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    11. हँसी की चोट, सपना और दरबार -Hansi ki Chot, Sapna or Darbar- Class 11 - Antra 1

    • 2 hours ago
    • 5 min read

     लेखक: देव


    1. कवि परिचय (Literary Profile)


    • साहित्यिक विशेषताएँ (Literary Traits): महाकवि देव (देवदत्त द्विवेदी) रीतिकालीन काव्य-परंपरा के अत्यंत प्रतिभाशाली और मौलिक कवि हैं। उन्होंने दरबारी जीवन को बहुत निकट से देखा था, इसलिए उनके काव्य में जहाँ एक ओर प्रेम और सौंदर्य के मार्मिक चित्र हैं, वहीं दूसरी ओर दरबारी चाटुकारिता के प्रति वितृष्णा (नफरत) भी है। वे शब्दों के माध्यम से सुंदर 'ध्वनि-चित्र' और 'इंद्रधनुषी' दृश्य रचने में निपुण हैं।

    • प्रमुख रचनाएँ (Key Works): भावविलास, भवानीविलास, रसविलास, सुजानविनोद, काव्यरसायन।

    • भाषा-शैली: आपकी भाषा परिष्कृत ब्रजभाषा है। अनुप्रास और यमक अलंकारों के प्रति आपका विशेष अनुराग है, जिससे काव्य में संगीतात्मकता आ जाती है।

    2. पाठ का सार (Executive Summary)


    • प्रतिपाद्य (Central Theme): संकलित पदों में तीन अलग-अलग भावों का वर्णन है। 'हँसी की चोट' में वियोगिनी नायिका की विवशता है, 'सपना' में संयोग और वियोग का सुख-दुख एक साथ है, और 'दरबार' में सामंती व्यवस्था की संवेदनहीनता पर तीखा व्यंग्य है।

    • English Summary: The verses of Dev explore contrasting themes. 'Hansi Ki Chot' describes the physical decline of a lady separated from Krishna, where her elements (fire, water, air) leave her body. 'Sapna' captures a beautiful dream of Krishna asking the lady to swing with him, which shatters upon waking, turning joy into tears. 'Darbar' is a sharp satire on the blind and deaf royal courts where merit is ignored in favor of flattery.

    • Key Points:

      • वियोग का प्रभाव: कृष्ण के दूर जाने (हँसकर मुँह फेर लेने) से नायिका के शरीर से पंचतत्व धीरे-धीरे निकल रहे हैं।

      • सुखद दुस्वप्न: सपने में कृष्ण का मिलन और जागने पर उनका गायब होना—संयोग और वियोग का एक साथ घटित होना।

      • दरबारी विद्रूपता: राजा अंधा है, दरबारी गूँगे हैं और सभा बहरी है; जहाँ कला की कोई परख नहीं है।

    2.1 पद्यांश अनुवाद (Line-by-Line Analysis)

    पंक्ति (Original Line)

    हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

    English Translation

    साँसनि ही सों समीर गयो अरु आँसुन ही सब नीर गयो ढरि।

    विरह की लंबी साँसों के साथ हवा (वायु) और आँसुओं के साथ पानी (जल) तत्व निकल गया।

    With deep sighs, the air left; with tears, the water element drained away.

    हरी हियो जु लियो हरि जू हरि।

    कृष्ण (हरि) ने नायिका का हृदय (हियो) हर लिया (छीन लिया) और फिर खुद भी दूर हो गए।

    Lord Krishna stole her heart and then himself moved away.

    झहरि-झहरि झीनी बूँद हैं परति मानो।

    सपने में महीन-महीन बूँदें झमाझम गिर रही हैं।

    In the dream, thin droplets are falling rhythmically.

    साहिब अंध, मुसाहिब मूक, सभा बहिरी।

    (दरबार में) राजा अंधा है, दरबारी गूँगे हैं और पूरी सभा बहरी हो गई है।

    The master is blind, the courtiers are mute, and the assembly is deaf.

    3. कठिन शब्दार्थ (Glossary)

    शब्द

    हिंदी अर्थ

    English Context

    तनुता

    कमजोरी / दुबलापन

    Frailty / Leanness

    बटाऊ

    राही / पथिक

    Traveler

    मुसाहिब

    दरबारी / चाटुकार

    Courtiers / Flatterers

    निवरे

    जिसका अंत न हो / व्यर्थ

    Endless / Vain

    दृगन

    आँखों में

    In the eyes

    4. साहित्यिक विश्लेषण (Literary Analysis)


    • भाव पक्ष (Thematic Aspect): 'हँसी की चोट' और 'सपना' में श्रृंगार रस (वियोग) है, जबकि 'दरबार' में शांत या वीभत्स रस की झलक है जो व्यवस्था के प्रति उदासीनता दर्शाती है।

    • कला पक्ष (Artistic Aspect):

      • पंचतत्व वर्णन: 'हँसी की चोट' में कवि ने विरह को भौतिक विज्ञान (Physics) से जोड़ा है—कैसे वायु, जल, अग्नि और पृथ्वी तत्व शरीर छोड़ देते हैं और केवल 'आकाश' (शून्यता) शेष रह जाता है।

      • अनुप्रास अलंकार: 'झहरि-झहरि', 'घहरि-घहरि' (पुनरुक्ति प्रकाश और अनुप्रास का सुंदर प्रयोग)।

      • व्यंग्य: 'दरबार' सवैये में विशेषणों (अंधा, गूँगा, बहरा) का प्रयोग कला के प्रति अज्ञानता दिखाने के लिए किया गया है।

    5. काव्यांश आधारित प्रश्न (Extract-Based Competency)


    Extract 1: "झहरि-झहरि झीनी बूँद हैं परति मानो... वेई छाई बूँदें मेरे आँसु है दृगन में।"

    1. Interpretation: नायिका का सपना क्यों टूट गया? (उत्तर: क्योंकि वह कृष्ण के साथ हिंडोले पर बैठने के लिए जैसे ही उठी, उसकी नींद खुल गई)।

    2. Aesthetics: 'जागने' और 'सोने' के संदर्भ में नायिका ने अपने भाग्य को कैसा बताया? (उत्तर: वह कहती है कि जागने पर उसके भाग्य सो गए क्योंकि कृष्ण चले गए, और सोते समय उसके भाग्य जागे थे क्योंकि कृष्ण साथ थे)।

    3. Inference: सपने की 'बूँदें' जागने पर किस रूप में बदल गईं? (उत्तर: वे आँखों के आँसू बन गईं)।

    6. पाठ्यपुस्तक प्रश्नोत्तर (Textbook Q&A)


    • 1. 'हँसी की चोट' सवैये में किन पंच तत्त्वों का वर्णन किया गया है?

      • उत्तर: वायु (समीर), जल (नीर), अग्नि (तेज), पृथ्वी (भूमि) और आकाश। वियोग में नायिका का शरीर इतना क्षीण हो गया है कि ये तत्व उसे छोड़कर जा रहे हैं।


    • 2. 'दरबार' सवैये में देव ने दरबारी चाटुकारिता पर किस प्रकार व्यंग्य किया है?

      • उत्तर: देव कहते हैं कि दरबार में विवेक मर चुका है। राजा को कुछ दिखता नहीं (अंधा), दरबारी कुछ बोलते नहीं (गूँगे) और सभा कुछ सुनती नहीं (बहरी)। वहाँ केवल व्यर्थ का नाच-गाना हो रहा है, कला की कोई कद्र नहीं है।


    • 3. 'सपना' कवित्त का भाव-सौंदर्य लिखिए।

      • उत्तर: इसमें संयोग सुख और वियोग दुख का अत्यंत सूक्ष्म चित्रण है। कृष्ण का प्रेम निमंत्रण देना सुखद है, पर अचानक नींद खुलना उस सुख को गहरी वेदना में बदल देता है। 'सोए गए भाग मेरे जानि वा जगन में' विरोधाभास का सुंदर उदाहरण है।

    7. अभिव्यक्ति और माध्यम (Creative Writing Connection)


    • Topic: "दरबारी संस्कृति बनाम कला का सम्मान"

    • Key Points:

      • इतिहास में राजाओं और कलाकारों के संबंध।

      • चाटुकारिता: रचनात्मकता की सबसे बड़ी दुश्मन।

      • आधुनिक समय में 'पुरस्कार' और 'गुटबाजी' की चुनौतियाँ।

    8. परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण कथन (Key Quotes)


    • "साहिब अंध, मुसाहिब मूक, सभा बहिरी।" (व्यवस्था पर प्रहार)।

    • "सोए गए भाग मेरे जानि वा जगन में।" (भाग्य की विडंबना)।

    • "हरी हियो जु लियो हरि जू हरि।" (यमक अलंकार का श्रेष्ठ उदाहरण)।

    9. सामान्य त्रुटियाँ (Common Student Errors)


    • Spelling: 'सवैये', 'कवित्त' और 'ब्रजभाषा' की वर्तनी पर ध्यान दें।

    • Conceptual: यह न समझें कि 'हँसी की चोट' में कोई खुशी की बात है। यहाँ 'हँसी' कृष्ण की है, जिससे नायिका को 'चोट' (दुख) पहुँचा है।


    10. विगत वर्षों के बोर्ड प्रश्न (PYQs)


    1. Short Answer (2 marks): 'हँसी की चोट' पद में आकाश तत्व ही क्यों शेष रह गया है?

      • Model Answer: क्योंकि शरीर के अन्य चारों तत्व (वायु, जल, अग्नि, पृथ्वी) वियोग के कष्ट में नायिका का साथ छोड़ चुके हैं। केवल आशा (आकाश) बची है कि शायद कृष्ण वापस आएँगे, इसलिए केवल 'शून्यता' या 'आकाश' शेष है।


    2. Long Answer (5 marks): देव के काव्य में 'अनुप्रास' और 'बिंब-विधान' की विशेषताएँ सोदाहरण समझाइए।

      • Model Answer: देव अनुप्रास के माध्यम से ध्वनि-चित्र रचने में कुशल हैं। 'झहरि-झहरि झीनी बूँद' में 'झ' वर्ण की आवृत्ति से वर्षा की झड़ी का बिंब साकार हो जाता है। उनके पदों में दृश्य और श्रव्य दोनों प्रकार के बिंब मिलते हैं। 'दरबार' में वे 'अंधे-बहरे' प्रतीकों से दरबारी जड़ता का प्रभावी बिंब खींचते हैं, जो उनकी काव्य-कला की श्रेष्ठता को सिद्ध करता है।


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