को देखकर) मुझे कल पता चला कि वसंत आ गया है। | Thus, walking on the footpath, yesterday I realized that spring has arrived. |
और यह कैलेंडर से मालूम था | लेकिन मुझे यह बात कैलेंडर देखने से पहले ही पता थी (तारीखों के हिसाब से)। | And I knew this from the calendar... |
अमुक दिन अमुक बार मदनमहीने की होवेगी पंचमी | कि फलाँ तारीख को, फलाँ दिन, वसंत ऋतु (मदन महीना) की पंचमी (वसंत पंचमी) होगी। | ...That on such and such day, such and such time, it would be the fifth day of the month of love (Spring). |
दफ़्तर में छुट्टी थी-यह था प्रमाण | और इसका सबसे बड़ा सबूत यह था कि उस दिन दफ्तर में छुट्टी थी। | There was a holiday in the office—this was the proof. |
और कविताएँ पढ़ते रहने से यह पता था | और कवियों की कविताएँ पढ़ते रहने से मुझे यह भी किताबी ज्ञान था... | And by reading poems, I knew... |
कि दहर-दहर दहकेंगे कहीं ढाक के जंगल | ...कि वसंत में पलाश (ढाक) के जंगल आग की तरह लाल होकर दहकेंगे। | ...That somewhere the forests of Dhak (Palash) would burn brightly (with red flowers). |
आम बौर आवेंगे | आम के पेड़ों पर बौर (मंजर) आ जाएंगे। | Mango trees would blossom. |
रंग-रस-गंध से लदे-फँदे दूर वे नंदन-वन होवेंगे यशस्वी | दूर स्थित सुंदर बगीचे (नंदन-वन) फूलों के रंग, रस और खुशबू से भर जाएंगे और शोभा पाएंगे। | Far away, the gardens of paradise would be glorious, laden with color, nectar, and fragrance. |
मधुमस्त पिक भौर आदि अपना-अपना कृतित्व दिखावेंगे | रस पीकर मस्त हुई कोयल (पिक) और भंवरे अपनी-अपनी कला (कूकना और गुंजन) दिखाएंगे। | Intoxicated cuckoos and bees would display their skills. |
यही नहीं जाना था कि आज के नगण्य दिन जानूँगा | बस मुझे यही नहीं पता था कि आज के इस तुच्छ (नगण्य) दिन मुझे यह इस तरह जानना पड़ेगा... | I just didn't know that on this insignificant day I would learn... |
जैसे मैंने जाना, कि वसंत आया। | ...कि वसंत आ गया है (अर्थात मुझे वसंत का अनुभव महसूस करके नहीं, बल्कि कैलेंडर और छुट्टी के जरिए करना पड़ेगा)। | ...The way I learned (today), that spring has arrived. |
(ख) तोड़ो
पंक्ति (Original Line) | हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning) | English Translation |
तोड़ो तोड़ो तोड़ो, ये पत्थर ये चट्टानें | कवि कहते हैं कि रास्ते की रुकावट बनने वाले इन पत्थरों और चट्टानों को तोड़ डालो। | Break, break, break; these stones, these rocks. |
ये झूठे बंधन टूटें, तो धरती को हम जानें | समाज के ये झूठे बंधन (रूढ़ियाँ) टूटेंगे, तभी हम धरती (सच्चाई/यथार्थ) को समझ पाएंगे। | Let these false bonds break, so that we may know the earth. |
सुनते हैं मिट्टी में रस है जिससे उगती दूब है | हम सुनते आए हैं कि मिट्टी में वह 'रस' (उर्वरता) है जिससे हरी घास (दूब) उगती है (सृजन होता है)। | We hear there is sap in the soil from which grass grows. |
अपने मन के मैदानों पर व्यापी कैसी ऊब है | लेकिन हमारे मन रूपी मैदानों पर यह कैसी 'ऊब' (उदासी/नीरसता) छाई हुई है? | What kind of boredom is spread over the plains of our mind? |
आधे आधे गाने | इसी ऊब के कारण हमारे गीत (सृजन) आधे-अधूरे रह जाते हैं। | Half-sung songs. |
तोड़ो तोड़ो तोड़ो, ये ऊसर बंजर तोड़ो | इस अनुपजाऊ (ऊसर) और बंजर ज़मीन को तोड़कर खेती योग्य बनाओ। | Break, break, break; break this barren, infertile land. |
ये चरती परती तोड़ो, सब खेत बनाकर छोड़ो | यह जो खाली पड़ी ज़मीन (चरती-परती) है, इसे तोड़कर खेत बना दो (सृजन के लिए तैयार करो)। | Break this fallow pasture land; turn it all into fields. |
मिट्टी में रस होगा ही जब वह पोसेगी बीज को | मिट्टी में तो रस (पोषण क्षमता) है ही, तभी तो वह बीज को पोषण देकर पौधा बनाती है। | There must be sap in the soil when it nourishes the seed. |
हम इसको क्या कर डालें इस अपने मन की खीज को? | (लेकिन मन का क्या करें?) हम अपने मन की इस 'खीज' (झुंझलाहट/बाधा) का क्या करें? इसे भी तोड़ना होगा। | What shall we do with this irritation/frustration of our mind? |
गोड़ो गोड़ो गोड़ो | इसलिए मन की जमीन को भी 'गोड़ो' (कुदाल से खोदो/हल चलाओ) ताकि वह उपजाऊ बन सके और नवनिर्माण हो सके। | Dig, dig, dig (Cultivate/Plough it). |
3. कठिन शब्दार्थ (Glossary)
शब्द (Word) | अर्थ (Hindi Meaning) | English Context |
पियराए | पीले पड़े हुए (पत्ते) | Yellowed (leaves) |
फिरकी | घूमने वाला खिलौना | Spinning top / Pinwheel |
मदन महीना | वसंत ऋतु (कामदेव का महीना) | Month of Spring (Cupid's month) |
दहर-दहर | धधक-धधक कर (आग की तरह) | Blazing / Burning brightly |
नगण्य | तुच्छ / गिनने योग्य नहीं | Insignificant / Trivial |
ऊसर / बंजर | अनुपजाऊ जमीन | Barren / Infertile land |
चरती / परती | पशुओं के चरने के लिए छोड़ी गई जमीन | Pasture / Fallow land |
ऊब | नीरसता / बोरियत | Boredom |
खीज | झुंझलाहट / चिड़चिड़ापन | Irritation / Frustration |
गोड़ना | मिट्टी को खोदकर भुरभुरा बनाना | To dig / hoe / cultivate |
4. साहित्यिक विश्लेषण (Literary Analysis)
(क) वसंत आया
भाव पक्ष (Thematic Aspect): यह कविता आधुनिक जीवन की विडंबना (Irony) को दर्शाती है। कवि व्यंग्य करता है कि हम इतने यांत्रिक (mechanical) हो गए हैं कि ऋतुओं का बदलाव महसूस करने के लिए हमें कैलेंडर की जरूरत पड़ती है।
कला पक्ष (Artistic Aspect):
भाषा: कवि ने तत्सम शब्दों (मदन महीना, नंदन-वन) के साथ देशज/तद्भव शब्दों (पियराए, कुऊकी, रस्सा-रस्सी) का सुंदर मिश्रण किया है।
अलंकार:
उपमा: "जैसे बहन दा कहती है", "गरम पानी से नहाई हो", "फिरकी-सी आई"।
अनुप्रास: "दहर-दहर दहकेंगे", "लदे-फँदे"।
शैली: गद्यात्मक (Prosaic) और वर्णनात्मक।
(ख) तोड़ो
भाव पक्ष (Thematic Aspect): यह कविता प्रतीकात्मक (Symbolic) है। यहाँ 'धरती' मानव मन का और 'पत्थर/चट्टानें' मन की बाधाओं (रूढ़ियाँ, ऊब) का प्रतीक हैं। कवि का संदेश है कि विध्वंस (तोड़ना) केवल विनाश नहीं, बल्कि नवनिर्माण की पहली शर्त है।
कला पक्ष (Artistic Aspect):
प्रतीक योजना:
मिट्टी = रचनाशीलता (Creativity).
बीज = विचार/भाव.
गोड़ो = सृजनात्मक प्रयास (Effort).
लय: कविता में एक विशेष लय है जो श्रमगीत (Work song) जैसी लगती है ("तोड़ो तोड़ो तोड़ो", "गोड़ो गोड़ो गोड़ो")।
5. काव्यांश आधारित प्रश्न (Extract-Based Competency)
संदर्भ 1 (वसंत आया):
"और यह कैलेंडर से मालूम था अमुक दिन अमुक बार मदनमहीने की होवेगी पंचमी दफ़्तर में छुट्टी थी-यह था प्रमाण"
कवि को वसंत आने का पता कैसे चला?
उत्तर: कवि को वसंत आने का पता 'कैलेंडर' में तारीख देखकर और दफ्तर में 'छुट्टी' होने के कारण चला।
'मदनमहीने' किसे कहा गया है और क्यों?
उत्तर: 'मदनमहीने' वसंत ऋतु को कहा गया है। भारतीय परंपरा में वसंत को कामदेव (मदन) का महीना माना जाता है क्योंकि यह ऋतु प्रेम और सौंदर्य का प्रतीक है।
इन पंक्तियों में निहित व्यंग्य (Satire) स्पष्ट करें।
उत्तर: व्यंग्य यह है कि मनुष्य का प्रकृति से नाता टूट चुका है। जो परिवर्तन बाहर प्रकृति में हो रहे हैं, उन्हें महसूस करने के बजाय मनुष्य उन्हें सरकारी छुट्टियों और कागजी प्रमाणों से जान रहा है।
संदर्भ 2 (तोड़ो):
"मिट्टी में रस होगा ही जब वह पोसेगी बीज को हम इसको क्या कर डालें इस अपने मन की खीज को? गोड़ो गोड़ो गोड़ो"
'मिट्टी में रस' से कवि का क्या तात्पर्य है?
उत्तर: 'मिट्टी में रस' का अर्थ है धरती की उर्वरा शक्ति (Fertility) या सृजन क्षमता। इसी रस के कारण मिट्टी बीज को पोषण देकर पौधा बनाती है।
'मन की खीज' का क्या अर्थ है और कवि इसे क्या करने को कहता है?
उत्तर: 'मन की खीज' का अर्थ है मन की झुंझलाहट, असंतोष या नीरसता जो सृजन में बाधा डालती है। कवि इसे 'गोड़ने' (दूर करने/तोड़ने) को कहता है ताकि मन सृजनशील बन सके।
'गोड़ो गोड़ो गोड़ो' की आवृत्ति क्यों की गई है?
उत्तर: यह आवृत्ति सृजन के लिए आवश्यक निरंतर 'परिश्रम' और 'प्रयास' पर बल देने के लिए की गई है। यह मन को झकझोरने का स्वर है।
6. पाठ्यपुस्तक प्रश्नोत्तर (Textbook Q&A)
(क) वसंत आया
प्रश्न 1: वसंत आगमन की सूचना कवि को कैसे मिली?
उत्तर: कवि को वसंत आगमन की सूचना दो तरह से मिली: (1) प्रत्यक्ष रूप से- चिड़िया की कूक, गिरे हुए पीले पत्ते और गुनगुनी हवा से। (2) अप्रत्यक्ष रूप से- कैलेंडर की तारीख और दफ्तर की छुट्टी से।
प्रश्न 2: 'कोई छह बजे सुबह... फिरकी सी आई, चली गई' पंक्ति में निहित भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: इन पंक्तियों में वसंत की हवा की ताजगी और गर्माहट का वर्णन है। हवा में सर्दियों वाली ठिठुरन नहीं थी, बल्कि गरम पानी से नहाई हुई सी ताजगी थी। वह 'फिरकी' की तरह चंचल थी, जो आई और तेजी से निकल गई।
प्रश्न 3: अलंकार बताइए-
(क) बड़े-बड़े पियराए पत्ते: पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार (बड़े-बड़े), अनुप्रास (प-प)।
(ख) कोई छह बजे सुबह जैसे गरम पानी से नहाई हो: उपमा अलंकार (हवा की तुलना नहाई हुई स्त्री से), मानवीकरण।
(ग) खिली हुई हवा आई, फिरकी-सी आई: उपमा अलंकार (फिरकी-सी)।
(घ) दहर-दहर दहकेंगे: अनुप्रास अलंकार (द-द) और पुनरुक्ति प्रकाश (दहर-दहर)।
प्रश्न 4: किन पंक्तियों से ज्ञात होता है कि आज मनुष्य प्रकृति के नैसर्गिक सौंदर्य की अनुभूति से वंचित है?
उत्तर: "और यह कैलेंडर से मालूम था... अमुक दिन अमुक बार... दफ्तर में छुट्टी थी-यह था प्रमाण।" और "यही नहीं जाना था कि आज के नगण्य दिन जानूँगा, जैसे मैंने जाना, कि वसंत आया।"
प्रश्न 5: 'प्रकृति मनुष्य की सहचरी है' इस विषय पर विचार व्यक्त करते हुए आज के संदर्भ में इस कथन की वास्तविकता पर प्रकाश डालिए।
उत्तर: आदिकाल से प्रकृति मनुष्य की साथी (सहचरी) रही है। हमारे त्योहार, कृषि और जीवनशैली ऋतुओं पर आधारित थे। लेकिन आज औद्योगिकीकरण और शहरीकरण के कारण यह रिश्ता टूट गया है। आज हम बंद कमरों में रहते हैं और प्रकृति को केवल 'सीनरी' की तरह देखते हैं। यह अलगाव तनाव और नीरसता का कारण है।
प्रश्न 6: 'वसंत आया' कविता में कवि की चिंता क्या है?
उत्तर: कवि की चिंता यह है कि मनुष्य संवेदना शून्य होता जा रहा है। उसका प्रकृति से रागात्मक संबंध टूट गया है। उसे वसंत के आने का ज्ञान अब 'अनुभव' से नहीं, बल्कि 'सूचना' (कैलेंडर) से होता है। यह यांत्रिकता चिंताजनक है।
(ख) तोड़ो
प्रश्न 1: 'पत्थर' और 'चट्टान' शब्द किसके प्रतीक हैं?
उत्तर: 'पत्थर' और 'चट्टान' दो चीजों के प्रतीक हैं: (1) बंजर भूमि में खेती की बाधाएँ। (2) मानव मन की बाधाएँ जैसे- रूढ़ियाँ, अंधविश्वास, ऊब और निष्क्रियता जो नवनिर्माण नहीं होने देतीं।
प्रश्न 2: भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए- 'मिट्टी में रस होगा ही... मन की खीज को?'
उत्तर: भाव यह है कि मिट्टी में तो सृजन की शक्ति (रस) प्राकृतिक रूप से है, लेकिन मन में सृजन तब तक नहीं हो सकता जब तक 'खीज' (बाधा) को दूर न किया जाए। कवि मिट्टी और मन की तुलना करके मानसिक उर्वरता की वकालत कर रहा है।
प्रश्न 3: कविता का आरंभ 'तोड़ो तोड़ो तोड़ो' से हुआ है और अंत 'गोड़ो गोड़ो गोड़ो' से। कवि ने ऐसा क्यों किया?
उत्तर: 'तोड़ो' का अर्थ है विध्वंस (बाधाओं को हटाना), जो शुरुआत है। 'गोड़ो' का अर्थ है सृजन (जमीन तैयार करना/बीज बोना), जो परिणाम है। कवि बताना चाहता है कि पहले बाधाओं (चट्टानों/रूढ़ियों) को तोड़ना होगा, तभी सृजन की प्रक्रिया (गोड़ना) शुरू हो सकती है।
प्रश्न 4: 'ये झूठे बंधन टूटें तो धरती को हम जानें' - यहाँ पर झूठे बंधनों और धरती को जानने से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: 'झूठे बंधन' समाज की रूढ़ियाँ और अंधविश्वास हैं जो हमें सच्चाई से दूर रखते हैं। 'धरती को जानना' मतलब वास्तविकता (यथार्थ) से जुड़ना है। जब तक हम पूर्वाग्रहों और बंधनों को नहीं तोड़ेंगे, हम जीवन की सच्चाई और सृजन के आनंद को नहीं समझ पाएंगे।
प्रश्न 5: 'आधे-आधे गाने' के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है?
उत्तर: 'आधे-आधे गाने' मन की 'ऊब' और 'असंतोष' का परिणाम हैं। जब मन में उत्साह नहीं होता, तो कोई भी रचना (गीत) पूरी नहीं हो पाती। यह अधूरी अभिव्यक्ति और बाधित सृजनशीलता का प्रतीक है।
7. अभिव्यक्ति और माध्यम (Creative Writing Connection)
संबंधित आलेख विषय: "प्रकृति से दूर होता आधुनिक मानव" या "सृजन के लिए विध्वंस क्यों जरूरी?"
मुख्य बिंदु:
शहरी जीवन और प्रकृति का अभाव।
ऋतुओं का बदलता चक्र और हमारी अज्ञानता।
मन की बंजरता (Depression/Boredom) को दूर करने के उपाय।
रचनात्मकता के लिए पुराने विचारों को त्यागना।
8. परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण कथन (Key Quotes)
"यही नहीं जाना था कि आज के नगण्य दिन जानूँगा, जैसे मैंने जाना, कि वसंत आया।" (आधुनिक जीवन की विडंबना पर)।
"मिट्टी में रस होगा ही जब वह पोसेगी बीज को।" (क्षमता और सृजन पर)।
"तोड़ो तोड़ो तोड़ो... ये झूठे बंधन टूटें तो धरती को हम जानें।" (यथार्थ को समझने के लिए)।
9. सामान्य त्रुटियाँ (Common Student Errors)
अवधारणा (Concept): 'तोड़ो' कविता को केवल 'खेती' की कविता न समझें। यह मुख्य रूप से 'मानव मन' और 'सृजनशीलता' की कविता है। खेत केवल एक उपमान (Metaphor) है।
वर्तनी (Spelling): 'रघुवीर सहाय' (सही), 'रधुवीर' (गलत)। 'वसंत' (सही), 'बसंत' (गलत - तत्सम रूप वसंत है)।
व्याख्या: 'बहन दा कहती है' का अर्थ चिड़िया की आवाज़ में अपनापन और मिठास होना है, न कि सचमुच की बहन।
10. विगत वर्षों के बोर्ड प्रश्न (PYQs)
प्रश्न 1 (लघु - 2 अंक): 'वसंत आया' कविता में 'गरम पानी से नहाई हुई' हवा का क्या अर्थ है?
उत्तर: इसका अर्थ है कि हवा में सर्दियों की ठिठुरन अब नहीं रही। उसमें एक सुखद गर्माहट और ताजगी है, जैसे स्नान के बाद शरीर में ताजगी और हल्कापन महसूस होता है।
प्रश्न 2 (लघु - 2 अंक): 'तोड़ो' कविता में कवि 'चरती-परती' को तोड़ने की बात क्यों करता है?
उत्तर: 'चरती-परती' वह जमीन है जो बेकार पड़ी है या पशुओं के चरने के लिए छोड़ी गई है। कवि इसे तोड़ने (जोतने) की बात इसलिए करता है ताकि इसे उपजाऊ खेत में बदला जा सके। प्रतीकात्मक रूप में, यह मन की निष्क्रियता को तोड़कर उसे सृजनशील बनाने की बात है।
प्रश्न 3 (दीर्घ - 5 अंक): रघुवीर सहाय की कविता 'वसंत आया' आज की जीवन-शैली पर एक व्यंग्य है। स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: जी हाँ, यह कविता एक गहरा व्यंग्य है। कवि दिखाता है कि आधुनिक मनुष्य प्रकृति से इतना कट गया है कि उसे ऋतु परिवर्तन का अहसास अपनी इंद्रियों (आँख, कान, त्वचा) से नहीं होता। वह मशीनी होकर केवल कैलेंडर, घड़ी और दफ्तर के नियमों से चलता है। वसंत जैसा उत्सव भी उसके लिए केवल एक 'छुट्टी' का दिन बनकर रह गया है। यह संवेदनाहीनता इस व्यंग्य का मुख्य विषय है।
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