2.6. गिल्लू - (Gillu) - Class 9 - गद्य-खंड - Rajeev Prakashan
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पाठ का प्रकार: गद्य
लेखिका का नाम: महादेवी वर्मा
विधा: रेखाचित्र (काव्य संग्रह 'मेरा परिवार' से संकलित)
परीक्षा-उपयोगी तथ्य (Quick Exam Facts)
विषय | विवरण |
लेखिका | महादेवी वर्मा |
जन्म वर्ष | सन् 1907 ई. |
पाठ की विधा | रेखाचित्र |
पाठ्यपुस्तक | गद्य-खंड, कक्षा 9 |
सबसे प्रसिद्ध पंक्ति | "उस लघुगात का, किसी वासंती दिन, जुही के पीताभ छोटे फूल में खिल जाने का विश्वास, मुझे संतोष देता है।" |
पाठ का केंद्रीय विषय | मानवेतर प्राणियों के प्रति असीम करुणा, ममत्व और लगाव |
सर्वाधिक पूछा जाने वाला प्रश्न | गिल्लू के अंत का वर्णन कीजिए और लेखिका ने उसकी प्राण रक्षा कैसे की? |
1. लेखिका परिचय (Author Introduction)
जन्म एवं स्थान: महादेवी वर्मा का जन्म सन् 1907 ई. में उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद में हुआ था। शिक्षा एवं कार्यक्षेत्र: आपने प्रयागराज के क्रास्टवेट कॉलेज से शिक्षा पाई और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से संस्कृत में एम.ए. किया। आप 'प्रयाग महिला विद्यापीठ' की प्राचार्य रहीं और प्रसिद्ध पत्रिका 'चाँद' का संपादन किया। साहित्यिक व्यक्तित्व: आप छायावाद के चार स्तंभों में से एक हैं। आपने अपने रेखाचित्रों के माध्यम से उपेक्षित स्त्री पात्रों और पशु-पक्षियों के जीवन-संघर्ष को हिंदी गद्य में प्रमुख स्थान दिया। प्रमुख रचनाएँ:
काव्य: नीहार, रश्मि, नीरजा, सांध्यगीत, यामा।
रेखाचित्र एवं संस्मरण: अतीत के चलचित्र, स्मृति की रेखाएँ, पथ के साथी, मेरा परिवार।
निबंध: शृंखला की कड़ियाँ। सम्मान: आपको ज्ञानपीठ पुरस्कार, भारत भारती, और पद्मभूषण से सम्मानित किया गया। निधन: सन् 1987 ई. में प्रयाग में आपका निधन हुआ।
English Summary of Introduction: Mahadevi Varma (1907–1987), born in Farrukhabad, UP, was a legendary poetess and prose writer of the Chhayavad era. Known as the "Modern Meera," she served as the Principal of Prayag Mahila Vidyapeeth. Her literary works, especially her sketches of animals and marginalized people, brought a unique depth of compassion and social inclusion to Hindi literature.
2. पाठ का सारांश (Bilingual Summary)
हिन्दी: 'गिल्लू' लेखिका की असीम करुणा का सजीव उदाहरण है। लेखिका को एक दिन गमले और दीवार की संधि में गिलहरी का एक घायल बच्चा मिलता है, जिसे कौवों ने अपनी चोंचों से घायल कर दिया था। सबने उसे मृतप्राय मान लिया था, लेकिन लेखिका ने उसका उपचार किया और उसे नया जीवन दिया। गिल्लू नाम का यह छोटा जीव लेखिका के परिवार का हिस्सा बन गया। वह लेखिका की थाली में खाना खाता, उनका ध्यान खींचने के लिए परदों पर दौड़ता और लेखिका की बीमारी में एक परिचारिका की तरह उनके सिर को सहलाता था। दो वर्ष की अपनी छोटी सी जीवन-यात्रा के बाद गिल्लू की मृत्यु हो गई और उसे उसकी प्रिय सोनजुही की लता के नीचे समाधि दी गई।
English: 'Gillu' is a heart-touching sketch reflecting the deep bond between Mahadevi Varma and a tiny squirrel. One morning, the author rescues a baby squirrel injured by crows and nurses it back to health against all odds. Named 'Gillu', the creature becomes a beloved companion, eating from her plate and soothing her during her illness. The story highlights Gillu's intelligence and his unique ways of showing affection. After completing his brief life cycle of two years, Gillu passes away and is buried under his favorite Sonjuhi vine, where the author believes he will one day bloom as a yellow flower.
3. केंद्रीय भाव / मूल संदेश (Central Idea / Theme)
हिन्दी: इस पाठ का मूल संदेश मानवेतर प्राणियों के प्रति संवेदना और प्रेम है। लेखिका यह बताना चाहती हैं कि पशु-पक्षी भी मनुष्य के प्रेम और करुणा को समझते हैं और उसी समर्पण भाव से प्रतिक्रिया देते हैं। हमारा पर्यावरण तभी सुंदर बनेगा जब हम इन लघुप्राणों के प्रति संवेदनशील होंगे।
English: The core message is empathy and compassion towards animals. The author illustrates that animals reciprocate human love with equal devotion and intelligence. It urges readers to observe their surroundings with kindness, emphasizing that even the smallest life forms deserve dignity and protection.
4. गद्यांश - ससन्दर्भ व्याख्या (Reference, Context & Explanation)
महत्वपूर्ण अंश 1: "सोनजुही में आज - - - लघुप्राण की खोज है।"
(क) सन्दर्भ: प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक 'गद्य-खंड' के 'गिल्लू' शीर्षक रेखाचित्र से लिया गया है। इसकी लेखिका महादेवी वर्मा हैं। (ख) प्रसंग: लेखिका सोनजुही की कली देखकर अपने प्रिय गिल्लू को याद कर रही हैं। (ग) व्याख्या: सोनजुही पर खिली पीली कली लेखिका को गिल्लू की याद दिलाती है, जो अक्सर उस लता की हरियाली में छिपकर बैठा रहता था और अचानक लेखिका के कंधे पर कूद पड़ता था। आज वह छोटा जीव (गिल्लू) नहीं है, वह मिट्टी में मिल चुका है, लेकिन उसकी स्मृतियाँ आज भी ताज़ा हैं। (घ) साहित्यिक विशेषता:
भाषा: तत्सम प्रधान और बिंबात्मक।
भाव: स्मृतियों में रची-बसी करुणा की अभिव्यक्ति।
महत्वपूर्ण अंश 2: "मेरी अस्वस्थता में - - - परिचारिका के हटने के समान लगता।"
(क) सन्दर्भ: पूर्ववत्। (ख) प्रसंग: लेखिका की बीमारी के दौरान गिल्लू की सेवा भावना का वर्णन। (ग) व्याख्या: जब लेखिका मोटर दुर्घटना में घायल होकर अस्पताल से लौटीं, तब गिल्लू उनके तकिये के पास बैठकर अपने नन्हें पंजों से उनके सिर और बालों को सहलाता था। उसका यह व्यवहार किसी समर्पित नर्स (परिचारिका) जैसा था, जो लेखिका के प्रति उसके असीम लगाव को दर्शाता है। (घ) साहित्यिक विशेषता:
उपमा: गिल्लू के व्यवहार की तुलना 'परिचारिका' से की गई है।
5. शब्दार्थ / शब्द-संपदा (Glossary)
शब्द | अर्थ | पर्यायवाची | विलोम |
लघुप्राण | छोटा जीव | सूक्ष्मजीवी | दीर्घजीवी |
निश्चेष्ट | बिना हिले-डुले | जड़, सुप्त | सचेष्ट |
स्निग्ध | चिकना / कोमल | कोमल | रूखा |
विस्मित | हैरान | आश्चर्यचकित | --- |
गात | शरीर | देह, तन | --- |
परिचारिका | सेविका / नर्स | दासी | --- |
मरणासन्न | मरने के निकट | मुमूर्षु | जीवित |
उष्णता | गर्मी | गर्मी, ताप | शीतलता |
पीताभ | पीली चमक वाला | पीतवर्ण | --- |
अनायास | अचानक | सरलता से | सायास |
6. सही या गलत - कारण सहित (True or False with Reason)
कथन 1: गिल्लू लेखिका की थाली में बैठकर खाना खाता था।
उत्तर: सही - कारण: लेखिका के अनुसार, गिल्लू एकमात्र ऐसा प्राणी था जिसने उनकी थाली में खाने की हिम्मत दिखाई थी।
कथन 2: गिलहरियों के जीवन की अवधि पाँच वर्ष होती है।
उत्तर: गलत - कारण: गिलहरियों की जीवन अवधि दो वर्ष से अधिक नहीं होती।
कथन 3: गिल्लू का प्रिय भोजन बिस्कुट था।
उत्तर: गलत - कारण: गिल्लू का सबसे प्रिय खाद्य काजू था।
कथन 4: लेखिका ने गिल्लू को सोनजुही की लता के नीचे समाधि दी।
उत्तर: सही - कारण: क्योंकि वह लता उसे बहुत प्रिय थी और लेखिका को विश्वास था कि वह कली बनकर वहीं खिलेगा।
7. लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions - 2 अंक प्रत्येक)
प्रश्न 1: लेखिका ने कौवे को 'विचित्र पक्षी' क्यों कहा है?
उत्तर: क्योंकि वह एक साथ सम्मानित और अपमानित है। पितरपक्ष में पुरखों के रूप में उसे आदर मिलता है, लेकिन सामान्य दिनों में उसकी कर्कश आवाज़ के कारण उसे तुच्छ समझा जाता है।
प्रश्न 2: गिल्लू ने लेखिका का ध्यान आकर्षित करने के लिए क्या उपाय निकाला?
उत्तर: वह लेखिका के पैरों तक आकर तेज़ी से परदे पर चढ़ जाता और फिर उसी तेज़ी से उतरता था। यह क्रम तब तक चलता जब तक लेखिका उसे पकड़ने के लिए नहीं उठतीं।
प्रश्न 3: लेखिका के अस्पताल में रहने के दौरान गिल्लू की क्या स्थिति थी?
उत्तर: गिल्लू बहुत उदास रहता था। उसने अपना प्रिय भोजन काजू भी बहुत कम खाया और अक्सर अपने झूले से उतरकर किसी को देखने पर वापस घोंसले में छिप जाता था।
प्रश्न 4: गिल्लू गर्मी से बचने के लिए क्या करता था?
उत्तर: वह लेखिका के पास रखी सुराही पर लेट जाता था। इससे वह लेखिका के समीप भी रहता था और उसे सुराही की ठंडक भी मिलती थी।
8. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions - 5 अंक प्रत्येक)
प्रश्न 1: महादेवी वर्मा का जीवन-परिचय देते हुए उनकी गद्य शैली की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर: महादेवी वर्मा (1907-1987) हिंदी साहित्य की 'आधुनिक मीरा' कही जाती हैं। उनकी शिक्षा प्रयाग में हुई और वे आजीवन प्रयाग महिला विद्यापीठ से जुड़ी रहीं। उनकी गद्य शैली तत्सम प्रधान, बिंबात्मक और सधी हुई है। वे अपने रेखाचित्रों में सूक्ष्म विवरणों और मानवीय संवेदनाओं को सजीव कर देती हैं। उनके लेखन में पशु-पक्षियों के प्रति असीम करुणा और समाज के उपेक्षित वर्गों के प्रति गहरी सहानुभूति दिखाई देती है।
प्रश्न 2: गिल्लू की जीवन-यात्रा के अंतिम क्षणों का मार्मिक वर्णन कीजिए।
उत्तर: गिल्लू के दो वर्ष पूरे होते ही उसकी जीवन-यात्रा का अंत आ गया। अंतिम दिन उसने न कुछ खाया, न वह बाहर गया। रात की भीषण पीड़ा में भी वह लेखिका के बिस्तर पर आया और अपने ठंडे पंजों से उनकी वही उँगली पकड़ ली, जो उसने बचपन में पकड़ी थी। लेखिका ने हीटर जलाकर उसे गर्मी देने की कोशिश की, लेकिन सुबह की पहली किरण के साथ ही वह हमेशा के लिए सो गया। उसकी मृत्यु के बाद उसका झूला उतार दिया गया और जाली बंद कर दी गई।
9. व्याकरण - पाठ पर आधारित (Grammar from the Lesson)
समास पहचानें:
अनायास: न आयास (अव्ययीभाव / नञ् तत्पुरुष)
लघुप्राण: लघु हैं प्राण जिसके (बहुब्रीहि)
जातिवाचक: जाति का वाचक (तत्पुरुष)
चिक-चिक: द्वंद्व या पुनरुक्ति प्रकाश
प्रत्यय:
सम्मानित: सम्मान + इत
उष्णता: उष्ण + ता (इसी प्रकार: कोमलता, मानवता, सुंदरता)
चमकीली: चमक + ईली
पर्यायवाची:
डाल: शाखा, टहनी।
कौवा: काक, वायस, पिशुन।
10. पिछली बोर्ड परीक्षाओं में पूछे गए प्रश्न (Previous Years' Board Questions)
प्रश्न 1: 'नीहार' किस विधा की रचना है?
उत्तर: यह महादेवी वर्मा का प्रथम कविता संकलन है।
प्रश्न 2: गिल्लू को 'समाधि' कहाँ दी गई?
उत्तर: गिल्लू को सोनजुही की लता के नीचे समाधि दी गई।
11. UP Board परीक्षा में इस पाठ से अपेक्षित प्रश्न (Expected Exam Questions)
5 अंक - दीर्घ उत्तरीय:
'गिल्लू' रेखाचित्र के आधार पर सिद्ध कीजिए कि पशु-पक्षी भी मनुष्य के सच्चे मित्र होते हैं।
6 अंक - गद्यांश व्याख्या:
"सोनजुही की लता के नीचे गिल्लू को समाधि दी गई है... पीताभ छोटे फूल में खिल जाने का विश्वास, मुझे संतोष देता है।"
2 अंक - लघु उत्तरीय:
लेखिका ने गिल्लू को मुक्त करने के लिए क्या किया?
गिल्लू की आँखों की तुलना किससे की गई है? (नीले काँच के मोतियों से)
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