top of page

    12. संध्या के बाद - Sandhya Ke Baad - Class 11 - Antra 12

    • 2h
    • 5 min read

    लेखक: सुमित्रानंदन पंत


    1. लेखक परिचय (Literary Profile)


    • साहित्यिक विशेषताएँ (Literary Traits): सुमित्रानंदन पंत को 'प्रकृति का सुकुमार कवि' कहा जाता है। वे छायावाद के चार प्रमुख स्तंभों में से एक हैं। उनकी कविताओं में पल-पल परिवर्तित होती प्रकृति के अत्यंत सूक्ष्म और सजीव चित्र मिलते हैं। पंत जी का काव्य सौंदर्यबोध, कल्पनाशीलता और मानवतावादी दृष्टि से समृद्ध है। वे बाद में प्रगतिशील चेतना (प्रगतिवाद) की ओर भी मुड़े।

    • प्रमुख रचनाएँ (Key Works): उच्छ्वास, पल्लव, वीणा, गुंजन, युगांत, युगवाणी, ग्राम्या, चिदंबरा (ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित)।

    • संदर्भ: 'संध्या के बाद' कविता पंत जी के 'ग्राम्या' संग्रह से ली गई है। इसमें ढलती शाम के समय ग्रामीण परिवेश के प्राकृतिक सौंदर्य और वहाँ के जनजीवन की आर्थिक विवशता का चित्रण है।

    2. पाठ का सार (Executive Summary)


    • प्रतिपाद्य (Central Theme): यह कविता प्रकृति के सुंदर चित्रण से शुरू होती है लेकिन धीरे-धीरे ग्रामीण जीवन की कड़वी सच्चाई—गरीबी, अवसाद और शोषण—की ओर मुड़ जाती है। कवि ग्राम्य जीवन के सौंदर्य के पीछे छिपी 'दैन्य' (दरिद्रता) को उजागर करते हैं और एक ऐसे समाज की कल्पना करते हैं जहाँ कर्म और गुणों के अनुसार धन का समान वितरण हो।

    • English Summary: 'Sandhya Ke Baad' begins with a lyrical description of a rural sunset, using metaphors of birds and changing light. However, the mood shifts as the poet describes the miserable conditions of village life—the tired laborers, the impoverished shopkeepers, and the overall stagnation. The poem concludes with a visionary hope for a socialist society where resources are distributed fairly, ending the cycle of exploitation.

    • Key Points:

      • संध्या का दृश्य: आकाश में पक्षियों की कतारें, झिलमिलाते निर्झर और मंदिर के कलश पर गिरती सूरज की अंतिम किरणें।

      • ग्रामीण वास्तविकता: तट पर बैठी विधवाओं का मौन रोदन, छोटे दुकानदारों की फीकी मुस्कान और मिट्टी के दीयों का धुँआ।

      • सामाजिक विसंगति: गाँव का दुकानदार (लाला) जो दिन भर के कठिन श्रम के बाद भी कर्ज और अभाव के जाल में फँसा है।

      • मानवतावादी संदेश: व्यक्ति नहीं, बल्कि समाज की व्यवस्था दोषी है। कवि एक ऐसे विश्व की कामना करते हैं जहाँ कोई दुखी न हो।

    2.1 प्रमुख काव्यांश भावार्थ (Stanza Analysis)

    पंक्ति (Original Line)

    हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

    English Context

    ताम्रपर्ण, पीपल से, शतमुख / झरते चंचल स्वर्णिम निर्झर !

    ढलती धूप में पीपल के पत्तों से छनकर आती रोशनी ऐसे लगती है जैसे सोने के झरने बह रहे हों।

    Sunlight filtering through pipal leaves looks like golden waterfalls.

    तट पर बगुलों-सी वृद्धाएँ / विधवाएँ जप ध्यान में मगन।

    नदी किनारे सफेद वस्त्रों में बैठी विधवाएँ बगुलों की तरह शांत और अंतर्मुखी दिखती हैं।

    Widows in white sitting by the river resemble silent storks in meditation.

    बिना आय की क्लांति बन रही / उसके जीवन की परिभाषा।

    दुकानदार के लिए बिना किसी कमाई की थकान ही अब उसके जीवन का परिचय बन गई है।

    For the poor merchant, fatigue without income has become his identity.

    3. कठिन शब्दार्थ (Glossary)

    शब्द

    हिंदी अर्थ

    English Context

    मंथर

    धीमी गति

    Slow / Languid

    अवसाद

    उदासी / दुख

    Depression / Sorrow

    नीराजन

    आरती करना

    Ritual lighting / Worship

    क्लांति

    थकावट

    Fatigue / Weariness

    स्वर्णिम

    सुनहरी

    Golden

    4. साहित्यिक विश्लेषण (Literary Analysis)


    • भाव पक्ष (Thematic Aspect): कविता छायावाद (प्रकृति चित्रण) से प्रगतिवाद (सामाजिक यथार्थ) की ओर यात्रा करती है। कवि ने 'दीपक की लौ' को ग्रामीण चेतना की मंद पड़ती ज्योति के रूप में चित्रित किया है।

    • कला पक्ष (Artistic Aspect):

      • उपमा अलंकार: 'बगुलों-सी वृद्धाएँ', 'दीन दीपशिखा-सा'।

      • रूपक: 'अदृश्य, गति अंतर-रोदन' (आंतरिक पीड़ा का प्रवाहित होना)।

      • बिंब (Imagery): 'ताम्रपर्ण' और 'स्वर्णिम निर्झर' के माध्यम से पंत जी ने एक जादुई दृश्य बिंब (Visual Imagery) रचा है।

    5. काव्यांश आधारित प्रश्न (Extract-Based Competency)


    Extract 1: "व्यक्ति नहीं, जग की परिपाटी / दोषी जन के दुःख क्लेश की।"

    1. Interpretation: कवि के अनुसार व्यक्ति के दुखों के लिए कौन जिम्मेदार है? (उत्तर: समाज की पुरानी और दोषपूर्ण व्यवस्था/परिपाटी)।

    2. Author's Intent: 'जग की परिपाटी' से कवि का क्या तात्पर्य है? (उत्तर: वह आर्थिक व्यवस्था जहाँ कुछ लोगों के पास बहुत धन है और मेहनतकश लोग गरीबी में जी रहे हैं)।

    3. Inference: कवि किस प्रकार के समाज का निर्माण करना चाहते हैं? (उत्तर: जहाँ कर्म और गुणों के आधार पर संसाधनों का समान वितरण हो)।

    6. पाठ्यपुस्तक प्रश्नोत्तर (Textbook Q&A)


    • 1. संध्या के समय प्रकृति में क्या-क्या परिवर्तन होते हैं?

      • उत्तर: सूरज की किरणें पीली होकर कलशों पर चमकती हैं, पक्षी चहचहाते हुए घर लौटते हैं, और आकाश का रंग ताँबे जैसा (ताम्रपर्ण) हो जाता है। धीरे-धीरे धुंधलका छाने लगता है और गाँव में दीये जल उठते हैं।


    • 2. दुकान के वातावरण को कवि ने 'अवसादपूर्ण' क्यों कहा है?

      • उत्तर: क्योंकि दुकानदार के पास बेचने के लिए बहुत कम सामान है, ग्राहक कम हैं और उसकी आय न के बराबर है। उसकी आँखों के आगे अभावों का जाला बुना हुआ है, जो उसे मानसिक रूप से थका देता है।


    • 3. 'बगुलों-सी वृद्धाएँ' उपमान के माध्यम से विधवाओं की किस स्थिति की ओर संकेत किया गया है?

      • उत्तर: यह उनके सफेद वस्त्रों, उनकी स्थिरता और उनके जीवन की नीरसता (बिना किसी रंग के) को दर्शाता है। वे समाज के किनारे चुपचाप अपनी पीड़ा पीकर जी रही हैं।

    7. अभिव्यक्ति और माध्यम (Creative Writing Connection)


    • Topic: "ग्रामीण भारत: सौंदर्य और संघर्ष का अंतर्विरोध"

    • Key Points:

      • गाँवों की प्राकृतिक सुंदरता बनाम आर्थिक पिछड़ापन।

      • छोटे व्यापारियों और किसानों की वर्तमान चुनौतियाँ।

      • सामाजिक न्याय और संसाधनों का उचित वितरण।

    8. परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण कथन (Key Quotes)


    • "व्यक्ति नहीं, जग की परिपाटी / दोषी जन के दुःख क्लेश की।"

    • "कर्म और गुण के समान / हो वितरण।" (समाजवादी विचारधारा)।

    • "मंथर धारा में बहता / जिनका अदृश्य, गति अंतर-रोदन!"

    9. सामान्य त्रुटियाँ (Common Student Errors)


    • Spelling: 'सुकुमार', 'नीराजन' और 'अवसाद' की वर्तनी पर ध्यान दें।

    • Conceptual: विद्यार्थी अक्सर केवल 'प्रकृति वर्णन' पर ध्यान देते हैं। याद रखें कि यह कविता प्रगतिशील चेतना की है, जहाँ प्रकृति के माध्यम से समाज की आर्थिक विसंगतियों पर बात की गई है।

    10. विगत वर्षों के बोर्ड प्रश्न (PYQs)


    1. Short Answer (2 marks): 'केंचुल-सा' उपमान किसके लिए और क्यों प्रयुक्त हुआ है?

      • Model Answer: यह आकाश या गाँव के ऊपर फैले हुए धुएँ और धुंधलके के लिए प्रयुक्त हुआ है। जैसे साँप अपनी केंचुल छोड़ता है, वैसे ही शाम का धुँआ हवा में झूलता हुआ प्रतीत होता है।


    2. Long Answer (5 marks): "संध्या के बाद" कविता के आधार पर पंत जी की मानवतावादी दृष्टि को स्पष्ट कीजिए।

      • Model Answer: पंत जी केवल प्रकृति के चितेरे नहीं हैं, वे मनुष्य के दुखों के प्रति भी संवेदनशील हैं। कविता के अंत में वे दार्शनिक प्रश्न उठाते हैं कि "क्यों न हो संपति जन की?" वे चाहते हैं कि विज्ञान और श्रम का फल सबको मिले। उनकी मानवतावादी दृष्टि एक ऐसे शोषणमुक्त समाज का सपना देखती है जहाँ मनुष्य, मनुष्य का शत्रु न होकर सहयात्री हो।


    About BhashaLab


    BhashaLab is a dynamic platform dedicated to the exploration and mastery of languages - operating both online and offline. Aligned with the National Education Policy (NEP) 2020 and the National Credit Framework (NCrF), we offer language education that emphasizes measurable learning outcomes and recognized, transferable credits.


    We offer:

    1. NEP alligned offline language courses for degree colleges - English, Sanskrit, Marathi and Hindi

    2. NEP alligned offline language courses for schools - English, Sanskrit, Marathi and Hindi

    3. Std VIII, IX and X - English and Sanskrit Curriculum Tuitions - All boards

    4. International English Olympiad Tuitions - All classes

    5. Basic and Advanced English Grammar - Offline and Online - Class 3 and above

    6. English Communication Skills for working professionals, adults and students - Offline and Online


    Contact: +91 86577 20901, +91 97021 12044

     
     
     

    Comments


    bottom of page