13. पतझर में टूटी पत्तियाँ - Patjhar Mein Tooti Pattiyan - Class 10 - Sparsh Bhag 2
- Dec 8, 2025
- 10 min read
Updated: Dec 13, 2025

पतझर में टूटी पत्तियाँ (Patjhar Mein Tooti Pattiyan)
Class 10 - Hindi Course B (Sparsh Bhag 2) | Author: रवींद्र केलेकर (Ravindra Kelekar)
1. पाठ का सार (Quick Revision Summary)
(I) गिन्नी का सोना (Ginni Ka Sona)
शुद्ध सोना बनाम गिन्नी का सोना: लेखक बताते हैं कि शुद्ध सोना अलग होता है और गिन्नी का सोना अलग। गिन्नी के सोने में मजबूती के लिए थोड़ा तांबा मिलाया जाता है, जिससे वह ज्यादा चमकता है और उससे गहने बनाए जा सकते हैं।
English: Pure Gold vs Guinea Gold: The author explains that pure gold is different from guinea gold. Guinea gold has a little copper mixed in it for strength, making it shine more and suitable for making jewelry.
आदर्शवाद बनाम व्यावहारिकता: शुद्ध आदर्श 'शुद्ध सोने' की तरह होते हैं। जब लोग आदर्शों में थोड़ी व्यावहारिकता (तांबा) मिला देते हैं, तो उन्हें 'प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट' (व्यावहारिक आदर्शवादी) कहा जाता है।
English: Idealism vs Practicality: Pure ideals are like 'pure gold'. When people mix a little practicality (copper) with ideals, they are called 'Practical Idealists'.
व्यावहारिकता का परिणाम: जब व्यावहारिकता का बखान होने लगता है, तो आदर्श पीछे छूट जाते हैं (सोना पीछे, तांबा आगे)। व्यवहारवादी लोग केवल लाभ-हानि देखकर कदम उठाते हैं, वे खुद तो आगे बढ़ते हैं लेकिन समाज को नीचे गिराते हैं।
English: Consequence of Practicality: When practicality is glorified, ideals are left behind (gold behind, copper ahead). Pragmatic people only look at profit and loss; they advance themselves but degrade society.
गांधीजी का उदाहरण: गांधीजी भी 'प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट' थे, लेकिन उन्होंने कभी आदर्शों को व्यावहारिकता के स्तर पर गिरने नहीं दिया। उन्होंने व्यावहारिकता को आदर्शों के स्तर पर उठाया (तांबे में सोना मिलाया, सोने में तांबा नहीं)। इसलिए उनके आदर्श हमेशा आगे रहे।
English: Example of Gandhi Ji: Gandhi Ji was also a 'Practical Idealist', but he never let ideals fall to the level of practicality. He raised practicality to the level of ideals (mixed gold in copper, not copper in gold). Hence, his ideals always remained at the forefront.
शाश्वत मूल्य: समाज के पास जो भी शाश्वत (Eternal) मूल्य हैं, वे आदर्शवादियों की देन हैं, व्यवहारवादियों की नहीं।
English: Eternal Values: Whatever eternal values society possesses are gifts from idealists, not from pragmatists.
(II) झेन की देन (Zen Ki Den)
जापान में मानसिक तनाव: जापान में 80% लोग मनोरुग्ण (Mental patients) हैं क्योंकि वहां जीवन की रफ्तार बहुत तेज है। लोग चलते नहीं दौड़ते हैं, बोलते नहीं बकते हैं। वे अमेरिका से प्रतिस्पर्धा करने के चक्कर में एक महीने का काम एक दिन में करना चाहते हैं, जिससे दिमाग का तनाव बढ़ जाता है।
English: Mental Stress in Japan: 80% of people in Japan are mental patients because the pace of life there is very fast. People don't walk, they run; they don't speak, they blabber. In an attempt to compete with America, they try to do a month's work in a day, which increases mental stress.
टी-सेरेमनी (चा-नो-यू): लेखक अपने मित्र के साथ मानसिक शांति के लिए 'टी-सेरेमनी' में गए। यह जापान में चाय पीने की एक विशेष विधि है, जिसे 'चा-नो-यू' कहते हैं। वहां का वातावरण अत्यंत शांत था।
English: Tea Ceremony (Cha-no-yu): The author went to a 'Tea Ceremony' with his friend for mental peace. It is a special method of drinking tea in Japan, called 'Cha-no-yu'. The atmosphere there was extremely peaceful.
शांतिपूर्ण वातावरण: पर्णकुटी (चाय घर) में केवल तीन लोगों को प्रवेश की अनुमति थी। चाजीन (चाय पिलाने वाला) ने बड़े सलीके और गरिमा से चाय तैयार की। वहां इतनी शांति थी कि पानी के उबलने (खदबदाने) की आवाज भी सुनाई दे रही थी।
English: Peaceful Atmosphere: Only three people were allowed inside the tea house (Parnakuti). The Cha-jin (tea master) prepared tea with great elegance and dignity. It was so quiet that even the sound of boiling water could be heard.
वर्तमान में जीना: चाय पीते समय लेखक के दिमाग की रफ्तार धीमी होती गई और अंत में सन्नाटा छा गया। उन्हें लगा कि वे अनंतकाल में जी रहे हैं। भूतकाल और भविष्यकाल दोनों मिट गए, केवल 'वर्तमान क्षण' सामने था।
English: Living in the Present: While drinking tea, the author's mind slowed down and finally, there was silence. He felt as if he was living in eternity. Both the past and the future disappeared; only the 'present moment' was there.
जीना किसे कहते हैं: लेखक को अहसास हुआ कि अक्सर हम या तो बीती यादों में रहते हैं या भविष्य के सपनों में, जबकि दोनों मिथ्या (झूठ) हैं। सत्य केवल वर्तमान है। उसी में जीना ही सच्चा जीवन है। यह झेन परंपरा की देन है।
English: What is Living: The author realized that we often live either in past memories or future dreams, whereas both are illusions. Only the present is true. Living in it is true life. This is the gift of the Zen tradition.
2. शब्द-संपदा (Vocabulary)
शब्द (Word) | अर्थ (Hindi Meaning) | English Meaning |
गिन्नी | सोने का सिक्का | Guinea (Gold Coin) |
बखान | प्रशंसा / वर्णन | Praise / Description |
सजग | सावधान / सचेत | Alert / Aware |
शाश्वत | सदा रहने वाला | Eternal / Everlasting |
मनोरुग्ण | मानसिक रोगी | Mentally ill |
प्रतिस्पर्धा | होड़ / मुकाबला | Competition |
चा-नो-यू | चाय पीने की विधि (जापानी) | Tea Ceremony |
पर्णकुटी | पत्तों की झोपड़ी | Hut made of leaves |
चाजीन | चाय पिलाने वाला | Tea Master |
भंगिमा | मुद्रा / अंदाज | Posture / Gesture |
मिथ्या | झूठ / भ्रम | False / Illusion |
गरिमापूर्ण | सलीके से / गौरवमय | Dignified / Graceful |
3. चरित्र चित्रण (Character Sketches)
गांधीजी (Gandhi Ji - In 'Ginni Ka Sona')
आदर्शवादी और व्यावहारिक (Idealist & Practical): गांधीजी आदर्शों को सर्वोपरि मानते थे। वे व्यावहारिकता की कीमत जानते थे, लेकिन उन्होंने कभी अपने आदर्शों से समझौता नहीं किया। वे 'प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट' थे जिन्होंने आदर्शों को व्यावहारिकता के स्तर पर गिरने नहीं दिया।
English: Gandhi Ji considered ideals supreme. He knew the value of practicality but never compromised on his ideals. He was a 'Practical Idealist' who did not let ideals fall to the level of practicality.
चाजीन (Cha-jin - In 'Zen Ki Den')
अनुशासित और गरिमामय (Disciplined & Dignified): वह चाय बनाने और परोसने की हर क्रिया (अंगीठी सुलगाना, बर्तन पोंछना, चाय डालना) अत्यंत सलीके और गरिमा के साथ करता है। उसका व्यवहार अत्यंत शांत और स्वागतपूर्ण है।
English: He performs every action of making and serving tea (lighting the stove, wiping utensils, pouring tea) with great elegance and dignity. His demeanor is extremely calm and welcoming.
4. योग्यता-आधारित प्रश्न (Competency-Based Questions)
A. अभिकथन और तर्क (Assertion & Reasoning)
प्रश्न 1: अभिकथन (A): जापान के लोग मानसिक रोगों के शिकार हो रहे हैं। तर्क (R): वे अमेरिका से प्रतिस्पर्धा करने के कारण एक महीने का काम एक दिन में पूरा करने की कोशिश करते हैं, जिससे उनके दिमाग पर अत्यधिक तनाव पड़ता है। उत्तर: (क) A और R दोनों सही हैं, तथा R, A की सही व्याख्या करता है।
प्रश्न 2: अभिकथन (A): लेखक ने शुद्ध आदर्शों की तुलना 'गिन्नी के सोने' से की है। तर्क (R): गिन्नी के सोने में तांबा मिला होता है जो व्यावहारिकता का प्रतीक है। उत्तर: (घ) A गलत है, R सही है। (लेखक ने शुद्ध आदर्शों की तुलना 'शुद्ध सोने' से की है, न कि गिन्नी के सोने से। गिन्नी का सोना 'व्यावहारिक आदर्शवाद' है)।
B. स्थिति-आधारित विश्लेषण (Situation Analysis) स्थिति (Situation): एक छात्र परीक्षा की चिंता में (भविष्य) इतना डूबा है कि वह आज (वर्तमान) पढ़ाई नहीं कर पा रहा है।
प्रश्न (Question): 'झेन की देन' पाठ के आधार पर आप उसे क्या सलाह देंगे?
उत्तर (Answer): मैं उसे समझाऊंगा कि भविष्य की चिंता करना व्यर्थ है क्योंकि वह अभी आया नहीं है। सत्य केवल 'वर्तमान क्षण' है। उसे भविष्य के तनाव को छोड़कर वर्तमान में अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, तभी वह तनावमुक्त रह पाएगा और सफल होगा।
स्थिति (Situation): एक व्यापारी अधिक मुनाफा कमाने के लिए मिलावट करता है और कहता है कि "आजकल सब चलता है, थोड़ा व्यावहारिक बनना पड़ता है।"
प्रश्न (Question): 'गिन्नी का सोना' पाठ के संदर्भ में इस व्यापारी की सोच पर टिप्पणी करें।
उत्तर (Answer): यह व्यापारी पूरी तरह से 'व्यवहारवादी' (Practic) है, आदर्शवादी नहीं। वह लाभ-हानि के चक्कर में अपने नैतिक मूल्यों (शुद्ध सोने) को त्याग रहा है। पाठ के अनुसार, ऐसे लोग खुद तो आगे बढ़ सकते हैं, लेकिन समाज को नीचे गिराते हैं। समाज शाश्वत मूल्यों से चलता है, मिलावट से नहीं।
C. आशय स्पष्टीकरण (Intent/Inference)
प्रश्न 1: "सोना पीछे रहकर ताँबा ही आगे आता है।" उत्तर: जब लोग आदर्शों (सोना) में व्यावहारिकता (तांबा) मिलाते हैं और व्यावहारिकता का ही गुणगान करने लगते हैं, तो धीरे-धीरे आदर्श खत्म हो जाते हैं। केवल स्वार्थ और लाभ-हानि की सोच (तांबा) ही प्रमुख हो जाती है। असली नैतिकता पीछे छूट जाती है।
प्रश्न 2: "भूत और भविष्य दोनों काल उड़ गए थे। केवल वर्तमान क्षण सामने था।" उत्तर: टी-सेरेमनी की शांति में लेखक का मन इतना एकाग्र हो गया कि बीती बातों का पछतावा (भूत) और आने वाले कल की चिंता (भविष्य) दोनों मिट गए। उन्हें अनुभव हुआ कि जीवन का असली आनंद और सत्य केवल 'आज' और 'अभी' में जीने में है।
5. प्रश्न-उत्तर (Subjective Q&A)
A. लघु उत्तरीय (Short Answer - 30-40 Words)
प्रश्न 1: शुद्ध सोना और गिन्नी का सोना अलग क्यों होता है?
उत्तर: शुद्ध सोना 24 कैरेट का होता है और पूरी तरह खालिस होता है। गिन्नी का सोना 22 कैरेट होता है जिसमें मजबूती और चमक के लिए थोड़ा तांबा मिलाया जाता है। गिन्नी का सोना शुद्ध सोने से ज्यादा मजबूत होता है।
प्रश्न 2: 'प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट' किसे कहते हैं?
उत्तर: जो लोग अपने आदर्शों के साथ थोड़ी व्यावहारिकता (Practicality) भी मिला लेते हैं, उन्हें 'प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट' कहते हैं। वे केवल हवा में नहीं उड़ते, बल्कि समय और परिस्थिति के अनुसार आदर्शों का पालन करते हैं।
प्रश्न 3: लेखक ने जापानियों के दिमाग में 'स्पीड का इंजन' लगने की बात क्यों कही है?
उत्तर: जापानी लोग अमेरिका से होड़ करने के लिए अत्यधिक काम करते हैं। उनका दिमाग पहले ही तेज चलता था, अब तनाव और काम के दबाव ने उसमें 'स्पीड का इंजन' लगा दिया है, जिससे दिमाग की रफ्तार हजार गुना बढ़ गई है और अंततः इंजन टूट जाता है (मानसिक रोग)।
प्रश्न 4: टी-सेरेमनी में कितने आदमियों को प्रवेश दिया जाता था और क्यों?
उत्तर: टी-सेरेमनी में केवल तीन आदमियों को प्रवेश दिया जाता था क्योंकि इस विधि का मुख्य उद्देश्य 'शांति' बनाए रखना था। अधिक लोगों के होने से शांति भंग होने का डर रहता है।
प्रश्न 5: गांधीजी के नेतृत्व की क्या विशेषता थी? (पाठ के आधार पर)
उत्तर: गांधीजी व्यावहारिकता को पहचानते थे, लेकिन वे आदर्शों को नीचे नहीं गिरने देते थे। वे व्यावहारिकता को आदर्शों के स्तर तक ले जाते थे। वे 'सोने में तांबा' नहीं, बल्कि 'तांबे में सोना' मिलाकर उसकी कीमत बढ़ाते थे।
प्रश्न 6: चाय पीने के बाद लेखक ने स्वयं में क्या परिवर्तन महसूस किया?
उत्तर: चाय पीते-पीते लेखक के दिमाग की रफ्तार धीमी होती गई और अंत में बिल्कुल बंद हो गई। उन्हें लगा कि वे अनंतकाल में जी रहे हैं। उन्हें सन्नाटा भी सुनाई देने लगा और वे भूत-भविष्य की चिंता से मुक्त हो गए।
प्रश्न 7: "व्यवहारवादी लोग समाज को गिराते हैं" - लेखक ने ऐसा क्यों कहा?
उत्तर: व्यवहारवादी लोग हमेशा अपने लाभ-हानि का हिसाब लगाकर काम करते हैं। वे स्वार्थी होते हैं। वे खुद तो सफल हो जाते हैं, लेकिन नैतिक मूल्यों की परवाह नहीं करते, जिससे समाज का नैतिक पतन होता है।
प्रश्न 8: 'जीना किसे कहते हैं' - यह लेखक को कब मालूम हुआ?
उत्तर: जब टी-सेरेमनी के दौरान लेखक का मन शांत हुआ और वे भूत-भविष्य को भूलकर केवल वर्तमान क्षण में खो गए, तब उन्हें मालूम हुआ कि वर्तमान में पूरी चेतना के साथ जीना ही असली जीवन है।
B. दीर्घ उत्तरीय/मूल्यपरक (Long/Value-Based - 100 Words)
प्रश्न 1: 'गिन्नी का सोना' पाठ के माध्यम से लेखक समाज को क्या संदेश देना चाहते हैं? क्या आज के दौर में शुद्ध आदर्शवादी होना संभव है? उत्तर: लेखक संदेश देना चाहते हैं कि समाज को शाश्वत मूल्य और नैतिकता केवल आदर्शवादी लोग ही दे सकते हैं, व्यवहारवादी नहीं। यद्यपि जीवन में व्यावहारिकता जरूरी है, लेकिन उसे आदर्शों पर हावी नहीं होने देना चाहिए। आज के दौर में शुद्ध आदर्शवादी होना कठिन है, लेकिन असंभव नहीं। गांधीजी की तरह हमें व्यावहारिकता को समझना चाहिए लेकिन अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं करना चाहिए। यदि हम केवल लाभ-हानि देखेंगे, तो समाज स्वार्थी और मूल्यहीन हो जाएगा। अतः 'तांबे में सोना' मिलाने की जरूरत है, न कि सोने को कम करने की।
प्रश्न 2: आधुनिक जीवन शैली ने मनुष्य को मानसिक शांति से दूर कर दिया है। 'झेन की देन' पाठ के आलोक में इस समस्या और इसके समाधान पर विचार कीजिए।
उत्तर: 'झेन की देन' पाठ आधुनिक जीवन की भागदौड़ और मानसिक तनाव का सजीव चित्रण करता है। हम भौतिक प्रगति की होड़ में इतना दौड़ रहे हैं कि रुकना और सांस लेना भूल गए हैं। हम शरीर से वर्तमान में होते हैं, लेकिन मन से भूत या भविष्य में भटकते रहते हैं। यही तनाव का मुख्य कारण है। पाठ हमें समाधान देता है - 'मेडिटेशन' या ध्यान। टी-सेरेमनी जैसी क्रियाएं हमें ठहराव सिखाती हैं। हमें दिन भर में कुछ समय निकालकर शांत बैठना चाहिए और केवल वर्तमान क्षण का आनंद लेना चाहिए। यही मानसिक शांति का एकमात्र उपाय है।
प्रश्न 3: "सत्य केवल वर्तमान है, उसी में जीना चाहिए।" इस कथन की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: अक्सर हम बीते हुए कल के सुख-दुख याद करके परेशान होते हैं या आने वाले कल के रंगीन सपने बुनते रहते हैं। लेखक कहते हैं कि बीता हुआ कल वापस नहीं आएगा और आने वाला कल अभी आया नहीं है, इसलिए दोनों मिथ्या (Unreal) हैं। हमारे पास जो वास्तव में है, वह केवल 'आज' और 'अभी' का पल है। यदि हम इस पल को चिंता में बिता देंगे, तो हम जीवन को खो देंगे। जीवन को पूर्णता से जीने के लिए हमें वर्तमान क्षण को पूरी तरह जीना और महसूस करना चाहिए। यही जीवन का सत्य है।
6. व्याकरण (Integrated Grammar)
(Based on Class 10 Hindi Course B - Sparsh Pattern)
प्रश्न 1: समास विग्रह और भेद बताइए: "लाभ-हानि"
उत्तर: लाभ और हानि - द्वंद्व समास।
प्रश्न 2: वाक्य रूपांतरण (मिश्र वाक्य में): "चाय तैयार हुई, उसने वह प्यालों में भरी।"
उत्तर: जब चाय तैयार हुई, तब उसने वह प्यालों में भरी।
प्रश्न 3: पदबंध पहचानिए: "तौलिये से बरतन साफ़ किए।" (रेखांकित: तौलिये से बरतन)
उत्तर: संज्ञा पदबंध (वाक्य में कर्म का कार्य कर रहा है)।
प्रश्न 4: मुहावरे का अर्थ और वाक्य: "बखान करना"
उत्तर: अर्थ: प्रशंसा करना / विस्तार से बताना।
वाक्य: लोग गांधीजी की सादगी का आज भी बखान करते हैं।
7. सामान्य त्रुटियाँ (Common Student Errors)
गांधीजी का प्रकार:
त्रुटि: छात्र लिखते हैं कि गांधीजी 'शुद्ध आदर्शवादी' थे।
सुधार: पाठ के अनुसार, लोग गांधीजी को 'प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट' (व्यावहारिक आदर्शवादी) कहते हैं, लेकिन उन्होंने व्यावहारिकता को आदर्शों के स्तर तक उठाया था।
मानसिक रोग का कारण:
त्रुटि: छात्र केवल 'काम का बोझ' लिखते हैं।
सुधार: मुख्य कारण 'अत्यधिक प्रतिस्पर्धा' (Competition) और दिमाग को 'स्पीड का इंजन' लगाकर दौड़ाना है, जिससे तनाव बढ़ता है।
टी-सेरेमनी का नाम:
त्रुटि: छात्र इसे 'जापानी चाय' लिखते हैं।
सुधार: इसका विशिष्ट जापानी नाम 'चा-नो-यू' है।
End
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