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    13. परिशिष्टम् २ – समासः - Parishistam 2 – Samasah - Class 9 - Sharada

    • 2 days ago
    • 16 min read

    Updated: 14 hours ago

    SECTION 1 — पाठ परिचय

    विवरण

    जानकारी

    पाठ का नाम:

    परिशिष्टम् २ – समासः (Parishiṣṭam 2 – Samāsaḥ)

    विधा:

    गद्य पाठ — व्याकरण-लेखः / परिशिष्टम्

    स्रोत/ग्रंथ:

    संस्कृत-व्याकरणशास्त्रम् (NCERT सङ्कलितः)

    लेखक/कवि:

    अज्ञात (NCERT सम्पादकमण्डलः)

    पाठ्यपुस्तक:

    शारदा, NCERT कक्षा 9 संस्कृत, 2026-27

    परीक्षा खंड:

    खंड-घ (अनुप्रयुक्त-व्याकरणम्)

    SECTION 2 — पाठ/विषय परिचय


    SANSKRIT:

    अयं पाठः शारदा-पाठ्यपुस्तकस्य द्वितीयं परिशिष्टम् अस्ति। अस्मिन् पाठे 'समासः' इति महत्त्वपूर्णस्य व्याकरणविषयस्य परिचयः दत्तः अस्ति। 'समसनं समासः' अर्थात् सङ्क्षेपीकरणम्। अत्र समासस्य परिभाषा, सुबन्तपदानां मध्ये तस्य नियमाः, विशेषतः च 'अव्ययीभाव-समासस्य' विभिन्न-अर्थेषु प्रयोगाः सोदाहरणं वर्णिताः सन्ति। संस्कृतभाषायां सङ्क्षिप्ततया अर्थप्रकटनाय समासस्य अतीव महत्त्वम् अस्ति।

    हिंदी अनुवाद:

    यह पाठ शारदा पाठ्यपुस्तक का दूसरा परिशिष्ट (Appendix) है। इस पाठ में 'समास' नामक महत्वपूर्ण व्याकरण विषय का परिचय दिया गया है। 'समसनं समासः' का अर्थ है संक्षेपीकरण (छोटा करना)। यहाँ समास की परिभाषा, सुबन्त (संज्ञा/सर्वनाम) पदों के बीच इसके नियम, और विशेष रूप से 'अव्ययीभाव समास' के विभिन्न अर्थों में प्रयोग उदाहरण सहित बताए गए हैं। संस्कृत भाषा में कम शब्दों में गहरा अर्थ प्रकट करने के लिए समास का बहुत महत्व है।

    English:

    This chapter is the second appendix of the Sharada textbook. It introduces the crucial grammatical concept of 'Samasa' (Compound words). 'Samasanam Samasah' means abbreviation or condensing. The text details the definition of Samasa, the rules governing compound formation between 'Subanta' (nominal) words, and specifically explores the 'Avyayibhava Samasa' with examples across various meanings. Samasa is highly significant in Sanskrit for expressing profound meanings concisely.

    EXAM TIP:परीक्षा में अनुप्रयुक्त-व्याकरण खण्ड में समास और विग्रह के प्रश्न 4-5 अंकों के लिए पूछे जाते हैं।(Focus on identifying the correct Samasa name and providing the accurate Vigraha, especially for Avyayibhava.)

    SECTION 3 — मूल पाठ


    १। समसनं समासः भवति। समसनं नाम सङ्क्षेपणम् इत्यर्थः ।

    २। अर्थात् समासे अर्थयुक्तं पदद्वयं, पदत्रयम् अथवा अनेकपदं मिलित्वा एकं पदं भवति।

    ३। यथा- 'महा' तथा 'पुरुष' इति अर्थयुक्तं पदद्वयम् अस्ति। तद् द्वयमपि मिलित्वा एकपदं भवति - महापुरुषः इति।

    ४। एवंविधानाम् अर्थवतां पदानाम् एकीभवनमेव समासः ।

    ५। समासः सामान्यतः परस्परं सुबन्तानां मध्ये भवति।

    ६। तथैव समासः युगपत् द्वयोः द्वयोः सुबन्तयोः मध्ये भवति। यथा- सीतायाः पतिः = सीतापतिः ।

    ७। द्वन्द्वसमासे तु युगपत् बहूनां सुबन्तानां मध्ये समासः भवति। यथा - हरश्च गुरुश्च = हरिहरगुरवः ।

    ८। परस्परम् अन्वितयोः (सम्बद्धयोः) सुबन्तयोः एव समासः भवति।

    ९। यदि पदानां मध्ये परस्परम् अन्वयः (सम्बन्धः) न भवति तर्हि समासः अपि न भवति।

    १०। परस्परम् अन्वयस्य उदाहरणम् - सः राज्ञः पुत्रः (राजपुत्रः) गच्छति ।

    ११। यत्र अन्वयः न भवति तत्र - भवति दर्शनं राज्ञः, पुत्रः कृषकस्य गच्छति। (अत्र राज्ञः अन्वयः दर्शनम् इत्यनेन सह अस्ति, पुत्रेण सह न। अतः 'राजपुत्रः' इति समासः न भवति)।

    अव्ययीभाव-समासः

    १२। प्रायेण पूर्वपदार्थप्रधानः अव्ययीभावः। अत्र पूर्वपदम् अव्ययम् उत्तरपदं च सुबन्तं भवति।

    १३। समासानन्तरं सम्पूर्णं पदम् अव्ययं भवति (नपुंसकलिङ्ग-एकवचनवत्)।

    १४। अस्य समासस्य प्रमुखाः प्रयोगाः अधोलिखित-सारण्यां दर्शिताः सन्ति -

    क्र.सं.

    समासनाम (अर्थः)

    विग्रहः

    समासः (समस्तपदम्)

    १.

    समीपार्थे अव्ययीभावः

    ग्रामस्य समीपे

    उपग्रामम्

    २.

    अभावार्थे अव्ययीभावः

    मशकानाम् अभावः

    निर्मशकम्

    ३.

    योग्यतार्थे अव्ययीभावः

    रूपस्य योग्यम्

    अनुरूपम्

    ४.

    वीप्सार्थे अव्ययीभावः

    दिने दिने

    प्रतिदिनम्

    ५.

    पदार्थ-अनतिवृत्त्यर्थे

    शक्तिम् अनतिक्रम्य

    यथाशक्ति

    ६.

    मर्यादार्थे अव्ययीभावः

    आ मुक्तेः

    आमुक्ति (संसारः)

    ७.

    अभिविध्यर्थे अव्ययीभावः

    आ बालेभ्यः

    आबालम् (हरिभक्तिः)

    ८.

    आभिमुख्यार्थे अव्ययीभावः

    अग्निम् अभि

    अभ्यग्नि

    ९.

    मात्रार्थे अव्ययीभावः

    शाकस्य लेशः

    शाकप्रति

    १०.

    अवधारणार्थे अव्ययीभावः

    यावन्तः श्लोकाः

    यावच्छ्लोकम्

    SECTION 4 — अन्वय (गद्य-वाक्य-संरचना)


    वाक्यम् २:

    मूल: अर्थात् समासे अर्थयुक्तं पदद्वयं, पदत्रयम् अथवा अनेकपदं मिलित्वा एकं पदं भवति।

    अन्वयः: अर्थात् समासे अर्थयुक्तं पदद्वयं, पदत्रयम् अथवा अनेकपदं मिलित्वा एकं पदं भवति।

    (अन्वयः मूल वाक्य के समान है)

    वाक्यम् ४:

    मूल: एवंविधानाम् अर्थवतां पदानाम् एकीभवनमेव समासः ।

    अन्वयः: एवंविधानाम् अर्थवतां पदानाम् एकीभवनम् एव समासः [भवति]।

    विशेष: अत्र 'भवति' क्रियापदम् अध्याहृतम् (जोड़ा गया) अस्ति।

    वाक्यम् ८:

    मूल: परस्परम् अन्वितयोः (सम्बद्धयोः) सुबन्तयोः एव समासः भवति।

    अन्वयः: परस्परम् अन्वितयोः (सम्बद्धयोः) सुबन्तयोः एव समासः भवति।

    (अन्वयः मूल वाक्य के समान है)

    EXAM TIP:व्याकरण-ग्रन्थेषु वाक्यानि प्रायः सरल-गद्यरूपेण एव भवन्ति। अत्र अन्वयापेक्षया परिभाषायाः विग्रहवाक्यानां च स्मरणम् अधिकं महत्त्वपूर्णम् अस्ति।

    SECTION 5 — शब्दार्थ

    संस्कृत पद

    हिंदी अर्थ

    English Meaning

    समसनम्

    संक्षेप करना / छोटा करना

    Abbreviation / Condensing

    सङ्क्षेपणम्

    संक्षेप (छोटा रूप)

    Summarization / Shortening

    पदद्वयम्

    दो शब्द

    Two words

    एकीभवनम्

    एक हो जाना

    Becoming one / Unification

    सुबन्तानाम्

    संज्ञा/सर्वनाम आदि शब्दों का

    Of nominal words (ending in Sup affixes)

    युगपत्

    एक साथ

    Simultaneously

    अन्वितयोः

    आपस में जुड़े हुए (संबंधित)

    Of the syntactically related

    अव्ययम्

    जो कभी न बदले (अविकारी शब्द)

    Indeclinable word

    वीप्सा

    दोहराव (बार-बार आना)

    Repetition

    अनतिवृत्ति

    सीमा पार न करना (के अनुसार)

    Not exceeding / According to

    अभिविधि

    तक (सभी को शामिल करते हुए)

    Including / Up to

    आभिमुख्य

    की ओर (सामने)

    Towards / Facing

    लेशः / मात्रा

    थोड़ा सा (अंश)

    A tiny bit / Trace

    अवधारणम्

    निश्चित करना (जितना है उतना)

    Ascertainment / As much as

    विग्रहः

    समास को अलग-अलग करके समझाना

    Dissolution / Analysis of compound

    समस्तपदम्

    जुड़ा हुआ एक शब्द (सामासिक पद)

    Compound word

    SECTION 6 — हिंदी अनुवाद


    १. समसन (संक्षेप) ही समास होता है। समसन का अर्थ है 'संक्षेपीकरण' (छोटा करना)।

    २. अर्थात्, समास में अर्थ वाले दो पद, तीन पद या अनेक पद मिलकर एक पद बन जाते हैं।

    ३. जैसे - 'महा' और 'पुरुष' ये दो अर्थ वाले पद हैं। ये दोनों मिलकर एक पद बन जाते हैं - 'महापुरुषः'।

    ४. इस प्रकार अर्थ वाले पदों के एक हो जाने को ही समास कहते हैं।

    ५. समास आम तौर पर आपस में सुबन्त (संज्ञा, सर्वनाम आदि) पदों के बीच होता है।

    ६. इसी तरह समास एक साथ दो-दो सुबन्त पदों के बीच होता है। जैसे - सीता का पति = सीतापतिः।

    ७. परन्तु द्वन्द्व समास में एक साथ बहुत से सुबन्त पदों के बीच समास हो जाता है। जैसे - हरि और शिव और गुरु = हरिहरगुरवः।

    ८. आपस में अन्वित (जिनका अर्थ एक-दूसरे से जुड़ा हो) सुबन्त पदों का ही समास होता है।

    ९. यदि पदों के बीच आपस में अन्वय (संबंध) नहीं है, तो उनका समास भी नहीं होता।

    १०. आपस में संबंध (अन्वय) का उदाहरण - वह राजा का पुत्र (राजपुत्रः) जा रहा है। (यहाँ राजा और पुत्र का संबंध है)।

    ११. जहाँ संबंध नहीं होता, वहाँ का उदाहरण - 'राजा के दर्शन होते हैं, किसान का बेटा जा रहा है।' (यहाँ 'राजा के' का संबंध 'दर्शन' से है, 'पुत्र' से नहीं। इसलिए यहाँ राजा और पुत्र को मिलाकर 'राजपुत्रः' समास नहीं हो सकता)।

    अव्ययीभाव समास:

    १२. जिसमें प्रायः पूर्वपद (पहला शब्द) के अर्थ की प्रधानता होती है, वह अव्ययीभाव समास है। इसमें पहला पद अव्यय और दूसरा पद सुबन्त (संज्ञा आदि) होता है।

    १३. समास होने के बाद पूरा नया शब्द अव्यय बन जाता है (और नपुंसकलिंग एकवचन की तरह प्रयोग होता है)।

    १४. इस समास के प्रमुख प्रयोग नीचे दी गई सारणी में दिखाए गए हैं:

    • समीप (पास) के अर्थ में - ग्रामस्य समीपे (गाँव के पास) = उपग्रामम्।

    • अभाव (कमी) के अर्थ में - मशकानाम् अभावः (मच्छरों की कमी) = निर्मशकम्।

    • योग्यता के अर्थ में - रूपस्य योग्यम् (रूप के योग्य) = अनुरूपम्।

    • वीप्सा (दोहराव) के अर्थ में - दिने दिने (हर दिन) = प्रतिदिनम्।

    • अनतिवृत्ति (अनुसार/सीमा न लांघना) के अर्थ में - शक्तिम् अनतिक्रम्य (शक्ति के अनुसार) = यथाशक्ति।

    • मर्यादा (सीमा) के अर्थ में - आ मुक्तेः (मोक्ष तक) = आमुक्ति।

    • अभिविधि (समेत) के अर्थ में - आ बालेभ्यः (बच्चों से लेकर) = आबालम्।

    • आभिमुख्य (की ओर) के अर्थ में - अग्निम् अभि (आग की ओर) = अभ्यग्नि।

    • मात्रा (लेश) के अर्थ में - शाकस्य लेशः (सब्जी का अंश) = शाकप्रति।

    • अवधारण (जितना हो) के अर्थ में - यावन्तः श्लोकाः (जितने श्लोक) = यावच्छ्लोकम्।


    SECTION 7 — English Translation


    1. Samasana is Samasa. Samasana means abbreviation or condensation.

    2. In other words, in a Samasa, two, three, or multiple meaningful words combine to become a single word.

    3. For example, 'Maha' (great) and 'Purusha' (man) are two meaningful words. Both combine to form a single word - 'Mahapurushah'.

    4. This unification of meaningful words is called Samasa.

    5. Samasa generally occurs between mutually related 'Subanta' (nominal/noun) words.

    6. Similarly, a compound is formed simultaneously between two nominal words. Example: Sitayah Patih (Husband of Sita) = Sitapatih.

    7. However, in the Dvandva Samasa, a compound can be formed simultaneously among many nominal words. Example: Hari, Hara, and Guru = Hariharaguravah.

    8. Samasa takes place only between nominal words that are syntactically and semantically related (Anvita).

    9. If there is no mutual relationship (Anvaya) between the words, then a compound cannot be formed.

    10. Example of mutual relationship: "He, the king's son (Rajaputrah), is going." (Here, king and son are related).

    11. Example where there is no relationship: "The vision of the king happens; the son of the farmer is going." (Here, 'of the king' is related to 'vision', not 'son'. Therefore, 'Rajaputrah' cannot be compounded here).

    Avyayibhava Samasa:

    12. Avyayibhava is that compound where the meaning of the first word (Purvapada) is usually dominant. Here, the first word is an indeclinable (Avyaya) and the second word is a nominal word (Subanta).

    13. After compounding, the entire new word becomes an indeclinable (functions like a neuter singular noun).

    14. The major applications of this Samasa are shown in the table below:

    • In the sense of proximity - Gramasya samipe (Near the village) = Upagramam.

    • In the sense of absence - Mashakanam abhavah (Absence of mosquitoes) = Nirmashakam.

    • In the sense of suitability - Rupasya yogyam (Worthy of form) = Anurupam.

    • In the sense of repetition - Dine dine (Day by day) = Pratidinam.

    • In the sense of non-transgression - Shaktim anatikramya (According to capacity) = Yathashakti.

    • In the sense of limit - Aa mukteh (Until liberation) = Aamukti.

    • In the sense of inclusion - Aa balebhyah (Including children) = Aabalam.

    • In the sense of direction - Agnim abhi (Towards the fire) = Abhyagni.

    • In the sense of trace/tiny amount - Shakasya leshah (A trace of vegetable) = Shakaprati.

    • In the sense of ascertainment - Yavantah shlokah (As many verses as there are) = Yavachhlokam.

    SECTION 8 — सारांश


    HINDI:

    प्रस्तुत परिशिष्ट "समासः" में संस्कृत व्याकरण के महत्वपूर्ण अंग 'समास' का विस्तृत वर्णन किया गया है। 'समसनं समासः' अर्थात् दो या दो से अधिक सार्थक शब्दों का मिलकर एक हो जाना (संक्षेप होना) ही समास है (जैसे महा + पुरुष = महापुरुषः)। पाठ में यह स्पष्ट किया गया है कि समास केवल उन्हीं शब्दों (सुबन्त पदों) के बीच होता है, जिनका आपस में अर्थ के स्तर पर संबंध (अन्वय) हो। इसके बाद 'अव्ययीभाव समास' का वर्णन है, जिसमें पहला पद अव्यय होता है और उसी के अर्थ की प्रधानता होती है। यह समास समीप (उपग्रामम्), अभाव (निर्मशकम्), योग्यता (अनुरूपम्), वीप्सा (प्रतिदिनम्), और अनतिवृत्ति (यथाशक्ति) जैसे दस विभिन्न अर्थों में प्रयोग किया जाता है। समास होने के बाद पूरा शब्द अव्यय बन जाता है।

    ENGLISH:

    The appendix "Samasah" provides a detailed description of 'Samasa' (compounding), a vital component of Sanskrit grammar. 'Samasanam Samasah' means the abbreviation or unification of two or more meaningful words into a single word (e.g., Maha + Purusha = Mahapurushah). The text clarifies that compounding only occurs between nominal words (Subantas) that share a logical and semantic relationship (Anvaya). It then details the 'Avyayibhava Samasa', where the first word is an indeclinable (Avyaya) and its meaning is dominant. This compound is used in ten different senses, such as proximity (Upagramam), absence (Nirmashakam), suitability (Anurupam), repetition (Pratidinam), and non-transgression of limits (Yathashakti). Once compounded, the entire word functions as an indeclinable.


    SECTION 9 — केंद्रीय भाव एवं मूल्य

    9A. विषय-वस्तु सारणी

    विषय

    पाठ में स्पष्टीकरण

    मुख्य विषय

    संस्कृत भाषा में समास की परिभाषा, उसकी शर्तें और अव्ययीभाव समास के विविध प्रयोग। (Definition, conditions of Samasa, and varied uses of Avyayibhava.)

    सुबन्त-अन्वयः

    समास केवल संबंधित शब्दों के बीच ही होता है, असंबद्ध शब्दों के बीच नहीं। (Compounds form only between syntactically related words.)

    सङ्क्षेपीकरणम्

    कम शब्दों में विस्तृत अर्थ प्रकट करने की संस्कृत भाषा की वैज्ञानिक कला। (The linguistic art of conveying vast meanings concisely.)

    9B. मानवीय एवं सांस्कृतिक मूल्य


    • सङ्क्षिप्तता / वाक्-संयमः (संक्षेप में बात कहना / Brevity and Restraint in Speech)

      • समसनं नाम सङ्क्षेपणम् इत्यर्थः।

      • व्याकरण का यह नियम हमें जीवन में भी वाक्-संयम (कम और सार्थक बोलना) सिखाता है। बहुत अधिक शब्दों के बजाय नपे-तुले शब्दों में अपनी बात कहना एक श्रेष्ठ गुण है।

      • (Teaches the value of brevity and concise communication in daily life.)

    • सम्बन्धः / अन्वयः (परस्पर जुड़ाव / Logical Connection and Unity)

      • परस्परम् अन्वितयोः (सम्बद्धयोः) सुबन्तयोः एव समासः भवति।

      • जिस प्रकार बिना संबंध के शब्दों का समास (एक होना) नहीं होता, उसी प्रकार समाज में भी बिना आपसी समझ और जुड़ाव के एकता स्थापित नहीं हो सकती।

      • (Highlights that true unity, whether in grammar or society, requires logical connection and mutual understanding.)

    EXAM TIP:मूल्यपरक प्रश्न 2-4 अंकों के लिए नियमित आते हैं।Always name the value in Sanskrit first (e.g., वाक्-संयमः, सम्बन्धः).

    SECTION 10 — मुख्य विचार-बिंदु (Key Arguments)


    व्याकरण-सम्बन्धिताः प्रमुखाः नियमाः (Key Grammatical Rules):

    १. समासस्य परिभाषा (Definition of Samasa)

    • Sanskrit: अर्थवतां पदानाम् एकीभवनमेव समासः। (समसनं समासः)

    • Hindi: दो या अधिक अर्थपूर्ण शब्दों का मिलकर एक संक्षिप्त (छोटा) शब्द बन जाना समास कहलाता है।

    • English: The unification and condensation of multiple meaningful words into a single word is Samasa.

    २. अन्वयस्य अनिवार्यता (Necessity of Syntactical Relation)

    • Sanskrit: परस्परम् अन्वितयोः सुबन्तयोः एव समासः भवति।

    • Hindi: समास केवल उन्हीं संज्ञा/सर्वनाम पदों के बीच होता है जिनका वाक्य में एक-दूसरे से सीधा संबंध (अन्वय) हो। असंबद्ध पदों का समास नहीं होता।

    • English: Compounding is strictly restricted to words that share a direct semantic and syntactic relationship within the sentence.

    ३. अव्ययीभाव-समासस्य लक्षणम् (Characteristics of Avyayibhava)

    • Sanskrit: प्रायेण पूर्वपदार्थप्रधानः अव्ययीभावः। समासानन्तरं सम्पूर्णं पदम् अव्ययं भवति।

    • Hindi: इस समास में पहला पद (अव्यय) प्रधान होता है। समास होने के बाद पूरा नया शब्द भी अव्यय (अविकारी) बन जाता है।

    • English: The first term (an indeclinable) dictates the primary meaning. Post-compounding, the entire newly formed word functions as an indeclinable.

    SECTION 11 — गद्यांश आधारित प्रश्न


    गद्यांशः १

    समसनं समासः भवति। समसनं नाम सङ्क्षेपणम् इत्यर्थः । अर्थात् समासे अर्थयुक्तं पदद्वयं, पदत्रयम् अथवा अनेकपदं मिलित्वा एकं पदं भवति। यथा- 'महा' तथा 'पुरुष' इति अर्थयुक्तं पदद्वयम् अस्ति। तद् द्वयमपि मिलित्वा एकपदं भवति - महापुरुषः इति। एवंविधानाम् अर्थवतां पदानाम् एकीभवनमेव समासः । समासः सामान्यतः परस्परं सुबन्तानां मध्ये भवति। तथैव समासः युगपत् द्वयोः द्वयोः सुबन्तयोः मध्ये भवति। यथा- सीतायाः पतिः = सीतापतिः । द्वन्द्वसमासे तु युगपत् बहूनां सुबन्तानां मध्ये समासः भवति। यथा - हरश्च गुरुश्च = हरिहरगुरवः ।


    प्र.(i) — अर्थबोध (1 mark):

    समसनं नाम किम्?

    (क) विस्तरणम् (ख) सङ्क्षेपणम्

    (ग) पठनम् (घ) लेखनम्

    उत्तरम्: (ख)

    हिंदी: गद्यांश के अनुसार समसन का अर्थ 'संक्षेपीकरण' (छोटा करना) होता है।

    English: According to the text, Samasana means 'abbreviation' or 'condensation' (Sankshepanam).


    प्र.(ii) — अन्वय पूर्तिः (1 mark):

    मञ्जूषातः पदं चित्वा अन्वयं पूरयत —

    [ एकीभवनम् / सुबन्तानां / अर्थयुक्तं ]

    एवंविधानाम् अर्थवतां पदानाम् _______ एव समासः भवति।

    उत्तरम्: एकीभवनम्

    हिंदी: अर्थ वाले पदों का 'एक हो जाना' (एकीभवनम्) ही समास है।

    English: The 'unification' (Ekibhavanam) of meaningful words is Samasa.


    प्र.(iii) — शब्दार्थ (1 mark):

    'युगपत्' इति पदस्य अर्थः अस्ति —

    (क) पृथक्-पृथक् (ख) युगान्तरे

    (ग) एककाले / सहैव (घ) कदापि न

    उत्तरम्: (ग)

    हिंदी: 'युगपत्' का अर्थ होता है 'एक साथ' (simultaneously)।

    English: Yugapat means 'at the same time' or 'simultaneously'.


    प्र.(iv) — प्रश्ननिर्माणम् (1 mark):

    अधोलिखितवाक्ये रेखाङ्कितपदम् आश्रित्य प्रश्नं रचयत —

    समासे अर्थयुक्तं पदद्वयं मिलित्वा एकं पदं भवति।

    उत्तरम्: समासे अर्थयुक्तं किम् मिलित्वा एकं पदं भवति?

    हिंदी: 'पदद्वयम्' नपुंसकलिंग शब्द है (क्या मिलकर?), अतः 'किम्' का प्रयोग होगा।

    English: 'Padadvayam' is a neuter noun, so 'Kim' (what) is used.


    गद्यांशः २

    परस्परम् अन्वितयोः (सम्बद्धयोः) सुबन्तयोः एव समासः भवति। यदि पदानां मध्ये परस्परम् अन्वयः (सम्बन्धः) न भवति तर्हि समासः अपि न भवति। परस्परम् अन्वयस्य उदाहरणम् - सः राज्ञः पुत्रः (राजपुत्रः) गच्छति । यत्र अन्वयः न भवति तत्र - भवति दर्शनं राज्ञः, पुत्रः कृषकस्य गच्छति। (अत्र राज्ञः अन्वयः दर्शनम् इत्यनेन सह अस्ति, पुत्रेण सह न। अतः 'राजपुत्रः' इति समासः न भवति)। प्रायेण पूर्वपदार्थप्रधानः अव्ययीभावः। अत्र पूर्वपदम् अव्ययम् उत्तरपदं च सुबन्तं भवति। समासानन्तरं सम्पूर्णं पदम् अव्ययं भवति।


    प्र.(i) — अर्थबोध (1 mark):

    अव्ययीभाव-समासे कस्य पदस्य प्रधानता भवति?

    (क) उत्तरपदस्य (ख) अन्यपदस्य

    (ग) पूर्वपदस्य (घ) उभयपदस्य

    उत्तरम्: (ग)

    हिंदी: अव्ययीभाव समास में 'पूर्वपद' (पहले शब्द) के अर्थ की प्रधानता होती है।

    English: In Avyayibhava, the meaning of the 'first word' (Purvapada) is dominant.


    प्र.(ii) — अन्वय पूर्तिः (1 mark):

    मञ्जूषातः पदं चित्वा अन्वयं पूरयत —

    [ सुबन्तं / समासः / अन्वयः ]

    यदि पदानां मध्ये परस्परम् _______ न भवति तर्हि समासः अपि न भवति।

    उत्तरम्: अन्वयः

    हिंदी: यदि शब्दों के बीच आपस में 'संबंध/अन्वय' न हो, तो समास नहीं होता।

    English: If there is no 'syntactical relation' (Anvayah) between words, Samasa does not occur.


    प्र.(iii) — शब्दार्थ (1 mark):

    'अन्वितयोः' इति पदस्य अर्थः अस्ति —

    (क) असम्बद्धयोः (ख) सम्बद्धयोः (जुड़े हुओं का)

    (ग) दूरस्थयोः (घ) अपरिचितयोः

    उत्तरम्: (ख)

    हिंदी: अन्वितयोः का अर्थ है 'आपस में जुड़े हुए' (सम्बद्धयोः)।

    English: Anvitayoh means 'of the mutually related' or connected.


    प्र.(iv) — प्रश्ननिर्माणम् (1 mark):

    अधोलिखितवाक्ये रेखाङ्कितपदम् आश्रित्य प्रश्नं रचयत —

    अत्र पूर्वपदम् अव्ययं भवति।

    उत्तरम्: अत्र किम् अव्ययं भवति?

    हिंदी: 'पूर्वपदम्' नपुंसकलिंग प्रथमा विभक्ति है, इसलिए 'किम्' का प्रयोग होगा।

    English: 'Purvapadam' is the neuter subject, so 'Kim' is used to frame the question.


    SECTION 12 — लघु उत्तरीय प्रश्न (3 Marks)


    प्र१. 'समासः' इति कः उच्यते?

    मूल बिंदु 1 (VP1): समसनं समासः (सङ्क्षेपणम्)

    मूल बिंदु 2 (VP2): अर्थवतां पदानाम् एकीभवनम्

    उत्तरम् (Sanskrit):

    'समसनं समासः' भवति। समसनं नाम सङ्क्षेपणम्। अर्थात् यदा अर्थयुक्तं पदद्वयं, पदत्रयम् अथवा अनेकपदं मिलित्वा एकं नवीनं सङ्क्षिप्तं पदं भवति, तदा सः समासः उच्यते। यथा 'महा' तथा 'पुरुषः' मिलित्वा 'महापुरुषः' इति समासः भवति।

    हिंदी अनुवाद:

    'समसन (संक्षेप)' ही समास है। अर्थात् जब अर्थ वाले दो, तीन या अनेक शब्द मिलकर एक नया और छोटा (संक्षिप्त) शब्द बन जाते हैं, तो उसे समास कहते हैं। जैसे 'महा' और 'पुरुष' मिलकर 'महापुरुष' बन जाता है।

    English:

    'Samasanam Samasah', meaning abbreviation or condensation is Samasa. When two, three, or multiple meaningful words combine to form a single, concise new word, it is called Samasa. For example, 'Maha' and 'Purusha' combine to form 'Mahapurushah'.


    प्र२. पदानां मध्ये समासः कदा न भवति? उदाहरणं दत्त।

    मूल बिंदु 1 (VP1): यदा पदानां मध्ये परस्परम् अन्वयः न भवति

    मूल बिंदु 2 (VP2): उदाहरणम् - दर्शनं राज्ञः, पुत्रः गच्छति

    उत्तरम् (Sanskrit):

    समासः केवलं परस्परम् अन्वितयोः (सम्बद्धयोः) सुबन्तयोः मध्ये एव भवति। यदि पदानां मध्ये परस्परम् अन्वयः (सम्बन्धः) न भवति, तर्हि समासः न भवति। यथा - "भवति दर्शनं राज्ञः, पुत्रः कृषकस्य गच्छति।" अत्र 'राज्ञः' पदस्य 'पुत्रेण' सह अन्वयः नास्ति, अतः 'राजपुत्रः' इति समासः न भवति।

    हिंदी अनुवाद:

    समास केवल आपस में जुड़े हुए (संबंधित) सुबन्त पदों के बीच ही होता है। यदि शब्दों के बीच आपस में कोई संबंध (अन्वय) नहीं है, तो उनका समास नहीं होता। जैसे - "राजा के दर्शन होते हैं, किसान का बेटा जा रहा है।" यहाँ 'राजा' का 'बेटे' के साथ कोई संबंध नहीं है, इसलिए यहाँ 'राजपुत्र' समास नहीं बन सकता।

    English:

    Samasa occurs only between nominal words that are mutually related. If there is no syntactical relationship (Anvaya) between the words, Samasa does not occur. For example: "The vision of the king happens; the son of the farmer goes." Here, 'king' is not related to 'son', so the compound 'Rajaputrah' cannot be formed.


    प्र३. अव्ययीभाव-समासस्य कानि प्रमुखलक्षणानि सन्ति?

    मूल बिंदु 1 (VP1): पूर्वपदार्थप्रधानः (First word's meaning is dominant)

    मूल बिंदु 2 (VP2): पूर्वपदम् अव्ययम्, सम्पूर्णं पदमपि अव्ययम् भवति (First word is indeclinable, entire word becomes indeclinable)

    उत्तरम् (Sanskrit):

    अव्ययीभाव-समासस्य प्रमुखलक्षणानि सन्ति यत् अत्र प्रायेण 'पूर्वपदार्थः' (प्रथमपदस्य अर्थः) प्रधानः भवति। अस्मिन् समासे पूर्वपदम् अव्ययम् उत्तरपदं च सुबन्तं भवति। समासस्य निर्माणानन्तरं तत् सम्पूर्णं समस्तपदमपि अव्ययं (नपुंसकलिङ्ग-एकवचनवत्) भवति।

    हिंदी अनुवाद:

    अव्ययीभाव समास के प्रमुख लक्षण यह हैं कि इसमें आमतौर पर 'पूर्वपद' (पहले शब्द) के अर्थ की प्रधानता होती है। इस समास में पहला पद अव्यय और दूसरा पद संज्ञा आदि होता है। समास बनने के बाद वह पूरा नया शब्द भी अव्यय बन जाता है।

    English:

    The main characteristics of the Avyayibhava Samasa are that the meaning of the 'first word' (Purvapada) is usually dominant. In this compound, the first word is an indeclinable (Avyaya) and the second is a nominal word. After compounding, the entire newly formed word functions as an indeclinable.


    प्र४. द्वन्द्वसमासस्य अन्याभ्यः समासेभ्यः कः भेदः अस्ति?

    मूल बिंदु 1 (VP1): सामान्यसमासः द्वयोः पदयोः मध्ये (Normal samasa is between two words)

    मूल बिंदु 2 (VP2): द्वन्द्वसमासः युगपत् बहूनां सुबन्तानां मध्ये (Dvandva can be simultaneously between many words)

    उत्तरम् (Sanskrit):

    सामान्यतः समासः युगपत् (एककाले) द्वयोः द्वयोः सुबन्तयोः मध्ये एव भवति (यथा सीतायाः पतिः = सीतापतिः)। परन्तु द्वन्द्वसमासे एषः भेदः अस्ति यत् अत्र युगपत् बहूनां सुबन्तानां मध्ये अपि समासः भवितुं शक्नोति। यथा - "हरश्च गुरुश्च = हरिहरगुरवः।"

    हिंदी अनुवाद:

    आमतौर पर समास एक साथ दो-दो सुबन्त पदों के बीच ही होता है (जैसे सीता का पति = सीतापति)। लेकिन द्वन्द्व समास में यह अंतर है कि इसमें एक साथ बहुत से सुबन्त पदों के बीच भी समास हो सकता है। जैसे - "हरि और शिव और गुरु = हरिहरगुरवः।"

    English:

    Generally, a compound is formed simultaneously between only two nominal words (e.g., Husband of Sita = Sitapatih). However, the difference in the Dvandva Samasa is that a compound can be formed simultaneously among many nominal words. For example: "Hari, Hara, and Guru = Hariharaguravah."


    SECTION 13 — दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 Marks)


    प्र१. अव्ययीभाव-समासः केषु अर्थेषु प्रयुज्यते? पञ्च उदाहरणानि विग्रहेण सह लिखत।

    मूल बिंदु 1 (VP1): अव्ययीभावस्य अर्थाः (Meanings: Proximity, absence, suitability, repetition, limit)

    मूल बिंदु 2 (VP2): पञ्च उदाहरणानि (5 examples with dissolution/vigraha)

    मूल बिंदु 3 (VP3): समीपार्थे - उपग्रामम् (Near the village)

    मूल बिंदु 4 (VP4): अभावार्थे - निर्मशकम् (Absence of mosquitoes)

    उत्तरम् (Sanskrit):

    अव्ययीभाव-समासः सामीप्यम्, अभावः, योग्यता, वीप्सा, मर्यादा, अभिविधिः, अनतिवृत्तिः इत्यादिषु बहुषु अर्थेषु प्रयुज्यते। अस्य पञ्च प्रमुखाणि उदाहरणानि विग्रहेण सह अधोलिखितानि सन्ति—

    १. समीपार्थे (पास) : ग्रामस्य समीपे = उपग्रामम्।

    २. अभावार्थे (कमी) : मशकानाम् अभावः = निर्मशकम्।

    ३. योग्यतार्थे (लायक) : रूपस्य योग्यम् = अनुरूपम्।

    ४. वीप्सार्थे (दोहराव) : दिने दिने = प्रतिदिनम्।

    ५. अनतिवृत्त्यर्थे (अनुसार) : शक्तिम् अनतिक्रम्य = यथाशक्ति।

    हिंदी अनुवाद:

    अव्ययीभाव समास का प्रयोग समीपता, अभाव (कमी), योग्यता, वीप्सा (दोहराव), मर्यादा, अभिविधि और अनतिवृत्ति (सीमा न लांघना) आदि कई अर्थों में किया जाता है। इसके पाँच प्रमुख उदाहरण विग्रह (टुकड़े) के साथ नीचे दिए गए हैं—

    १. समीप के अर्थ में : ग्रामस्य समीपे (गाँव के पास) = उपग्रामम्।

    २. अभाव के अर्थ में : मशकानाम् अभावः (मच्छरों की कमी) = निर्मशकम्।

    ३. योग्यता के अर्थ में : रूपस्य योग्यम् (रूप के योग्य) = अनुरूपम्।

    ४. वीप्सा के अर्थ में : दिने दिने (हर दिन) = प्रतिदिनम्।

    ५. अनतिवृत्ति के अर्थ में : शक्तिम् अनतिक्रम्य (शक्ति के अनुसार) = यथाशक्ति।

    English:

    The Avyayibhava Samasa is used in various senses such as proximity, absence, suitability, repetition, limit, inclusion, and non-transgression. Five major examples with their dissolution (Vigraha) are as follows:

    1. In the sense of proximity: Gramasya samipe (Near the village) = Upagramam.

    2. In the sense of absence: Mashakanam abhavah (Absence of mosquitoes) = Nirmashakam.

    3. In the sense of suitability: Rupasya yogyam (Worthy of form) = Anurupam.

    4. In the sense of repetition: Dine dine (Day by day) = Pratidinam.

    5. In the sense of non-transgression: Shaktim anatikramya (According to capacity) = Yathashakti.


    प्र२. "समसनं समासः भवति" - अस्य कथनस्य सविस्तारं व्याख्यां कुर्वन् समासस्य अनिवार्यां शर्तां (अन्वय-नियमं) स्पष्टीकुरुत।

    मूल बिंदु 1 (VP1): समासस्य तात्पर्यम् एकीभवनम् (Meaning of Samasa is unification)

    मूल बिंदु 2 (VP2): अर्थवतां पदानां सङ्क्षेपणम् (Condensation of meaningful words)

    मूल बिंदु 3 (VP3): सुबन्तपदानां मध्ये (Occurs between nominal words)

    मूल बिंदु 4 (VP4): परस्परम् अन्वयः अनिवार्यः (Mutual syntactical relationship is mandatory)

    उत्तरम् (Sanskrit):

    'समसनं' नाम सङ्क्षेपणम्। अर्थात् यदा अर्थयुक्तं पदद्वयं वा अनेकपदं मिलित्वा एकं पदं भवति, तदा सः समासः उच्यते। यथा 'महा' तथा 'पुरुषः' पदद्वयं मिलित्वा 'महापुरुषः' भवति। एषः समासः सामान्यतः सुबन्तानां मध्ये एव भवति।

    परन्तु अस्य एका अनिवार्या शर्ता अस्ति - समासः केवलं "परस्परम् अन्वितयोः (सम्बद्धयोः) सुबन्तयोः एव भवति।" अर्थात् वाक्ये येषां पदानाम् अर्थः परस्परं सम्बद्धः अस्ति, तेषामेव एकीभवनं शक्यते। यदि पदानां मध्ये अन्वयः नास्ति, तर्हि समासः न भवति। यथा - "भवति दर्शनं राज्ञः, पुत्रः कृषकस्य गच्छति" अत्र 'राज्ञः' पदस्य 'पुत्रेण' सह कोऽपि सम्बन्धः नास्ति, अतः 'राजपुत्रः' इति समासः अत्र असम्भवः अस्ति। एषः नियमः व्याकरणस्य तार्किकतां प्रमाणीकरोति।

    हिंदी अनुवाद:

    'समसन' का अर्थ है संक्षेपीकरण। अर्थात् जब अर्थ वाले दो या अनेक पद मिलकर एक पद बन जाते हैं, तो उसे समास कहते हैं। जैसे 'महा' और 'पुरुष' दो पद मिलकर 'महापुरुष' बन जाते हैं। यह समास आम तौर पर सुबन्त (संज्ञा आदि) पदों के बीच ही होता है।

    लेकिन इसकी एक अनिवार्य शर्त है - समास केवल "आपस में जुड़े हुए (संबंधित) सुबन्त पदों का ही होता है।" अर्थात् वाक्य में जिन शब्दों का अर्थ आपस में जुड़ा हो, उन्हीं को एक किया जा सकता है। यदि शब्दों के बीच संबंध (अन्वय) नहीं है, तो समास नहीं होता। जैसे - "राजा के दर्शन होते हैं, किसान का बेटा जा रहा है।" यहाँ 'राजा' शब्द का 'बेटे' के साथ कोई संबंध नहीं है, इसलिए यहाँ 'राजपुत्र' समास बनाना असंभव है। यह नियम व्याकरण की तार्किकता को साबित करता है।

    English:

    'Samasana' means abbreviation or condensation. That is, when two or more meaningful words combine to become a single word, it is called Samasa. For instance, the two words 'Maha' and 'Purusha' combine to become 'Mahapurushah'. This compounding generally occurs between nominal words (Subantas).

    However, there is a mandatory condition: Samasa takes place only between "mutually related nominal words." Meaning, only words whose meanings are logically connected in a sentence can be unified. If there is no syntactical relationship (Anvaya) between the words, a compound cannot be formed. For example, in "The vision of the king happens; the son of the farmer goes," the word 'king' has no relation to the word 'son'. Hence, forming the compound 'Rajaputrah' is impossible here. This rule proves the logical structure of grammar.

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