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    3. अपना मालवा - खाऊ-उजाडू सभ्यता में Apna Malwa - Class 12 - Antral 2

    • 6 hours ago
    • 4 min read

    लेखक: प्रभाष जोशी


    1. लेखक परिचय (Literary Profile)

    • साहित्यिक विशेषताएँ (Literary Traits): प्रभाष जोशी हिंदी पत्रकारिता के एक विशिष्ट स्तंभ थे। उन्होंने 'जनसत्ता' अखबार के माध्यम से हिंदी पत्रकारिता को नया तेवर दिया। उनके लेखन में मालवा की मिट्टी के संस्कार, देशज शब्दावली और सामाजिक सरोकारों के प्रति गहरा जुड़ाव दिखता है। वे गांधीवादी विचारधारा और लोक-संस्कृति के प्रबल समर्थक थे।

    • प्रमुख रचनाएँ (Key Works): 'कागद कारे' (लेखों का संग्रह), 'हिंदू होने का धर्म'।

    • संदर्भ: यह पाठ जनसत्ता के 'कागद कारे' स्तंभ से लिया गया है, जो आधुनिक जीवनशैली और पर्यावरणीय विनाश पर चोट करता है।


    2. पाठ का सार (Executive Summary)

    • प्रतिपाद्य (Central Theme): इस पाठ में लेखक ने मालवा प्रदेश की प्राकृतिक संपन्नता और आधुनिक औद्योगिक सभ्यता के कारण हो रहे उसके विनाश का तुलनात्मक चित्रण किया है। लेखक ने पश्चिमी उपभोगवादी संस्कृति को 'खाऊ-उजाडू सभ्यता' कहा है।

    • English Summary: The essay 'Apna Malwa' explores the environmental transition of the Malwa region from a land of plenty to a water-scarce area. Prabhash Joshi critiques the 'consumerist civilization' (Khau-Ujadu Sabhyata) imported from the West, which has led to the drying up of rivers and the loss of traditional water-management wisdom.

    • Key Points:

      • मालवा का स्वर्णिम अतीत: "मालव धरती गहन गंभीर, डग-डग रोटी पग-पग नीर"।

      • आधुनिक औद्योगिक विकास ने मालवा को 'उजाड़ की अपसभ्यता' में बदल दिया है।

      • पश्चिमी देशों (अमेरिका/यूरोप) की जीवन पद्धति ने वैश्विक पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुँचाया है।

      • राजा भोज और विक्रमादित्य के समय के जल-प्रबंधन (तालाब और बावड़ियाँ) की आधुनिक समय में उपेक्षा।


    3. कठिन शब्दार्थ (Glossary)

    शब्द

    हिंदी अर्थ

    English Context

    खाऊ-उजाडू

    उपभोग करने वाली और उजाड़ने वाली

    Consumerist and destructive

    अपसभ्यता

    बुरी या विनाशकारी सभ्यता

    Degenerate culture

    नेम-धरम

    नियम और धर्म (संस्कार)

    Rituals and values

    गहन-गंभीर

    बहुत गहरी और समृद्ध

    Deep and prosperous

    सार्वभौमिक

    पूरी दुनिया से संबंधित

    Universal

    4. साहित्यिक विश्लेषण (Literary Analysis)


    • मूल संवेदना (Core Sentiment): प्रकृति के विनाश के प्रति गहरी चिंता। लेखक यह संदेश देते हैं कि आधुनिकता के नाम पर हम अपनी जड़ों और जल-संस्कृति को नष्ट कर रहे हैं।

    • सभ्यता का द्वंद्व: एक तरफ वह सभ्यता है जो प्रकृति को 'मैया' (नर्मदा मैया) मानती है, और दूसरी तरफ वह 'खाऊ-उजाडू' सभ्यता है जो प्रकृति को केवल उपभोग की वस्तु समझती है।

    • बिंब (Imagery): मालवा की वर्षा, लबालब भरे तालाब और अब सूखती जा रही नदियों के बिंबों के माध्यम से लेखक ने पर्यावरण परिवर्तन को सजीव किया है।


    5. गद्यांश आधारित प्रश्न (Extract-Based Competency)

    Extract 1: "मालव धरती गहन गंभीर, डग-डग रोटी पग-पग नीर... अब के मालवा में नदी नाले सूख गए, पग-पग नीर वाला मालवा सूखा हो गया।"

    1. Interpretation: मालवा के पुराने स्वरूप की क्या विशेषता थी? (उत्तर: वहाँ हर कदम पर पानी और रोटी यानी संपन्नता उपलब्ध थी)।

    2. Author's Intent: 'सूखा मालवा' कहने के पीछे लेखक का क्या उद्देश्य है? (उत्तर: गिरते भू-जल स्तर और सूखती नदियों की दयनीय स्थिति की ओर ध्यान दिलाना)।

    3. Inference: 'गहन-गंभीर' शब्द मालवा की किस विशेषता को उजागर करता है? (उत्तर: वहाँ की संस्कृति और संसाधनों की गहराई और गंभीरता को)।


    6. पाठ्यपुस्तक प्रश्नोत्तर (Textbook Q&A)

    1. 'मालव धरती गहन गंभीर, डग-डग रोटी पग-पग नीर' कहावत मालवा की किस विशेषता को बताती है?

      उत्तर: यह कहावत मालवा की अत्यधिक संपन्नता को बताती है। इसका अर्थ है कि यहाँ की धरती इतनी उपजाऊ है कि हर कदम पर भोजन (रोटी) उपलब्ध है और यहाँ के जलाशय व नदियाँ इतनी भरपूर हैं कि हर कदम पर जल (नीर) मिलता है।


    2. लेखक ने पश्चिमी सभ्यता को 'खाऊ-उजाडू' क्यों कहा है?

      उत्तर: पश्चिमी सभ्यता (अमेरिका और यूरोप) केवल संसाधनों के उपभोग पर टिकी है। वह प्रकृति का दोहन तो करती है पर उसके संरक्षण की परवाह नहीं करती। इस सभ्यता ने विकास के नाम पर जंगलों, नदियों और शुद्ध हवा को 'उजाड़' दिया है।


    3. नर्मदा नदी के संदर्भ में लेखक ने क्या चिंता व्यक्त की है?

      उत्तर: लेखक बताते हैं कि नर्मदा पर बड़े बाँध बनाने से उसकी प्राकृतिक धारा और उसके आस-पास के जनजीवन पर बुरा असर पड़ा है। आधुनिक इंजीनियरिंग ने पुरानी जल-संस्कृति को नष्ट कर दिया है।


    7. अभिव्यक्ति और माध्यम (Creative Writing Connection)

    • विषय: "आधुनिक विकास और पर्यावरण विनाश"

    • मुख्य बिंदु:

      • विकास का ऐसा मॉडल जो भविष्य को खतरे में न डाले (Sustainable Development)।

      • पारंपरिक जल स्रोतों (तालाब, कुएँ) की पुनरुद्धार की आवश्यकता।

      • उपभोक्तावादी संस्कृति पर नियंत्रण।


    8. परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण कथन (Key Quotes)

    • "नदी नाले सूख गए, पग-पग नीर वाला मालवा सूखा हो गया।"

    • "औद्योगिक सभ्यता उजाड़ की अपसभ्यता बन गई है।"

    • "हम अपनी जीवन पद्धति, संस्कृति और धरती को उजाड़ने में लगे हुए हैं।"


    9. सामान्य त्रुटियाँ (Common Student Errors)

    • वर्तनी (Spelling): 'खाऊ-उजाडू' में 'ऊ' की मात्रा और 'अपसभ्यता' लिखने में गलती न करें।

    • भ्रम (Conceptual): छात्र अक्सर सोचते हैं कि लेखक केवल मालवा के मौसम की बात कर रहे हैं, जबकि वे ग्लोबल वार्मिंग और पश्चिमी उपभोगवाद पर वैश्विक कटाक्ष कर रहे हैं।


    10. विगत वर्षों के बोर्ड प्रश्न (PYQs)

    1. Short Answer (2 marks): 'उजाड़ की अपसभ्यता' का क्या अर्थ है?

      Model Answer: इसका अर्थ है विकास का वह तरीका जो प्राकृतिक संसाधनों को पूरी तरह नष्ट कर देता है और भविष्य के लिए केवल बंजर धरती छोड़ता है।


    2. Long Answer (5 marks): "अपना मालवा" पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि औद्योगिक विकास ने हमारी 'जड़-जमीन' को कैसे प्रभावित किया है?

      Model Answer: औद्योगिक विकास ने हमें अपनी पारंपरिक जल-संस्कृति से अलग कर दिया है। पहले के राजाओं (भोज, विक्रमादित्य) ने तालाब और बावड़ियाँ बनवाई थीं ताकि पानी रुका रहे, लेकिन आधुनिक काल में हमने उन्हें कचरा घर बना दिया। हमने नदियों में औद्योगिक कचरा डाला जिससे वे 'गंदे नाले' बन गईं। हम पश्चिम की नकल में अपनी उस संस्कृति को भूल गए जो प्रकृति को पूजती थी।


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