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    7 - बारहमासा (Barahmasa) - Class 12 - Antara 2

    • 1 day ago
    • 14 min read

    बारहमासा (Barahmasa) Class 12 - Hindi Elective (Antara Bhag 2) | Poet: मलिक मुहम्मद जायसी (Malik Muhammad Jayasi)

    1. कवि परिचय (Literary Profile)

    • साहित्यिक विशेषताएँ (Literary Traits): मलिक मुहम्मद जायसी हिंदी साहित्य के भक्तिकाल की 'निर्गुण प्रेमाश्रयी शाखा' (सूफी काव्यधारा) के प्रतिनिधि कवि हैं। उनकी रचनाओं में प्रेम के माध्यम से परमात्मा (ईश्वर) को प्राप्त करने का संदेश है। वे 'हठयोग' और 'वेदांत' के भी जानकार थे। उनकी कविता में भारतीय लोक-संस्कृति और ऋतुओं का सजीव चित्रण मिलता है।

    • प्रमुख रचनाएँ (Key Works):

      • पद्मावत (Padmavat): (महाकाव्य - इनकी कीर्ति का आधार स्तंभ)।

      • अखरावट (Akhravat): (वर्णमाला के एक-एक अक्षर को लेकर सिद्धांत निरूपण)।

      • आखिरी कलाम (Aakhiri Kalam): (कयामत का वर्णन)।

    2. पाठ/कविता का सार (Executive Summary)

    • प्रतिपाद्य (Central Theme): यह पाठ जायसी के महाकाव्य 'पद्मावत' के 'नागमती वियोग खंड' से लिया गया है। इसमें राजा रत्नसेन के वियोग में रानी नागमती की विरह-वेदना का मार्मिक चित्रण 'बारहमासा' (बारह महीनों का वर्णन) शैली में किया गया है। यहाँ शीत ऋतु के चार महीनों—अगहन, पूस, माघ और फागुन—में नागमती के कष्टों और प्रकृति के साथ उसके संबंधों को दर्शाया गया है।

    • English Explanation: This chapter presents excerpts from the 'Barahmasa' section of the epic Padmavat. It vividly describes the intense separation grief (Virah) of Queen Nagmati after her husband, King Ratnasen, leaves her. The poem portrays her suffering through the changing nature of four winter months: Agahan, Paush, Magh, and Phagun.

    • Key Points:

      • अगहन (Agahan): दिन छोटे और रातें लंबी हो जाती हैं, जिससे विरह का दुख बढ़ जाता है। नागमती भँवरे और कौए के माध्यम से पति को संदेश भेजती है।

      • पूस (Paush): कड़ाके की ठंड में नागमती काँप रही है। वह अपने पति की गर्मी (सान्निध्य) के बिना जीवित रहने में असमर्थ महसूस करती है।

      • माघ (Magh): जाड़े के साथ-साथ माघ की वर्षा (माहुर) उसके दुख को बढ़ा रही है। वह वियोग में सूखकर धागे (डोरा) जैसी हो गई है।

      • फागुन (Phagun): होली के उल्लासपूर्ण वातावरण में नागमती का दुख दोगुना हो जाता है। वह अपने शरीर को जलाकर राख कर देना चाहती है ताकि वह राख उड़कर पति के चरणों तक पहुँच जाए।

    2.1 पद्यांश अनुवाद (Line-by-Line Translation)

    (1) अगहन (Agahan)

    पंक्ति (Original Line)

    हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

    English Translation

    अगहन देवस घटा निसि बाढ़ी। दूभर दुख सो जाइ किमि काढ़ी।।

    अगहन के महीने में दिन छोटे और रातें लंबी हो गई हैं। यह असहनीय (दूभर) दुख अब कैसे काटा जाए?

    In Agahan, days have shortened and nights lengthened. How can this unbearable sorrow be endured?

    अब धनि देवस बिरह भा राती। जरै बिरह ज्यों दीपक बाती।।

    अब नायिका (धनि) के लिए दिन भी विरह के कारण रात जैसा (अंधकारमय) हो गया है। वह विरह में दीपक की बाती की तरह जल रही है।

    Now, for the lady, even the day has become like night due to separation. She burns in grief like a lamp's wick.

    काँपा हिया जनावा सीऊ। तौ पै जाइ होइ सँग पीऊ।।

    ठंड के कारण हृदय काँप रहा है और सर्दी महसूस हो रही है। यह ठंड तभी जा सकती है जब प्रियतम (पीऊ) साथ हों।

    The heart trembles, feeling the chill. This cold can only go away if the beloved is present.

    घर घर चीर रचा सब काहूँ। मोर रूप रँग लै गा नाहू।।

    घर-घर में सबने नए वस्त्र (चीर) धारण किए हैं (खुशी मना रहे हैं), लेकिन मेरा रूप-रंग तो मेरा स्वामी (नाहू) अपने साथ ले गया है।

    Everyone in every house is adorned in new clothes, but my husband has taken away my beauty and color with him.

    पलटि न बहुरा गा जो बिछोई। अबहूँ फिरै फिरै रँग सोई।।

    जो बिछड़ कर गया, वह पलट कर वापस नहीं आया। यदि वह अब भी लौट आए, तो मेरा रंग-रूप फिर से लौट आएगा।

    The one who separated has not returned. If he returns even now, my vibrancy will return.

    सियरि अगिनि बिरहिनि हिय जारा। सुलगि सुलगि दगधै भै छारा।।

    ठंड की यह 'सियरि' (शीतल) हवा विरहिणी के हृदय को अग्नि की तरह जला रही है। वह सुलग-सुलग कर जल रही है और राख (छार) होती जा रही है।

    The cold wind burns the separated lover's heart like fire. Smoldering slowly, she is turning into ash.

    यह दुख दगध न जानै कंतू। जोबन जनम करै भसमंतू।।

    पति (कंत) मेरे इस जलने के दुख को नहीं जानता। यह विरह मेरे यौवन और जीवन को भस्म किए दे रहा है।

    My husband does not know the pain of this burning. This grief is turning my youth and life into ash.

    पिय सौं कहेहु सँदेसड़ा, ऐ भँवरा ऐ काग।

    (नागमती कहती है) हे भँवरे! हे कौए! तुम जाकर मेरे प्रियतम से यह संदेश कहना...

    (Nagmati says) O Bumblebee! O Crow! Go and tell this message to my beloved...

    सो धनि बिरहें जरि मुई, तेहिक धुआँ हम लाग।।

    ...कि वह स्त्री (तुम्हारी पत्नी) विरह में जलकर मर गई है और उसी (आग) का धुआँ हमें लग गया है (इसीलिए हम काले हो गए हैं)।

    ...That the lady has burnt to death in separation, and it is the smoke from her pyre that has turned us black.

    (2) पूस (Paush)

    पंक्ति (Original Line)

    हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

    English Translation

    पूस जाड़ थरथर तन काँपा। सुरुज जड़ाइ लंक दिसि तापा।।

    पूस की सर्दी में शरीर थर-थर काँप रहा है। सूरज भी ठंड से डरकर गर्मी लेने के लिए दक्षिण दिशा (लंका) की ओर चला गया है।

    In Paush, the body trembles with cold. Even the sun, feeling cold, has moved south (towards Lanka) for warmth.

    बिरह बाढि भा दारुन सीऊ। कँपि कँपि मरौं लेहि हरि जीऊ।।

    विरह बढ़ने से यह सर्दी और भी भयानक (दारुण) हो गई है। मैं काँप-काँप कर मर रही हूँ, यह सर्दी मेरे प्राण हर रही है।

    As separation grows, the cold becomes unbearable. I am trembling to death; it is taking my life away.

    कंत कहाँ हौं लागौं हियरै। पंथ अपार सूझ नहिं नियरें।।

    हे पति! तुम कहाँ हो? मैं तुम्हारे हृदय से लगना चाहती हूँ। रास्ता बहुत लंबा (अपार) है और तुम निकट दिखाई नहीं देते।

    Where are you, my husband? I want to cling to your chest. The path is endless, and you are nowhere near.

    सौर सुपेती आवै जूड़ी। जानहुँ सेज हिवंचल बूढ़ी।।

    रजाई (सौर) और सफेद चादर (सुपेती) ओढ़ने पर भी ठिठुरन (जूड़ी) आती है। बिस्तर ऐसा लगता है मानो बर्फ (हिमाचल) में डूबा हुआ हो।

    Even blankets and sheets feel cold. The bed feels as if it is submerged in ice (Himalayas).

    चकई निसि बिछुरै दिन मिला। हौं निसि बासर बिरह कोकिला।।

    चकवा-चकई पक्षी तो केवल रात में बिछड़ते हैं और दिन में मिल जाते हैं, पर मैं तो रात-दिन (निसि-बासर) कोयल की तरह विरह में तड़प रही हूँ।

    The Chakvi bird separates only at night and meets in the day. But I suffer separation day and night like a cuckoo.

    रैनि अकेलि साथ नहिं सखी। कैसें जिऔं बिछोही पँखी।।

    रात में मैं अकेली हूँ, कोई सखी भी साथ नहीं है। मैं उस पक्षी की तरह कैसे जियूँ जो अपने साथी से बिछड़ गया है?

    I am alone at night without any friend. How should I survive like a bird separated from its mate?

    बिरह सचान भँवै तन चाँड़ा। जीयत खाइ मुएँ नहिं छाँड़ा।।

    विरह रूपी बाज (सचान) मेरे शरीर रूपी शिकार पर मंडरा रहा है। यह मुझे जीते-जी खा रहा है और मरने पर भी नहीं छोड़ेगा।

    The hawk of separation hovers over my body. It eats me alive and does not spare me even in death.

    रकत ढरा माँसू गरा, हाड़ भए सब संख।

    (रोने से) मेरे शरीर का सारा रक्त ढल गया है, मांस गल गया है और हड्डियाँ सूखकर शंख जैसी खोखली हो गई हैं।

    My blood has drained, flesh has melted, and bones have become hollow like a conch shell.

    धनि सारस होइ ररि मुई, आइ समेटहु पंख।।

    तुम्हारी पत्नी सारस की जोड़ी की तरह रटते-रटते (पुकारते हुए) मर रही है। अब तो आकर उसके मरे हुए पंखों को समेट लो।

    Your wife is dying crying like a crane (Saras). Come now at least to gather her wings (remains).

    (3) माघ (Magh)

    पंक्ति (Original Line)

    हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

    English Translation

    लागेउ माँह परै अब पाला। बिरहा काल भएउ जड़काला।।

    माघ का महीना लग गया है और अब पाला पड़ने लगा है। यह विरह मेरे लिए साक्षात मृत्यु (काल) बन गया है।

    Magh has begun, and frost is falling. This separation has become death for me.

    पहल पहल तन रुई जो झाँपै। हहलि हहलि अधिकौ हिय काँपै।।

    मैं अपने शरीर को रुई के वस्त्रों से ढकती हूँ, फिर भी मेरा हृदय काँप-काँप (हहलि-हहलि) कर और अधिक धड़कता है।

    Even when I cover my body with cotton, my heart trembles and shudders excessively.

    आई सूर होइ तपु रे नाहाँ। तेहि बिनु जाड़ न छूटै माहाँ।।

    हे नाथ! तुम सूर्य बनकर वापस आओ और तपो (गर्मी दो)। तुम्हारे बिना माघ महीने का जाड़ा नहीं जाएगा।

    O Lord! Come back as the Sun and provide heat. Without you, the cold of Magh won't leave.

    एहि मास उपजै रस मूलू। सो भँवर मोर जोबन फूलू।।

    इस महीने में वनस्पतियों की जड़ों (मूल) में रस उत्पन्न होता है (वसंत की तैयारी)। तुम मेरे यौवन रूपी फूल के भँवरे हो।

    In this month, sap rises in the roots of plants. You are the bumblebee to the flower of my youth.

    नैन चुवहिं जस माँहुट नीरू। तेहि जल अंग लाग सर चीरू।।

    मेरी आँखों से आँसू ऐसे टपक रहे हैं जैसे माघ की वर्षा (माहुर/महावट) हो। उन आँसुओं से भीगकर मेरे वस्त्र बाण (सर) की तरह चुभ रहे हैं।

    Tears drip from my eyes like winter rain. Soaked in that water, my clothes pierce me like arrows.

    टूटहिं बुंद परहिं जस ओला। बिरह पवन होइ मारें झोला।।

    आँसू की बूँदें ऐसे टूटकर गिर रही हैं जैसे ओले पड़ रहे हों। विरह पवन बनकर मुझे झकझोर रहा है।

    Tear drops fall like hailstones. The wind of separation strikes me violently.

    केहिक सिंगार को पहिर पटोरा। गियँ नहिं हार रही होइ डोरा।।

    अब मैं किसके लिए श्रृंगार करूँ और रेशमी वस्त्र (पटोरा) पहनूँ? मेरी गर्दन में अब हार नहीं है, वह सूखकर डोरे जैसी पतली हो गई है।

    For whom should I adorn myself? My neck no longer has a necklace; it has become thin like a thread.

    तुम्ह बिनु कंता धनि हरुई, तन तिनुवर भा डोल।

    हे कंत! तुम्हारे बिना तुम्हारी पत्नी बहुत हल्की (कमजोर) हो गई है, उसका शरीर तिनके (तिनुवर) जैसा डोल रहा है।

    Without you, husband, your wife has become light/weak; her body sways like a blade of grass.

    तेहि पर बिरह जराइ कै, चहै उड़ावा झोल।।

    उस पर भी यह विरह मुझे जलाकर राख (झोल) बनाकर उड़ा देना चाहता है।

    On top of that, separation wants to burn me and blow away my ashes.

    (4) फागुन (Phagun)

    पंक्ति (Original Line)

    हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

    English Translation

    फागुन पवन झंकोरै बहा। चौगुन सीउ जाइ किमि सहा।।

    फागुन में हवा झकझोर कर बह रही है। इसमें सर्दी चौगुनी हो गई है, जिसे सहना मुश्किल है।

    In Phagun, the wind blows in gusts. The cold has quadrupled; how can it be endured?

    तन जस पियर पात भा मोरा। बिरह न रहै पवन होइ झोरा।।

    मेरा शरीर पीले पत्ते (पियर पात) जैसा हो गया है। विरह अब पवन बनकर मुझे झड़ा रहा है (गिराना चाहता है)।

    My body has turned yellow like a leaf. Separation acts as the wind trying to shake me off.

    तरिवर झरै झरै बन ढाँखा। भइ अनपत्त फूल फर साखा।।

    पेड़ों के पुराने पत्ते झड़ रहे हैं और ढाक के वन भी झड़ रहे हैं। शाखाएँ पत्तों से रहित होकर नए फूलों-फलों से लद रही हैं।

    Trees and Dhak forests are shedding leaves. Branches are becoming leafless to bear new flowers and fruits.

    करिन्ह बनाफति कीन्ह हुलासू। मो कहँ भा जग दून उदासू।।

    सभी वनस्पतियां उल्लास मना रही हैं (वसंत आ रहा है), लेकिन मेरे लिए यह दुनिया दोगुनी उदास हो गई है।

    The vegetation is rejoicing, but for me, the world has become doubly sorrowful.

    फाग करहि सब चाँचरि जोरी। मोहिं जिय लाइ दीन्हि जसि होरी।।

    सब लोग जोड़ियाँ बनाकर फाग (होली) और चाँचरि गा रहे हैं, पर मुझे ऐसा लग रहा है जैसे मेरे जीवन में होली की आग लगा दी गई हो।

    Everyone is playing Holi and singing songs in pairs, but I feel as if my life has been set on fire like Holika.

    जौं पै पियहि जरत अस भावा। जरत मरत मोहि रोस न आवा।।

    यदि मेरे प्रियतम को मेरा जलना ही अच्छा लगता है, तो मुझे जलकर मरने में भी कोई क्रोध/दुख नहीं है।

    If my beloved enjoys seeing me burn, I have no anger in burning and dying.

    रातिहु देवस इहै मन मोरें। लागौं कंत छार जेऊँ तोरें।।

    रात-दिन मेरे मन में यही इच्छा है कि मैं जलकर राख (छार) हो जाऊँ और किसी तरह तुम तक पहुँचूँ।

    Day and night, I have only this desire: to become ash and somehow touch you.

    यह तन जारौं छार कै, कहौं कि पवन उड़ाउ।

    मैं इस शरीर को जलाकर राख कर दूँगी और पवन से कहूँगी कि मुझे उड़ा ले जाओ।

    I will burn this body to ash and ask the wind to blow me away.

    मकु तेहि मारग होइ परौं, कंत धरैं जहँ पाउ।।

    शायद (मकु) मैं उड़कर उस रास्ते पर गिर पड़ूँ, जहाँ मेरा पति अपने पैर रखे।

    Perchance I might fall on that path where my husband places his feet.

    3. कठिन शब्दार्थ (Glossary)

    शब्द (Word)

    अर्थ (Hindi Meaning)

    English Context

    अगहन (Agahan)

    एक हिंदी महीना (मार्गशीर्ष)

    A winter month (Nov-Dec)

    दूभर (Dubhar)

    कठिन / मुश्किल

    Difficult / Unbearable

    सीऊ / सियरि (Siu)

    शीत / ठंड

    Cold / Chill

    नाहू (Naahu)

    नाथ / स्वामी

    Husband / Lord

    छारा (Chhara)

    राख

    Ash

    दगधै (Dagdhai)

    जलना

    Burning

    सौर-सुपेती

    रजाई और चादर

    Quilt and Bedsheet

    सचान (Sachan)

    बाज पक्षी

    Hawk

    माँहुट (Mahaut)

    माघ की वर्षा (शीतकालीन वर्षा)

    Winter rain

    तिनुवर (Tinuvar)

    तिनका

    Straw / Blade of grass

    झोल (Jhol)

    राख / भस्म

    Ash

    चाँचरि (Chanchari)

    होली का गीत

    Folk song sung during Holi

    4. साहित्यिक विश्लेषण (Literary Analysis)

    • भाव पक्ष (Thematic Aspect):

      • वियोग श्रृंगार (Separation Love): यह कविता 'वियोग श्रृंगार' का उत्कृष्ट उदाहरण है। नागमती का प्रेम 'एकनिष्ठ' है। वह प्रकृति के हर बदलाव में केवल अपने पति की कमी महसूस करती है।

      • प्रकृति चित्रण: जायसी ने प्रकृति को 'उद्दीपन' (भावनाओं को भड़काने वाला) रूप में चित्रित किया है। जो मौसम दूसरों को सुख देता है (जैसे फागुन), वही नागमती को दुख देता है।

    • कला पक्ष (Artistic Aspect):

      • भाषा: ठेठ अवधी (Thet Avadhi)। यह रामचरितमानस की संस्कृतनिष्ठ अवधी से अलग, आम बोलचाल की अवधी है।

      • शैली: बारहमासा (Barahmasa) - यह भारतीय साहित्य की एक लोक-शैली है जिसमें साल के 12 महीनों के माध्यम से नायिका की मनोदशा का वर्णन होता है।

      • अलंकार:

        • अतिशयोक्ति (Hyperbole): "रकत ढरा माँसू गरा, हाड़ भए सब संख" (रक्त ढल गया, हड्डियाँ शंख हो गईं) और भँवरे/काग का काला होना।

        • उपमा (Simile): "जरै बिरह ज्यों दीपक बाती" (दीपक की बाती सा जलना), "पियर पात" (पीला पत्ता)।

        • उत्प्रेक्षा (Metaphor): "जानहुँ सेज हिवंचल बूढ़ी" (मानो सेज बर्फ में डूबी हो)।

      • छंद: दोहा-चौपाई (Doha-Chaupai)। (सात चौपाइयों के बाद एक दोहा - कड़वक शैली)।

    5. गद्यांश आधारित प्रश्न (Extract-Based Competency)

    संदर्भ 1 (अगहन):

    "पिय सौं कहेहु सँदेसड़ा, ऐ भँवरा ऐ काग। सो धनि बिरहें जरि मुई, तेहिक धुआँ हम लाग।।"

    1. नागमती किसे संदेश भेज रही है और क्यों?

      • उत्तर: नागमती भँवरे और कौए के माध्यम से अपने पति रत्नसेन को संदेश भेज रही है क्योंकि वह विरह में जल रही है और अपनी मृत्यु का समाचार उन तक पहुँचाना चाहती है।

    2. 'तेहिक धुआँ हम लाग' का क्या आशय है?

      • उत्तर: इसका आशय है कि नागमती विरह की आग में जलकर मर गई है और उसकी चिता के काले धुएँ के लगने से ही भँवरे और कौए का रंग काला हो गया है। यह 'अतिशयोक्ति अलंकार' है।

    3. इन पंक्तियों में निहित काव्य-सौंदर्य बताइए।

      • उत्तर: यहाँ लोक-शैली में संदेश भेजने की परंपरा है। वियोग की तीव्रता दिखाने के लिए कवि ने प्रकृति (पक्षी/कीट) को भी प्रभावित दिखाया है। भाषा ठेठ अवधी है।

    संदर्भ 2 (माघ):

    "तुम्ह बिनु कंता धनि हरुई, तन तिनुवर भा डोल। तेहि पर बिरह जराइ कै, चहै उड़ावा झोल।।"

    1. 'धनि हरुई' का क्या अर्थ है?

      • उत्तर: 'धनि' का अर्थ पत्नी (नागमती) है और 'हरुई' का अर्थ 'हल्की' या 'कमजोर' है। पति के बिना नागमती सूखकर इतनी कमजोर हो गई है कि उसका वजन घट गया है।

    2. नागमती के शरीर की तुलना किससे की गई है?

      • उत्तर: नागमती के शरीर की तुलना 'तिनके' (तिनुवर) से की गई है जो हवा के झोंके से डोलता रहता है।

    3. विरह क्या करना चाहता है?

      • उत्तर: विरह नागमती को जलाकर राख (झोल) बना देना चाहता है और उसे हवा में उड़ा देना चाहता है।

    6. पाठ्यपुस्तक प्रश्नोत्तर (Textbook Q&A)

    A. बोधात्मक प्रश्न (Short Answer)

    • प्रश्न 1: अगहन मास की विशेषता बताते हुए विरहिणी (नागमती) की व्यथा-कथा का चित्रण अपने शब्दों में कीजिए।

      • उत्तर: अगहन में दिन छोटे और रातें लंबी होती हैं, जिससे नागमती को विरह सहने के लिए लंबा समय काटना पड़ता है। ठंड बढ़ जाती है। नागमती दीपक की बाती की तरह जलती है। उसे नए वस्त्र और रंग-रूप अच्छे नहीं लगते क्योंकि उसका पति परदेस में है।

    • प्रश्न 2: 'जीयत खाइ मुएँ नहिं छाँड़ा' पंक्ति के संदर्भ में नायिका की विरह-दशा का वर्णन कीजिए।

      • उत्तर: नागमती को विरह एक 'बाज' (शिकारी पक्षी) की तरह लगता है। जैसे बाज शिकार को नोचता है, वैसे ही विरह नागमती को जीते-जी खा रहा है (तड़पा रहा है) और उसे डर है कि मरने के बाद भी यह विरह उसका पीछा नहीं छोड़ेगा। यह अत्यंत कष्टदायी स्थिति है।

    • प्रश्न 3: माघ महीने में विरहिणी को क्या अनुभूति होती है?

      • उत्तर: माघ में पाला पड़ता है और कड़ाके की सर्दी होती है। नागमती को रुई के कपड़े पहनने पर भी ठंड लगती है। माघ की वर्षा (महावट) उसके गीले कपड़ों को बाण जैसा चुभाती है। वह वियोग में सूखकर धागे जैसी हो गई है।

    B. विश्लेषणात्मक प्रश्न (Long Answer)

    • प्रश्न 4: वृक्षों से पत्तियाँ तथा वनों से ढाँखें किस माह में गिरते हैं? इससे विरहिणी का क्या संबंध है?

      • उत्तर: वृक्षों से पत्तियाँ और वनों से ढाँखें फागुन मास में गिरते हैं (पतझड़)। विरहिणी का संबंध यह है कि जैसे पत्ते पीले पड़कर झड़ जाते हैं, वैसे ही नागमती का शरीर विरह में पीला (पियर) पड़ गया है और वह मानसिक रूप से बिखर रही है। प्रकृति का झड़ना उसके जीवन की निराशा का प्रतीक है।

    • प्रश्न 5: निम्नलिखित पंक्तियों की व्याख्या कीजिए-

      • (क) पिय सौं कहेहु सँदेसड़ा...: नागमती भँवरे और कौए से कहती है कि मेरे प्रिय से कहना कि तुम्हारी पत्नी वियोग में जल मरी और उसी के धुएँ से हम काले हो गए हैं। (विरह की अतिशयोक्ति)।

      • (ख) रकत ढरा माँसू गरा...: नागमती कहती है कि रोते-रोते मेरा सारा खून आँसू बनकर बह गया, शरीर का मांस गल गया और हड्डियाँ शंख जैसी खोखली हो गईं। मैं सारस पक्षी की तरह रट लगाकर मर रही हूँ।

      • (ग) तुम्ह बिनु कंता धनि हरुई...: हे पति, तुम्हारे बिना मैं तिनके जैसी हल्की हो गई हूँ और विरह मुझे जलाकर राख बनाकर उड़ाना चाहता है।

      • (घ) यह तन जारौं छार कै...: मैं अपने शरीर को जलाकर राख कर दूँगी और हवा से कहूँगी कि मुझे उड़ाकर उस रास्ते पर गिरा दे जहाँ मेरे पति के चरण पड़ते हों। यह प्रेम की चरम सीमा (आत्म-समर्पण) है।

    • प्रश्न 6: प्रथम दो छंदों में से अलंकार छाँटकर लिखिए।

      • उत्तर:

        • उपमा: "जरै बिरह ज्यों दीपक बाती", "काँपा हिया जनावा सीऊ"।

        • अतिशयोक्ति: "तेहिक धुआँ हम लाग" (धुएँ से कौए का काला होना)।

        • अनुप्रास: "फिरै फिरै", "सुलगि सुलगि" (पुनरुक्ति प्रकाश भी है)।

        • रूपक: "बिरह सचान" (विरह रूपी बाज)।

    7. अभिव्यक्ति और माध्यम (Creative Writing Connection)

    • संबंधित आलेख विषय: "ऋतु परिवर्तन और मानव मन" या "भारतीय साहित्य में विरह वर्णन"

    • मुख्य बिंदु:

      • मौसम का भावनाओं पर प्रभाव (सर्दी में उदासी, वसंत में खुशी)।

      • नागमती का वियोग केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सार्वभौमिक प्रेम की पीड़ा है।

      • जायसी का प्रकृति ज्ञान—किस महीने में कौन सा फूल खिलता है या पत्ते झड़ते हैं।

    8. परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण कथन (Key Quotes)

    1. "सो धनि बिरहें जरि मुई, तेहिक धुआँ हम लाग।" (विरह की तीव्रता और अतिशयोक्ति के लिए)।

    2. "मकु तेहि मारग होइ परौं, कंत धरैं जहँ पाउ।" (सच्चे प्रेम और समर्पण के लिए)।

    3. "हौं निसि बासर बिरह कोकिला।" (रात-दिन तड़पने की दशा के लिए)।

    9. सामान्य त्रुटियाँ (Common Student Errors)

    • भाषा: छात्र अक्सर इसे 'ब्रज भाषा' मान लेते हैं, जबकि यह 'ठेठ अवधी' है।

    • पात्र: नागमती को पद्मावती समझ लेना। (नागमती रत्नसेन की पहली पत्नी है जो चित्तौड़ में रह गई है)।

    • क्रम: महीनों का क्रम गलत करना। सही क्रम: अगहन -> पूस -> माघ -> फागुन

    10. विगत वर्षों के बोर्ड प्रश्न (PYQs)

    • प्रश्न 1 (लघु - 2 अंक): नागमती ने भौंरे और कौए के माध्यम से क्या संदेश भेजा?

      • उत्तर: उसने संदेश भेजा कि तुम्हारी पत्नी विरह की आग में जलकर भस्म हो गई है और उसी आग के धुएँ से हमारा रंग काला पड़ गया है।

    • प्रश्न 2 (लघु - 2 अंक): 'पूस' के महीने में नागमती की दशा का वर्णन करें।

      • उत्तर: पूस में नागमती ठंड से थर-थर काँप रही है। उसे रजाई और बिस्तर बर्फ जैसे ठंडे लगते हैं। वह चकवा-चकई के विरह से भी ज्यादा दुखी है क्योंकि वह दिन-रात अकेली है।

    • प्रश्न 3 (दीर्घ - 5 अंक): जायसी के 'बारहमासा' में प्रकृति चित्रण की क्या भूमिका है? सोदाहरण स्पष्ट करें।

      • उत्तर: जायसी ने प्रकृति को 'उद्दीपन विभाव' (भावनाओं को बढ़ाने वाला) के रूप में प्रयोग किया है।

        • अगहन में छोटी दिन और लंबी रातें दुख बढ़ाती हैं।

        • माघ की वर्षा (माहुर) कपड़ों को गीला कर बाण जैसी चुभती है।

        • फागुन का उल्लास नागमती के दुख को दोगुना कर देता है।

          प्रकृति नागमती के दुख की सहचरी भी है और कारण भी।

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