top of page

    10 - एक कहानी यह भी (Ek Kahani Yeh Bhi)-Class 10 Kshitij 2

    • Dec 13, 2025
    • 9 min read

    Updated: Dec 16, 2025

    एक कहानी यह भी (Ek Kahani Yeh Bhi)

    Class 10 - Hindi Course A (Kshitij Bhag 2) | Author: मन्नू भंडारी (Mannu Bhandari)


    1. पाठ का सार (Quick Revision Summary)

    • आत्मकथा नहीं, आत्मकथ्य: यह पाठ मन्नू भंडारी की सिलसिलेवार आत्मकथा नहीं है, बल्कि उनके जीवन के उन पलों और व्यक्तियों का वर्णन है जिन्होंने उनके लेखकीय व्यक्तित्व को आकार दिया।

      • English: Not an Autobiography, but a Memoir: This text is not a chronological autobiography of Mannu Bhandari, but a description of those moments and people in her life who shaped her literary personality.

    • पिता का प्रभाव: लेखिका के पिता इंदौर में प्रतिष्ठित और खुशहाल थे, लेकिन आर्थिक झटके के कारण वे अजमेर आ गए। गिरती आर्थिक स्थिति और अपनों द्वारा मिले धोखे ने उन्हें क्रोधी, शक्की और अहंवादी बना दिया था। वे लेखिका (जो काली और दुबली थीं) की तुलना उनकी गोरी बड़ी बहन सुशीला से करते थे, जिससे लेखिका में हीन-भावना (Inferiority Complex) घर कर गई।

      • English: Father's Influence: The author's father was reputed and prosperous in Indore, but due to a financial shock, they moved to Ajmer. Declining economic status and betrayal by close ones made him angry, suspicious, and egoistic. He used to compare the author (who was dark and thin) with her fair elder sister Sushila, which instilled an inferiority complex in the author.

    • माँ का व्यक्तित्व: लेखिका की माँ अनपढ़ थीं और धैर्य व सहनशक्ति की मूर्ति थीं। वे पति के क्रोध और बच्चों की जिद्दों को अपना भाग्य मानकर सहती थीं। लेखिका उन्हें अपना आदर्श नहीं बना सकीं क्योंकि उनका त्याग मजबूरी में लिपटा था।

      • English: Mother's Personality: The author's mother was uneducated and an idol of patience and endurance. She bore her husband's anger and children's stubbornness as her fate. The author could not make her a role model because her sacrifice was wrapped in helplessness.

    • शीला अग्रवाल का योगदान: कॉलेज में हिंदी प्राध्यापिका शीला अग्रवाल ने लेखिका को साहित्य की दुनिया में प्रवेश कराया। उन्होंने लेखिका को चुनकर किताबें पढ़ने के लिए दीं और बहस करना सिखाया। उन्होंने ही लेखिका के मन में आजादी की लड़ाई के लिए जोश भरा।

      • English: Contribution of Sheela Agarwal: In college, Hindi professor Sheela Agarwal introduced the author to the world of literature. She gave her selected books to read and taught her to debate. It was she who filled the author's mind with enthusiasm for the freedom struggle.

    • स्वतंत्रता आंदोलन में भागीदारी: सन् 1946-47 के दौरान, लेखिका ने प्रभात-फेरियाँ, हड़तालें और भाषणबाज़ी में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। पिता जी चाहते थे कि बेटी घर में बैठकर राजनीति समझे, लेकिन लड़कों के साथ सड़कों पर नारे लगाना उन्हें पसंद नहीं था। इस बात पर पिता और बेटी में अक्सर टकराव होता था।

      • English: Participation in Freedom Movement: During 1946-47, the author actively participated in morning processions, strikes, and speeches. Her father wanted his daughter to understand politics sitting at home, but he did not like her shouting slogans on the streets with boys. This often led to conflict between father and daughter.

    • पिता का गर्व: एक बार कॉलेज की प्रिंसिपल ने लेखिका की शिकायत की कि वे लड़कियों को भड़काती हैं। पिता जी गुस्से में कॉलेज गए, लेकिन जब उन्हें पता चला कि कॉलेज की लड़कियां मन्नू के एक इशारे पर क्लास छोड़ देती हैं और उनका रौब है, तो वे गर्व से भर गए। डॉ. अंबालाल ने भी लेखिका के भाषण की तारीफ की, जिससे पिता जी का गुस्सा गर्व में बदल गया।

      • English: Father's Pride: Once the college principal complained that the author was inciting girls. The father went to college in anger, but when he learned that the girls left class at Mannu's signal and she commanded respect, he was filled with pride. Dr. Ambalal also praised the author's speech, which turned the father's anger into pride.

    2. शब्द-संपदा (Vocabulary)

    शब्द (Word)

    अर्थ (Hindi Meaning)

    English Meaning

    भग्नावशेष

    खंडहर / टूटे-फूटे अवशेष

    Ruins / Remains

    दरियादिली

    उदारता / खुले दिल वाला

    Generosity / Large-heartedness

    भटियारखाना

    जहाँ चौबीसों घंटे चूल्हा जलता रहे (रसोईघर)

    Furnace / Kitchen (used negatively)

    विस्फारित

    फैला हुआ

    Expanded / Spread out

    हौसला

    हिम्मत

    Courage

    वर्चस्व

    दबदबा / प्रभाव

    Dominance / Hegemony

    निषिद्ध

    जिस पर रोक लगी हो

    Prohibited / Forbidden

    शगल

    शौक / आदत

    Hobby / Pastime

    दकियानूसी

    पुराने विचारों वाला

    Conservative / Orthodox

    गुबार

    मन का क्रोध या मैल

    Venting anger / Outburst

    3. चरित्र चित्रण (Character Sketches)

    मन्नू भंडारी (लेखिका / The Author)

    • विद्रोही और स्वाभिमानी (Rebellious & Self-respecting): बचपन में हीन-भावना की शिकार होने के बावजूद, उन्होंने अपनी मेहनत और शीला अग्रवाल की प्रेरणा से आत्मविश्वास पाया। वे पिता की दकियानूसी सोच और अंग्रेजों के शासन दोनों के खिलाफ खड़ी हुईं।

      • English: Despite suffering from an inferiority complex in childhood, she gained confidence through her hard work and Sheela Agarwal's inspiration. She stood against both her father's conservative thinking and British rule.

    • साहित्य प्रेमी और देशभक्त (Literature Lover & Patriot): साहित्य ने उन्हें संवेदनशील बनाया और देश की आजादी के आंदोलन में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई। वे निडर होकर भाषण देती थीं।

      • English: Literature made her sensitive, and she played an active role in the freedom movement. She used to give fearless speeches.

    लेखिका के पिता (Author's Father)

    • अंतर्विरोधी व्यक्तित्व (Contradictory Personality): वे आधुनिकता के समर्थक थे (बेटी को पढ़ाना, राजनीति समझाना) लेकिन रूढ़िवादी भी थे (बेटी को घर की चारदीवारी में रखना)। वे शक्की और क्रोधी थे, लेकिन अपनी प्रतिष्ठा (Social Image) के प्रति बहुत सजग थे।

      • English: He supported modernity (educating daughter, explaining politics) but was also conservative (keeping daughter within the four walls). He was suspicious and short-tempered but very conscious of his reputation.

    शीला अग्रवाल (Sheela Agarwal)

    • प्रेरक शिक्षिका (Inspiring Teacher): उन्होंने मन्नू भंडारी को मात्र 'किताबी कीड़ा' न बनकर साहित्य को जीवन से जोड़ने और देश के लिए कुछ करने की प्रेरणा दी। उन्होंने लेखिका के व्यक्तित्व को निखारने में अहम भूमिका निभाई।

      • English: She inspired Mannu Bhandari not to just be a bookworm but to connect literature with life and do something for the country. She played a key role in refining the author's personality.

    4. योग्यता-आधारित प्रश्न (Competency-Based Questions)

    A. अभिकथन और तर्क (Assertion & Reasoning)

    प्रश्न 1:

    अभिकथन (A): लेखिका के पिता चाहते थे कि मन्नू घर पर ही रहकर देश की स्थितियों को जाने-समझे।

    तर्क (R): वे नहीं चाहते थे कि उनकी बेटी रसोई (भटियारखाने) में अपना समय बर्बाद करे और अपनी प्रतिभा को कुंठित करे।

    उत्तर: (क) A और R दोनों सही हैं, तथा R, A की सही व्याख्या करता है। (पिता जी चाहते थे कि बेटी रसोई से दूर रहे और जागरूक बने, लेकिन घर की सीमा में रहकर)।

    प्रश्न 2:

    अभिकथन (A): लेखिका अपनी माँ को अपना आदर्श नहीं बनाना चाहती थीं।

    तर्क (R): उनकी माँ बहुत क्रोधी स्वभाव की थीं और बच्चों पर बहुत सख्ती करती थीं।

    उत्तर: (ग) A सही है, R गलत है। (माँ क्रोधी नहीं, बल्कि बहुत सहनशील और त्यागी थीं, लेकिन उनका त्याग मजबूरी वाला था, इसलिए लेखिका उन्हें आदर्श नहीं मानती थीं)।

    B. स्थिति-आधारित विश्लेषण (Situation Analysis)

    स्थिति (Situation): आज की लड़कियां हर क्षेत्र में लड़कों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं।

    प्रश्न (Question): 'एक कहानी यह भी' पाठ के संदर्भ में बताइए कि मन्नू भंडारी के समय में लड़कियों के लिए 'आजादी की सीमा' क्या थी और मन्नू ने उसे कैसे तोड़ा?

    उत्तर (Answer): उस समय लड़कियों के लिए आजादी की सीमा 'घर की चारदीवारी' तक थी। उन्हें पढ़ना-लिखना तो था, लेकिन सार्वजनिक रूप से लड़कों के साथ नारे लगाना या भाषण देना वर्जित था। मन्नू ने अपने पिता के विरोध के बावजूद सड़कों पर उतरकर, हड़तालें करवाकर और भाषण देकर इस सीमा को तोड़ा। उन्होंने साबित किया कि देशसेवा में लिंग का भेद नहीं होता।

    C. आशय स्पष्टीकरण (Intent/Inference)

    प्रश्न 1: "रसोई को वे भटियारखाना कहते थे।"

    उत्तर: लेखिका के पिता का मानना था कि रसोई में काम करने से लड़कियों की प्रतिभा और क्षमता नष्ट हो जाती है (भट्ठी में झोंक दी जाती है)। 'भटियारखाना' शब्द का प्रयोग रसोई के काम को नीचा और प्रतिभा-नाशक बताने के लिए किया गया है।

    प्रश्न 2: "आज भी परिचय करवाते समय... मैं संकोच से सिमट ही नहीं जाती बल्कि गड़ने-गड़ने को हो आती हूँ।"

    उत्तर: यह पंक्ति लेखिका के बचपन की 'हीन-भावना' (Inferiority Complex) को दर्शाती है। बचपन में काली और दुबली होने के कारण पिता द्वारा नकारे जाने का गहरा असर उन पर पड़ा था। आज सफल लेखिका बनने के बाद भी उन्हें विश्वास नहीं होता कि यह सफलता उनकी अपनी है, उन्हें यह सब 'तुक्का' लगता है।

    5. प्रश्न-उत्तर (Subjective Q&A)

    A. लघु उत्तरीय (Short Answer - 30-40 Words)

    प्रश्न 1: लेखिका के पिता ने रसोई को 'भटियारखाना' कहकर क्यों संबोधित किया है?

    उत्तर: लेखिका के पिता का मानना था कि रसोई में रहने से लड़कियों की मानसिक क्षमता और प्रतिभा कुंठित हो जाती है। वे चाहते थे कि उनकी बेटी देश-दुनिया की जानकारी रखे, न कि केवल चूल्हा-चौका तक सीमित रहकर अपनी योग्यता बर्बाद करे।

    प्रश्न 2: शीला अग्रवाल ने लेखिका के जीवन में क्या परिवर्तन किया?

    उत्तर: शीला अग्रवाल ने लेखिका की साहित्यिक समझ को बढ़ाया। उन्होंने लेखिका को चुनकर किताबें दीं और उन पर चर्चा की। साथ ही, उन्होंने लेखिका को घर की चारदीवारी से निकालकर स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भागीदारी (Active Participation) के लिए प्रेरित किया।

    प्रश्न 3: डॉ. अंबालाल ने लेखिका के पिता से क्या कहा और उसका पिता पर क्या असर हुआ?

    उत्तर: डॉ. अंबालाल ने पिता जी को बधाई देते हुए कहा कि "भंडारी जी, आपने क्या बेटी पाई है! मैंने अभी उसका धुआँधार भाषण सुना, मुझे उस पर गर्व है।" यह सुनकर पिता जी का गुस्सा गर्व में बदल गया और उनका चेहरा खिल उठा।

    प्रश्न 4: लेखिका को अपने पिता से वैचारिक टकराहट क्यों रहती थी?

    उत्तर: पिता जी लेखिका को जागरूक तो बनाना चाहते थे लेकिन अपनी शर्तों पर (घर के भीतर)। जबकि लेखिका खुले आसमान में उड़ना चाहती थीं। पिता जी की दकियानूसी सोच, शक करने की आदत और अहम (Ego) लेखिका के आधुनिक विचारों से टकराते थे।

    प्रश्न 5: प्रिंसिपल ने लेखिका के पिता को कॉलेज क्यों बुलाया?

    उत्तर: प्रिंसिपल ने शिकायत करने के लिए बुलाया कि मन्नू भंडारी कॉलेज की लड़कियों को भड़काती हैं, हड़तालें करवाती हैं और अनुशासन तोड़ती हैं। उनके कारण कॉलेज चलाना मुश्किल हो गया है, इसलिए उन्हें घर बिठा लिया जाए।

    B. दीर्घ उत्तरीय/मूल्यपरक (Long/Value-Based - 100 Words)

    प्रश्न 1: 'एक कहानी यह भी' पाठ के आधार पर बताइए कि लेखिका के पिता के व्यक्तित्व की किन विशेषताओं ने लेखिका को प्रभावित किया? (सकारात्मक और नकारात्मक दोनों)

    उत्तर: लेखिका के पिता का व्यक्तित्व जटिल था।

    • नकारात्मक प्रभाव: उनके शक्की स्वभाव और रंग-भेद (काली-गोरी की तुलना) ने लेखिका में हीन-भावना भर दी, जिससे वे जीवन भर आत्मविश्वास की कमी महसूस करती रहीं। उनके क्रोधी स्वभाव ने घर का माहौल तनावपूर्ण रखा।

    • सकारात्मक प्रभाव: उन्होंने लेखिका को रसोई से दूर रखकर देश-दुनिया की बहस में शामिल किया, जिससे राजनीतिक समझ विकसित हुई। उनकी 'यश-लिप्सा' (नाम कमाने की चाह) ने लेखिका को कुछ विशिष्ट करने के लिए प्रेरित किया। उनके अंतर्विरोधों से लड़कर ही लेखिका का विद्रोही व्यक्तित्व बना।

    प्रश्न 2: "पड़ोस कल्चर" अब लुप्त होता जा रहा है। मन्नू भंडारी के बचपन और आज के समय की तुलना करते हुए अपने विचार व्यक्त कीजिए।

    उत्तर: मन्नू भंडारी के बचपन में घर की दीवारें पूरे मोहल्ले तक फैली थीं। बच्चे किसी भी घर में बेरोक-टोक जा सकते थे और सब एक परिवार की तरह रहते थे। दुख-सुख साझा होते थे। लेकिन आज महानगरों में 'फ्लैट कल्चर' ने लोगों को सीमित कर दिया है। हम अपने पड़ोसी को भी ठीक से नहीं जानते। इस अलगाव ने हमें असुरक्षित और आत्मकेंद्रित बना दिया है। बच्चों को वह खुलापन और स्नेह नहीं मिलता जो पहले मिलता था। सामाजिक समरसता के लिए 'पड़ोस कल्चर' का पुनर्जीवित होना आवश्यक है।

    प्रश्न 3: स्वतंत्रता आंदोलन में मन्नू भंडारी की भूमिका का वर्णन कीजिए। क्या एक छात्र के रूप में राजनीति में भाग लेना सही है?

    उत्तर: मन्नू भंडारी ने 1946-47 के आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाई। वे शहर के मुख्य चौराहों पर भाषण देती थीं, हड़तालें करवाती थीं और रैलियाँ निकालती थीं। उनका भाषण इतना ओजस्वी होता था कि डॉक्टर अंबालाल जैसे वरिष्ठ लोग भी प्रभावित हो जाते थे। जहाँ तक छात्रों के राजनीति में भाग लेने का प्रश्न है, यदि राजनीति देशहित और जागरूकता के लिए हो (जैसे मन्नू की थी), तो यह उचित है। इससे छात्रों में नेतृत्व क्षमता और नागरिक दायित्व का विकास होता है। लेकिन पढ़ाई की कीमत पर हुड़दंग करना अनुचित है।

    6. व्याकरण (Integrated Grammar)

    (Based on Class 10 Hindi Course A Pattern)

    प्रश्न 1: पद-परिचय: "मैं काली हूँ।" (रेखांकित: काली)

    उत्तर: विशेषण (गुणवाचक), स्त्रीलिंग, एकवचन, 'मैं' (विशेष्य) की विशेषता बता रहा है।

    प्रश्न 2: वाच्य परिवर्तन: "ड्राइवर ने ज़ोर से ब्रेक मारे।" (कर्मवाच्य में बदलिए)

    उत्तर: ड्राइवर द्वारा ज़ोर से ब्रेक मारे गए।

    प्रश्न 3: निपात छाँटिए और भेद बताइए: "यह सब तो मैंने केवल सुना।"

    उत्तर: 'तो' और 'केवल' (निपात हैं)।

    प्रश्न 4: रचना के आधार पर वाक्य भेद: "जब मैं घर लौटी तो पिता जी के मित्र बैठे थे।"

    उत्तर: मिश्र वाक्य (Mixed Sentence).

    7. सामान्य त्रुटियाँ (Common Student Errors)

    1. आत्मकथा vs आत्मकथ्य:

      • त्रुटि: छात्र इसे पूरी आत्मकथा मान लेते हैं।

      • सुधार: यह एक 'आत्मकथ्य' है, जिसमें केवल वे ही घटनाएं हैं जो उनके लेखक बनने में सहायक हुईं।

    2. शहर का नाम:

      • त्रुटि: छात्र अक्सर इंदौर और अजमेर में कंफ्यूज होते हैं।

      • सुधार: जन्म भानपुरा में हुआ, बचपन इंदौर में बीता, लेकिन यादों का सिलसिला अजमेर से शुरू होता है (ब्रह्मपुरी मोहल्ला)।

    3. पिता का स्वभाव:

      • त्रुटि: छात्र पिता को केवल खलनायक (Villain) के रूप में देखते हैं।

      • सुधार: पिता में अच्छाइयां भी थीं (शिक्षा प्रेमी, जागरूक), लेकिन परिस्थितियों ने उन्हें कड़वा बना दिया था। उनका चरित्र 'ग्रे' (Grey) है, पूरी तरह काला नहीं।





    About BhashaLab


    BhashaLab is a dynamic platform dedicated to the exploration and mastery of languages - operating both online and offline. Aligned with the National Education Policy (NEP) 2020 and the National Credit Framework (NCrF), we offer language education that emphasizes measurable learning outcomes and recognized, transferable credits.


    We offer:

    1. NEP alligned offline language courses for degree colleges - English, Sanskrit, Marathi and Hindi

    2. NEP alligned offline language courses for schools - English, Sanskrit, Marathi and Hindi

    3. Std VIII, IX and X - English and Sanskrit Curriculum Tuitions - All boards

    4. International English Olympiad Tuitions - All classes

    5. Basic and Advanced English Grammar - Offline and Online - Class 3 and above

    6. English Communication Skills for working professionals, adults and students - Offline and Online


    Contact: +91 86577 20901, +91 97021 12044


    Found any mistakes or suggestions? Click here to send us your fee

     
     
     
    bottom of page