1. स्वदेश - (Swadesh)- Class 8 - Malhar
- Dec 28, 2025
- 7 min read
Updated: Dec 31, 2025

Poet: गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही' (Gaya Prasad Shukla 'Sanehi')
1. पाठ का सार (Quick Revision Summary)
सच्चा देशभक्त बनाम पत्थर दिल: कवि कहते हैं कि जिस व्यक्ति के दिल में अपने देश के लिए प्यार नहीं है, वह दिल नहीं बल्कि पत्थर का टुकड़ा है। जो व्यक्ति अपने जीवन में जोश और उत्साह नहीं जगा सका, उसका जीवन व्यर्थ (सारहीन) है।
English: True Patriot vs Stone Heart: The poet says that a heart that does not have love for its country is not a heart but a piece of stone. A person who cannot awaken enthusiasm and passion in their life, their life is meaningless.
साहस और कर्मठता: कवि के अनुसार, जो व्यक्ति समय और दुनिया के साथ कदम मिलाकर नहीं चल सकता, उसका इस संसार में कोई अस्तित्व नहीं है। जिसने मुसीबतों में साहस छोड़ दिया, वह कभी सफलता के किनारे नहीं पहुँच सकता। यदि हम अपनी जाति और देश का उद्धार (भला) नहीं कर सकते, तो हमारा खुद का भी उद्धार नहीं होगा।
English: Courage and Action: According to the poet, one who cannot keep pace with time and the world has no existence. One who abandons courage in difficulties can never reach the shore of success. If we cannot uplift our race and country, we cannot achieve our own salvation.
मातृभूमि से रिश्ता: हमारा शरीर जिस देश की मिट्टी में पला-बढ़ा है, जिसका अन्न-जल हमने ग्रहण किया है, और जहाँ हमें माता-पिता और भाई-बहन मिले हैं, उस देश के प्रति हमारा गहरा ऋण है। हम इस देश की संतान (राजा-रानी) हैं।
English: Bond with Motherland: Our body has grown in this country's soil, we have consumed its food and water, and here we found parents and siblings; we owe a deep debt to this land. We are the children (kings/queens) of this land.
कृतज्ञता और बलिदान: इस धरती ने हमारे लिए अपने खजाने खोल दिए हैं और हमें अनमोल रत्न दिए हैं। बड़े-बड़े ज्ञानी भी इस देश पर न्योछावर होते हैं। मृत्यु निश्चित है, एक दिन सबको जाना है। इसलिए हमें 'दीपक और परवाने' की तरह देश के लिए बलिदान देने को तैयार रहना चाहिए। जो देश के लिए पसीजा (द्रवित) नहीं, वह धरती पर बोझ है।
English: Gratitude and Sacrifice: This land has opened its treasures for us and given us priceless gems. Even wise men sacrifice themselves for this land. Death is certain. Therefore, like a 'lamp and moth', we should be ready to sacrifice for the country. One who does not feel for the country is a burden on earth.
आत्म-शक्ति: अंत में कवि कहते हैं कि सब कुछ हमारे अपने हाथों में है। देशप्रेम के लिए तोप या तलवार की ज़रूरत नहीं, बल्कि सच्चे जज्बे की ज़रूरत है। जिसके मन में भावों की रसधार नहीं बहती, वह मनुष्य नहीं पत्थर है।
English: Self-Power: In the end, the poet says that everything is in our hands. Patriotism does not need cannons or swords, but true spirit. One whose mind does not flow with emotions is not a human but a stone.
2. शब्द-संपदा (Vocabulary)
शब्द (Word) | अर्थ (Hindi Meaning) | English Meaning |
सार | अर्थ / निचोड़ | Essence / Meaning |
उद्धार | कल्याण / भला करना | Upliftment / Salvation |
लासानी | जिसका कोई जोड़ न हो / बेमिसाल | Incomparable / Unique |
दीवानी | पागल / प्रेमी | Crazy / Devoted |
पसीजा | दया आना / पिघलना | Melted (with emotion) |
निस्संशय | बिना किसी संदेह के | Undoubtedly |
परवाना | पतंगा (कीड़ा जो दीये पर जल मरता है) | Moth |
रस-धार | प्रेम की धारा | Stream of emotion/love |
बंधु | भाई / सगे-संबंधी | Brother / Kin |
3. केंद्रीय भाव (Central Theme)
देशप्रेम और कृतज्ञता (Patriotism & Gratitude)
कविता का मुख्य उद्देश्य पाठकों के मन में राष्ट्र के प्रति प्रेम और सम्मान जगाना है। कवि याद दिलाते हैं कि हमारा अस्तित्व देश से जुड़ा है। जिसने हमें सब कुछ दिया, उसके लिए बलिदान देना हमारा कर्तव्य है। निष्क्रिय जीवन जीने वाला व्यक्ति देश पर भार समान है।
English: The main objective is to instill love and respect for the nation. The poet reminds us that our existence is linked to the country. It is our duty to sacrifice for the land that gave us everything. An inactive person is a burden on the country.
4. योग्यता-आधारित प्रश्न (Competency-Based Questions)
A. अभिकथन और तर्क (Assertion & Reasoning)
प्रश्न 1: अभिकथन (A): कवि ने ऐसे हृदय को पत्थर कहा है जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं है।
तर्क (R): पत्थर में संवेदना और भावनाएँ नहीं होतीं, वैसे ही देशप्रेम से रहित मनुष्य संवेदनहीन होता है। उत्तर: (क) A और R दोनों सही हैं, तथा R, A की सही व्याख्या करता है।
प्रश्न 2: अभिकथन (A): हमें मृत्यु से डरना नहीं चाहिए।
तर्क (R): मृत्यु एक अटल सत्य है (निस्संशय है जान एक दिन जाने को), इसलिए हमें डरने के बजाय देश के लिए सार्थक जीवन जीना चाहिए।
उत्तर: (क) A और R दोनों सही हैं, तथा R, A की सही व्याख्या करता है।
B. स्थिति-आधारित विश्लेषण (Situation Analysis)
स्थिति (Situation): 'खादी गीत' (सोहनलाल द्विवेदी) में खादी के धागे-धागे में अन्यायी का अपमान और अपनेपन का अभिमान भरा है।
प्रश्न (Question): 'स्वदेश' कविता के आधार पर बताइए कि स्वदेशी वस्तुओं (जैसे खादी) का प्रयोग करना किस प्रकार देशप्रेम का प्रमाण है?
उत्तर (Answer): 'स्वदेश' कविता सिखाती है कि देश के संसाधनों और संस्कृति का सम्मान करना चाहिए। खादी केवल कपड़ा नहीं, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम और स्वाभिमान का प्रतीक है। स्वदेशी अपनाने से हम अपने देश के कारीगरों (भाई-बहनों) की मदद करते हैं और देश को आत्मनिर्भर बनाते हैं। यह भी देश के प्रति हमारा 'सक्रिय योगदान' है।
C. आशय स्पष्टीकरण (Intent/Inference)
प्रश्न 1: "वह पहुँच सकेगा पार नहीं।"
उत्तर: यहाँ 'पार' का अर्थ है सफलता या लक्ष्य की प्राप्ति। कवि का आशय है कि जो व्यक्ति जीवन में साहस छोड़ देता है और चुनौतियों से डर जाता है, वह जीवन रूपी सागर को पार नहीं कर सकता अर्थात सफल नहीं हो सकता।
प्रश्न 2: "क्या तोप नहीं तलवार नहीं।"
उत्तर: इसका आशय है कि देशसेवा के लिए हमेशा हथियारों की ज़रूरत नहीं होती। यदि हमारे अंदर इच्छाशक्ति और प्रेम है, तो हम बिना तोप-तलवार के भी देश का कल्याण कर सकते हैं (जैसे समाज सुधार, ईमानदारी या स्वदेशी अपनाकर)।
5. प्रश्न-उत्तर (Subjective Q&A)
A. लघु उत्तरीय (Short Answer - 30-40 Words)
प्रश्न 1: कवि ने 'जीवित जोश' किसे कहा है? उत्तर: 'जीवित जोश' का अर्थ है सक्रियता, उत्साह और देश के लिए कुछ कर गुजरने की तमन्ना। जो व्यक्ति केवल साँस ले रहा है पर देशहित के लिए निष्क्रिय है, उसमें 'जीवित जोश' नहीं है।
प्रश्न 2: "हम हैं जिसके राजा-रानी" पंक्ति का क्या अर्थ है?
उत्तर: इसका अर्थ है कि यह मातृभूमि हमारी अपनी है। हम यहाँ किसी के गुलाम नहीं, बल्कि इस धरती के वारिस और मालिक हैं। माता-पिता और भाई-बहन जैसे रिश्ते हमें इसी धरती ने दिए हैं।
प्रश्न 3: दीपक और परवाने का उदाहरण देकर कवि क्या समझाना चाहते हैं?
उत्तर: परवाना (पतंगा) जलते हुए दीपक से इतना प्रेम करता है कि उसमें जलकर जान दे देता है। कवि चाहते हैं कि हम भी अपनी मातृभूमि (दीपक) से वैसा ही निस्वार्थ प्रेम करें और ज़रूरत पड़ने पर अपने प्राण न्योछावर कर दें।
प्रश्न 4: "उस पर है दुनिया दीवानी" पंक्ति किस संदर्भ में कही गई है?
उत्तर: यह पंक्ति भारत भूमि की महानता और समृद्धि के संदर्भ में कही गई है। भारत का इतिहास, संस्कृति और प्राकृतिक संपदा इतनी अद्भुत है कि पूरी दुनिया इसके प्रति आकर्षित (दीवानी) रहती है।
B. दीर्घ उत्तरीय/मूल्यपरक (Long/Value-Based - 100 Words)
प्रश्न 1: 'स्वदेश' कविता के माध्यम से कवि युवाओं को क्या संदेश देना चाहते हैं?
उत्तर: कवि युवाओं को आलस्य और भय त्यागकर कर्मठ बनने का संदेश देते हैं। वे कहते हैं कि युवा देश की रीढ़ हैं। यदि वे साहस छोड़ देंगे या समय के साथ नहीं चलेंगे, तो देश पिछड़ जाएगा। कवि चाहते हैं कि युवा यह समझें कि जिस मिट्टी ने उन्हें पाला-पोसा है, उसका कर्ज उन्हें चुकाना है। मृत्यु के भय से मुक्त होकर राष्ट्र के निर्माण और रक्षा के लिए तत्पर रहना ही सच्चे युवा का धर्म है। केवल भावुकता नहीं, बल्कि 'जाति-उद्धार' (समाज कल्याण) के लिए ठोस कार्य करना ज़रूरी है।
प्रश्न 2: देश के प्रति हमारे क्या कर्तव्य होने चाहिए? कविता के आधार पर अपने विचार लिखिए।
उत्तर: कविता के अनुसार, देश के प्रति हमारे मुख्य कर्तव्य हैं:
प्रेम और सम्मान: देश को पत्थर दिल से नहीं, बल्कि भावनाओं से प्यार करना।
साहस और सक्रियता: चुनौतियों का सामना करना और देश की प्रगति में योगदान देना।
कृतज्ञता: यह याद रखना कि हमारा शरीर और जीवन इसी देश के अन्न-जल से बना है।
बलिदान: आवश्यकता पड़ने पर देश की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति देने से पीछे न हटना।
आत्मनिर्भरता: यह मानना कि "सब कुछ अपने हाथों में है" और दूसरों पर निर्भर न रहना।
6. व्याकरण (Integrated Grammar)
(Based on the text of the chapter)
प्रश्न 1: विलोम शब्द लिखिए:
स्वदेश: विदेश
जीवित: मृत
उद्धार: पतन
ज्ञानी: अज्ञानी / मूर्ख
प्रश्न 2: पर्यायवाची शब्द:
पत्थर: पाषाण, प्रस्तर
संसार: जग, दुनिया, विश्व
बंधु: भाई, सखा, सहोदर
प्रश्न 3: तुकांत शब्द (Rhyming Words) छाँटिए:
प्यार - सार - संसार - पार - उद्धार
पानी - रानी - लासानी - दीवानी
7. सामान्य त्रुटियाँ (Common Student Errors)
कवि का नाम:
त्रुटि: छात्र अक्सर कवि का नाम 'मैथिलीशरण गुप्त' या 'दिनकर' लिख देते हैं क्योंकि शैली वीर रस की है।
सुधार: इस कविता के रचयिता गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही' हैं।
'पत्थर' का अर्थ:
त्रुटि: छात्र इसे शाब्दिक अर्थ में लेते हैं।
सुधार: यहाँ पत्थर का अर्थ संवेदनहीनता (Lack of emotions) से है।
दीपक-परवाना प्रतीक:
त्रुटि: छात्र इसे केवल प्रेम कहानी समझते हैं।
सुधार: यहाँ दीपक देश/मातृभूमि का प्रतीक है और परवाना देशभक्त का, जो बलिदान देता है।
End
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