2.7. गुरु नानकदेव - Class 9 - गद्य-खंड - Rajeev Prakashan
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पाठ का प्रकार: गद्य
लेखक का नाम: आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी
विधा: ललित निबंध
परीक्षा-उपयोगी तथ्य (Quick Exam Facts)
विषय | विवरण |
लेखक | आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी |
जन्म वर्ष | सन् 1907 ई. |
पाठ की विधा | निबंध |
पाठ्यपुस्तक | गद्य-खंड, कक्षा 9 |
सबसे प्रसिद्ध पंक्ति | "एक जोति ते जग ऊपजा कौन भले कौन मंदे!" |
पाठ का केंद्रीय विषय | गुरु नानकदेव का जीवन-दर्शन, प्रेम और सांप्रदायिक सौहार्द |
सर्वाधिक पूछा जाने वाला प्रश्न | गुरु नानकदेव के अनुसार 'सच्चा प्रेम' और 'निर्भयता' क्या है? |
1. लेखक परिचय (Author Introduction)
जन्म एवं स्थान: आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का जन्म सन् 1907 ई. में उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद के ओझवलिया गाँव में हुआ था।
शिक्षा: आपने ज्योतिष विषय से शास्त्राचार्य की उपाधि प्राप्त की थी।
साहित्यिक व्यक्तित्व: आप हिंदी के मूर्धन्य विद्वान, निबंधकार, उपन्यासकार और आलोचक थे। आपने शांतिनिकेतन, काशी हिंदू विश्वविद्यालय और पंजाब विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों में अपनी सेवाएँ दीं।
प्रमुख रचनाएँ:
निबंध: अशोक के फूल, कल्पलता, कुटज, आलोक पर्व।
उपन्यास: बाणभट्ट की आत्मकथा, पुनर्नवा, अनामदास का पोथा।
इतिहास/आलोचना: हिंदी साहित्य की भूमिका, हिंदी साहित्य का आदिकाल, कबीर, सूर साहित्य।
सम्मान: आपको पद्मभूषण और साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
निधन: सन् 1979 ई. में दिल्ली में आपका निधन हुआ।
English Summary of Introduction:
Hazari Prasad Dwivedi (1907–1979) was a legendary Hindi essayist, novelist, and literary historian born in Ballia, UP. A scholar of Sanskrit, Pali, and Prakrit, he is known for his humanist approach and inclusive vision. He taught at Shantiniketan and was honored with the Padma Bhushan and the Sahitya Akademi Award.
2. पाठ का सारांश (Bilingual Summary)
हिन्दी:
'गुरु नानकदेव' निबंध में आचार्य द्विवेदी ने सिक्ख धर्म के प्रवर्तक गुरु नानकदेव के जीवन और उनके महान विचारों को रेखांकित किया है। गुरुजी का जन्म तलवंडी में हुआ था और उनका बाल्यकाल सांप्रदायिक सौहार्द के वातावरण में बीता। नौकरी के दौरान 'तेरा' (तेरह) की रट ने उन्हें आध्यात्मिक शिखर पर पहुँचा दिया। उन्होंने कामरूप से मक्का-मदीना तक लंबी यात्राएँ कीं और विश्व को प्रेम, निर्भयता और अहंकारहीनता का संदेश दिया। द्विवेदी जी बताते हैं कि नानक के अनुसार बाह्य आडंबर धर्म नहीं हैं, बल्कि हृदय में विराजमान परमात्मा से सच्चा प्रेम ही वास्तविक धर्म है। उन्होंने जाति-पाँति का विरोध कर 'एक ज्योति' से उत्पन्न संसार में सबकी समानता का समर्थन किया।
English:
In this essay, Dwivedi highlights the life and teachings of Guru Nanak Dev, the founder of Sikhism. Born in Talwandi, Nanak’s childhood was influenced by communal harmony. While weighing flour, the word 'Tera' (meaning 'Thirteen' in Punjabi but also 'Yours' in Hindi) triggered a spiritual realization in him, leading him to dedicate his life to God. He traveled extensively from India to Baghdad and Mecca, spreading the message of Universal Love, Fearlessness, and Ego-less existence. He rejected external rituals, emphasizing that God resides within and true religion lies in equality and kindness toward all.
3. केंद्रीय भाव / मूल संदेश (Central Idea / Theme)
हिन्दी:
इस पाठ का मूल संदेश मानवीय एकता और आंतरिक शुद्धता है। लेखक यह समझाना चाहते हैं कि मनुष्य को अहंकार और संकीर्णता त्याग कर प्रेम को सर्वोच्च मूल्य मानना चाहिए। "डरो मत और डराओ मत" नानक का वह मंत्र है जो आज के युग में भी प्रासंगिक है।
English:
The core message is human unity and inner purity. It encourages individuals to renounce ego and sectarianism, embracing love as the supreme value. Nanak's motto "Do not fear and do not frighten" remains eternally relevant for a peaceful world.
4. गद्यांश - ससन्दर्भ व्याख्या (Reference, Context & Explanation)
महत्वपूर्ण अंश 1: "आटा तौलते समय - - - 'तेरा' 'तेरा' 'तेरा'।"
(क) सन्दर्भ: प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक 'गद्य-खंड' के 'गुरु नानकदेव' नामक निबंध से लिया गया है। इसके लेखक हजारी प्रसाद द्विवेदी हैं।
(ख) प्रसंग: लेखक गुरु नानकदेव के जीवन की उस घटना का वर्णन कर रहे हैं जिसने उन्हें वैराग्य की ओर प्रेरित किया।
(ग) व्याख्या: सुल्तानपुर के मोदीखाने में नौकरी करते हुए जब नानक अनाज तौल रहे थे, तब 'तेरह' (13) संख्या पर पहुँचते ही उनके मन में 'मैं तेरा (ईश्वर का) हूँ' का भाव जग गया। वे इस विचार में इतने लीन (तन्मय) हो गए कि हाथ तौलते रहे और मुँह से केवल 'तेरा' शब्द निकलता रहा। यह उनकी गहरी भगवन्निष्ठा का प्रतीक था।
(घ) साहित्यिक विशेषता:
शैली: वर्णनात्मक और रोचक।
भाव: लौकिक कार्य से अलौकिक प्रेम की ओर संक्रमण।
महत्वपूर्ण अंश 2: "अन्यायी से भय - - - दूसरे मार्ग धोखा हैं।"
(क) सन्दर्भ: पूर्ववत्।
(ख) प्रसंग: गुरु नानकदेव द्वारा प्रतिपादित निर्भयता और निर्वैरता के सिद्धांत की व्याख्या।
(ग) व्याख्या: लेखक के अनुसार, जो व्यक्ति किसी अन्यायी के सामने नहीं झुकता, वही सच्चा निर्भय है। नानक ने सिखाया कि मनुष्य को न किसी से डरना चाहिए और न ही किसी को डराना चाहिए। निर्भयता के साथ मन में किसी के प्रति बैर (दुश्मनी) न होना ही ईश्वर के प्रेम को पाने का एकमात्र सही रास्ता है।
(घ) साहित्यिक विशेषता:
संदेश: साहस और क्षमा का संतुलन।
5. शब्दार्थ / शब्द-संपदा (Glossary)
शब्द | अर्थ | पर्यायवाची | विलोम |
आविर्भाव
| प्रकट होना | उदय | तिरोभाव |
तन्मय
| लीन | मग्न | --- |
उच्छ्वसित
| प्रकट होना | प्रवाहित | --- |
अगम
| जहाँ पहुँचा न जा सके | अगम्य | सुगम |
विगतस्पृह
| इच्छा रहित | निस्पृह | स्पृह |
उद्विग्न
| परेशान | व्याकुल | शांत |
निर्वैरता
| बैर न होना | शत्रुता रहित | वैर |
उन्मुख
| ऊपर की ओर मुख | तत्पर | विमुख |
संकीर्णता
| तंगदिली | संकुचित भाव | व्यापकता |
आडंबर
| दिखावा | पाखंड | सादगी |
6. सही या गलत - कारण सहित (True or False with Reason)
कथन 1: गुरु नानकदेव का जन्म एक मुस्लिम परिवार में हुआ था।
उत्तर: गलत - कारण: उनका जन्म तलवंडी के एक खत्री परिवार में हुआ था।
कथन 2: नानक के साथ रहने वाले मुसलमान रागी का नाम मरदाना था।
उत्तर: सही - कारण: मरदाना उनकी वाणियों को राग के ढाँचे में बाँधकर स्मरण रखते थे।
कथन 3: नानकदेव ने मक्का और यरूशलम की भी यात्रा की थी।
उत्तर: सही - कारण: उन्होंने पश्चिम की चौथी यात्रा में हाजी के रूप में मक्का, यरूशलम और बगदाद का भ्रमण किया था।
कथन 4: 'विगतस्पृह' उस व्यक्ति को कहते हैं जिसके मन में बहुत अधिक इच्छाएँ हों।
उत्तर: गलत - कारण: 'विगतस्पृह' वह है जो सभी सांसारिक इच्छाओं और संचय की भावना से मुक्त हो गया हो।
7. लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions - 2 अंक प्रत्येक)
प्रश्न 1: 'मैं तेरा हूँ'—इस कथन का नानक के जीवन में क्या महत्व है?
उत्तर: यह कथन नानक के पूर्ण आत्म-समर्पण का प्रतीक है। अनाज तौलते समय इस भाव ने उन्हें नौकरी के बंधन से मुक्त कर अध्यात्म के मार्ग पर अग्रसर कर दिया।
प्रश्न 2: गुरु नानकदेव ने असली 'धर्म' किसे माना है?
उत्तर: नानक के अनुसार बाह्य आडंबर और पुराने संस्कार धर्म नहीं हैं; हृदय में विराजमान परमात्मा के प्रति सच्चा प्रेम ही वास्तविक धर्म है।
प्रश्न 3: नानक के अनुसार 'निराश' व्यक्ति कौन है?
उत्तर: नानक 'निराश' उसे कहते हैं जिसके मन में किसी वस्तु को पाने या इकट्ठा करने की कोई इच्छा (स्पृहा) न हो।
प्रश्न 4: "डरो मत और डराओ मत" का क्या संदेश है?
उत्तर: यह संदेश निर्भयता और अहिंसा का है। यह सिखाता है कि आत्म-सम्मान के साथ जिएँ और दूसरों के अधिकारों का हनन न करें।
8. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions - 5 अंक प्रत्येक)
प्रश्न 1: गुरु नानकदेव की चारित्रिक विशेषताओं का वर्णन निबंध के आधार पर कीजिए।
उत्तर: गुरु नानकदेव का व्यक्तित्व अत्यंत मोहक और प्रभावशाली था। उनकी प्रमुख विशेषताएँ निम्न हैं:
सांप्रदायिक सौहार्द: वे हिंदू और मुसलमान दोनों से समान प्रेम करते थे और भेदभाव के विरोधी थे।
दृढ़ विश्वासी: उनका परमात्मा पर अखंड विश्वास था, वे मानते थे कि हर साँस का हिसाब ईश्वर के पास है।
निर्भय और निरहंकार: वे न किसी से डरते थे और न किसी को डराते थे। उनमें लेशमात्र भी घमंड नहीं था।
लोक-संग्राहक: उन्होंने दूर-दराज की यात्राएँ कर लोगों को सत्य और प्रेम का मार्ग दिखाया।
प्रश्न 2: आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी की भाषा-शैली पर प्रकाश डालिए।
उत्तर: आचार्य द्विवेदी की भाषा तत्सम प्रधान होते हुए भी अत्यंत प्रवाहपूर्ण और सजीव है। उनकी शैली की विशेषताएँ हैं:
शब्दों का साहचर्य: वे संस्कृत के साथ-साथ तद्भव, देशज और विदेशी शब्दों का कुशलता से प्रयोग करते हैं।
पांडित्य और सरलता: वे गूढ़ दार्शनिक विषयों को भी उदाहरणों और मुहावरों के माध्यम से अत्यंत सरल बनाकर पाठकों के सामने रखते हैं।
आत्मीयता: उनके निबंधों में पाठक के साथ एक सीधा संवाद और आत्मीयता का भाव झलकता है।
9. व्याकरण - पाठ पर आधारित (Grammar from the Lesson)
प्रत्यय पहचानें:
संकीर्णता: संकीर्ण + ता
खंडित: खंड + इत
विचलित: विचल + इत
भयवश: भय + वश
संधि-विच्छेद:
भगवन्निष्ठा: भगवान् + निष्ठा
परमात्मा: परम + आत्मा
धर्मालाप: धर्म + आलाप
संसार: सम् + सार
समास-विग्रह:
साधु-संग: साधुओं का संग (तत्पुरुष)
माता-पिता: माता और पिता (द्वंद्व)
विगतस्पृह: विगत (चली गई) है स्पृहा जिसकी (बहुब्रीहि)
10. पिछली बोर्ड परीक्षाओं में पूछे गए प्रश्न (Previous Years' Board Questions)
प्रश्न 1: 'सिक्ख गुरुओं का पुण्य स्मरण' किसकी कृति है?
उत्तर: यह आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी की सुप्रसिद्ध कृति है।
प्रश्न 2: 'एक जोति ते जग ऊपजा...' पंक्ति का अर्थ स्पष्ट करें।
उत्तर: इसका अर्थ है कि संपूर्ण संसार एक ही ईश्वर की ज्योति से उत्पन्न हुआ है, अतः यहाँ कोई छोटा-बड़ा या अच्छा-बुरा नहीं है।
11. UP Board परीक्षा में इस पाठ से अपेक्षित प्रश्न (Expected Exam Questions)
5 अंक - दीर्घ उत्तरीय:
'गुरु नानकदेव' पाठ का सारांश लिखिए और उनके संदेशों की वर्तमान प्रासंगिकता बताइए।
6 अंक - गद्यांश व्याख्या:
"गुरु के जीवनकाल में ही उनका प्रभाव... प्राप्ति और संचय की कोई स्पृहा न हो।"
"गुरु नानकदेव ने सत्य को ही एकमात्र लक्ष्य माना... खंडित होने दिया।"
2 अंक - लघु उत्तरीय:
गुरु नानकदेव का जन्म कहाँ और कब हुआ था? (तलवंडी, 500 वर्ष पूर्व)
सुलक्खनी कौन थीं? (गुरु नानकदेव की पत्नी)
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