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    15. परिशिष्टम् ४ – शब्दरूपाणि - Parisistam 4 – sabdarupani - Class 9 - Sharada

    • 12 hours ago
    • 10 min read

    SECTION 1 — पाठ परिचय

    विवरण

    जानकारी

    पाठ का नाम:

    परिशिष्टम् ४ – शब्दरूपाणि (Parishiṣṭam 4 – Śabdarūpāṇi)

    विधा:

    गद्य पाठ — लेख (व्याकरण-परिशिष्टम्)

    स्रोत/ग्रंथ:

    संस्कृत-व्याकरणशास्त्रम्

    लेखक/कवि:

    अज्ञात (NCERT सम्पादकमण्डलः)

    पाठ्यपुस्तक:

    शारदा, NCERT कक्षा 9 संस्कृत, 2026-27

    परीक्षा खंड:

    खंड-घ (अनुप्रयुक्त-व्याकरणम्) — 25-30 अंक

    SECTION 2 — लेखक/स्रोत परिचय


    SANSKRIT:

    अयं पाठः संस्कृतव्याकरणस्य महत्त्वपूर्णः भागः 'शब्दरूपाणि' इति अस्ति। अस्य मूलस्रोतः महर्षिपाणिनिना विरचितं व्याकरणशास्त्रम् (अष्टाध्यायी) अस्ति। अस्मिन् परिशिष्टे विशेषतया व्यञ्जनान्त-शब्दानां (हलन्त-शब्दानां) पुंलिङ्गे, स्त्रीलिङ्गे, नपुंसकलिङ्गे च रूपाणि सङ्कलितानि सन्ति। अन्ते च 'सुप्-प्रत्ययानां' तालिका दत्ता अस्ति। शुद्ध-संस्कृत-वाक्यरचनायै अस्य पाठस्य अतीव महत्त्वम् अस्ति।

    हिंदी अनुवाद:

    यह पाठ संस्कृत व्याकरण का महत्वपूर्ण भाग 'शब्दरूप' है। इसका मूल स्रोत महर्षि पाणिनि द्वारा रचित व्याकरण शास्त्र (अष्टाध्यायी) है। इस परिशिष्ट में विशेष रूप से व्यंजनान्त (जिनके अंत में व्यंजन हो) शब्दों के पुल्लिंग, स्त्रीलिंग और नपुंसकलिंग रूपों को संकलित किया गया है। अंत में 'सुप्-प्रत्ययों' की तालिका दी गई है। शुद्ध संस्कृत वाक्य रचना के लिए इस पाठ का बहुत महत्व है।

    English:

    This chapter constitutes a vital segment of Sanskrit grammar, 'Shabdarupani' (Declensions). Its primary source is the grammatical treatise (Ashtadhyayi) composed by Sage Panini. This appendix specifically compiles the declensions of consonant-ending nouns across masculine, feminine, and neuter genders. Finally, a table of 'Sup affixes' is provided. This chapter is of immense importance for constructing grammatically pure Sanskrit sentences.

    EXAM TIP:परीक्षा में शब्दरूपों से संबंधित प्रश्न 4-5 अंकों के लिए 'रिक्तस्थान-पूर्ति' (Fill in the blanks) के रूप में पूछे जाते हैं।(Questions related to declensions appear as fill-in-the-blanks. Focus heavily on words like Vidvas, Jagat, and the Sup affixes.)

    SECTION 3 — मूल पाठ

    (अयं पाठः पूर्णतया तालिकारूपेण अस्ति। अत्र मुख्यशब्दानां सूची प्रदीयते।)

      

    १। पुंलिङ्गशब्दाः (Masculine Nouns):

    • 'न्' कारान्तः - ब्रह्मन्, गुणिन्, पथिन्।

    • 'स्' कारान्तः - विद्वस्, चन्द्रमस्, पुंस्, वेधस्।

    • 'द्' कारान्तः - सुहृद्।

    • 'ज्' कारान्तः - वणिज्, भिषज्।

    २। स्त्रीलिङ्गरूपाणि (Feminine Nouns):

    • 'च्' कारान्तः - वाच्, त्वच्।

    • 'ज्' कारान्तः - स्रज्, रुज्।

    • 'त्' कारान्तः - सरित्, विद्युत्।

    • 'व्' कारान्तः - दिव्।

    • 'श्' कारान्तः - दिश्।

    ३। नपुंसकलिङ्गरूपाणि (Neuter Nouns):

    • 'त्' कारान्तः - जगत्।

    • 'न्' कारान्तः - नामन्, कर्मन्, चर्मन्।

    • 'स्' कारान्तः - मनस्, तपस्, पयस्, शिरस्, छन्दस्।

    • 'ष्' कारान्तः - चक्षुष्।

    ४। सुप्-प्रत्ययाः (Sup Affixes - For all genders):

    • प्रथमा - सु, औ, जस्

    • द्वितीया - अम्, औट्, शस्

    • तृतीया - टा, भ्याम्, भिस्

    • चतुर्थी - ङे, भ्याम्, भ्यस्

    • पञ्चमी - ङसि, भ्याम्, भ्यस्

    • षष्ठी - ङस्, ओस्, आम्

    • सप्तमी - ङि, ओस्, सुप्


    SECTION 4 — अन्वय (Anvaya)

    (अयं पाठः शब्दरूपतालिका अस्ति, अतः अत्र वाक्यान्वयः न भवति।)

    (Since this chapter is a compilation of grammar tables and declensions, there are no prose sentences or shlokas to rearrange into Anvaya.)


    SECTION 5 — शब्दार्थ

    संस्कृत पद (मूलशब्दः)

    हिंदी अर्थ

    English Meaning

    ब्रह्मन्

    ब्रह्मा (सृष्टिकर्ता)

    Lord Brahma (Creator)

    गुणिन्

    गुणवान व्यक्ति

    Virtuous person

    पथिन्

    रास्ता / मार्ग

    Path / Way

    विद्वस्

    विद्वान / ज्ञानी

    Scholar / Wise man

    चन्द्रमस्

    चंद्रमा

    Moon

    पुंस्

    पुरुष / मनुष्य

    Man / Male

    वेधस्

    विधाता / ब्रह्मा

    Creator

    सुहृद्

    मित्र / दोस्त

    Friend

    वणिज्

    व्यापारी

    Merchant

    भिषज्

    वैद्य / डॉक्टर

    Doctor / Physician

    वाच्

    वाणी / बोली

    Speech

    त्वच्

    त्वचा / खाल

    Skin

    स्रज्

    माला

    Garland

    रुज्

    रोग / बीमारी

    Disease / Illness

    सरित्

    नदी

    River

    विद्युत्

    बिजली

    Electricity / Lightning

    दिव्

    स्वर्ग / आकाश

    Heaven / Sky

    दिश्

    दिशा

    Direction

    जगत्

    संसार / दुनिया

    World / Universe

    नामन्

    नाम

    Name

    कर्मन्

    कर्म / काम

    Action / Deed

    मनस्

    मन

    Mind

    चक्षुष्

    आँख

    Eye

    सुप्-प्रत्ययाः

    शब्दरूप बनाने वाले २१ प्रत्यय

    The 21 nominal case affixes

    SECTION 6 — हिंदी अनुवाद


    (इस पाठ में वाक्यों का अनुवाद नहीं है, बल्कि यह व्याकरण के नियमों और तालिकाओं का संग्रह है।)

    १. पुल्लिंग शब्द: इस भाग में उन पुल्लिंग शब्दों के रूप दिए गए हैं जिनके अंत में व्यंजन आते हैं। उदाहरण के लिए, 'ब्रह्मन्' (ब्रह्मा) का प्रथमा एकवचन 'ब्रह्मा' और बहुवचन 'ब्रह्माणः' होता है। 'विद्वस्' (विद्वान) का प्रथमा एकवचन 'विद्वान्' और बहुवचन 'विद्वांसः' होता है। 'पुंस्' (पुरुष) का रूप 'पुमान्, पुमांसौ, पुमांसः' चलता है। २. स्त्रीलिंग शब्द: इस भाग में 'वाच्' (वाणी), 'सरित्' (नदी), और 'दिश्' (दिशा) जैसे शब्दों के रूप हैं। 'सरित्' का प्रथमा एकवचन 'सरित्' या 'सरिद्' होता है और बहुवचन 'सरितः' होता है। ३. नपुंसकलिंग शब्द: इस भाग में 'जगत्' (संसार), 'मनस्' (मन), और 'नामन्' (नाम) जैसे शब्द हैं। 'जगत्' का प्रथमा बहुवचन 'जगन्ति' होता है। 'मनस्' का प्रथमा एकवचन 'मनः' और बहुवचन 'मनांसि' होता है। ४. सुप् प्रत्यय: संस्कृत में किसी भी मूल शब्द (प्रातिपदिक) को संज्ञा पद बनाने के लिए 21 प्रत्ययों का प्रयोग होता है, जिन्हें 'सुप्' कहते हैं। ये सातों विभक्तियों और तीनों वचनों (एक, द्वि, बहु) में लगते हैं।  


    SECTION 7 — English Translation

    (As this is a grammar appendix consisting of tables, the translation focuses on the structural concepts.)

    1. Masculine Nouns (Halanta): This section provides the declensions of consonant-ending masculine nouns. For example, 'Brahman' declines as 'Brahma' in the nominative singular and 'Brahmanah' in the plural. 'Vidvas' (Scholar) declines as 'Vidvan' (singular) and 'Vidvansah' (plural).  

    2. Feminine Nouns: This section lists words like 'Vach' (speech), 'Sarit' (river), and 'Dish' (direction). The nominative singular of 'Sarit' is 'Sarit' or 'Sarid', and its plural is 'Saritah'.  

    3. Neuter Nouns: This section contains words like 'Jagat' (world), 'Manas' (mind), and 'Naman' (name). The nominative plural of 'Jagat' is 'Jaganti'. The nominative singular of 'Manas' is 'Manah', and its plural is 'Manamsi'.  

    4. Sup Affixes: In Sanskrit, to convert a base word (Pratipadika) into a proper noun form, 21 affixes called 'Sup' are used. These are applied across all seven cases and three numbers.  


    SECTION 8 — सारांश

    HINDI:

    प्रस्तुत परिशिष्ट "शब्दरूपाणि" संस्कृत व्याकरण में हलन्त (व्यंजनान्त) शब्दों के रूप निर्माण को स्पष्ट करता है। इसमें मुख्य रूप से न्, स्, द्, ज्, च्, त्, व्, श् और ष् पर समाप्त होने वाले शब्दों (जैसे ब्रह्मन्, विद्वस्, सरित्, जगत् आदि) को पुल्लिंग, स्त्रीलिंग और नपुंसकलिंग में बाँटकर उनकी सातों विभक्तियों और तीनों वचनों की तालिकाएँ दी गई हैं। अंत में 21 'सुप्-प्रत्ययों' की सूची दी गई है, जो सभी प्रकार के शब्दरूपों के निर्माण का आधार हैं।

    ENGLISH:

    The appendix "Shabdarupani" elucidates the formation of consonant-ending (Halanta) noun declensions in Sanskrit grammar. It systematically categorizes words ending in consonants like n, s, d, j, c, t, v, sh, and sh (e.g., Brahman, Vidvas, Sarit, Jagat) into masculine, feminine, and neuter genders, providing their tables across all seven cases and three numbers. Finally, it lists the 21 'Sup-affixes', which serve as the foundational building blocks for creating all nominal word forms in Sanskrit.


    SECTION 9 — केंद्रीय भाव एवं मूल्य

    9A. विषय-वस्तु सारणी

    विषय

    पाठ में स्पष्टीकरण

    मुख्य विषय

    व्यंजनान्त शब्दों के रूप और विभक्तियों का ज्ञान। (Knowledge of consonant-ending nouns and their case declensions.)

    सुप्-प्रत्ययाः

    शब्दरूपों के निर्माण का वैज्ञानिक आधार। (The scientific foundation of word formation using 21 affixes.)  

    9B. मानवीय एवं सांस्कृतिक मूल्य

    • अनुशासनम् (नियमों का पालन / Discipline)

      • विभक्ति-वचनानां नियमाः

      • जिस प्रकार व्याकरण में शब्दों को एक निश्चित नियम (सुप्-प्रत्यय) के अनुसार चलना पड़ता है, उसी प्रकार मानव जीवन में भी सफलता के लिए अनुशासन और नियमों का पालन अनिवार्य है।

      • (Just as words strictly follow grammatical rules to make sense, humans must follow discipline to succeed in life.)

    • संरचनात्मक-पवित्रता (व्यवस्था / Structural Purity)

      • संस्कृत की यह वैज्ञानिक संरचना हमें विचारों में स्पष्टता और व्यवस्था (Orderliness) रखने की प्रेरणा देती है।

      • (The scientific structure of Sanskrit grammar inspires clarity and orderliness in our thoughts.)

    EXAM TIP:व्याकरण के पाठों में मूल्यपरक प्रश्न सीधे भाषा-विज्ञान और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जुड़ते हैं।

    SECTION 10 — मुख्य विचार-बिंदु (Key Arguments / Concepts)

    १. हलन्त-शब्दानां वैशिष्ट्यम् (Specialty of Consonant-ending Nouns)

    • Sanskrit: व्यञ्जनान्त-शब्देषु सम्बोधनविभक्त्याः रूपं प्रथमाविभक्त्याः किञ्चित् भिन्नं भवति।

    • Hindi: व्यंजन से अंत होने वाले शब्दों में सम्बोधन विभक्ति (हे...) का रूप प्रथमा विभक्ति से थोड़ा अलग होता है (जैसे- विद्वान् का हे विद्वन्)।  

    • English: In consonant-ending words, the vocative case slightly differs from the nominative case.

    २. सुप्-प्रत्ययानां प्रयोगः (Application of Sup Affixes)

    • Sanskrit: सु, औ, जस् इत्यादयः २१ प्रत्ययाः शब्दरूपनिर्माणस्य आधारः सन्ति।  

    • Hindi: सु, औ, जस् आदि 21 प्रत्यय ही किसी भी शब्द को वाक्य में प्रयोग करने लायक (पद) बनाते हैं।  

    • English: The 21 affixes (Su, Au, Jas, etc.) are the foundation for making any base word usable in a sentence.


    SECTION 11 — गद्यांश (तालिका) आधारित प्रश्न


    गद्यांशः १ (तालिका-अंश)

    'स्' कारान्तः पुंलिङ्गः 'विद्वस्' शब्दः प्रथमा - विद्वान्, विद्वांसौ, विद्वांसः द्वितीया - विद्वांसम्, विद्वांसौ, विदुषः तृतीया - विदुषा, विद्वद्भ्याम्, विद्वद्भिः चतुर्थी - विदुषे, विद्वद्भ्याम्, विद्वद्भ्यः  


    प्र.(i) — अर्थबोध (1 mark): 'विद्वस्' शब्दस्य प्रथमा-बहुवचने किं रूपं भवति? (क) विद्वांसौ (ख) विदुषः (ग) विद्वांसः (घ) विद्वांसम् उत्तरम्: (ग) हिंदी: 'विद्वस्' शब्द का प्रथमा बहुवचन 'विद्वांसः' होता है। English: The nominative plural of 'Vidvas' is 'Vidvansah'.  


    प्र.(ii) — अन्वय पूर्तिः (1 mark): मञ्जूषातः पदं चित्वा रिक्तस्थानं पूरयत — [ विदुषा / विद्वान् / विदुषः ] द्वितीयाविभक्तौ बहुवचने 'विद्वस्' शब्दस्य रूपं _______ भवति। उत्तरम्: विदुषः हिंदी: द्वितीया बहुवचन में 'विदुषः' रूप बनता है। English: In the accusative plural, the form is 'Vidushah'.  


    प्र.(iii) — शब्दार्थ (1 mark):

    'विद्वस्' इति पदस्य अर्थः अस्ति —

    (क) मूर्खः (ख) ज्ञानी

    (ग) राजा (घ) सैनिकः

    उत्तरम्: (ख)

    हिंदी: विद्वस् का अर्थ 'ज्ञानी' या 'विद्वान' होता है।

    English: Vidvas means a knowledgeable or wise person.


    प्र.(iv) — प्रश्ननिर्माणम् (1 mark):

    अधोलिखितवाक्ये रेखाङ्कितपदम् आश्रित्य प्रश्नं रचयत —

    विद्वान् सर्वत्र पूज्यते।

    उत्तरम्: कः सर्वत्र पूज्यते?

    हिंदी: 'विद्वान्' पुल्लिङ्ग प्रथमा एकवचन है, अतः 'कः' (कौन) का प्रयोग होगा।

    English: 'Vidvan' is a masculine subject, so 'Kah' is used to form the question.


    SECTION 12 — लघु उत्तरीय प्रश्न (3 Marks)


    प्र१. 'जगत्' शब्दस्य प्रथमाविभक्तौ त्रीणि वचनानि लिखत। मूल बिंदु 1 (VP1): एकवचनम् - जगत्/जगद् मूल बिंदु 2 (VP2): द्विवचनम् - जगती, बहुवचनम् - जगन्ति  

    उत्तरम् (Sanskrit): 'जगत्' (नपुंसकलिङ्ग) शब्दस्य प्रथमाविभक्तौ रूपाणि सन्ति — जगत्/जगद् (एकवचनम्), जगती (द्विवचनम्), जगन्ति (बहुवचनम्) च।  

    हिंदी अनुवाद: 'जगत्' शब्द के प्रथमा विभक्ति के रूप हैं — जगत्/जगद् (एकवचन), जगती (द्विवचन), और जगन्ति (बहुवचन)।  

    English: The forms of the word 'Jagat' in the nominative case are — Jagat/Jagad (singular), Jagati (dual), and Jaganti (plural).  


    प्र२. 'ब्रह्मन्' शब्दस्य तृतीयाविभक्तौ रूपाणि कानि सन्ति? मूल बिंदु 1 (VP1): एकवचनम् - ब्रह्मणा मूल बिंदु 2 (VP2): द्विवचनम् - ब्रह्मभ्याम्, बहुवचनम् - ब्रह्मभिः  

    उत्तरम् (Sanskrit): 'ब्रह्मन्' (पुंलिङ्ग) शब्दस्य तृतीयाविभक्तौ रूपाणि सन्ति — ब्रह्मणा (एकवचनम्), ब्रह्मभ्याम् (द्विवचनम्), ब्रह्मभिः (बहुवचनम्) च।  

    हिंदी अनुवाद: 'ब्रह्मन्' शब्द के तृतीया विभक्ति के रूप हैं — ब्रह्मणा (एकवचन), ब्रह्मभ्याम् (द्विवचन), और ब्रह्मभिः (बहुवचन)।  

    English: The forms of the word 'Brahman' in the instrumental case are — Brahmana (singular), Brahmabhyam (dual), and Brahmabhih (plural).  


    प्र३. 'सरित्' शब्दस्य पञ्चमी-षष्ठी-विभक्त्योः एकवचने किं रूपं भवति? मूल बिंदु 1 (VP1): पञ्चमी एकवचनम् - सरितः मूल बिंदु 2 (VP2): षष्ठी एकवचनम् - सरितः  

    उत्तरम् (Sanskrit): 'सरित्' (स्त्रीलिङ्ग) शब्दस्य पञ्चमीविभक्तौ षष्ठीविभक्तौ च एकवचने समानमेव रूपं 'सरितः' इति भवति।  

    हिंदी अनुवाद: 'सरित्' शब्द का पञ्चमी और षष्ठी दोनों विभक्तियों के एकवचन में एक ही रूप 'सरितः' बनता है।  

    English: The form of the word 'Sarit' remains identical in the singular of both ablative and genitive cases, which is 'Saritah'.  


    प्र४. सुप्-प्रत्ययाः कति सन्ति? तेषां प्रथमाविभक्तेः प्रत्ययान् लिखत। मूल बिंदु 1 (VP1): आहत्य २१ प्रत्ययाः सन्ति मूल बिंदु 2 (VP2): प्रथमाविभक्तिः - सु, औ, जस्  

    उत्तरम् (Sanskrit): सुप्-प्रत्ययाः आहत्य एकविंशतिः (२१) सन्ति। तेषु प्रथमाविभक्तेः त्रयः प्रत्ययाः सन्ति — सु (एकवचने), औ (द्विवचने), जस् (बहुवचने) च।  

    हिंदी अनुवाद: सुप् प्रत्यय कुल मिलाकर 21 होते हैं। उनमें से प्रथमा विभक्ति के तीन प्रत्यय हैं — सु (एकवचन), औ (द्विवचन), और जस् (बहुवचन)।  

    English: There are a total of 21 Sup affixes. Out of these, the three affixes for the nominative case are — Su (singular), Au (dual), and Jas (plural).  

    SECTION 13 — दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 Marks)


    प्र१. 'मनस्' शब्दस्य (नपुंसकलिङ्गस्य) सम्पूर्ण-शब्दरूप-तालिकां लिखत। मूल बिंदु 1 (VP1): प्रथमा-द्वितीया - मनः, मनसी, मनांसि मूल बिंदु 2 (VP2): तृतीया-चतुर्थी - मनसा, मनोभ्याम्, मनोभिः / मनसे, मनोभ्याम्, मनोभ्यः मूल बिंदु 3 (VP3): पञ्चमी-षष्ठी - मनसः, मनोभ्याम्, मनोभ्यः / मनसः, मनसोः, मनसाम् मूल बिंदु 4 (VP4): सप्तमी-सम्बोधनम् - मनसि, मनसोः, मनःसु / हे मनः, हे मनसी, हे मनांसि  

    उत्तरम् (Sanskrit — तालिका): 'मनस्' शब्दस्य रूपाणि एवं सन्ति—  

    • प्रथमा: मनः — मनसी — मनांसि

    • द्वितीया: मनः — मनसी — मनांसि

    • तृतीया: मनसा — मनोभ्याम् — मनोभिः

    • चतुर्थी: मनसे — मनोभ्याम् — मनोभ्यः

    • पञ्चमी: मनसः — मनोभ्याम् — मनोभ्यः

    • षष्ठी: मनसः — मनसोः — मनसाम्

    • सप्तमी: मनसि — मनसोः — मनःसु (मनस्सु)

    • सम्बोधनम्: हे मनः — हे मनसी — हे मनांसि

    हिंदी अनुवाद: 'मनस्' (मन) शब्द के सातों विभक्तियों के रूप ऊपर तालिका में दिए गए हैं। ध्यान दें कि नपुंसकलिंग होने के कारण इसकी प्रथमा और द्वितीया विभक्ति के रूप बिल्कुल समान (मनः, मनसी, मनांसि) होते हैं।  

    English: The complete declension table for the neuter word 'Manas' is provided above in Sanskrit. Note that being a neuter noun, its forms in the nominative and accusative cases are completely identical (Manah, Manasi, Manamsi).  


    प्र२. संस्कृतव्याकरणे 'सुप्-प्रत्ययानां' का भूमिका अस्ति? सम्पूर्णं सुप्-प्रत्यय-सारणीं स्पष्टीकुरुत। मूल बिंदु 1 (VP1): प्रातिपदिकात् पदनिर्माणम् (Converting base word to usable noun) मूल बिंदु 2 (VP2): २१ प्रत्ययानां प्रयोगः (Application of 21 affixes) मूल बिंदु 3 (VP3): प्रथमा तः चतुर्थी पर्यन्तम् (Su to Bhyas) मूल बिंदु 4 (VP4): पञ्चमी तः सप्तमी पर्यन्तम् (Nasi to Sup)  

    उत्तरम् (Sanskrit): संस्कृतव्याकरणे सुप्-प्रत्ययानां महती भूमिका अस्ति। यतोहि "अपदं न प्रयुञ्जीत" अर्थात् यत् 'पदं' नास्ति तस्य वाक्ये प्रयोगः न भवति। प्रातिपदिकेभ्यः (मूलशब्देभ्यः) एतेषां २१ सुप्-प्रत्ययानां योजनेन एव 'पदस्य' (शब्दरूपस्य) निर्माणं भवति। सम्पूर्णसारणी एवम् अस्ति—  

    • प्रथमा - सु, औ, जस्

    • द्वितीया - अम्, औट्, शस्

    • तृतीया - टा, भ्याम्, भिस्

    • चतुर्थी - ङे, भ्याम्, भ्यस्

    • पञ्चमी - ङसि, भ्याम्, भ्यस्

    • षष्ठी - ङस्, ओस्, आम्

    • सप्तमी - ङि, ओस्, सुप् एतैः प्रत्ययैः एव पुंलिङ्ग-स्त्रीलिङ्ग-नपुंसकलिङ्गशब्दानां रूपाणि साध्यन्ते।  

    हिंदी अनुवाद: संस्कृत व्याकरण में सुप्-प्रत्ययों की बहुत बड़ी भूमिका है। नियम है कि जो 'पद' नहीं है उसका वाक्य में प्रयोग नहीं हो सकता। मूल शब्दों में इन 21 सुप्-प्रत्ययों को जोड़ने से ही 'पद' (शब्दरूप) बनते हैं। पूरी तालिका ऊपर दी गई है (जैसे प्रथमा में सु, औ, जस् आदि)। इन्हीं प्रत्ययों के माध्यम से सभी लिंगों के शब्दरूप सिद्ध किए जाते हैं।  

    English: Sup affixes play a massive role in Sanskrit grammar. The rule states that a non-pada (uninflected base word) cannot be used in a sentence. It is only by attaching these 21 Sup affixes to the base words that proper 'Padas' (declined nouns) are formed. The complete table is listed above (e.g., Su, Au, Jas for the nominative case). It is through these affixes that the declensions for masculine, feminine, and neuter nouns are derived.

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