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    11 - नौबतखाने में इबादत (Naubatkhane Mein Ibadat) - Class 10 Kshitij 2

    • Dec 13, 2025
    • 9 min read

    Updated: Dec 16, 2025

    नौबतखाने में इबादत (Naubatkhane Mein Ibadat)

    Class 10 - Hindi Course A (Kshitij Bhag 2) | Author: यतींद्र मिश्र (Yatindra Mishra)


    1. पाठ का सार (Quick Revision Summary)

    • बिस्मिल्ला खाँ का परिचय: उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ (बचपन का नाम अमीरुद्दीन) का जन्म डुमराँव (बिहार) में हुआ था, लेकिन उनका कर्मक्षेत्र काशी (वाराणसी) रहा। वे भारत के सर्वश्रेष्ठ शहनाई वादक थे और उन्हें 'भारत रत्न' से सम्मानित किया गया था।

      • English: Introduction to Bismillah Khan: Ustad Bismillah Khan (childhood name Amiruddin) was born in Dumraon (Bihar), but his workplace was Kashi (Varanasi). He was India's best Shehnai player and was awarded the 'Bharat Ratna'.

    • डुमराँव और शहनाई: शहनाई बजाने के लिए जिस 'रीड' (Reed) का प्रयोग होता है, वह 'नरकट' (एक प्रकार की घास) से बनती है। यह नरकट डुमराँव में सोन नदी के किनारे पाई जाती है। इसलिए शहनाई और डुमराँव का गहरा रिश्ता है।

      • English: Dumraon and Shehnai: The 'reed' used to play the Shehnai is made from 'Narkat' (a type of grass). This Narkat is found on the banks of the Son River in Dumraon. Hence, there is a deep connection between Shehnai and Dumraon.

    • काशी और बालाजी मंदिर: बिस्मिल्ला खाँ अपने मामा के साथ काशी में रहते थे। वे रोज़ बालाजी मंदिर की ड्योढ़ी पर शहनाई बजाते थे। मंदिर जाने के लिए वे उस रास्ते का प्रयोग करते थे जहाँ रसूलनबाई और बतूलनबाई (गायिकाएँ) रहती थीं, जिनके गायन ने उन्हें संगीत के प्रति प्रेरित किया।

      • English: Kashi and Balaji Temple: Bismillah Khan lived in Kashi with his maternal uncle. He used to play Shehnai daily at the entrance (Deorhi) of the Balaji Temple. To go to the temple, he used the path where Rasoolan Bai and Batoolan Bai (singers) lived, whose singing inspired him towards music.

    • संगीत ही ईश्वर (इबादत): खाँ साहब के लिए शहनाई बजाना ईश्वर की पूजा (इबादत) जैसा था। वे पाँचों वक्त की नमाज़ में ईश्वर से 'सच्चे सुर' की नेमत (वरदान) माँगते थे। वे कहते थे, "मालिक एक सुर बख्श दे, सुर में वह तासीर पैदा कर कि आँखों से सच्चे मोती की तरह आँसू निकल आएँ।"

      • English: Music is Worship: For Khan Saheb, playing the Shehnai was like worshiping God (Ibadat). In his five daily prayers (Namaz), he used to ask God for the gift of a 'true note' (Sur). He would say, "O Master, grant me a note, create such effect in the note that tears flow from the eyes like true pearls."

    • गंगा-जमुनी तहज़ीब: बिस्मिल्ला खाँ सांप्रदायिक सद्भाव की मिसाल थे। वे एक सच्चे मुसलमान थे जो मुहर्रम के दिनों में शोक मनाते थे और शहनाई नहीं बजाते थे। साथ ही, उनकी काशी विश्वनाथ और गंगा मैया के प्रति भी अटूट श्रद्धा थी। वे काशी छोड़कर कहीं नहीं जाना चाहते थे।

      • English: Syncretic Culture: Bismillah Khan was an example of communal harmony. He was a devout Muslim who mourned during Muharram and did not play the Shehnai. At the same time, he had unshakable faith in Kashi Vishwanath and Ganga Maiya. He never wanted to leave Kashi.

    • सादगी और विनम्रता: भारत रत्न मिलने के बाद भी उनमें घमंड नहीं आया। वे फटी हुई लुंगी (तहमद) पहनकर मिलते थे। जब उनकी शिष्या ने उन्हें टोका, तो उन्होंने कहा कि "भारत रत्न शहनाई पर मिला है, लुंगी पर नहीं"। वे रियाज़ (अभ्यास) को महत्व देते थे, दिखावे को नहीं।

      • English: Simplicity and Humility: Even after receiving the Bharat Ratna, he did not become arrogant. He used to meet people wearing a torn lungi. When his student objected, he said, "Bharat Ratna has been awarded for the Shehnai, not for the lungi". He valued practice (Riyaz) over show-off.

    2. शब्द-संपदा (Vocabulary)

    शब्द (Word)

    अर्थ (Hindi Meaning)

    English Meaning

    नौबतखाना

    प्रवेश द्वार के ऊपर मंगलध्वनि बजाने का स्थान

    Place for playing auspicious music over the entrance

    इबादत

    पूजा / उपासना

    Worship / Prayer

    सुषिर-वाद्य

    फूँककर बजाए जाने वाले वाद्य (जैसे-बाँसुरी, शहनाई)

    Wind instruments

    रियाज़

    अभ्यास / साधना

    Practice

    तासीर

    प्रभाव / असर

    Effect / Impact

    सजदा

    माथा टेकना (ईश्वर के आगे)

    Prostration / Bowing

    अज़ादारी

    शोक मनाना (मुहर्रम में)

    Mourning (in Muharram)

    नेमत

    ईश्वर की देन / वरदान

    Blessing / Gift from God

    सुकून

    शांति / आराम

    Peace / Relief

    तिलिस्म

    जादू

    Magic

    बदस्तूर

    नियम के अनुसार / जैसे का तैसा

    As usual / Unchanged

    3. चरित्र चित्रण (Character Sketches)

    बिस्मिल्ला खाँ (Bismillah Khan)

    • समर्पित संगीत साधक (Dedicated Musician): वे 80 वर्ष की उम्र में भी खुद को पूर्ण नहीं मानते थे और ईश्वर से 'सुर' माँगते रहते थे। संगीत उनके लिए केवल कला नहीं, बल्कि ईश्वर तक पहुँचने का रास्ता था।

      • English: Even at the age of 80, he did not consider himself perfect and kept asking God for 'Sur' (musical notes). For him, music was not just an art but a way to reach God.

    • सांप्रदायिक सद्भाव के प्रतीक (Symbol of Communal Harmony): वे मुस्लिम होते हुए भी हिंदू मंदिरों (बालाजी, विश्वनाथ) में शहनाई बजाते थे और गंगा को अपनी माँ मानते थे। वे धर्म के नाम पर भेद नहीं करते थे।

      • English: Despite being a Muslim, he played Shehnai in Hindu temples (Balaji, Vishwanath) and considered Ganga as his mother. He did not discriminate in the name of religion.

    • बेहद सरल और सादे (Extremely Simple): इतनी शोहरत और 'भारत रत्न' पाने के बाद भी वे एक साधारण आदमी की तरह जीते थे। उन्हें बनावटीपन और दिखावे से सख्त नफरत थी।

      • English: Even after gaining so much fame and 'Bharat Ratna', he lived like a common man. He hated artificiality and show-off.

    4. योग्यता-आधारित प्रश्न (Competency-Based Questions)

    A. अभिकथन और तर्क (Assertion & Reasoning) प्रश्न 1: अभिकथन (A): बिस्मिल्ला खाँ को काशी छोड़कर कहीं और जाना पसंद नहीं था। तर्क (R): काशी में उन्हें बहुत धन-दौलत और सुविधाएं मिलती थीं जो अन्यत्र नहीं थीं। उत्तर: (ग) A सही है, R गलत है। (वे काशी इसलिए नहीं छोड़ना चाहते थे क्योंकि वहाँ बाबा विश्वनाथ, गंगा और उनके पूर्वजों की यादें थीं, धन के कारण नहीं)।

    प्रश्न 2: अभिकथन (A): शहनाई को 'सुषिर-वाद्यों में शाह' (Shahney) कहा गया है। तर्क (R): शहनाई की आवाज़ बहुत मधुर और मंगलकारी होती है और यह सभी फूँककर बजाए जाने वाले वाद्यों में श्रेष्ठ है। उत्तर: (क) A और R दोनों सही हैं, तथा R, A की सही व्याख्या करता है। B. स्थिति-आधारित विश्लेषण (Situation Analysis) स्थिति (Situation): एक व्यक्ति अपने काम में बहुत सफल है और उसे कई पुरस्कार मिले हैं, लेकिन वह अब मेहनत करना छोड़ देता है और अहंकार में रहता है। प्रश्न (Question): 'नौबतखाने में इबादत' पाठ के आधार पर बताइए कि बिस्मिल्ला खाँ का दृष्टिकोण इस व्यक्ति से कैसे भिन्न था? उत्तर (Answer): बिस्मिल्ला खाँ सफलता के शिखर (भारत रत्न) पर पहुँचने के बाद भी विनम्र थे। वे मानते थे कि अभी उन्हें बहुत कुछ सीखना बाकी है। वे ईश्वर से प्रार्थना करते थे कि "फटा सुर न बख्शें" (सुर न बिगड़े)। वे अहंकार करने के बजाय निरंतर 'रियाज़' (अभ्यास) में विश्वास रखते थे, जो उस व्यक्ति के विपरीत है।

    C. आशय स्पष्टीकरण (Intent/Inference) प्रश्न 1: "फटा सुर न बख्शें। लुंगिया का क्या है, आज फटी है, तो कल सी जाएगी।" उत्तर: बिस्मिल्ला खाँ का आशय है कि संगीत (सुर) ही कलाकार की असली पहचान और आत्मा है। यदि सुर बिगड़ गया (फट गया), तो उसकी भरपाई नहीं हो सकती। लेकिन कपड़े (लुंगी) बाहरी वस्तु हैं, अगर वे फट भी जाएं तो उन्हें सिला जा सकता है या बदला जा सकता है। वे भौतिक सुखों से अधिक महत्व अपनी कला की शुद्धता को देते थे।

    प्रश्न 2: "काशी संस्कृति की पाठशाला है।" उत्तर: इसका आशय है कि काशी (बनारस) केवल एक शहर नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, संगीत, भक्ति और ज्ञान का केंद्र है। यहाँ हज़ारों सालों का इतिहास, बड़े-बड़े संगीतकार (जैसे बिस्मिल्ला खाँ, कंठे महाराज) और धार्मिक सद्भाव (बिस्मिल्ला खाँ और विश्वनाथ) एक साथ देखने को मिलते हैं। यहाँ से ही तहज़ीब और कला सीखी जाती है।

    5. प्रश्न-उत्तर (Subjective Q&A)

    A. लघु उत्तरीय (Short Answer - 30-40 Words) प्रश्न 1: शहनाई की दुनिया में डुमराँव को क्यों याद किया जाता है? उत्तर: शहनाई बजाने के लिए जिस 'रीड' (नरकट) का प्रयोग होता है, वह डुमराँव में सोन नदी के किनारे पाई जाती है। इसके बिना शहनाई नहीं बज सकती। साथ ही, महान शहनाई वादक बिस्मिल्ला खाँ का जन्म भी डुमराँव में ही हुआ था।

    प्रश्न 2: बिस्मिल्ला खाँ को शहनाई की 'मंगलध्वनि' का नायक क्यों कहा जाता है? उत्तर: शहनाई का प्रयोग विवाह और शुभ कार्यों में किया जाता है, इसलिए इसे मंगलध्वनि का वाद्य कहते हैं। बिस्मिल्ला खाँ ने इस वाद्य को शास्त्रीय ऊंचाइयों तक पहुँचाया और इसे विश्व प्रसिद्ध किया, इसलिए वे इसके नायक हैं।

    प्रश्न 3: मुहर्रम के दिनों में बिस्मिल्ला खाँ और उनके खानदान का क्या नियम था? उत्तर: मुहर्रम के दस दिनों तक उनके खानदान का कोई भी व्यक्ति न तो शहनाई बजाता था और न ही किसी संगीत कार्यक्रम में भाग लेता था। आठवीं तारीख को बिस्मिल्ला खाँ पैदल रोते हुए और शोक धुन बजाते हुए दालमंडी से फातमान तक जाते थे।

    प्रश्न 4: बिस्मिल्ला खाँ के जीवन पर किन दो महिलाओं का प्रभाव पड़ा? उत्तर: उनके जीवन पर 'रसूलनबाई' और 'बतूलनबाई' नामक दो गायिका बहनों का गहरा प्रभाव पड़ा। बचपन में मंदिर जाते समय वे इनके टप्पे और ठुमरी सुनते थे, जिससे उनके मन में संगीत के प्रति प्रेम और प्रेरणा जागी।

    प्रश्न 5: सुषिर-वाद्यों से क्या अभिप्राय है? उत्तर: सुषिर-वाद्य वे वाद्य यंत्र होते हैं जिन्हें फूँककर बजाया जाता है और जिनमें छिद्र (सुराख) होते हैं। जैसे- बाँसुरी, शहनाई, बीन, आदि। शहनाई इनमें सबसे श्रेष्ठ मानी जाती है।

    B. दीर्घ उत्तरीय/मूल्यपरक (Long/Value-Based - 100 Words) प्रश्न 1: बिस्मिल्ला खाँ का जीवन सांप्रदायिक सौहार्द (Communal Harmony) की एक मिसाल है। पाठ के आधार पर सिद्ध कीजिए। उत्तर: बिस्मिल्ला खाँ का जीवन सिद्ध करता है कि संगीत किसी धर्म में बँधा नहीं होता। वे एक सच्चे मुसलमान थे जो पाँचों वक्त नमाज़ पढ़ते थे और मुहर्रम में शोक मनाते थे। इसके बावजूद, वे काशी विश्वनाथ और बालाजी मंदिर में शहनाई बजाते थे और गंगा को अपनी माँ मानते थे। उनकी शहनाई की धुन से ही काशी में दिन की शुरुआत होती थी। वे कहते थे कि "संगीत ही उनका धर्म है"। उनका व्यक्तित्व हिंदू-मुस्लिम एकता और भारतीय संस्कृति की मिली-जुली विरासत (गंगा-जमुनी तहज़ीब) का जीवंत उदाहरण था।

    प्रश्न 2: "सफलता पाने के लिए निरंतर अभ्यास और समर्पण आवश्यक है।" बिस्मिल्ला खाँ के जीवन से यह कैसे प्रमाणित होता है? उत्तर: बिस्मिल्ला खाँ को 'भारत रत्न' जैसा सर्वोच्च सम्मान मिला, फिर भी उन्होंने अभ्यास (रियाज़) करना नहीं छोड़ा। 80 वर्ष की आयु में भी वे अपनी कला में सुधार की गुंजाइश देखते थे और ईश्वर से 'सच्चे सुर' की माँग करते थे। वे कहते थे कि "सातों सुरों को बरतने की तमीज़ उन्हें अब तक सलीके से नहीं आई"। उनका यह कथन उनकी विनम्रता और सीखने की ललक को दर्शाता है। यह प्रमाणित करता है कि महान बनने के लिए केवल प्रतिभा काफी नहीं है, बल्कि जीवन भर समर्पण और कठोर परिश्रम (रियाज़) की आवश्यकता होती है।

    प्रश्न 3: काशी में हो रहे कौन-से परिवर्तन बिस्मिल्ला खाँ को व्यथित (दुखी) करते थे? उत्तर: बिस्मिल्ला खाँ को दुख था कि काशी से पुरानी परंपराएँ और तहज़ीब धीरे-धीरे लुप्त हो रही हैं। अब संगीत और साहित्य का वैसा सम्मान नहीं रहा। मलाई-बर्फ वाले जा चुके हैं और देसी घी की कचौड़ियाँ भी अब पहले जैसी नहीं रहीं (स्वाद और शुद्धता कम हो गई है)। संगतकारों (साथियों) के लिए गायकों के मन में आदर कम हो गया है। हिंदू-मुस्लिम भाईचारे में भी कमी आई है। ये बदलाव उन्हें कचोटते थे क्योंकि वे पुरानी काशी और उसकी समृद्ध विरासत से बेहद प्यार करते थे।

    6. व्याकरण (Integrated Grammar)

    (Based on Class 10 Hindi Course A Pattern - वाक्य भेद)

    प्रश्न 1: वाक्य का भेद बताइए: "अमीरुद्दीन का जन्म डुमराँव में हुआ था और उनका पालन-पोषण काशी में हुआ।" उत्तर: संयुक्त वाक्य (क्योंकि 'और' योजक से दो स्वतंत्र वाक्य जुड़े हैं)।

    प्रश्न 2: मिश्र वाक्य में बदलिए: "काशी में संगीत आयोजन की एक प्राचीन एवं अद्भुत परंपरा है।" उत्तर: काशी में जो संगीत आयोजन होता है, वह एक प्राचीन एवं अद्भुत परंपरा है।

    प्रश्न 3: आश्रित उपवाक्य छाँटिए: "वह शहनाई, जो बिस्मिल्ला खाँ बजाते थे, बहुत मधुर थी।" उत्तर: जो बिस्मिल्ला खाँ बजाते थे (विशेषण उपवाक्य)।

    प्रश्न 4: पद-परिचय: "बिस्मिल्ला खाँ शहनाई बजाते थे।" (रेखांकित: बिस्मिल्ला खाँ) उत्तर: संज्ञा (व्यक्तिवाचक), पुल्लिंग, एकवचन, कर्ता कारक, 'बजाते थे' क्रिया का कर्ता।

    7. सामान्य त्रुटियाँ (Common Student Errors)

    1. जन्म स्थान और कर्म स्थान:

      • त्रुटि: छात्र अक्सर लिखते हैं कि उनका जन्म काशी (वाराणसी) में हुआ।

      • सुधार: उनका जन्म डुमराँव (बिहार) में हुआ था, लेकिन वे बचपन में काशी (ननिहाल) आ गए थे और वहीं रहे।

    2. शहनाई और बाँसुरी:

      • त्रुटि: छात्र शहनाई को बाँसुरी समझ लेते हैं।

      • सुधार: शहनाई एक अलग वाद्य है जिसमें 'रीड' (नरकट) का प्रयोग होता है और यह मांगलिक अवसरों पर बजाई जाती है।

    3. भारत रत्न और सादगी:

      • त्रुटि: छात्र मानते हैं कि भारत रत्न मिलने के बाद वे अमीर हो गए थे और ठाठ से रहते थे।

      • सुधार: वे अंत तक बेहद सादगी से रहे और फटी लुंगी पहनने में भी संकोच नहीं करते थे।



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