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    14. परिशिष्टम् ३ – वाच्यम् - Parishistam 3 – Vacyam - Class 9 - Sharada

    • Jun 12
    • 7 min read

    Updated: Jun 13

    SECTION 1 — पाठ परिचय

    विवरण

    जानकारी

    पाठ का नाम:

    परिशिष्टम् ३ – वाच्यम् (Parishiṣṭam 3 – Vācyam)

    विधा:

    गद्य पाठ — व्याकरण-लेखः / परिशिष्टम्

    स्रोत/ग्रंथ:

    संस्कृत-व्याकरणशास्त्रम् (NCERT सङ्कलितः)

    लेखक/कवि:

    अज्ञात (NCERT सम्पादकमण्डलः)

    पाठ्यपुस्तक:

    शारदा, NCERT कक्षा 9 संस्कृत, 2026-27

    परीक्षा खंड:

    खंड-घ (अनुप्रयुक्त-व्याकरणम्) — 5 अंक

    SECTION 2 — पाठ/विषय परिचय


    SANSKRIT:

    अयं पाठः शारदा-पाठ्यपुस्तकस्य तृतीयं परिशिष्टम् अस्ति। अस्मिन् पाठे 'वाच्यम्' (प्रयोगः) इति व्याकरणविषयस्य परिचयः दत्तः अस्ति। संस्कृतभाषायां क्रियायाः प्रधानतानुसारं त्रीणि वाक्यानि भवन्ति—कर्तृवाच्यम्, कर्मवाच्यम्, भाववाच्यम् च। एतेषां भेदानां रचना, विभक्तयः, क्रियापदस्य परिवर्तनं च सोदाहरणं वर्णितानि सन्ति।

    हिंदी अनुवाद:

    यह पाठ शारदा पाठ्यपुस्तक का तीसरा परिशिष्ट (Appendix) है। इसमें 'वाच्य' (प्रयोग) नामक व्याकरण विषय का परिचय दिया गया है। संस्कृत भाषा में क्रिया की प्रधानता के अनुसार तीन प्रकार के वाक्य होते हैं—कर्तृवाच्य (Active Voice), कर्मवाच्य (Passive Voice), और भाववाच्य (Impersonal Voice)। इन भेदों की रचना, विभक्तियाँ और क्रियापद का परिवर्तन उदाहरण सहित यहाँ वर्णित है।

    English:

    This chapter is the third appendix of the Sharada textbook, introducing the grammatical concept of 'Vachya' (Voice). In Sanskrit, sentences are classified into three types based on the focus of the verb: Kartrivachya (Active Voice), Karmavachya (Passive Voice), and Bhavavachya (Impersonal Voice). The structure, case endings (Vibhakti), and verb transformations for these are explained with examples.

    EXAM TIP:परीक्षा में कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य में परिवर्तन के प्रश्न 5 अंकों के निश्चित आते हैं।(Focus on the transition rules: Kartri-prathama -> Tritiya, Karma-dwitiya -> Prathama, Verb -> Atmanepada/Passive form).

    SECTION 3 — मूल पाठ (मुख्य नियम)

    १। वाच्यं त्रिधा भवति -

    (क) कर्तृवाच्यम् (कर्तरि प्रयोगः)

    (ख) कर्मवाच्यम् (कर्मणि प्रयोगः)

    (ग) भाववाच्यम् (भावे प्रयोगः)


    १. कर्तृवाच्यम् (Active Voice):

    • कर्ता 'प्रथमा' विभक्तौ भवति।

    • कर्म 'द्वितीया' विभक्तौ भवति।

    • क्रियापदं कर्तृपदानुगुणं भवति (परस्मैपद/आत्मनेपद)।

      यथा - बालः चित्रं पश्यति। बालौ चित्रं पश्यतः। बालाः चित्रं पश्यन्ति।


    २. कर्मवाच्यम् (Passive Voice):

    • कर्ता 'तृतीया' विभक्तौ भवति।

    • कर्म 'प्रथमा' विभक्तौ भवति।

    • क्रियापदं 'कर्म' के वचन/पुरुष के अनुसार (आत्मनेपद) भवति (य+ते, ये+ते)।

      यथा - बालेन चित्रं दृश्यते।


    ३. भाववाच्यम् (Impersonal Voice):

    • यह केवल अकर्मक धातुओं में होता है।

    • कर्ता 'तृतीया' विभक्तौ भवति।

    • कर्म इसमें होता ही नहीं है।

    • क्रियापद हमेशा 'प्रथम पुरुष एकवचन' (य+ते) में ही रहता है।

      यथा - तेन हसितम् (अतीत) / तेन हस्यते (वर्तमान)।


    SECTION 4 — शब्दार्थ (वाच्य-परिवर्तन हेतु)

    धातुरूप (कर्तृ)

    धातुरूप (कर्मवाच्य/भावे)

    अर्थ

    हसति

    हस्यते

    हँसना

    खादति

    खाद्यते

    खाना

    पठति

    पठ्यते

    पढ़ना

    पश्यति

    दृश्यते

    देखना

    करोति

    क्रियते

    करना

    क्रीडति

    क्रीड्यते

    खेलना

    पतति

    पत्यते

    गिरना

    उत्तिष्ठति

    उत्थायते

    उठना

    शयति

    शय्यते

    सोना

    SECTION 5 — हिंदी अनुवाद (नियम-व्याख्या)


    कर्तरि प्रयोग (कर्तृवाच्य):

    कर्तरि प्रयोग में कर्ता प्रथमा विभक्ति में होता है। कर्म द्वितीया विभक्ति में होता है। क्रियापद कर्ता के वचन के अनुसार होता है। यानी, कर्ता एकवचन तो क्रिया एकवचन, कर्ता द्विवचन तो क्रिया द्विवचन।

    उदाहरण: बालः फलं खादति। (बालक फल खाता है)

    कर्मणि प्रयोग (कर्मवाच्य):

    कर्मवाच्य में कर्ता तृतीया विभक्ति (जैसे - बालेन) में हो जाता है। कर्म प्रथमा विभक्ति में हो जाता है। क्रियापद कर्म के वचन के अनुसार बदलता है। क्रियापद में 'य' जुड़कर आत्मनेपद (यते/येते) रूप बनता है।

    उदाहरण: बालेन फलं खाद्यते। (बालक के द्वारा फल खाया जाता है)

    भावे प्रयोग (भाववाच्य):

    यह केवल अकर्मक क्रियाओं (जिसमें कर्म न हो) के साथ होता है। इसमें कर्ता तृतीया विभक्ति में होता है और क्रिया हमेशा प्रथम पुरुष एकवचन (यते) में ही रहती है।

    उदाहरण: शिशोः शय्यते। (शिशु के द्वारा सोया जाता है)


    SECTION 6 — English Translation


    Kartari Prayoga (Active Voice):

    In active voice, the subject is in the nominative case (Prathama). The object is in the accusative case (Dwitiya). The verb form follows the subject. If the subject is singular, the verb is singular; if plural, the verb is plural.

    Example: Balah phalam khadati (The boy eats the fruit).

    Karmani Prayoga (Passive Voice):

    In passive voice, the subject is in the instrumental case (Tritiya, e.g., Balena). The object changes to the nominative case (Prathama). The verb form agrees with the object's number and person. The verb is transformed by adding 'ya' + Atmanepada endings.

    Example: Balena phalam khadyate (The fruit is eaten by the boy).

    Bhave Prayoga (Impersonal Voice):

    This occurs only with intransitive verbs (verbs without an object). The subject is in the instrumental case (Tritiya). The verb always remains in the third person singular (Prathama Purusha Ekavachana) regardless of the subject.

    Example: Shishoh shayyate (The child sleeps / By the child, it is slept).


    SECTION 7 — सारांश


    HINDI:

    इस परिशिष्ट "वाच्यम्" में संस्कृत भाषा के प्रयोगों का वर्णन है। संस्कृत में तीन वाच्य होते हैं: १. कर्तृवाच्य (जहाँ कर्ता प्रधान है), २. कर्मवाच्य (जहाँ कर्म प्रधान है), ३. भाववाच्य (जहाँ केवल भाव/क्रिया प्रधान है)। कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य में बदलते समय कर्ता को तृतीया में, कर्म को प्रथमा में और क्रिया को आत्मनेपद (यते आदि प्रत्यय के साथ) में बदल दिया जाता है। भाववाच्य केवल अकर्मक धातुओं के साथ प्रयुक्त होता है और इसमें क्रिया सदा प्रथम पुरुष एकवचन में रहती है।

    ENGLISH:

    The appendix "Vachyam" describes the voices in the Sanskrit language. There are three types: 1. Kartrivachya (Active), where the subject is dominant; 2. Karmavachya (Passive), where the object is dominant; 3. Bhavavachya (Impersonal), where only the action is dominant. When converting from active to passive, the subject changes to the instrumental case (Tritiya), the object to the nominative case (Prathama), and the verb is converted into the Atmanepada form by adding 'ya' + ending. Bhavavachya is used only with intransitive verbs, and the verb always remains in the third person singular.


    SECTION 8 — केंद्रीय भाव एवं मूल्य


    8A. विषय-वस्तु सारणी

    विषय

    पाठ में स्पष्टीकरण

    मुख्य विषय

    संस्कृत वाच्य-परिवर्तन के नियम (कर्तृ, कर्म और भाव)। (Rules for Sanskrit voice transformation.)

    व्याकरणिक शुद्धता

    कर्ता, कर्म और क्रिया के बीच विभक्ति और वचन का तालमेल। (Agreement of Vibhakti and Vachana between Subject, Object, and Verb.)

    8B. मानवीय एवं सांस्कृतिक मूल्य


    • अनुशासनम् (व्याकरण का अनुशासन / Grammatical Discipline)

      • क्रियापदं कर्तृपदानुगुणं भवति।

      • जिस प्रकार व्याकरण में क्रिया को कर्ता का अनुशासन मानना पड़ता है, वैसे ही जीवन में भी हमें अपने से बड़ों या अनुशासन के नियमों का पालन करना चाहिए।

      • (Grammatical discipline teaches us the importance of following rules and maintaining order in life.)

    • परिवर्तनशीलता (अनुकूलन / Adaptability)

      • वाच्य-परिवर्तन

      • वाच्य परिवर्तन सिखाता है कि परिस्थितियों (कर्ता से कर्म या भाव) के अनुसार हमें खुद को बदलना और ढालना (Adaptability) आना चाहिए।

      • (Voice transformation teaches us to adapt ourselves according to changing circumstances.)

    EXAM TIP:व्याकरण के पाठों में मूल्यपरक प्रश्न सीधे भाषा-विज्ञान और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जुड़ते हैं।

    SECTION 9 — गद्यांश आधारित प्रश्न


    गद्यांशः १

    कर्तरि प्रयोगे कर्तृवाचकं पदं 'प्रथमाविभक्तौ' भवति । कर्मवाचकं पदं 'द्वितीयाविभक्तौ' भवति । क्रियापदं कर्तृपदानुगुणं भवति । तन्नाम कर्तृपदं यद्वचनयुक्तं भवति क्रियापदमपि तद्वचनयुक्तमेव भवति । अर्थात् कर्तरि प्रयोगे क्रियापदं कर्तृपदमनुसृत्य एव भवति । कर्मपदेन सह तस्य कोऽपि सम्बन्धः न भवति । यथा - बालः चित्रं पश्यति । बालौ चित्रं पश्यतः । बालाः चित्रं पश्यन्ति ।


    प्र.(i) — अर्थबोध (1 mark):

    कर्तरि प्रयोगे क्रियापदं कं पदमनुसृत्य भवति?

    (क) कर्मपदम् (ख) कर्तृपदम्

    (ग) उभयपदम् (घ) विशेषणपदम्

    उत्तरम्: (ख)

    हिंदी: कर्तरि प्रयोग (कर्तृवाच्य) में क्रिया 'कर्तृपद' (कर्ता) के अनुसार होती है।

    English: In Kartari Prayoga (Active Voice), the verb follows the 'Kartripadam' (Subject).


    प्र.(ii) — प्रश्ननिर्माणम् (1 mark):

    बालः चित्रं पश्यति ।

    उत्तरम्: कः चित्रं पश्यति?

    हिंदी: 'बालः' पुल्लिङ्ग प्रथमा एकवचन है (कौन?), अतः 'कः' का प्रयोग होगा।

    English: 'Balah' is the masculine subject, replaced by the interrogative 'Kah'.


    गद्यांशः २

    कर्मवाच्यम् (कर्मणि प्रयोगः) - कर्ता 'तृतीया' विभक्तौ भवति। कर्म 'प्रथमा' विभक्तौ भवति। क्रियापदं 'कर्म' के वचन/पुरुष के अनुसार (आत्मनेपद) भवति (य+ते, ये+ते)।

    यथा - बालेन चित्रं दृश्यते।


    प्र.(i) — अर्थबोध (1 mark):

    कर्मणि प्रयोगे (कर्मवाच्ये) कर्ता कस्मिन् विभक्तौ भवति?

    (क) प्रथमा (ख) द्वितीया

    (ग) तृतीया (घ) चतुर्थी

    उत्तरम्: (ग)

    हिंदी: कर्मवाच्य में कर्ता 'तृतीया' विभक्ति में होता है।

    English: In Karmani Prayoga (Passive Voice), the subject is in the 'Tritiya' (instrumental) case.


    प्र.(ii) — वाक्य-परिवर्तनम् (1 mark):

    'बालः फलम् खादति' इति वाक्यं कर्मवाच्ये परिवर्तयत।

    उत्तरम्: बालेन फलं खाद्यते।

    हिंदी: बालेन (तृतीया) फलं (प्रथमा) खाद्यते (य+ते)।

    English: Balena phalam khadyate.


    SECTION 10 — लघु उत्तरीय प्रश्न (3 Marks)


    प्र१. कर्तृवाच्ये कर्मवाच्ये च क्रियापदस्य भेदः कः अस्ति?

    मूल बिंदु 1 (VP1): कर्तृवाच्ये कर्ताप्रधानः (Active voice - Subject dominant)

    मूल बिंदु 2 (VP2): कर्मवाच्ये कर्मप्रधानः (Passive voice - Object dominant)

    उत्तरम् (Sanskrit):

    कर्तृवाच्ये क्रियापदं कर्तृपदानुगुणं (परस्मैपदम्) भवति, अतः तत्र कर्ता प्रधानः अस्ति। परन्तु कर्मवाच्ये क्रियापदं कर्मपदानुगुणं (आत्मनेपदम् - यते, येते) भवति, अतः तत्र कर्म प्रधानः अस्ति।

    हिंदी अनुवाद:

    कर्तृवाच्य में क्रियापद कर्ता के अनुसार (परस्मैपद) होता है, इसलिए वहाँ कर्ता प्रधान है। लेकिन कर्मवाच्य में क्रियापद कर्म के अनुसार (आत्मनेपद - यते, येते) होता है, इसलिए वहाँ कर्म प्रधान है।

    English:

    In active voice, the verb follows the subject (Parasmaipada), making the subject dominant. However, in passive voice, the verb follows the object (Atmanepada - yate, yete), making the object dominant.


    SECTION 11 — दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 Marks)


    प्र१. कर्तृवाच्य-कर्मवाच्य-भाववाच्य-भेदानां सोदाहरणं वर्णनं कुरुत।

    मूल बिंदु 1 (VP1): कर्तृवाच्यस्य लक्षणम् उदाहरणम् (Active voice definition & example)

    मूल बिंदु 2 (VP2): कर्मवाच्यस्य लक्षणम् उदाहरणम् (Passive voice definition & example)

    मूल बिंदु 3 (VP3): भाववाच्यस्य लक्षणम् उदाहरणम् (Impersonal voice definition & example)

    उत्तरम् (Sanskrit):

    संस्कृतभाषायां वाक्यानि त्रीणि वाच्यभेदाः सन्ति—

    १. कर्तृवाच्यम्: अत्र कर्ता प्रथमाविभक्तौ, कर्म द्वितीयाविभक्तौ च भवति। क्रियापदं कर्तृपदानुगुणं भवति। यथा - 'बालः पुस्तकं पठति।'

    २. कर्मवाच्यम्: अत्र कर्ता तृतीयाविभक्तौ, कर्म प्रथमाविभक्तौ च भवति। क्रियापदं कर्मपदानुगुणं (यते) भवति। यथा - 'बालेन पुस्तकं पठ्यते।'

    ३. भाववाच्यम्: अत्र कर्म न भवति। कर्ता तृतीयाविभक्तौ भवति, क्रिया सदा प्रथमपुरुष-एकवचन-आत्मनेपदे (यते) भवति। यथा - 'तेन हस्यते।'

    अनेन प्रकारेण वाच्यभेदाः वाक्यस्य अर्थस्य दृष्टिकोणं परिवर्तयन्ति।

    हिंदी अनुवाद:

    संस्कृत भाषा में वाच्य के तीन भेद हैं—

    १. कर्तृवाच्य: यहाँ कर्ता प्रथमा विभक्ति और कर्म द्वितीया विभक्ति में होता है। क्रियापद कर्ता के अनुसार होता है। जैसे - 'बालः पुस्तकं पठति।'

    २. कर्मवाच्य: यहाँ कर्ता तृतीया विभक्ति और कर्म प्रथमा विभक्ति में होता है। क्रियापद कर्म के अनुसार (यते) होता है। जैसे - 'बालेन पुस्तकं पठ्यते।'

    ३. भाववाच्य: यहाँ कर्म नहीं होता। कर्ता तृतीया विभक्ति में होता है, क्रिया हमेशा प्रथम पुरुष एकवचन (यते) में होती है। जैसे - 'तेन हस्यते।'

    इस प्रकार वाच्य भेद वाक्य के अर्थ के दृष्टिकोण को बदलते हैं।

    English:

    There are three types of voices in Sanskrit:

    1. Kartrivachya (Active Voice): Here, the subject is in the nominative case and the object is in the accusative case. The verb follows the subject. E.g., 'Balah pustakam pathati.'

    2. Karmavachya (Passive Voice): Here, the subject is in the instrumental case and the object is in the nominative case. The verb follows the object (yate). E.g., 'Balena pustakam pathyate.'

    3. Bhavavachya (Impersonal Voice): Here, there is no object. The subject is in the instrumental case, and the verb always remains in the third person singular (yate). E.g., 'Tena hasyate.'

      In this way, these types of voices alter the perspective of the sentence's meaning.


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