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    10. सूरदास - Surdas - Class 11 - Antra 1

    • 2 hours ago
    • 5 min read

    लेखक: सूरदास


    1. कवि परिचय (Literary Profile)


    • साहित्यिक विशेषताएँ (Literary Traits): सूरदास भक्तिकाल की सगुण धारा की कृष्णभक्ति शाखा के सर्वोपरि कवि हैं। उन्हें 'वात्सल्य रस का सम्राट' कहा जाता है। सूरदास ने कृष्ण की बाल-लीलाओं, रूप-माधुरी और भ्रमरगीत के माध्यम से प्रेम और भक्ति का अनूठा संसार रचा है। उनकी कविता में मनोवैज्ञानिक गहराई और स्वाभाविकता का अद्भुत संगम है।

    • प्रमुख रचनाएँ (Key Works): सूरसागर, सूरसारावली, साहित्य-लहरी।

    • भाषा: सूरदास की भाषा विशुद्ध 'ब्रजभाषा' है। उन्होंने साधारण बोलचाल की भाषा को परिष्कृत कर उसे उच्चकोटि का साहित्यिक रूप प्रदान किया है।

    2. पाठ का सार (Executive Summary)


    • प्रतिपाद्य (Central Theme): यहाँ संकलित पदों में सूरदास ने कृष्ण के बाल-रूप और उनकी मुरली के प्रति गोपियों के ईर्ष्या भाव का वर्णन किया है। पहला पद खेल में हारने पर कृष्ण की बाल-सुलभ खींच (झुंझलाहट) और तर्क-वितर्क को दर्शाता है, जबकि दूसरा पद मुरली के प्रति गोपियों के सौतिया डाह (ईर्ष्या) को व्यक्त करता है।

    • English Summary: Surdas's verses depict different shades of Krishna's life. The first verse captures a relatable childhood moment where Krishna, after losing a game to Sudama, tries to use excuses to avoid his turn, showcasing 'Child Psychology'. The second verse portrays the 'Gopis' jealousy' towards Krishna's flute (Murali), as they feel the flute occupies a more intimate place with Krishna than they do.

    • Key Points:

      • खेल में बराबरी का भाव: सुदामा से हारने पर कृष्ण का अपनी जाति और पद का अहंकार दिखाना, जिस पर साथी उन्हें खरी-खोटी सुनाते हैं।

      • बाल-मनोविज्ञान: हार स्वीकार न करना और अंत में नंद बाबा की दुहाई देकर दाँव देना।

      • मुरली का वर्चस्व: मुरली कृष्ण के अधरों (होठों) पर विराजमान रहती है और कृष्ण को अपनी उँगलियों पर नचाती है।

    2.1 पद्यांश अनुवाद (Line-by-Line Analysis)

    पंक्ति (Original Line)

    हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

    English Translation

    खेलन में को काको गुसैयाँ।

    खेल में भला कौन किसका स्वामी होता है? (सब बराबर हैं)।

    In play, who is the master of whom? (Everyone is equal).

    जाति-पाँति हमतैं बढ़ि नाहीं, नाहीं बसत तुम्हारी गैयाँ।

    न तुम्हारी जाति हमसे बड़ी है, न हम तुम्हारी गायों के सहारे रहते हैं।

    Your caste is not higher than ours, nor do we live under your shelter.

    अति अधिकार जनावत यातें, जातें अधिक तुम्हारी गैयाँ।

    तुम इतना अधिकार इसलिए जता रहे हो क्योंकि तुम्हारे पास कुछ गायें ज़्यादा हैं।

    You show so much authority just because you own a few more cows.

    अधर-सज्जा पर कर पल्लव पलुटावति।

    (मुरली) कृष्ण के होठों रूपी सेज पर लेटकर उनके कोमल हाथों से पैर दबवाती है।

    The flute rests on his lips and makes his tender hands press its feet.

    3. कठिन शब्दार्थ (Glossary)

    शब्द

    हिंदी अर्थ

    English Context

    गुसैयाँ

    स्वामी / मालिक

    Master / Owner

    तकरार

    बहस / झगड़ा

    Dispute / Argument

    बरबस

    ज़बरदस्ती

    Forcefully

    भृकुटी

    भौंहें

    Eyebrows

    नासा-पुट

    नथुने

    Nostrils

    कनौड़े

    कृतज्ञ / दबा हुआ

    Obliged / Under influence

    4. साहित्यिक विश्लेषण (Literary Analysis)


    • भाव पक्ष (Thematic Aspect): पदों में वात्सल्य और श्रृंगार रस की प्रधानता है। सूरदास ने बाल-लीलाओं के माध्यम से यह सिद्ध किया है कि खेल में कोई बड़ा-छोटा नहीं होता।

    • कला पक्ष (Artistic Aspect):

      • बाल-मनोविज्ञान: हारने पर कृष्ण के बहाने और साथियों का उन्हें 'जाति-पाँति' की याद दिलाना बच्चों के बीच की वास्तविक बातचीत को दर्शाता है।

      • रूपक अलंकार: 'अधर-सज्जा' (होठों रूपी सेज), 'कर-पल्लव' (हाथ रूपी नए पत्ते)।

      • मानवीकरण (Personification): मुरली को एक 'सौत' के रूप में चित्रित करना जो कृष्ण को अपनी उँगलियों पर नचाती है।

    5. काव्यांश आधारित प्रश्न (Extract-Based Competency)


    Extract 1: "सुनि री सखी ! मूरली तऊ गुपालहिं भावति। ... गिरिधर नार नवावति।"

    1. Interpretation: सखी के अनुसार मुरली कृष्ण के साथ कैसा व्यवहार करती है? (उत्तर: वह कृष्ण को एक पैर पर खड़ा रखती है और उन्हें अपनी उँगलियों पर नचाती है)।

    2. Aesthetics: 'नार नवावति' का क्या आशय है? (उत्तर: इसका अर्थ है गर्दन झुकवाना। मुरली बजाते समय कृष्ण की गर्दन झुक जाती है, जिसे सखी मुरली का प्रभुत्व मानती है)।

    3. Inference: गोपियाँ मुरली से क्यों जलती हैं? (उत्तर: क्योंकि मुरली कृष्ण के होठों का रस पीती है और उन्हें अपने वश में रखती है)।

    6. पाठ्यपुस्तक प्रश्नोत्तर (Textbook Q&A)


    • 1. खेल में कृष्ण के रूठने पर उनके साथियों ने क्या-क्या तर्क दिए?

      • उत्तर: साथियों ने कहा कि खेल में कोई किसी का स्वामी नहीं होता। तुम्हारी जाति हमसे बड़ी नहीं है और न ही हम तुम्हारी शरण में रहते हैं। तुम केवल इसलिए अकड़ रहे हो क्योंकि तुम्हारे पास हमसे कुछ ज़्यादा गायें हैं।

    • 2. 'खेलन में को काको गुसैयाँ'—इस पंक्ति से बाल-मनोविज्ञान पर क्या प्रकाश पड़ता है?

      • उत्तर: यह पंक्ति दर्शाती है कि बच्चों के लिए खेल सर्वोपरि है। वे सामाजिक ऊँच-नीच को नहीं मानते और हारने वाले की बेईमानी को बर्दाश्त नहीं करते।

    • 3. कृष्ण के अधरों की तुलना 'सेज' (बिस्तर) से क्यों की गई है?

      • उत्तर: क्योंकि मुरली हमेशा कृष्ण के होठों पर टिकी रहती है। सखी को लगता है कि मुरली वहाँ विश्राम कर रही है और कृष्ण (उसके दास की तरह) अपनी उँगलियों से उसके पैर दबा रहे हैं।

    7. अभिव्यक्ति और माध्यम (Creative Writing Connection)


    • Topic: "बचपन के खेल और सामाजिक समानता"

    • Key Points:

      • खेलों के माध्यम से टीम भावना और नेतृत्व का विकास।

      • खेल: जहाँ भेदभाव की दीवारें गिर जाती हैं।

      • कृष्ण की बाल-लीलाओं में छिपा लोक-रंजन।

    8. परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण कथन (Key Quotes)


    • "खेलन में को काको गुसैयाँ।"

    • "जाति-पाँति हमतैं बढ़ि नाहीं।"

    • "भृकुटी कुटिल, नैन नासा-पुट, हम पर कोप-करावति।" (मुरली का प्रभाव)।

    9. सामान्य त्रुटियाँ (Common Student Errors)


    • Spelling: 'ब्रजभाषा', 'वात्सल्य' और 'अष्टछाप' की वर्तनी पर ध्यान दें।

    • Conceptual: यह न समझें कि गोपियाँ कृष्ण से नफरत करती हैं; उनकी ईर्ष्या केवल मुरली के प्रति है क्योंकि वह कृष्ण के अधिक समीप है।

    10. विगत वर्षों के बोर्ड प्रश्न (PYQs)


    1. Short Answer (2 marks): कृष्ण ने अंत में दाँव (अपनी बारी) क्यों दिया?

      • Model Answer: जब उनके सभी साथी उनके व्यवहार के कारण उनके साथ खेलने से मना करने लगे और वे अकेले पड़ गए, तब खेल जारी रखने के लिए कृष्ण ने नंद बाबा की कसम (दुहाई) खाकर अपनी बारी दी।


    2. Long Answer (5 marks): सूरदास के पदों के आधार पर उनकी काव्य-कला की विशेषताएँ बताइए।

      • Model Answer: सूरदास की काव्य-कला सजीव चित्रण और मनोवैज्ञानिक बोध पर आधारित है। वे ब्रजभाषा के सिद्धहस्त कवि हैं। उनके पदों में उपमा, रूपक और उत्प्रेक्षा अलंकारों का सहज प्रयोग मिलता है। विशेषकर वात्सल्य रस के वर्णन में वे अद्वितीय हैं, जहाँ वे कृष्ण की बाल-सुलभ चेष्टाओं को पाठक की आँखों के सामने साकार कर देते हैं।


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