11. झाँसी की रानी - Jhansi ki Rani - Class 9 - Ganga
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पाठ/काव्य परिचय (Chapter)
कविता का नाम: झाँसी की रानी
कवयित्री: सुभद्रा कुमारी चौहान
विधा: कथात्मक कविता (Narrative Poetry)
पाठ्यपुस्तक: गंगा — NCERT कक्षा 9 हिंदी, R1, 2026-27
कवयित्री परिचय (Poet Introduction)
सुभद्रा कुमारी चौहान का जन्म सन् 1904 में उत्तर प्रदेश के प्रयागराज (इलाहाबाद) में हुआ था। वे अपने समय की एक अत्यंत प्रसिद्ध कवयित्री होने के साथ-साथ एक सक्रिय स्वतंत्रता सेनानी भी थीं। स्वाधीनता संग्राम में भाग लेने के कारण उन्हें दो बार जेल भी जाना पड़ा था। उन्होंने अपनी ओजस्वी कविताओं के माध्यम से भारतीय जनमानस में राष्ट्रीय चेतना और देशभक्ति की भावना जगाई।
उनके लेखन के मुख्य विषय देशप्रेम, स्वाधीनता संग्राम और स्त्री-केंद्रित रहे हैं। उनकी भाषा की सहजता ने उन्हें अपार लोकप्रियता दिलाई। उनकी प्रमुख रचनाओं में 'मुकुल', 'त्रिधारा' (कविता संग्रह), और 'बिखरे मोती', 'उन्मादिनी', 'सीधे-सादे चित्र' (कहानी संग्रह) शामिल हैं। उन्हें 'मुकुल' और 'बिखरे मोती' के लिए दो बार 'सेकसरिया पुरस्कार' से सम्मानित किया गया था। सन् 1948 में उनकी आकस्मिक मृत्यु हो गई। भारतीय डाक विभाग ने उनके सम्मान में एक डाक टिकट भी जारी किया है।
Subhadra Kumari Chauhan was born in 1904 in Prayagraj (Allahabad), Uttar Pradesh. She was a highly famous poetess of her time as well as an active freedom fighter. Due to her participation in the freedom struggle, she had to go to jail twice. She awakened national consciousness and patriotism in the Indian masses through her vigorous poetry.
The main subjects of her writing have been patriotism, the freedom struggle, and women-centric themes. The simplicity of her language brought her immense popularity. Her major works include 'Mukul', 'Tridhara' (poetry collections), and 'Bikhre Moti', 'Unmadini', 'Sidhe-Sade Chitra' (story collections). She was awarded the 'Seksaria Prize' twice for 'Mukul' and 'Bikhre Moti'. She died suddenly in 1948. The Indian Postal Department has also issued a postage stamp in her honor.
परीक्षा टिप / Exam Tip:कवयित्री परिचय 5 अंकों के दीर्घ उत्तरीय प्रश्न में पूछा जाता है। सुभद्रा कुमारी चौहान का स्वाधीनता संग्राम में योगदान, उनकी ओजपूर्ण (वीर रस) शैली और 'मुकुल' तथा 'बिखरे मोती' का विशेष उल्लेख करें।(Poetess Introduction appears as a 5-mark long answer. Make special mention of Subhadra Kumari Chauhan's contribution to the freedom struggle, her vigorous (Veer Ras) style, and her works 'Mukul' and 'Bikhre Moti'.)
कविता का पूरा पाठ (Full Poem Text)
सिंहासन हिल उठे, राजवंशों ने भृकुटी तानी थी,
बूढ़े भारत में भी आई फिर से नई जवानी थी,
गुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थी,
दूर फ़िरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी।
चमक उठी सन् सत्तावन में, वह तलवार पुरानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।
कानपूर के नाना की मुँहबोली बहन 'छबीली' थी,
लक्ष्मीबाई नाम, पिता की वह संतान अकेली थी,
नाना के सँग पढ़ती थी वह, नाना के सँग खेली थी,
बरछी, ढाल, कृपाण, कटारी उसकी यही सहेली थी।
वीर शिवाजी की गाथाएँ उसको याद ज़बानी थीं,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।
लक्ष्मी थी या दुर्गा थी वह स्वयं वीरता की अवतार,
देख मराठे पुलकित होते उसकी तलवारों के वार,
नकली युद्ध, व्यूह की रचना और खेलना खूब शिकार,
सैन्य घेरना, दुर्ग तोड़ना ये थे उसके प्रिय खिलवार।
महाराष्ट्र-कुल-देवी उसकी भी आराध्य भवानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।
हुई वीरता की वैभव के साथ सगाई झाँसी में,
ब्याह हुआ रानी बन आई लक्ष्मीबाई झाँसी में,
राजमहल में बजी बधाई खुशियाँ छाईं झाँसी में,
सुभट बुंदेलों की विरुदावलि-सी वह आई झाँसी में।
चित्रा ने अर्जुन को पाया, शिव से मिली भवानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।
उदित हुआ सौभाग्य, मुदित महलों में उजयाली छाई,
किंतु कालगति चुपके-चुपके काली घटा घेर लाई,
तीर चलाने वाले कर में उसे चूड़ियाँ कब भाईं,
रानी विधवा हुई हाय! विधि को भी नहीं दया आई।
निःसंतान मरे राजाजी रानी शोक-समानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।
बुझा दीप झाँसी का तब डलहौज़ी मन में हरषाया,
राज्य हड़प करने का उसने यह अच्छा अवसर पाया,
फ़ौरन फ़ौजें भेज दुर्ग पर अपना झंडा फहराया,
लावारिस का वारिस बनकर ब्रिटिश राज्य झाँसी आया।
अश्रुपूर्ण रानी ने देखा झाँसी हुई बिरानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।
अनुनय-विनय नहीं सुनता है, विकट फ़िरंगी की माया,
व्यापारी बन दया चाहता था जब यह भारत आया,
डलहौज़ी ने पैर पसारे अब तो पलट गई काया,
राजाओं नव्वाबों को भी उसने पैरों ठुकराया।
रानी दासी बनी, बनी यह दासी अब महरानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।
छिनी राजधानी देहली की, लिया लखनऊ बातों-बात,
कैद पेशवा था बिठूर में, हुआ नागपुर का भी घात,
उदैपूर, तंजोर, सतारा, करनाटक की कौन बिसात,
जब कि सिंध, पंजाब, ब्रह्म पर अभी हुआ था वज्र-निपात।
बंगाले, मद्रास आदि की भी तो यही कहानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।
रानी रोईं रनिवासों में बेगम ग़म से थीं बेज़ार,
उनके गहने-कपड़े बिकते थे कलकत्ते के बाज़ार,
सरे-आम नीलाम छापते थे अंग्रेज़ों के अख़बार,
'नागपूर के ज़ेवर ले लो लखनऊ के लो नौलख हार'।
यों परदे की इज़्ज़त पर-देशी के हाथ बिकानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।
कुटियों में थी विषम वेदना, महलों में आहत अपमान,
वीर सैनिकों के मन में था, अपने पुरखों का अभिमान,
नाना धुंधूपंत पेशवा जुटा रहा था सब सामान,
बहिन छबीली ने रण-चंडी का कर दिया प्रकट आह्वान।
हुआ यज्ञ प्रारंभ उन्हें तो सोई ज्योति जगानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।
महलों ने दी आग, झोंपड़ी ने ज्वाला सुलगाई थी,
यह स्वतंत्रता की चिनगारी अंतरतम से आई थी,
झाँसी चेती, दिल्ली चेती, लखनऊ लपटें छाई थीं,
मेरठ, कानपूर, पटना ने भारी धूम मचाई थी।
जबलपूर, कोल्हापूर में भी कुछ हलचल उकसानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।
इस स्वतंत्रता महायज्ञ में कई वीरवर आए काम,
नाना धुंधूपंत, ताँतिया, चतुर अज़ीमुल्ला सरनाम,
अहमदशाह मौलवी, ठाकुर कुँवरसिंह सैनिक अभिराम,
भारत के इतिहास-गगन में अमर रहेंगे जिनके नाम।
लेकिन आज जुर्म कहलाती उनकी जो कुरबानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।
इनकी गाथा छोड़ चलें हम झाँसी के मैदानों में,
जहाँ खड़ी है लक्ष्मीबाई मर्द बनी मर्दानों में,
लेफ्टिनेंट वॉकर आ पहुँचा, आगे बढ़ा जवानों में,
रानी ने तलवार खींच ली, हुआ द्वंद्व असमानों में।
ज़ख्मी होकर वॉकर भागा, उसे अजब हैरानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।
रानी बढ़ी कालपी आई, कर सौ मील निरंतर पार,
घोड़ा थक कर गिरा भूमि पर, गया स्वर्ग तत्काल सिधार,
यमुना-तट पर अंग्रेज़ों ने फिर खाई रानी से हार,
विजयी रानी आगे चल दी, किया ग्वालियर पर अधिकार।
अंग्रेज़ों के मित्र सिंधिया ने छोड़ी रजधानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।
विजय मिली, पर अंग्रेज़ों की फिर सेना घिर आई थी,
अबके जनरल स्मिथ सन्मुख था, उसने मुँह की खाई थी,
काना और मंदरा सखियाँ रानी के सँग आई थीं,
युद्ध क्षेत्र में उन दोनों ने भारी मार मचाई थी।
पर, पीछे ह्यू रोज़ आ गया, हाय! घिरी अब रानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।
तो भी रानी मार-काट कर चलती बनी सैन्य के पार,
किंतु सामने नाला आया, था यह संकट विषम अपार,
घोड़ा अड़ा, नया घोड़ा था, इतने में आ गए सवार,
रानी एक, शत्रु बहुतेरे, होने लगे वार पर वार।
घायल होकर गिरी सिंहनी उसे वीर-गति पानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।
रानी गई सिधार, चिता अब उसकी दिव्य सवारी थी,
मिला तेज़ से तेज़, तेज़ की वह सच्ची अधिकारी थी,
अभी उम्र कुल तेइस की थी, मनुज नहीं अवतारी थी,
हमको जीवित करने आई बन स्वतंत्रता-नारी थी।
दिखा गई पथ, सिखा गई हमको जो सीख सिखानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।
जाओ रानी याद रखेंगे हम कृतज्ञ भारतवासी, यह तेरा बलिदान जगावेगा स्वतंत्रता अविनाशी, होवे चुप इतिहास, लगे सच्चाई को चाहे फाँसी, हो मदमाती विजय मिटा दे गोलों से चाहे झाँसी। तेरा स्मारक तू ही होगी, तू खुद अमिट निशानी थी, बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।
पद-वार सारांश (Stanza-wise Summary)
पद 1-3: कविता की शुरुआत 1857 की क्रांति के उफ़ान से होती है। अंग्रेज़ों (फ़िरंगियों) के शोषण से त्रस्त, कमज़ोर (बूढ़े) भारत में आज़ादी की नई लहर उठी और राजाओं ने अंग्रेज़ों को भगाने की ठान ली। इस क्रांति में झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई ने मर्दों की तरह असाधारण युद्ध किया। बचपन में उन्हें 'छबीली' कहा जाता था और वे कानपुर के नाना साहब की मुँहबोली बहन थीं। गुड्डे-गुड़ियों की जगह तलवार, बरछी और कटारी ही उनकी सहेलियाँ थीं। वे स्वयं साक्षात् 'वीरता की अवतार' थीं; सैन्य-व्यूह रचना और युद्ध उनके प्रिय खेल थे।
(The poem starts with the surge of the 1857 revolution. Tormented by the exploitation of the British (Firangis), a new wave of freedom arose in weak (old) India, and kings decided to drive the British away. In this revolution, Rani Lakshmibai of Jhansi fought extraordinarily like a man. In her childhood, she was called 'Chhabili' and was the foster sister of Nana Saheb of Kanpur. Instead of dolls, swords, spears, and daggers were her friends. She was an 'incarnation of bravery' herself; military formations and warfare were her favorite games.)
पद 4-6: लक्ष्मीबाई का विवाह झाँसी के राजा गंगाधर राव से हुआ, जिससे झाँसी में खुशियाँ छा गईं (वीरता का वैभव से मिलन)। लेकिन दुर्भाग्य से, कुछ ही समय बाद राजा का निःसंतान निधन हो गया और रानी विधवा हो गईं। इस अवसर का लाभ उठाकर अंग्रेज़ गवर्नर डलहौज़ी ने 'राज्य हड़प नीति' (Doctrine of Lapse) के तहत लावारिस झाँसी पर कब्ज़ा कर लिया और अपना झंडा फहरा दिया।
(Lakshmibai was married to King Gangadhar Rao of Jhansi, bringing happiness to Jhansi (union of bravery with wealth). But unfortunately, shortly after, the king died childless, and the queen became a widow. Taking advantage of this, British Governor Dalhousie captured the heirless Jhansi under the 'Doctrine of Lapse' and hoisted his flag.)
पद 7-9: जो अंग्रेज़ भारत में व्यापारी बनकर दया माँगते हुए आए थे, अब वे राजा-नवाबों को ठुकरा रहे थे। उन्होंने दिल्ली, लखनऊ, नागपुर सहित कई राज्यों को छल से छीन लिया। अंग्रेज़ इतने निर्दयी थे कि वे भारत की रानियों और बेगमों के गहने-कपड़े कलकत्ता के बाज़ारों में सरेआम नीलाम कर रहे थे। भारत का सम्मान विदेशियों के हाथ बिक रहा था।
(The British, who came to India as traders begging for mercy, were now kicking kings and nawabs. They deceitfully snatched many states including Delhi, Lucknow, and Nagpur. The British were so ruthless that they were publicly auctioning the jewels and clothes of Indian queens and begums in the markets of Calcutta. India's honor was being sold to foreigners.)
पद 10-12: अंग्रेज़ों के इस अत्याचार के खिलाफ महलों और झोपड़ियों, दोनों जगह विद्रोह की ज्वाला भड़क उठी। नाना धुंधूपंत ने युद्ध की तैयारी की और उनकी बहन छबीली (लक्ष्मीबाई) ने 'रण-चंडी' का रूप धारण कर युद्ध का शंखनाद कर दिया। इस स्वतंत्रता महायज्ञ में ताँत्या टोपे, अज़ीमुल्ला, कुँवर सिंह जैसे कई महान वीर शहीद हुए, जिनका नाम इतिहास में अमर रहेगा।
(Against this British tyranny, the flames of rebellion flared up in both palaces and huts. Nana Dhundhupant prepared for war, and his sister Chhabili (Lakshmibai) took the form of 'Ran-Chandi' (Goddess of War) and sounded the bugle of war. In this great sacrifice for freedom, many great heroes like Tantia Tope, Azimullah, and Kunwar Singh were martyred, whose names will remain immortal in history.)
पद 13-15: झाँसी के मैदान में रानी लक्ष्मीबाई ने अदम्य साहस दिखाते हुए अंग्रेज़ अधिकारी लेफ्टिनेंट वॉकर को बुरी तरह ज़ख्मी कर भगा दिया। उसके बाद रानी सौ मील का सफर तय करके कालपी पहुँचीं और वहाँ भी अंग्रेज़ों को हराया। फिर उन्होंने ग्वालियर पर कब्ज़ा किया (जहाँ का राजा सिंधिया अंग्रेज़ों का मित्र था)। फिर अंग्रेज़ सेनापति जनरल स्मिथ ने रानी को घेरा, लेकिन रानी और उनकी सखियों (काना और मंदरा) ने अंग्रेज़ सेना में भारी तबाही मचाई।
(In the battlefield of Jhansi, showing indomitable courage, Rani Lakshmibai badly injured and chased away British officer Lieutenant Walker. After that, traveling 100 miles, the queen reached Kalpi and defeated the British there too. Then she captured Gwalior (whose king Scindia was a friend of the British). Then British commander General Smith surrounded the queen, but the queen and her friends (Kana and Mandra) caused heavy destruction in the British army.)
पद 16-18: स्मिथ को हराने के बाद, पीछे से अंग्रेज़ अधिकारी 'ह्यू रोज़' की ताज़ा सेना ने रानी को घेर लिया। फिर भी रानी अंग्रेज़ों को काटती हुई आगे निकल गईं, लेकिन सामने एक बड़ा नाला आ गया। रानी का नया घोड़ा अड़ गया। अकेली रानी पर कई शत्रुओं ने वार किए और वह 'शेरनी' (सिंहनी) मात्र 23 वर्ष की उम्र में शहीद (वीरगति को प्राप्त) हो गई।
(After defeating Smith, the fresh army of British officer 'Hugh Rose' surrounded the queen from behind. Still, cutting through the British, the queen moved ahead, but a large drain appeared in front. The queen's new horse balked. Many enemies attacked the lone queen, and that 'lioness' was martyred (attained Veergati) at the mere age of 23.)
पद 19: अंत में कवयित्री कहती हैं कि कृतज्ञ भारतवासी रानी लक्ष्मीबाई के इस महान बलिदान को हमेशा याद रखेंगे। भले ही अंग्रेज़ इतिहास मिटा दें या झाँसी को नष्ट कर दें, रानी स्वयं ही अपना सबसे बड़ा 'अमिट स्मारक' हैं। वे एक 'अवतारी' नारी थीं जो हमें आज़ादी और स्वाभिमान का रास्ता दिखा गईं।
(In the end, the poetess says that grateful Indians will always remember this great sacrifice of Rani Lakshmibai. Even if the British erase history or destroy Jhansi, the queen herself is her biggest 'indelible monument'. She was an 'incarnate' woman who showed us the path of freedom and self-respect.)
शीर्षक की सार्थकता (Title Justification)
इस कविता का शीर्षक 'झाँसी की रानी' पूर्णतः सटीक और सार्थक है। पूरी कविता 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई की अप्रतिम शूरवीरता, युद्ध-कौशल और उनके अमर बलिदान के इर्द-गिर्द बुनी गई है। यह शीर्षक सीधे तौर पर उस महान वीरांगना को समर्पित है जो इस गाथा की मुख्य केंद्र हैं।
The title of this poem 'Jhansi Ki Rani' is completely accurate and justified. The entire poem is woven around the unparalleled bravery, warfare skills, and immortal sacrifice of Rani Lakshmibai of Jhansi in the First War of Independence of 1857. This title is directly dedicated to that great heroine who is the main center of this saga.
काव्य-सौंदर्य (Poetic Beauty)
भाव सौंदर्य (Emotional Beauty)
यह कविता 'वीर रस' (Heroic sentiment) और 'देशप्रेम' (Patriotism) का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इसमें रानी लक्ष्मीबाई के अदम्य साहस, अंग्रेजों के खिलाफ उनके आक्रोश और मातृभूमि के लिए अपने प्राण न्योछावर कर देने के उदात्त भाव को अत्यंत प्रेरणादायक रूप में चित्रित किया गया है। कविता पाठकों के मन में राष्ट्र के प्रति गर्व और बलिदान की भावना (स्थायी भाव: उत्साह) जगाती है।
(This poem is an excellent example of 'Veer Ras' (Heroic sentiment) and 'Deshprem' (Patriotism). It portrays Rani Lakshmibai's indomitable courage, her anger against the British, and her sublime feeling of laying down her life for the motherland in a highly inspiring form. The poem awakens the feeling of pride and sacrifice for the nation in the readers' minds (Sthai Bhav: Utsah).
शिल्प सौंदर्य (Structural Beauty)
विधा: कथात्मक कविता (Narrative Poetry), जिसमें कहानी और कविता दोनों के गुण मौजूद हैं।
भाषा: सरल, सुबोध और ओजपूर्ण खड़ी बोली हिंदी, जो जनमानस से सीधा जुड़ती है।
शैली: लोकगीत (बुंदेली हरबोलों) की शैली पर आधारित गेय (गाने योग्य) कविता।
अलंकार:
उपमा: "सुभट बुंदेलों की विरुदावलि-सी वह आई झाँसी में"।
रूपक: "काली घटा घेर लाई" (विपत्ति रूपी बादल)।
अतिशयोक्ति: "सिंहासन हिल उठे"।
अनुप्रास: "मिला तेज़ से तेज़"।
मुहावरों का सटीक प्रयोग: 'भृकुटी तानना' (क्रोधित होना), 'पैर पसारना' (अधिकार जमाना), 'मुँह की खाना' (बुरी तरह हारना)।
केंद्रीय भाव एवं मूल्य (Central Theme & Values)
5A. विषय-वस्तु तालिका (Themes Table)
विषय (Theme) | कविता में स्पष्टीकरण (Explanation in Text) |
मुख्य विषय: 1857 का स्वतंत्रता संग्राम और लक्ष्मीबाई की वीरता | कविता अंग्रेज़ों (फ़िरंगियों) के अत्याचारों के खिलाफ भारत के विद्रोह और उसमें रानी लक्ष्मीबाई के अद्वितीय युद्ध-कौशल का सजीव चित्रण करती है। |
नारी सशक्तिकरण (Women Empowerment) | यह कविता पारंपरिक सोच को तोड़ती है कि युद्ध केवल पुरुषों का काम है; रानी "मर्दों में मर्द" बनकर लड़ती हैं। |
साम्राज्यवाद का विरोध (Anti-Imperialism) | डलहौज़ी की राज्य हड़प नीति और अंग्रेज़ों द्वारा भारतीय राजघरानों के अपमान (गहने नीलाम करना) का तीखा विरोध। |
राष्ट्रीय चेतना (National Consciousness) | यह कविता "गुमी हुई आज़ादी की कीमत" समझाकर भारतवासियों को एक होकर लड़ने के लिए प्रेरित करती है। |
5B. मानवीय मूल्य (Human Values)
देशभक्ति और बलिदान (Patriotism and Sacrifice): अपनी मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए मात्र 23 वर्ष की उम्र में हँसते-हँसते प्राण न्योछावर कर देना।
(Happily sacrificing one's life at the mere age of 23 for the freedom of the motherland.)
अदम्य साहस और दृढ़ निश्चय (Indomitable Courage and Determination): अकेले होने और शत्रुओं से घिरे होने (ह्यू रोज़ की सेना) के बावजूद हार न मानना और अंत तक लड़ना।
(Not giving up and fighting till the end despite being alone and surrounded by enemies (Hugh Rose's army).
कृतज्ञता (Gratitude): कवयित्री द्वारा यह संकल्प लेना कि भारतवासी रानी के इस सर्वोच्च बलिदान के प्रति हमेशा आभारी (कृतज्ञ) रहेंगे।
(The poetess taking a pledge that Indians will always remain thankful (grateful) for this supreme sacrifice of the queen.)
शब्दार्थ (Vocabulary)
क्र. | शब्द/पद | हिंदी अर्थ | English Meaning |
1 | फ़िरंगी | अंग्रेज़ / विदेशी | British / Foreigner |
2 | भृकुटी तानना | क्रोधित होना | To frown / Be angry |
3 | मर्दानी | बहादुर / पुरुषों जैसा युद्ध कौशल रखने वाली | Brave (like a man) / Masculine valor |
4 | छबीली | तेज़ और सुंदर छवि वाली | Beautiful and vibrant |
5 | सुभट | वीर / रणकुशल योद्धा | Brave warrior |
6 | विरुदावलि | कीर्ति-गाथा / प्रशंसागीत | Saga of glory / Song of praise |
7 | कालगति | समय का चक्र / मृत्यु | Pace of time / Death |
8 | विधि | विधाता / भगवान | God / Destiny |
9 | बिरानी | पराई | Alien / Belonging to others |
10 | अनुनय-विनय | प्रार्थना / विनती | Pleading / Requesting |
11 | बिसात | हैसियत / औकात | Capacity / Worth |
12 | वज्र-निपात | भारी विपत्ति का गिरना | Falling of a thunderbolt / Heavy disaster |
13 | बेज़ार | दुखी / परेशान | Sad / Distressed |
14 | अंतरतम | हृदय की गहराई से | From the depth of the heart |
15 | अभिराम | सुंदर / मनोहर | Beautiful |
16 | सन्मुख | सम्मुख / सामने | In front of / Facing |
17 | मुँह की खाना | बुरी तरह हारना | To be badly defeated |
18 | सिधारना | प्रस्थान करना / मृत्यु को प्राप्त होना | To depart / To die |
19 | कृतज्ञ | उपकार मानने वाला | Grateful / Thankful |
20 | अविनाशी | जो कभी नष्ट न हो / अमर | Indestructible / Immortal |
काव्यांश आधारित प्रश्न (Extract-Based Questions)
Extract 1
"उदित हुआ सौभाग्य, मुदित महलों में उजयाली छाई, किंतु कालगति चुपके-चुपके काली घटा घेर लाई, तीर चलाने वाले कर में उसे चूड़ियाँ कब भाईं, रानी विधवा हुई हाय! विधि को भी नहीं दया आई। निःसंतान मरे राजाजी रानी शोक-समानी थी, बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।"
Q1. 'कालगति चुपके-चुपके काली घटा घेर लाई' से कवयित्री का क्या आशय है? (A) बारिश होने वाली थी (B) राजा गंगाधर राव की मृत्यु से उत्पन्न विपत्ति और शोक रूपी बादल (C) अंग्रेज़ों का आक्रमण (D) रात का समय
उत्तर: (B) — कवयित्री का आशय है कि विवाह की खुशियों के बीच अचानक समय का चक्र पलटा और राजा की मृत्यु से झाँसी पर विपत्ति और शोक के काले बादल छा गए।
(The poetess means that amidst the joys of marriage, the wheel of time suddenly turned, and with the king's death, dark clouds of disaster and grief hovered over Jhansi.)
Q2. 'तीर चलाने वाले कर में उसे चूड़ियाँ कब भाईं'—इस पंक्ति में 'उसे' किसके लिए प्रयुक्त हुआ है? (A) रानी लक्ष्मीबाई के लिए (B) अंग्रेज़ों के लिए (C) विधाता (विधि / भगवान) के लिए (D) गंगाधर राव के लिए उत्तर: (C) — यहाँ 'उसे' विधाता (भाग्य) के लिए प्रयुक्त हुआ है, जिसे रानी के वीर हाथों में सुहाग की चूड़ियाँ अच्छी नहीं लगीं और उसने रानी को विधवा कर दिया।
(Here 'USe' (him) is used for Destiny (God), who did not like the bangles of matrimony in the queen's brave hands and made her a widow.)
Q3. राजा के निधन के बाद डलहौज़ी क्यों हरषाया (खुश हुआ)?
उत्तर: राजा गंगाधर राव की निःसंतान मृत्यु हो गई थी। डलहौज़ी इसलिए खुश हुआ क्योंकि उसे अपनी 'राज्य हड़प नीति' के तहत लावारिस झाँसी पर कब्ज़ा करने का सुनहरा अवसर मिल गया था।
(King Gangadhar Rao died childless. Dalhousie rejoiced because he got a golden opportunity to capture the heirless Jhansi under his 'Doctrine of Lapse'.)
Q4. इस पद्यांश में किस रस की प्रधानता है?
उत्तर: इस पद्यांश में 'करुण रस' की प्रधानता है, क्योंकि इसमें राजा की असामयिक मृत्यु, रानी के विधवा होने और उनके असीम शोक का अत्यंत हृदयविदारक वर्णन किया गया है।
(This stanza is dominated by 'Karun Ras' (Pathos/Sadness), as it deeply describes the untimely death of the king, the queen becoming a widow, and her immense grief.)
Extract 2
"तो भी रानी मार-काट कर चलती बनी सैन्य के पार, किंतु सामने नाला आया, था यह संकट विषम अपार, घोड़ा अड़ा, नया घोड़ा था, इतने में आ गए सवार, रानी एक, शत्रु बहुतेरे, होने लगे वार पर वार। घायल होकर गिरी सिंहनी उसे वीर-गति पानी थी, बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।"
Q1. रानी अंग्रेज़ों की सेना को पार करने के बावजूद क्यों फँस गईं? (A) क्योंकि उनके पास हथियार नहीं थे (B) क्योंकि सामने एक विशाल नाला आ गया था और उनका नया घोड़ा उसे पार करने से अड़ गया (रुक गया) (C) क्योंकि उनकी सहेलियाँ भाग गईं (D) क्योंकि रानी डर गई थीं
उत्तर: (B) — ब्रिटिश सेना का घेरा तोड़कर निकलने के बाद रास्ते में एक बड़ा नाला आ गया, जिसे रानी का नया और अनुभवहीन घोड़ा पार करने से अड़ (रुक) गया। (After breaking through the British army's siege, a large drain appeared on the way, which the queen's new and inexperienced horse balked at crossing.)
Q2. 'रानी एक, शत्रु बहुतेरे' पंक्ति युद्ध की किस स्थिति को दर्शाती है? (A) रानी की कायरता (B) न्यायपूर्ण युद्ध (C) अंग्रेज़ों का कायरतापूर्ण आचरण जहाँ एक अकेली महिला पर कई सैनिकों ने एक साथ हमला किया (D) अंग्रेज़ों की हार
उत्तर: (C) — यह पंक्ति अंग्रेज़ों के अनैतिक और कायरतापूर्ण युद्ध-कौशल को दर्शाती है, जहाँ उन्होंने निहत्थी/अकेली रानी पर चारों ओर से एक साथ वार किए। (This line shows the immoral and cowardly warfare of the British, where they attacked the lone/unarmed queen from all sides simultaneously.)
Q3. कवयित्री ने रानी को 'सिंहनी' क्यों कहा है?
उत्तर: कवयित्री ने रानी को 'सिंहनी' (शेरनी) कहा है क्योंकि उन्होंने युद्ध के मैदान में एक शेरनी की तरह निडर होकर भयंकर मार-काट मचाई और अंग्रेज़ों के छक्के छुड़ा दिए थे।
(The poetess has called the queen a 'Lioness' because she fought fearlessly like a lioness in the battlefield, causing fierce destruction and routing the British.)
Q4. 'उसे वीर-गति पानी थी' का आशय स्पष्ट कीजिए। उत्तर: इसका आशय है कि रानी पीठ दिखाकर भागने वालों में से नहीं थीं; वे अंत तक शत्रुओं से लड़ती रहीं और मातृभूमि की रक्षा करते हुए युद्धभूमि में शहीद (वीरगति प्राप्त) हो गईं।
(It means the queen was not one to show her back and flee; she fought the enemies till the end and was martyred (attained Veergati) on the battlefield protecting the motherland.)
लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)
प्र1. 'बूढ़े भारत में भी आई फिर से नई जवानी थी'—इस पंक्ति का क्या भाव है? (कवि की भावना) मुख्य बिंदु 1 (VP1): अंग्रेज़ों के शोषण से त्रस्त हताश भारत। (Hopeless India tormented by British exploitation). मुख्य बिंदु 2 (VP2): 1857 की क्रांति से जगी नई ऊर्जा और आज़ादी की चाह। (New energy and desire for freedom awakened by the 1857 revolution).
उत्तर: इस पंक्ति का भाव है कि अंग्रेज़ों की लगातार गुलामी और शोषण के कारण भारतवर्ष कमज़ोर, हताश और 'बूढ़ा' (निर्जीव) सा हो गया था। परंतु, 1857 की क्रांति ने भारतीयों के मन में अपनी खोई हुई आज़ादी को वापस पाने का ऐसा जोश और उत्साह भर दिया, मानो उस बूढ़े शरीर में फिर से नई 'जवानी' (ऊर्जा) लौट आई हो। (The meaning of this line is that due to continuous British slavery and exploitation, India had become weak, hopeless, and 'old' (lifeless). However, the 1857 revolution filled the minds of Indians with such zeal and enthusiasm to regain their lost freedom, as if a new 'youth' (energy) had returned to that old body.)
प्र2. 'रानी रोईं रनिवासों में बेगम ग़म से थीं बेज़ार'—अंग्रेज़ों के किस कृत्य से यह स्थिति उत्पन्न हुई? (घटना का महत्व) मुख्य बिंदु 1 (VP1): राज्यों को हड़पना और राजाओं-नवाबों का अपमान। (Annexing states and insulting kings and nawabs). मुख्य बिंदु 2 (VP2): रानियों और बेगमों के गहने-कपड़े सरेआम नीलाम करना। (Publicly auctioning the jewels and clothes of queens and begums). उत्तर: अंग्रेज़ों ने अपनी कूटनीति (हड़प नीति) से दिल्ली, लखनऊ, नागपुर जैसे राज्यों को छीन लिया और वहाँ के राजा-नवाबों को बेदखल कर दिया। इसके बाद अंग्रेज़ों ने घोर क्रूरता दिखाते हुए भारत की प्रतिष्ठित रानियों और बेगमों के कीमती गहनों और कपड़ों को कलकत्ता के बाज़ारों में सरेआम नीलाम किया। भारत की इस घोर बेइज़्ज़ती के कारण रानियाँ और बेगमें रोने और शोक मनाने को विवश थीं। (The British snatched states like Delhi, Lucknow, and Nagpur through their diplomacy (Doctrine of Lapse) and ousted their kings and nawabs. After this, showing extreme cruelty, the British publicly auctioned the precious jewels and clothes of respected Indian queens and begums in the markets of Calcutta. Due to this severe insult to India, the queens and begums were forced to cry and mourn.)
प्र3. 'महलों ने दी आग, झोंपड़ी ने ज्वाला सुलगाई थी'—यह पंक्ति 1857 के संग्राम की किस विशेषता को दर्शाती है? (अनुमान/निष्कर्ष) मुख्य बिंदु 1 (VP1): समाज के हर वर्ग की भागीदारी। (Participation of every section of society). मुख्य बिंदु 2 (VP2): अमीर (महल) और गरीब (झोपड़ी) का एकजुट होना। (Uniting of the rich (palaces) and poor (huts).
उत्तर: यह पंक्ति 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की सबसे बड़ी विशेषता 'राष्ट्रव्यापी एकता' को दर्शाती है। अंग्रेज़ों के खिलाफ विद्रोह केवल राजघरानों (महलों) तक सीमित नहीं था, बल्कि समाज के सबसे निचले और गरीब वर्ग (झोपड़ियों में रहने वाले आम नागरिक) ने भी इस आज़ादी की लड़ाई में बढ़-चढ़कर और एकजुट होकर हिस्सा लिया था। (This line reflects the biggest feature of the First War of Independence of 1857, which is 'nationwide unity'. The rebellion against the British was not limited to royal families (palaces), but the lowest and poorest section of society (common citizens living in huts) also participated actively and unitedly in this fight for freedom.)
प्र4. कविता में रानी लक्ष्मीबाई को 'अवतारी' क्यों कहा गया है? (मूल्यपरक) मुख्य बिंदु 1 (VP1): असाधारण साहस और अमानवीय युद्ध-कौशल। (Extraordinary courage and superhuman warfare skills). मुख्य बिंदु 2 (VP2): मृतप्राय भारत में स्वतंत्रता की ज्योति जगाना। (Igniting the flame of freedom in a dying India).
उत्तर: सुभद्रा कुमारी चौहान ने लक्ष्मीबाई को 'अवतारी' (दिव्य शक्ति) कहा है क्योंकि उनका साहस, नेतृत्व क्षमता और युद्ध-कौशल किसी सामान्य मनुष्य के बस की बात नहीं थी। 23 वर्ष की अल्पायु में उन्होंने अकेले ही शक्तिशाली अंग्रेज़ सेना की नींद हराम कर दी थी। वे एक देवी (स्वतंत्रता नारी) बनकर आईं और मृतप्राय भारतीयों में स्वाभिमान और आज़ादी की जो ज्योति जगा गईं, वह कार्य केवल कोई अवतारी आत्मा ही कर सकती है।
(Subhadra Kumari Chauhan has called Lakshmibai an 'Avatar' (divine power) because her courage, leadership abilities, and warfare skills were beyond an ordinary human's capacity. At the young age of 23, she alone caused sleepless nights for the powerful British army. She came as a Goddess (freedom woman) and ignited the flame of self-respect and freedom in dying Indians, a task only an incarnate soul could do.)
प्र5. 'झाँसी की रानी' कविता में 'बुंदेले हरबोलों' का क्या महत्व है? (भाषा/शिल्प) मुख्य बिंदु 1 (VP1): बुंदेलखंड के पारंपरिक लोकगायक। (Traditional folk singers of Bundelkhand). मुख्य बिंदु 2 (VP2): लोक-कथाओं और इतिहास को जन-जन तक पहुँचाना। (Spreading folk tales and history to the masses).
उत्तर: 'हरबोले' बुंदेलखंड के लोकगायकों का एक समुदाय है जो वीर रस की गाथाएँ गाते हैं। कवयित्री ने इस कविता में टेक (Refrain) के रूप में "बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी" का बार-बार प्रयोग किया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि रानी की वीरता कोई कोरी कल्पना नहीं है, बल्कि यह वह प्रामाणिक लोक-इतिहास है जो बुंदेलखंड के जन-जन की जुबान पर आज भी लोकगीतों के रूप में जीवित है। ('Harbole' is a community of folk singers in Bundelkhand who sing tales of heroism. The poetess has repeatedly used "Bundele Harbolo ke muh humne suni kahani thi" as a refrain in this poem. This clarifies that the queen's bravery is not a mere imagination, but authentic folk history that still lives on the tongues of the masses in Bundelkhand in the form of folk songs.)
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)
प्र1. 'झाँसी की रानी' कविता के आधार पर रानी लक्ष्मीबाई के बचपन, उनकी रुचियों और उनके असाधारण युद्ध-कौशल का विस्तार से वर्णन कीजिए। (चरित्र चित्रण) मुख्य बिंदु 1 (VP1): बचपन: 'छबीली' नाम, नाना साहब की बहन, पिता की इकलौती संतान। (Childhood: Named 'Chhabili', Nana Saheb's sister, father's only child). मुख्य बिंदु 2 (VP2): रुचियाँ: गुड़ियों की जगह हथियारों (बरछी, ढाल, कटारी) से खेलना, सैन्य-व्यूह रचना। (Interests: Playing with weapons instead of dolls, military formations). मुख्य बिंदु 3 (VP3): युद्ध कौशल: लेफ्टिनेंट वॉकर, स्मिथ को हराना और वीरगति प्राप्त करना। (Warfare skills: Defeating Lt. Walker, Smith, and attaining martyrdom). मुख्य बिंदु 4 (VP4): चारित्रिक महानता: दुर्गा/भवानी का रूप, स्वतंत्रता के लिए प्राण न्योछावर। (Character greatness: Form of Durga/Bhavani, sacrificing life for freedom).
उत्तर: सुभद्रा कुमारी चौहान रचित 'झाँसी की रानी' कविता लक्ष्मीबाई के विराट और ओजस्वी व्यक्तित्व का एक सजीव दस्तावेज़ है।
रानी का बचपन सामान्य लड़कियों से बिल्कुल अलग था। वे अपने पिता की इकलौती संतान थीं और कानपुर के नाना साहब की मुँहबोली बहन थीं, जो उन्हें प्यार से 'छबीली' कहते थे। जहाँ अन्य कन्याएँ गुड्डे-गुड़ियों से खेलती थीं, वहीं लक्ष्मीबाई की सहेलियाँ बरछी, ढाल, कृपाण (तलवार) और कटारी थीं। उन्हें बचपन से ही वीर शिवाजी की शौर्य गाथाएँ ज़बानी याद थीं। नकली युद्ध करना, सैन्य-व्यूह की रचना करना, दुश्मन के किले (दुर्ग) तोड़ना और शिकार खेलना उनके सबसे प्रिय खेल थे। वे साक्षात् 'वीरता की अवतार' (दुर्गा या भवानी) लगती थीं, जिनकी तलवारबाज़ी देखकर मराठे भी गर्व से भर जाते थे।
विवाह के पश्चात जब अंग्रेज़ों ने झाँसी पर कब्ज़ा किया, तो रानी ने एक साधारण दासी या विधवा की तरह रोने के बजाय रण-चंडी का रूप धारण किया। उनका युद्ध-कौशल अमानवीय था; उन्होंने झाँसी के मैदान में लेफ्टिनेंट वॉकर को बुरी तरह घायल कर भगा दिया। इसके बाद कालपी और ग्वालियर में भी उन्होंने अंग्रेज़ सेना (जनरल स्मिथ) को धूल चटाई। अंत में जब ह्यू रोज़ की विशाल सेना ने उन्हें घेर लिया और उनका नया घोड़ा अड़ गया, तब भी वे अकेली अनेक शत्रुओं से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुईं। उनका यह रूप सिद्ध करता है कि वे वास्तव में "मर्दों में मर्दानी" थीं।
(The poem 'Jhansi Ki Rani' by Subhadra Kumari Chauhan is a living document of Lakshmibai's vast and vigorous personality. The queen's childhood was completely different from normal girls. She was her father's only child and the foster sister of Nana Saheb of Kanpur, who lovingly called her 'Chhabili'. While other girls played with dolls, Lakshmibai's friends were spears, shields, swords, and daggers. She knew the heroic tales of brave Shivaji by heart since childhood. Mock fighting, military formations, breaking enemy forts, and hunting were her favorite games. She looked like an 'incarnation of bravery' (Durga or Bhavani) whose swordplay filled even the Marathas with pride.
After marriage, when the British captured Jhansi, instead of crying like an ordinary maid or widow, the queen took the form of the Goddess of War (Ran-Chandi). Her warfare skills were superhuman; she badly injured and chased away Lt. Walker on the Jhansi battlefield. After that, she defeated the British army (General Smith) in Kalpi and Gwalior as well. In the end, when Hugh Rose's huge army surrounded her and her new horse balked, she attained martyrdom fighting alone against numerous enemies. This form of hers proves that she truly was "a man among men" (Mardani).)
प्र2. 'तेरा स्मारक तू ही होगी, तू खुद अमिट निशानी थी।'—इस पंक्ति के माध्यम से कवयित्री क्या संदेश देना चाहती है? कविता के आधार पर रानी लक्ष्मीबाई के बलिदान के महत्व का मूल्यांकन कीजिए। (केंद्रीय भाव एवं संदेश) मुख्य बिंदु 1 (VP1): भौतिक स्मारकों (मूर्ति/भवन) की नश्वरता और व्यर्थता। (Mortality and futility of physical monuments (statues/buildings)). मुख्य बिंदु 2 (VP2): रानी के अदम्य साहस और कार्यों का स्वयं एक 'अमिट निशानी' होना। (The queen's indomitable courage and deeds being an 'indelible mark' themselves). मुख्य बिंदु 3 (VP3): भारतीयों के हृदय में स्वतंत्रता की बुझी हुई लौ को पुनः जलाना। (Re-igniting the extinguished flame of freedom in the hearts of Indians). मुख्य बिंदु 4 (VP4): पीढ़ियों तक देशप्रेम और स्वाभिमान की प्रेरणा देना। (Inspiring patriotism and self-respect for generations).
उत्तर: सुभद्रा कुमारी चौहान ने इस कविता के अंतिम पद में रानी लक्ष्मीबाई के महान और अविनाशी बलिदान का मार्मिक मूल्यांकन किया है। प्रस्तुत पंक्ति का मुख्य संदेश यह है कि महान योद्धाओं की कीर्ति ईंट-पत्थर के स्मारकों की मोहताज नहीं होती। अंग्रेज़ भले ही गोलों से झाँसी को मिटा दें, झाँसी के इतिहास को नष्ट कर दें या सच्चाई को फाँसी पर चढ़ा दें, लेकिन वे रानी लक्ष्मीबाई की उस 'अमिट निशानी' (बलिदान) को भारतीय जनमानस से कभी नहीं मिटा सकते। रानी का अदम्य साहस और उनका जीवन ही उनका सबसे बड़ा और सच्चा स्मारक है।
रानी के बलिदान का महत्व इस बात में है कि उन्होंने निराशा और गुलामी की ज़ंजीरों में जकड़े 'बूढ़े' भारत में एक नई जान फूँक दी थी। उन्होंने यह सिखाया कि देश की आज़ादी और परदे (स्त्रियों) की इज़्ज़त की रक्षा के लिए प्राणों का मोह छोड़ना पड़ता है। 23 वर्ष की उम्र में उनका हँसते-हँसते वीरगति प्राप्त करना कोई साधारण घटना नहीं थी; वह एक 'स्वतंत्रता महायज्ञ' की पूर्णाहुति थी जिसने आने वाली पीढ़ियों के लिए आज़ादी का मार्ग प्रशस्त किया। इसीलिए कवयित्री दृढ़ता से कहती है कि कृतज्ञ भारतवासी रानी के इस उपकार को युगों-युगों तक याद रखेंगे।
(In the final stanza of this poem, Subhadra Kumari Chauhan has poignantly evaluated the great and indestructible sacrifice of Rani Lakshmibai. The main message of the given line is that the glory of great warriors is not dependent on monuments of bricks and stones. Even if the British destroy Jhansi with cannonballs, erase its history, or hang the truth, they can never erase that 'indelible mark' (sacrifice) of Rani Lakshmibai from the Indian consciousness. The queen's indomitable courage and her life itself are her biggest and truest monument.
The significance of the queen's sacrifice lies in the fact that she breathed new life into 'old' India, which was trapped in the chains of despair and slavery. She taught that to protect the country's freedom and the honor of women (Parde ki izzat), one has to give up the attachment to life. Attaining martyrdom happily at the age of 23 was no ordinary event; it was the final offering in the 'great sacrifice of freedom' which paved the way for independence for future generations. That is why the poetess firmly says that grateful Indians will remember this favor of the queen for ages.)
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