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    2.5. स्मृति - (Smriti) - Class 9 - गद्य-खंड - Rajeev Prakashan

    • 2 hours ago
    • 7 min read

    पाठ का प्रकार: गद्य

    लेखक का नाम: श्रीराम शर्मा

    विधा: संस्मरणात्मक शिकार साहित्य  


    परीक्षा-उपयोगी तथ्य (Quick Exam Facts)

    विषय

    विवरण

    लेखक

    श्रीराम शर्मा  


    जन्म वर्ष

    सन् 1892 ई.  


    पाठ की विधा

    संस्मरण (शिकार साहित्य)  


    पाठ्यपुस्तक

    गद्य-खंड, कक्षा 9

    सबसे प्रसिद्ध पंक्ति

    "दृढ़ संकल्प से दुविधा की बेड़ियाँ कट जाती हैं।"  


    पाठ का केंद्रीय विषय

    बचपन का साहस, भाई का डर और साँप से चिट्ठियाँ बचाने का संघर्ष  


    सर्वाधिक पूछा जाने वाला प्रश्न

    कुएँ में घुसकर चिट्ठियाँ निकालने के निर्णय के पीछे लेखक की क्या मनोदशा थी?  


    1. लेखक परिचय (Author Introduction)

    जन्म एवं स्थान: श्रीराम शर्मा का जन्म सन् 1892 ई. में उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जनपद के किरथरा ग्राम में हुआ था। शिक्षा: संघर्षपूर्ण बचपन के बाद आपने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की। साहित्यिक विशेषता: हिंदी साहित्य में आपको 'शिकार साहित्य' के प्रवर्तक के रूप में जाना जाता है। आपने इस कथेतर विधा को अपनी विशिष्ट वर्णन शैली और रोमांच से लोकप्रिय बनाया। आपके लेखन में पशुओं का मनोविज्ञान और साहसिक विवरण प्रमुख हैं। प्रमुख रचनाएँ:  


    • शिकार साहित्य: प्राणों का सौदा, शिकार, बोलती प्रतिमा, जंगल के जीव।  


    • संस्मरण: सेवाग्राम की डायरी, सन् बयालीस के संस्मरण।  


    • संपादन: आपने 'विशाल भारत' पत्रिका का संपादन किया। निधन: सन् 1967 ई. में आपका देहावसान हुआ।  


    English Summary of Introduction: Shriram Sharma (1892–1967), born in Mainpuri, UP, is a pioneering figure in Hindi 'Hunting Literature' (Shikar Sahitya). His writing blends thrilling adventure with the psychological study of animals. He used a vivid, descriptive style and colloquial language to capture his life experiences, making them as engaging as fiction.  


    2. पाठ का सारांश (Bilingual Summary)

    हिन्दी: 'स्मृति' कहानी सन् 1908 की एक वास्तविक घटना पर आधारित है। कड़कड़ाती ठंड के दिनों में लेखक और उसका छोटा भाई मक्खनपुर डाकखाने में चिट्ठियाँ डालने जा रहे थे। रास्ते में एक सूखे कुएँ में साँप को ढेला मारने की शरारत के दौरान लेखक की टोपी से तीनों जरूरी चिट्ठियाँ कुएँ में गिर गईं, जहाँ एक भयंकर काला साँप रहता था। बड़े भाई की मार के डर और अपनी जिम्मेदारी के बोध के कारण 11 वर्षीय लेखक ने अपनी जान जोखिम में डालकर कुएँ में उतरने का फैसला किया। धोतियों की रस्सी बनाकर वह नीचे उतरा और डंडे की सहायता से साँप को छकाते हुए अपनी बुद्धिमत्ता और साहस से चिट्ठियाँ निकाल लीं।  


    English: 'Smriti' is a gripping memoir from 1908. While going to post urgent letters on a freezing winter day, the 11-year-old author accidentally dropped them into a 36-foot deep dry well inhabited by a lethal black cobra. Terrified of his elder brother's punishment and driven by a sense of duty, he made the perilous decision to descend into the well. Using a rope made of tied dhotis and a bamboo stick, he faced the snake in a confined space. Through sheer courage and quick thinking, he successfully retrieved the letters, embodying the triumph of determination over fear.  


    3. केंद्रीय भाव / मूल संदेश (Central Idea / Theme)

    हिन्दी: इस पाठ का मूल संदेश दृढ़ संकल्प और साहस है। यह दिखाता है कि कैसे एक बच्चा डर पर विजय पाकर असंभव कार्य को संभव बना देता है। लेखक यह भी स्पष्ट करते हैं कि बचपन की स्मृतियाँ हमारे चरित्र निर्माण में सहायक होती हैं और कठिन परिस्थितियों में हमारा धैर्य ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है।  


    English: The core message is determination and bravery. It illustrates how willpower can overcome deep-seated fear and lead to success in life-threatening situations. The story also highlights the innocence and integrity of childhood, where duty is performed with absolute honesty.  


    4. गद्यांश - ससन्दर्भ व्याख्या (Reference, Context & Explanation)

    महत्वपूर्ण अंश 1: "दृढ़ संकल्प से - - - कुएँ में घुसने की ठानी।" (क) सन्दर्भ: प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक 'गद्य-खंड' के 'स्मृति' नामक संस्मरण से लिया गया है। इसके लेखक श्रीराम शर्मा हैं। (ख) प्रसंग: जब चिट्ठियाँ कुएँ में गिर जाती हैं, तब लेखक के मन में चल रहे अंतर्द्वंद्व और अंतिम निर्णय का वर्णन है। (ग) व्याख्या: लेखक कहते हैं कि जब हम किसी कार्य को करने का पक्का इरादा कर लेते हैं, तो मन की सारी दुविधाएँ और हिचकिचाहट समाप्त हो जाती है। यद्यपि कुएँ में साक्षात् मौत (साँप) बैठी थी, फिर भी लेखक ने अपने डंडे पर विश्वास कर और अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए उस खतरे का सामना करने का साहसिक निर्णय लिया। (घ) साहित्यिक विशेषता:  


    • शैली: विवेचनात्मक और प्रेरणादायक।  


    • भाव: साहस और कर्तव्य-परायणता की पराकाष्ठा।  


    महत्वपूर्ण अंश 2: "मनुष्य का अनुमान - - - असंभवता प्रतीत हो गई।" (क) सन्दर्भ: पूर्ववत्। (ख)

    प्रसंग: कुएँ के नीचे साँप से आमने-सामने होने पर लेखक की योजना की विफलता का वर्णन। (ग) व्याख्या: लेखक ने सोचा था कि वह डंडे से साँप को मार देगा, लेकिन नीचे उतरने पर उसने देखा कि कुआँ बहुत संकरा है और डंडा चलाने की जगह ही नहीं है। यहाँ लेखक दार्शनिक भाव से कहते हैं कि इंसान भविष्य के लिए जो योजनाएँ बनाता है, वे हकीकत के सामने अक्सर गलत और निष्फल साबित होती हैं। (घ) साहित्यिक विशेषता:  


    • मुहावरा: 'आकाश-कुसुम' (असंभव बात) का सटीक प्रयोग।


    5. शब्दार्थ / शब्द-संपदा (Glossary)

    शब्द

    अर्थ

    पर्यायवाची

    विलोम

    आकुल

    व्याकुल / बेचैन

    उद्विग्न

    शांत

    उझककर

    झाँककर

    निहारकर

    ---

    मृगशावक

    हिरन का बच्चा

    छौना

    ---

    चक्षुश्रवा

    आँखों से सुनने वाला (साँप)

    सर्प, भुजंग

    ---

    दुधारी

    दोनों ओर धार वाली

    तीक्ष्ण

    ---

    प्रतिद्वंद्वी

    विरोधी / शत्रु

    विपक्षी

    मित्र

    जद्दोजहद

    कठिन संघर्ष

    प्रयास

    ---

    सजल नेत्र

    आँसुओं से भरी आँखें

    अश्रुपूरित

    ---

    ताकीद

    निर्देश / चेतावनी

    हिदायत

    ---

    धौंकनी

    तेज़ साँस चलना

    ---

    ---


    6. सही या गलत - कारण सहित (True or False with Reason)

    कथन 1: लेखक ने यह घटना अपनी माँ को सन् 1908 में ही बता दी थी।

    • उत्तर: गलत - कारण: लेखक ने यह साहसिक घटना सन् 1915 में मैट्रिक की परीक्षा पास करने के बाद माँ को सुनाई थी।


    कथन 2: कुएँ की गहराई 36 फीट (24 हाथ) थी।

    • उत्तर: सही - कारण: पाठ में उल्लेख है कि कुआँ चौबीस हाथ गहरा था और लेखक 36 फीट ऊपर चढ़कर आया।


    कथन 3: लेखक ने साँप को डंडे से मार दिया था।

    • उत्तर: गलत - कारण: लेखक ने साँप को मारा नहीं, बल्कि डंडे से उसे छकाकर और मिट्टी फेंककर उसका ध्यान भटकाया और चिट्ठियाँ निकाल लीं।


    कथन 4: चिट्ठियाँ लेखक के कुर्ते की जेब से गिरी थीं।

    • उत्तर: गलत - कारण: लेखक के कुर्ते में जेबें नहीं थीं, चिट्ठियाँ उसकी टोपी में रखी थीं।


    7. लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions - 2 अंक प्रत्येक)

    प्रश्न 1: भाई साहब ने लेखक को क्या काम सौंपा था?

    • उत्तर: भाई साहब ने लेखक को कुछ बहुत जरूरी पत्र दिए थे और उन्हें तुरंत मक्खनपुर डाकखाने की शाम की डाक में डालने के लिए कहा था।


    प्रश्न 2: लेखक का डंडा 'नारायण-वाहन' क्यों बन चुका था?

    • उत्तर: क्योंकि उस डंडे से लेखक ने पहले भी कई साँपों को मारा था। जैसे गरुड़ (नारायण का वाहन) साँपों का शत्रु है, वैसे ही लेखक का डंडा साँपों के लिए घातक था।


    प्रश्न 3: चिट्ठियाँ कुएँ में गिरते ही लेखक की क्या दशा हुई?

    • उत्तर: लेखक को लगा जैसे उसके शरीर से प्राण निकल गए हों। वह पिटने के डर और चिट्ठियाँ न पहुँचने की जिम्मेदारी के बोझ से घबराकर कुएँ के किनारे बैठकर रोने लगा।


    प्रश्न 4: लेखक ने कुएँ से बाहर आने के लिए किस शक्ति का प्रयोग किया?

    • उत्तर: लेखक ने केवल अपनी भुजाओं के बल पर, बिना पैरों का सहारा लिए, एक-एक इंच सरकते हुए 36 फीट की ऊँचाई तय की।


    8. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions - 5 अंक प्रत्येक)

    प्रश्न 1: 'स्मृति' पाठ के आधार पर लेखक (श्रीराम शर्मा) की चारित्रिक विशेषताओं का वर्णन कीजिए।  


    • उत्तर: 'स्मृति' संस्मरण में लेखक के व्यक्तित्व के कई प्रेरक पहलू उभरते हैं:

    • साहस: एक जहरीले साँप वाले कुएँ में उतरना लेखक के अदम्य साहस को दर्शाता है।

    • कर्तव्यनिष्ठा: पिटने के डर से अधिक लेखक को इस बात की चिंता थी कि चिट्ठियाँ समय पर नहीं पहुँचीं तो क्या होगा।

    • सत्यवादिता: बचपन में लेखक झूठ बोलना नहीं जानते थे और सच बोलकर पिटने के लिए तैयार थे।

    • प्रत्युत्पन्नमति: कुएँ के संकरे स्थान पर जब डंडा चलाना असंभव हुआ, तो उन्होंने मिट्टी फेंककर साँप का ध्यान भटकाया और अपना काम पूरा किया।


    प्रश्न 2: कुएँ के अंदर लेखक और साँप के बीच हुए संघर्ष (द्वंद्व) का सजीव चित्रण कीजिए।

    • उत्तर: कुएँ के भीतर का दृश्य अत्यंत भयानक था। साँप फन फैलाए घातक मुद्रा में बैठा था और लेखक बीचोंबीच धोती पकड़े लटक रहा था। लेखक ने जैसे ही डंडे से चिट्ठियों को सरकाना चाहा, साँप ने बिजली की गति से डंडे पर तीन-चार बार हमला किया और अपना विष डंडे पर छोड़ दिया। एक समय तो साँप का ठंडा शरीर लेखक के हाथों से भी छू गया था। अंततः लेखक ने बुद्धिमानी से काम लिया; उन्होंने एक हाथ से मिट्टी दाईं ओर फेंकी, जिससे साँप उस पर झपटा और उसी क्षण लेखक ने बाईं ओर से चिट्ठियाँ और अपना डंडा उठा लिया।


    9. व्याकरण - पाठ पर आधारित (Grammar from the Lesson)

    समास-विग्रह:

    • चक्षुश्रवा: आँखों से सुनने वाला - साँप (बहुब्रीहि समास)।

    • भ्रातृ-स्नेह: भाई का स्नेह (तत्पुरुष समास)।

    • एकाग्रचित: एक है अग्र (नोक) जिसका ऐसा चित्त (बहुब्रीहि/कर्मधारय)।


    वाक्य प्रकृति:

    • "दृढ़ संकल्प से दुविधा की बेड़ियाँ कट जाती हैं": सरल वाक्य।

    • "जाड़े के दिन थे ही, तिस पर हवा के प्रकोप से कँपकँपी लग रही थी": संयुक्त वाक्य।


    प्रत्यय:

    • कठिनाई: कठिन + आई। (इसी प्रकार: भलाई, चतुराई, बुराई, धुनाई)


    10. पिछली बोर्ड परीक्षाओं में पूछे गए प्रश्न (Previous Years' Board Questions)

    प्रश्न 1: 'प्राणों का सौदा' किसकी रचना है?  

    • उत्तर: यह श्रीराम शर्मा का प्रसिद्ध शिकार साहित्य है।  


    प्रश्न 2: लेखक ने अपनी साहसिक कहानी माँ को किस वर्ष सुनाई?

    • उत्तर: सन् 1915 ई. में मैट्रिक पास करने के बाद।


    11. UP Board परीक्षा में इस पाठ से अपेक्षित प्रश्न (Expected Exam Questions)


    5 अंक - दीर्घ उत्तरीय:

    • 'स्मृति' पाठ का सारांश अपने शब्दों में लिखिए और इसका उद्देश्य स्पष्ट कीजिए।  

    6 अंक - गद्यांश व्याख्या:

    • "दृढ़ संकल्प से दुविधा की बेड़ियाँ कट जाती हैं... चिट्ठियाँ निकालने का निश्चय किया।"

    2 अंक - लघु उत्तरीय:

    • 'डेंग' किसे कहते हैं? (वह लकड़ी जिस पर कुएँ का चरस-पुर टिकता है)

    • साँप को 'चक्षुश्रवा' क्यों कहा जाता है? (क्योंकि माना जाता है कि वह आँखों से सुनता है)

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