16. परिशिष्टम् ५ – धातुरूपाणि - Parisistam 5 – Dhaturupani - Class 9 - Sharada
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SECTION 1 — पाठ परिचय
विवरण | जानकारी |
पाठ का नाम: | परिशिष्टम् ५ – धातुरूपाणि (Pariśiṣṭam 5 – Dhāturūpāṇi) |
विधा: | व्याकरण-परिशिष्टम् (Grammar Appendix) |
स्रोत/ग्रंथ: | संस्कृत-व्याकरणशास्त्रम् |
लेखक/कवि: | अज्ञात (NCERT सम्पादकमण्डलः) |
पाठ्यपुस्तक: | शारदा, NCERT कक्षा 9 संस्कृत, 2026-27 |
परीक्षा खंड: | खंड-घ (अनुप्रयुक्त-व्याकरणम्) — 25-30 अंक |
SECTION 2 — लेखक/स्रोत परिचय
SANSKRIT: अयं पाठः संस्कृतव्याकरणस्य महत्त्वपूर्णः भागः 'धातुरूपाणि' (क्रियापदानि) इति अस्ति। अस्मिन् परिशिष्टे परस्मैपदि-आत्मनेपदि-धातूनां पञ्चसु लकारेषु (लट्, लृट्, लङ्, लोट्, विधिलिङ्) रूपाणि सङ्कलितानि सन्ति। अत्र 'पठ्', 'वृध्', 'लभ्' तथा च विशिष्टधातूनां 'शीङ्', 'भुज्' इत्येतेषां रूपाणि दत्तानि सन्ति। 'णिच्' (प्रेरणार्थे) प्रत्ययस्य अपि अत्र परिचयः दत्तः अस्ति।
हिंदी अनुवाद: यह पाठ संस्कृत व्याकरण का महत्वपूर्ण भाग 'धातुरूप' (क्रिया पद) है। इस परिशिष्ट में परस्मैपद और आत्मनेपद धातुओं के पाँच लकारों (वर्तमान, भविष्य, भूत, आज्ञा और प्रार्थना काल) में रूप संकलित किए गए हैं। यहाँ 'पठ्' (पढ़ना), 'वृध्' (बढ़ना), 'लभ्' (पाना) और विशेष धातुओं 'शीङ्' (सोना) तथा 'भुज्' (खाना) के रूप दिए गए हैं। 'णिच्' (प्रेरणार्थक - किसी से काम करवाना) प्रत्यय का भी परिचय दिया गया है।
English: This chapter constitutes a vital segment of Sanskrit grammar, 'Dhaturupani' (Verb Conjugations). This appendix compiles the declensions of Parasmaipada and Atmanepada verb roots across five Lakaras (tenses/moods). It provides the forms for roots like 'Path' (to read), 'Vridh' (to grow), 'Labh' (to get), and special roots like 'Shi' (to sleep) and 'Bhuj' (to eat). The causative suffix 'Nich' is also introduced.
EXAM TIP:परीक्षा में धातुरूपों से संबंधित प्रश्न 'रिक्तस्थान-पूर्ति' के रूप में पूछे जाते हैं।(Focus heavily on the special Atmanepada roots like 'Shi' (शेते, शेरते) and 'Bhuj' (भुङ्क्ते, भुञ्जते), as their forms are tricky and frequently tested.)
SECTION 3 — मूल पाठ
(अयं पाठः पूर्णतया तालिकारूपेण अस्ति। अत्र मुख्यधातूनां सूची प्रदीयते।)
१। परस्मैपदिधातूनां प्रयोगाः (पञ्चसु लकारेषु):
पठ् (पठ् + णिच् = पाठयति): प्रेरणार्थे प्रयोगः (पाठयति, पाठयतः, पाठयन्ति)।
पठ् (पठति): लट्, लृट् (पठिष्यति), लङ् (अपठत्), लोट् (पठतु), विधिलिङ् (पठेत्)।
२। आत्मनेपदि-धातूनां प्रयोगाः (पञ्चसु लकारेषु):
वृध् (वर्धते): लट् (वर्धते), लृट् (वर्धिष्यते), लङ् (अवर्धत), लोट् (वर्धताम्), विधिलिङ् (वर्धेत)।
लभ् (लभते): लट् (लभते), लृट् (लप्स्यते), लङ् (अलभत), लोट् (लभताम्), विधिलिङ् (लभेत)।
३। विशिष्टधातवः (आत्मनेपदिनः):
शीङ् (शेते): लट् (शेते), लृट् (शयिष्यते), लङ् (अशेत), लोट् (शेताम्), विधिलिङ् (शयीत)।
भुज् (भुङ्क्ते): लट् (भुङ्क्ते), लृट् (भोक्ष्यते), लङ् (अभुङ्क्त), लोट् (भुङ्क्ताम्), विधिलिङ् (भुञ्जीत)।
SECTION 4 — अन्वय
(चूंकि यह पाठ केवल व्याकरण की तालिकाओं का संग्रह है, इसमें श्लोक नहीं हैं जिनका अन्वय किया जाए। तथापि, वाक्य-प्रयोग के उदाहरण यहाँ प्रस्तुत हैं:)
वाक्यम् १: मूल: वृक्षः वर्धते । वृक्षाः वर्धन्ते । अन्वयः: वृक्षः वर्धते। वृक्षाः वर्धन्ते। (कर्तृपदानुसारं क्रियापदम्)
वाक्यम् २: मूल: आवां वर्धावहे । वयं वर्धामहे । अन्वयः: आवां वर्धावहे। वयं वर्धामहे।
EXAM TIP:वाक्य-निर्माण में कर्ता के पुरुष और वचन के अनुसार ही धातु (क्रिया) का प्रयोग होता है (यथा- अहम् वर्धे, त्वम् वर्धसे)।
SECTION 5 — शब्दार्थ
संस्कृत पद (धातुः) | हिंदी अर्थ | English Meaning |
पठ् (पठति) | पढ़ना | To read / study |
णिच् (पाठयति) | पढ़ाना (प्रेरणार्थक) | To teach / make read |
वृध् (वर्धते) | बढ़ना / विकास होना | To grow / increase |
लभ् (लभते) | प्राप्त करना / पाना | To get / obtain |
शीङ् (शेते) | सोना (नींद) | To sleep |
भुज् (भुङ्क्ते) | खाना / उपभोग करना | To eat / consume |
लट्-लकारः | वर्तमान काल | Present Tense |
लृट्-लकारः | भविष्य काल | Future Tense |
लङ्-लकारः | भूतकाल | Past Tense |
लोट्-लकारः | आज्ञा / आदेश | Imperative Mood |
विधिलिङ्-लकारः | चाहिए (प्रार्थना/सुझाव) | Potential Mood |
SECTION 6 — हिंदी अनुवाद
(यह व्याकरण तालिकाओं का परिशिष्ट है, अतः इसका भावार्थ इस प्रकार है:)
१. परस्मैपद धातुएँ: 'पठ्' (पढ़ना) धातु के पाँचों लकारों के रूप दिए गए हैं। साथ ही 'णिच्' प्रत्यय लगाकर प्रेरणार्थक रूप (Causative) बनाने का तरीका बताया गया है, जैसे 'पठति' (पढ़ता है) से 'पाठयति' (पढ़ाता है)। इसी तरह खादयति (खिलाता है), हासयति (हँसाता है) आदि बनते हैं। २. आत्मनेपद धातुएँ: 'वृध्' (बढ़ना) और 'लभ्' (पाना) के पाँचों लकारों के रूप दिए गए हैं। 'वृध्' का वर्तमान काल में 'वर्धते, वर्धेते, वर्धन्ते' और भविष्य काल में 'वर्धिष्यते' बनता है। 'लभ्' का भविष्य काल में 'लप्स्यते' बनता है। ३. विशिष्ट आत्मनेपद धातुएँ: 'शीङ्' (सोना) और 'भुज्' (खाना) धातुओं के रूप थोड़े कठिन होते हैं। 'शीङ्' का प्रथम पुरुष बहुवचन 'शेरते' होता है। 'भुज्' का एकवचन 'भुङ्क्ते' और बहुवचन 'भुञ्जते' होता है।
SECTION 7 — English Translation
(As this is a grammar appendix consisting of tables, the translation focuses on the structural concepts.)
Parasmaipada Roots: The conjugation of the root 'Path' (to read) across all five Lakaras is provided. It also introduces the causative 'Nich' suffix, converting 'Pathati' (reads) to 'Pathayati' (teaches/makes someone read). Similar forms include Khadayati (feeds), Hasayati (makes one laugh).
Atmanepada Roots: The forms for 'Vridh' (to grow) and 'Labh' (to get) in five Lakaras are listed. In the present tense, 'Vridh' becomes 'Vardhate, Vardhete, Vardhante'. In the future tense, 'Labh' becomes 'Lapsyate'.
Special Atmanepada Roots: The roots 'Shi' (to sleep) and 'Bhuj' (to eat) have unique conjugations. The plural of 'Shete' (sleeps) is 'Sherate'. The singular of 'Bhuj' is 'Bhunkte' (eats) and its plural is 'Bhunjate'.
SECTION 8 — सारांश
HINDI:
प्रस्तुत परिशिष्ट "धातुरूपाणि" संस्कृत व्याकरण में क्रियाओं (Verbs) के विभिन्न रूपों को स्पष्ट करता है। इसमें परस्मैपद की 'पठ्' धातु, आत्मनेपद की 'वृध्' और 'लभ्' धातु, तथा कुछ विशेष धातुओं जैसे 'शीङ्' (सोना) और 'भुज्' (खाना) के रूप पाँचों लकारों (वर्तमान, भविष्य, भूत, आज्ञा, चाहिए) में दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त 'णिच्' प्रत्यय का परिचय दिया गया है, जिसका प्रयोग प्रेरणार्थक क्रियाएँ (जैसे- पढ़ाना, खिलाना) बनाने के लिए किया जाता है। शुद्ध संस्कृत वाक्य निर्माण के लिए इन धातुरूपों का ज्ञान अनिवार्य है।
ENGLISH:
The appendix "Dhaturupani" elucidates the various verb conjugations in Sanskrit grammar. It provides the forms of the Parasmaipada root 'Path', Atmanepada roots 'Vridh' and 'Labh', and special roots like 'Shi' (to sleep) and 'Bhuj' (to eat) across all five Lakaras (Present, Future, Past, Imperative, Potential). Additionally, it introduces the 'Nich' suffix, used to form causative verbs (e.g., to teach, to feed). Mastery of these verb forms is essential for constructing grammatically correct Sanskrit sentences.
SECTION 9 — केंद्रीय भाव एवं मूल्य
9A. विषय-वस्तु सारणी
विषय | पाठ में स्पष्टीकरण |
मुख्य विषय | पञ्च लकारों में परस्मैपद और आत्मनेपद धातुओं का रूप-ज्ञान। (Knowledge of verb conjugations in five tenses/moods.) |
विशिष्ट-प्रयोगाः | 'णिच्' प्रत्यय (Causative) तथा 'शीङ्', 'भुज्' जैसी कठिन धातुओं के रूप। (Causative verbs and special root conjugations.) |
9B. मानवीय एवं सांस्कृतिक मूल्य
अनुशासनम् (नियमों का पालन / Discipline)
व्याकरण के नियम (जैसे कर्ता के अनुसार क्रिया का बदलना) हमें जीवन में व्यवस्था और अनुशासन का पालन करना सिखाते हैं।
(Grammatical rules teach us the importance of maintaining order and discipline in life.)
निरन्तर-अभ्यासः (लगातार अभ्यास / Continuous Practice)
धातुरूपों को बिना निरंतर अभ्यास के याद नहीं रखा जा सकता। यह हमें मेहनत और अभ्यास का महत्व सिखाता है।
(Conjugations cannot be mastered without regular practice, highlighting the value of perseverance.)
EXAM TIP:व्याकरण के पाठों में मूल्यपरक प्रश्न सीधे भाषा-विज्ञान और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जुड़ते हैं।
SECTION 10 — मुख्य विचार-बिंदु (Key Arguments / Concepts)
१. णिच्-प्रत्ययस्य प्रयोगः (Use of Causative 'Nich' Suffix)
Sanskrit: प्रेरणार्थे णिच्-प्रत्ययस्य प्रयोगः भवति। यथा 'पठति' इत्यस्य 'पाठयति' भवति।
Hindi: जब कोई काम किसी दूसरे से करवाया जाता है (प्रेरणार्थक), तब 'णिच्' प्रत्यय लगता है। जैसे 'पढ़ता है' का 'पढ़ाता है' (पाठयति) हो जाता है।
English: To express a causative action (making someone do something), the 'Nich' suffix is added. E.g., 'reads' becomes 'teaches/makes read' (Pathayati).
२. विशिष्ट-आत्मनेपदि-धातवः (Special Atmanepada Roots)
Sanskrit: 'शीङ्' तथा 'भुज्' धातोः रूपाणि सामान्यात् किञ्चित् भिन्नानि भवन्ति। यथा- शेते, शयाते, शेरते।
Hindi: 'शीङ्' (सोना) और 'भुज्' (खाना) धातुओं के रूप सामान्य आत्मनेपद धातुओं (जैसे लभते) से थोड़े अलग चलते हैं।
English: Roots like 'Shi' and 'Bhuj' follow a slightly irregular conjugation pattern compared to standard Atmanepada roots.
SECTION 11 — गद्यांश (तालिका) आधारित प्रश्न
गद्यांशः १ (तालिका-अंश)
'पठ्' + णिच् = पाठि प्रथमपुरुषः - पाठयति, पाठयतः, पाठयन्ति मध्यमपुरुषः - पाठयसि, पाठयथः, पाठयथ उत्तमपुरुषः - पाठयामि, पाठयावः, पाठयामः एवमेव लेखयति, खादयति, हासयति, चालयति...
प्र.(i) — अर्थबोध (1 mark): प्रेरणार्थे 'पठ्' धातोः प्रथमपुरुष-बहुवचने किं रूपं भवति? (क) पठन्ति (ख) पाठयन्ति (ग) पाठयामः (घ) अपठन् उत्तरम्: (ख) हिंदी: प्रेरणार्थक (णिच्) में 'पठ्' का प्रथम पुरुष बहुवचन 'पाठयन्ति' होता है। English: The causative first-person plural of 'Path' is 'Pathayanti'.
प्र.(ii) — अन्वय पूर्तिः (1 mark): मञ्जूषातः पदं चित्वा रिक्तस्थानं पूरयत — [ पाठयामि / पाठयति / हासयति ] शिक्षकः छात्रं श्लोकं _______ । उत्तरम्: पाठयति हिंदी: शिक्षक छात्र को श्लोक 'पढ़ाता है' (पाठयति)। English: The teacher 'teaches' (Pathayati) the verse to the student.
प्र.(iii) — शब्दार्थ (1 mark): 'हासयति' इति पदस्य अर्थः अस्ति — (क) हसति (ख) रोदिति (ग) हँसाता है (घ) धावति उत्तरम्: (ग) हिंदी: हासयति का अर्थ 'हँसाता है' (प्रेरणार्थक) होता है। English: Hasayati means 'makes someone laugh'.
प्र.(iv) — प्रश्ननिर्माणम् (1 mark):
अधोलिखितवाक्ये रेखाङ्कितपदम् आश्रित्य प्रश्नं रचयत —
माता शिशुं खादयति।
उत्तरम्: माता शिशुं किं करोति?
हिंदी: 'खादयति' क्रिया है, अतः 'किं करोति' का प्रयोग होगा।
English: 'Khadayati' is a verb, so 'Kim karoti' (what does she do) is used.
गद्यांशः २ (तालिका-अंश)
विशिष्टधातवः (आत्मनेपदिनः) 'शीङ्' - धातुः, लट् - लकारः प्रथमपुरुषः - शेते, शयाते, शेरते मध्यमपुरुषः - शेषे, शयाथे, शेध्वे उत्तमपुरुषः - शये, शेवहे, शेमहे
प्र.(i) — अर्थबोध (1 mark): 'शीङ्' धातोः प्रथमपुरुष-बहुवचने किं रूपं भवति? (क) शेन्ते (ख) शयन्ते (ग) शेरते (घ) शेते
उत्तरम्: (ग) हिंदी: 'शीङ्' धातु का प्रथम पुरुष बहुवचन 'शेरते' होता है। English: The first-person plural of 'Shi' is 'Sherate'.
प्र.(ii) — अन्वय पूर्तिः (1 mark): मञ्जूषातः पदं चित्वा रिक्तस्थानं पूरयत — [ शेरते / शये / शेते ] रात्रौ शिशुः सुखेन _______ ।
उत्तरम्: शेते हिंदी: रात में शिशु सुख से 'सोता है' (शेते)। English: The baby 'sleeps' (Shete) peacefully at night.
प्र.(iii) — शब्दार्थ (1 mark): 'शीङ्' इति धातोः अर्थः अस्ति — (क) शयनं करणम् (सोना) (ख) पठनम् (ग) धावनम् (घ) गमनम्
उत्तरम्: (क) हिंदी: 'शीङ्' धातु का अर्थ सोना (नींद) है। English: The root 'Shi' means to sleep.
प्र.(iv) — प्रश्ननिर्माणम् (1 mark):
अधोलिखितवाक्ये रेखाङ्कितपदम् आश्रित्य प्रश्नं रचयत —
शिशुः शेते।
उत्तरम्: कः शेते?हिंदी: 'शिशुः' पुल्लिङ्ग प्रथमा एकवचन है, अतः 'कः' का प्रयोग होगा।
English: 'Shishuh' is the masculine subject, so 'Kah' is used.
SECTION 12 — लघु उत्तरीय प्रश्न (3 Marks)
प्र१. 'वृध्' धातोः लृट्लकारे (भविष्यत्काले) प्रथमपुरुषस्य रूपाणि कानि सन्ति? मूल बिंदु 1 (VP1): एकवचनम् - वर्धिष्यते मूल बिंदु 2 (VP2): द्विवचनम् - वर्धिष्येते, बहुवचनम् - वर्धिष्यन्ते
उत्तरम् (Sanskrit): 'वृध्' धातोः लृट्लकारे (भविष्यत्काले) प्रथमपुरुषस्य रूपाणि सन्ति — वर्धिष्यते (एकवचनम्), वर्धिष्येते (द्विवचनम्), वर्धिष्यन्ते (बहुवचनम्) च।
हिंदी अनुवाद: 'वृध्' (बढ़ना) धातु के भविष्य काल के प्रथम पुरुष के रूप हैं — वर्धिष्यते (एकवचन), वर्धिष्येते (द्विवचन), और वर्धिष्यन्ते (बहुवचन)।
English: The first-person forms of the root 'Vridh' in the future tense (Lrit Lakara) are — Vardhishyate (singular), Vardhishyete (dual), and Vardhishyante (plural).
प्र२. 'लभ्' धातोः लङ्-लकारे (भूतकाले) उत्तमपुरुषस्य रूपाणि लिखत। मूल बिंदु 1 (VP1): एकवचनम् - अलभे मूल बिंदु 2 (VP2): द्विवचनम् - अलभावहि, बहुवचनम् - अलभामहि
उत्तरम् (Sanskrit): 'लभ्' धातोः लङ्-लकारे उत्तमपुरुषस्य रूपाणि सन्ति — अलभे (एकवचनम्), अलभावहि (द्विवचनम्), अलभामहि (बहुवचनम्) च।
हिंदी अनुवाद: 'लभ्' (पाना) धातु के भूतकाल के उत्तम पुरुष के रूप हैं — अलभे (एकवचन), अलभावहि (द्विवचन), और अलभामहि (बहुवचन)।
English: The first-person (Uttama Purusha) forms of the root 'Labh' in the past tense (Lang Lakara) are — Alabhe (singular), Alabhavahi (dual), and Alabhamahi (plural).
प्र३. 'भुज्' धातोः लोट्-लकारे मध्यमपुरुषस्य रूपाणि कानि भवन्ति? मूल बिंदु 1 (VP1): एकवचनम् - भुङ्क्ष्व मूल बिंदु 2 (VP2): द्विवचनम् - भुञ्जाथाम्, बहुवचनम् - भुङ्ग्ध्वम्
उत्तरम् (Sanskrit): 'भुज्' धातोः लोट्-लकारे मध्यमपुरुषस्य रूपाणि सन्ति — भुङ्क्ष्व (एकवचनम्), भुञ्जाथाम् (द्विवचनम्), भुङ्ग्ध्वम् (बहुवचनम्) च।
हिंदी अनुवाद: 'भुज्' (खाना) धातु के लोट् लकार (आज्ञा) के मध्यम पुरुष के रूप हैं — भुङ्क्ष्व (एकवचन), भुञ्जाथाम् (द्विवचन), और भुङ्ग्ध्वम् (बहुवचन)।
English: The second-person (Madhyama Purusha) forms of the root 'Bhuj' in the imperative mood (Lot Lakara) are — Bhunkshva (singular), Bhunjatham (dual), and Bhungdhvam (plural).
SECTION 13 — दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 Marks)
प्र१. 'शीङ्' (शयनं करणम्) धातोः लट्-लकारस्य लङ्-लकारस्य च सम्पूर्ण-रूप-तालिकां लिखत। मूल बिंदु 1 (VP1): लट् (वर्तमान) - शेते, शयाते, शेरते मूल बिंदु 2 (VP2): लट् (वर्तमान) शेषे, शयाथे, शेध्वे / शये, शेवहे, शेमहे मूल बिंदु 3 (VP3): लङ् (भूतकाल) - अशेत, अशयाताम्, अशेरत मूल बिंदु 4 (VP4): लङ् (भूतकाल) - अशेथाः, अशयाथाम्, अशेध्वम् / अशयि, अशेवहि, अशेमहि
उत्तरम् (Sanskrit — तालिका): 'शीङ्' धातोः रूपाणि एवं सन्ति— लट्-लकारः (वर्तमानकालः):
प्रथमपुरुषः: शेते — शयाते — शेरते
मध्यमपुरुषः: शेषे — शयाथे — शेध्वे
उत्तमपुरुषः: शये — शेवहे — शेमहे
लङ्-लकारः (भूतकालः):
प्रथमपुरुषः: अशेत — अशयाताम् — अशेरत
मध्यमपुरुषः: अशेथाः — अशयाथाम् — अशेध्वम्
उत्तमपुरुषः: अशयि — अशेवहि — अशेमहि
हिंदी अनुवाद: 'शीङ्' (सोना) धातु के वर्तमान काल और भूतकाल के रूप ऊपर तालिका में दिए गए हैं। ध्यान दें कि यह एक विशिष्ट आत्मनेपद धातु है, इसलिए इसके रूप (जैसे शेरते, अशेरत) सामान्य धातुओं से थोड़े अलग होते हैं।
English: The complete declension tables for the root 'Shi' (to sleep) in the present tense (Lat Lakara) and past tense (Lang Lakara) are provided above. Note that as a special Atmanepada root, its forms (e.g., Sherate, Asherata) deviate slightly from standard conjugations.
प्र२. 'भुज्' धातोः लट्-लकारस्य लृट्-लकारस्य च सम्पूर्ण-रूप-तालिकां लिखत। मूल बिंदु 1 (VP1): लट् (वर्तमान) - भुङ्क्ते, भुञ्जाते, भुञ्जते मूल बिंदु 2 (VP2): लट् (वर्तमान) - भुङ्क्ष्वे (भुङ्क्ष), भुञ्जाथे, भुङ्ग्वे / भुञ्जे, भुञ्जवहे, भुञ्जमहे मूल बिंदु 3 (VP3): लृट् (भविष्य) - भोक्ष्यते, भोक्ष्येते, भोक्ष्यन्ते मूल बिंदु 4 (VP4): लृट् (भविष्य) - भोक्ष्यसे, भोक्ष्येथे, भोक्ष्यध्वे / भोक्ष्ये, भोक्ष्यावहे, भोक्ष्यामहे
उत्तरम् (Sanskrit — तालिका): 'भुज्' धातोः रूपाणि एवं सन्ति— लट्-लकारः (वर्तमानकालः):
प्रथमपुरुषः: भुङ्क्ते — भुञ्जाते — भुञ्जते
मध्यमपुरुषः: भुङ्क्ष — भुञ्जाथे — भुङ्ग्वे
उत्तमपुरुषः: भुञ्जे — भुञ्जवहे — भुञ्जमहे
लृट्-लकारः (भविष्यत्कालः):
प्रथमपुरुषः: भोक्ष्यते — भोक्ष्येते — भोक्ष्यन्ते
मध्यमपुरुषः: भोक्ष्यसे — भोक्ष्येथे — भोक्ष्यध्वे
उत्तमपुरुषः: भोक्ष्ये — भोक्ष्यावहे — भोक्ष्यामहे
हिंदी अनुवाद: 'भुज्' (खाना/उपभोग करना) धातु के वर्तमान काल और भविष्य काल के रूप ऊपर तालिका में दिए गए हैं। यह भी एक विशिष्ट आत्मनेपद धातु है।
English: The complete declension tables for the root 'Bhuj' (to eat/consume) in the present tense (Lat Lakara) and future tense (Lrit Lakara) are provided above. This is also a special Atmanepada root with unique conjugations.
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