2.4. दंतकथा - Dantakatha - Class 11 -Yuvakbharati
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लेखक: वसंत सबनीस (१९२३-२००२) | विधा: विनोदी ललित लेख (Humorous Essay)
१. शब्दार्थ और मुहावरे (Glossary with English Context)
क. शब्दार्थ (Word Meanings)
शब्द (Word) | अर्थ (Hindi) | अर्थ (English Context) |
मेख | अड़चन / पेंच | Snag / Catch |
उपद्रव | परेशानी / उत्पाद | Nuisance / Disturbance |
अवहेलना | अपमान / उपेक्षा | Mockery / Disdain |
केविलवाणी | दयनीय | Pitiable |
विसंगती | बेमेल / विसंगति | Inconsistency |
फितूर | गद्दार / बागी | Traitorous / Rebellious |
परिसंवाद | चर्चा सत्र | Symposium / Discussion |
लीलया | आसानी से | Effortlessly |
नतद्रष्ट | दुष्ट / अभागा | Wicked / Wretched |
नक्षा उतरणे | गर्व चूर होना | To be humbled |
ख. मुहावरे (Idioms)
मुहावरा (Idiom) | अर्थ (Meaning) | वाक्य प्रयोग (Sentence Usage) |
चारीमुंड्या चीत होणे | पूरी तरह पराजित होना | परशा पहेलवान जैसा बलशाली व्यक्ति भी दातदुखी के सामने चारीमुंड्या चीत हो गया । |
ब्रह्मांडाच्या फेऱ्या होणे | अत्यधिक कष्ट होना | दांत के दर्द के कारण लेखक की रातभर ब्रह्मांडाच्या फेऱ्या झाल्या । |
शंख करणे | जोर-जोर से चिल्लाना | दांत के दर्द ने लेखक को शंख करायला लावले । |
दात घशात घालणे | सबक सिखाना (धमकी) | गुस्से में लोग अक्सर एक-दूसरे को दात घशात घालण्याची धमकी देते हैं । |
तृण धरणे | हार मानना / शरण आना | दांतों की योजना शायद इसलिए हुई ताकि हार मानते समय इंसान तृण धर सके । |
२. परिचय और सारांश (Introduction & Summary)
लेखक परिचय: वसंत सबनीस (१९२३-२००२) एक सुप्रसिद्ध लेखक, विनोदकार और नाटककार थे । उनकी रचनाओं में 'विच्छा माझी पुरी करा' जैसे लोकनाट्य अत्यंत लोकप्रिय रहे हैं ।
केंद्रीय भाव (Central Idea - Bilingual):
हिन्दी: 'दंतकथा' एक हास्यप्रद ललित लेख है, जिसमें दांत के दर्द की असहनीय पीड़ा और उस दौरान मनुष्य की दयनीय अवस्था का अत्यंत मर्मस्पर्शी व विनोदी चित्रण किया गया है ।
English: 'Dantakatha' is a humorous essay that satirically describes the unbearable pain of a toothache and the pitiable condition of a person suffering from it, using clever wordplay and exaggerations.
सारांश (Summary): लेखक का मानना है कि 'दांत' मानव शरीर का छठा महाभूत है, जिसे परमेश्वर ने बहुत बाद में जोड़ा । अन्य अंगों की तुलना में दांत दो बार उगते हैं और आते व जाते समय केवल कष्ट ही देते हैं । लेखक ने शुरुआत में दांत के दर्द का मजाक उड़ाया था, लेकिन जब उनके बलशाली मित्र 'परशा पहेलवान' को दांत के दर्द ने 'बकरा' बना दिया, तब उन्हें इसकी गंभीरता समझ आई ।
जब लेखक का अपना दांत दुखने लगा, तो उन्हें पूरा ब्रह्मांड दांत में ही नजर आने लगा । दांत का दर्द रात में 'राक्षस' जैसा अकराल-विकराल हो जाता है । मोहल्ले के लोग इलाज बताने के बहाने उनके घर जमा हो जाते और एक 'परिसंवाद' शुरू हो जाता । अंत में, इस पीड़ा से तंग आकर लेखक ने दंत चिकित्सक (Dentist) के पास जाकर अपना 'खलदंत' (दुष्ट दांत) निकलवा दिया और चैन की सांस ली ।
३. HSC गद्य आकलन (Prose Pattern)
कृति १: आकलन (Understanding - 2 Marks)
प्रश्न १: लेखक के अनुसार दांतों की विशेषताएं लिखें:
१. ये अन्य अंगों की तरह एक साथ नहीं, बल्कि बाद में आते हैं 。
२. ये एकमात्र अंग हैं जो दो बार उगते हैं 。
३. ये आते समय बुखार और जाते समय पश्चाताप देते हैं 。
४. मराठी भाषा और कवियों ने भी दांतों को अक्सर अपमानजनक संदर्भों में ही इस्तेमाल किया है 。
प्रश्न २: कारण लिखिए:
१. लेखक को दांतों के प्रति प्रेम नहीं है, क्योंकि: बचपन में दांत आते समय उन्होंने पूरे घर को रुलाया था 。
२. दांत के दर्द के समय लेखक 'दाते' या 'दातार' जैसे नाम वाले व्यक्तियों से नहीं मिलना चाहते, क्योंकि: उनकी सहनशक्ति खत्म हो चुकी होती है और वे इन नामों से चिढ़ जाते हैं 。
कृति २: शब्द संपदा (Vocabulary - 2 Marks)
प्रश्न: निम्नलिखित सामासिक शब्दों का विग्रह करें: १. पंचमहाभूते: पाच महाभूतांचा समूह (द्विगु समास) । २. परमेश्वर: परम असा ईश्वर (कर्मधारय समास)। ३. शब्दप्रयोग: शब्दाचा प्रयोग (तत्पुरुष समास)। ४. शेजारीपाजारी: शेजारी, पाजारी व इतर (समाहार द्वंद्व समास)।
कृति ३: अभिव्यक्ति (Personal Response - 2 Marks)
प्रश्न १: 'दांत का दर्द इंसान को आध्यात्मिक बना देता है', पाठ के आधार पर स्पष्ट करें।
उत्तर: लेखक ने दांत के दर्द का बहुत ही विनोदी वर्णन किया है। वे कहते हैं कि जब दांत का दर्द अपने चरम पर होता है, तब इंसान को संसार 'असार' और 'मिथ्या' लगने लगता है । उसे अपनी पत्नी, बच्चे और यहाँ तक कि स्वादिष्ट भोजन भी भास मात्र लगने लगते हैं । उस पीड़ा में उसे केवल दांत ही 'सत्य' महसूस होता है । यह स्थिति किसी ऋषि-मुनि के वैराग्य जैसी होती है, जहाँ बाहरी दुनिया का अस्तित्व खत्म हो जाता है और व्यक्ति केवल अपने 'ब्रह्मांड' (पीड़ा) में खो जाता है ।
७. व्याकरण (Grammar Corner with Explanations)
वाक्य परिवर्तन (Sentence Transformation):
१. "परशाने प्रश्न नम्रपणे विचारला नव्हता।" (होकारार्थी/सकारात्मक करें) उत्तर: परशाने प्रश्न उर्मटपणे विचारला होता। Rule: [Replaced 'not polite' with 'arrogant' to maintain meaning while making it positive.]
२. "शिंव्हाला काय भ्या हाय व्हय कुणाचं?" (विधानार्थी करें) उत्तर: शिंव्हाला कुणाचंच भ्या (भीती) नसतं। Rule: [Converted a rhetorical question into a straightforward assertive statement.]
प्रयोग पहचानें (Recognize Voice):
१. "सगळे खुश होतात।" - कर्तरी प्रयोग 。 २. "डॉक्टरांनी लीलया दात उपटला।" - कर्मणी प्रयोग 。
८. पिछली बोर्ड परीक्षाओं में पूछे गए प्रश्न (Board Questions)
प्रश्न १: 'परशा पहेलवान' का वर्णन लेखक ने किस प्रकार किया है?
उत्तर: परशा जन्म से पहेलवान था और खुद को 'सिंह' कहता था । वह इतना अभिमानी था कि उसे दांत घिसने में भी शर्म आती थी । लेकिन दांत के दर्द ने उस 'सिंह' को 'बकरा' बना दिया, जिससे वह असहाय होकर रोने लगा
प्रश्न २: दांत के दर्द के समय मोहल्ले वालों की क्या प्रतिक्रिया होती थी?
उत्तर: लेखक के अनुसार, जब उनका दांत दुखता था, तो पूरा मोहल्ला जाग जाता था । लोग उनके घर आकर इलाज पर 'परिसंवाद' (Symposium) शुरू कर देते थे 。 हर कोई अपने द्वारा बताए गए नुस्खे से ही आराम मिलने का दावा करता था 。
प्रश्न ३: लेखक ने दांत की तुलना 'चोर' और 'राक्षस' से क्यों की है?
उत्तर: लेखक का कहना है कि दांत का दर्द दिन में सभ्य रहता है, लेकिन रात होते ही वह 'राक्षस' की तरह अकराल-विकराल हो जाता है 。 जिस तरह चोर रात में गड़बड़ करते हैं, वैसे ही दांत का दर्द भी रात में ही सबसे ज्यादा परेशान करता है 。
प्रश्न ४: दंत चिकित्सक (Dentist) के पास जाने के अनुभव का वर्णन करें।
उत्तर: लेखक पहले दंत चिकित्सक से बहुत डरते थे 。 लेकिन डॉक्टर ने उन्हें इंजेक्शन देकर इतनी आसानी से दांत निकाल दिया कि वे आश्चर्यचकित रह गए 。 दांत निकलने के बाद लेखक को इतनी खुशी हुई कि उन्होंने वह दांत डॉक्टर को ही 'अर्पण' कर दिया 。
प्रश्न ५: 'दांत' को 'परमेश्वर द्वारा मारी गई मेख' क्यों कहा गया है?
उत्तर: लेखक के अनुसार, शरीर के अन्य अंग जन्म के साथ आते हैं और बिना दर्द दिए बढ़ते हैं 。 लेकिन दांत बहुत बाद में आते हैं, असहनीय दर्द देते हैं और उनके बिना जीवन अधूरा लगता है, इसीलिए इसे एक दिव्य अड़चन (मेख) माना गया है 。
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