14. शिरीष के फूल - Shirish ke Phool - Class 12 - Aroh - 2
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Updated: 12 hours ago
Author: हजारी प्रसाद द्विवेदी
1. लेखक परिचय (Literary Profile)
साहित्यिक विशेषताएँ (Literary Traits): आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी हिंदी के महान निबंधकार, उपन्यासकार और आलोचक हैं. उनका साहित्य भारतीय सांस्कृतिक इतिहास की रचनात्मक परिणति है. वे ज्ञान को बोध और पांडित्य की सहृदयता में ढालकर विचार की तेजस्विता और कथन के लालित्य का संगम प्रस्तुत करते हैं.
प्रमुख रचनाएँ (Key Works):
निबंध-संग्रह: अशोक के फूल, कल्पलता, विचार और वितर्क, कुटज.
उपन्यास: बाणभट्ट की आत्मकथा, चारुचंद्रलेख, पुनर्नवा, अनामदास का पोथा.
आलोचना/इतिहास: कबीर, हिंदी साहित्य की भूमिका, हिंदी साहित्य का आदिकाल.
सम्मान: साहित्य अकादेमी पुरस्कार ('आलोक पर्व' पर) और भारत सरकार द्वारा 'पद्मभूषण'.
2. पाठ का सार (Executive Summary)
प्रतिपाद्य (Central Theme): यह ललित निबंध 'कल्पलता' संग्रह से लिया गया है. इसमें लेखक प्रचंड गर्मी और लू में भी अविचल रहने वाले शिरीष के माध्यम से मनुष्य की अजेय जिजीविषा (जीने की इच्छा) और कठिन परिस्थितियों में धैर्यपूर्वक कर्तव्यशील बने रहने के मानवीय मूल्य को स्थापित करता है.
English Summary: This lyrical essay uses the Shirish flower as a symbol of resilience. Even in the scorching heat of summer, the Shirish remains steadfast and blooming, much like a stoic ascetic (Avadhut). Dwivedi correlates the flower's nature with the philosophy of Mahatma Gandhi and the true essence of a poet, emphasizing that one must remain detached yet productive amidst life's struggles.
Key Points:
शिरीष भयंकर गर्मी में 'कालजयी अवधूत' की तरह जीवन की अजेयता का मंत्र प्रचार करता है.
शिरीष के पुराने फल अधिकार-लिप्सा का प्रतीक हैं, जो नई पीढ़ी द्वारा धकियाए जाने तक स्थान नहीं छोड़ते.
सच्चा कवि वही है जो अनासक्त योगी की तरह स्थिर-प्रज्ञ हो.
लेखक शिरीष की तुलना गांधीजी से करते हैं, जो बाह्य संघर्षों के बीच आत्मबल से संचालित थे.
3. कठिन शब्दार्थ (Glossary)
शब्द | हिंदी अर्थ | English Context |
अवधूत | सांसारिक बंधनों से ऊपर उठा संन्यासी | Stoic Ascetic |
जीर्ण | पुराना / कमजोर | Worn out / Feeble |
अनासक्त | विषय-भोग से ऊपर उठा हुआ | Detached |
निर्वह | बिना आघात या बाधा के | Without obstacle |
स्थिरप्रज्ञता | अविचल बुद्धि की अवस्था | Steady wisdom |
कृषीवल | किसान | Cultivator |
4. साहित्यिक विश्लेषण (Literary Analysis)
मूल संवेदना (Core Sentiment): संघर्षशील जीवन में सौंदर्य और मानवीय मूल्यों की रक्षा करना. शिरीष केवल एक फूल नहीं, बल्कि एक जीवन-दृष्टि है.
कला पक्ष (Artistic Aspect):
शैली: विचारात्मक और ललित निबंध शैली, जिसमें संस्कृतनिष्ठ शब्दावली और लोक-अनुभवों का अद्भुत मिश्रण है.
रूपक (Metaphor): शिरीष = अवधूत; पुराने फल = सत्तालोलुप वृद्ध नेता.
बिंब (Imagery): जेठ की जलती धूप में फूलों से लदे शिरीष का दृश्य.
5. गद्यांश आधारित प्रश्न (Extract-Based Competency)
Extract 1: "शिरीष के फूलों की कोमलता देखकर... पुराने फल बुरी तरह खड़खड़ाते रहते हैं।"
Interpretation: शिरीष के पुराने फल किस बात के प्रतीक हैं?
Author's Intent: लेखक ने इनकी तुलना किन नेताओं से की है
Inference: "जमे कि मरे" के माध्यम से लेखक क्या संदेश देना चाहता है?
Extract 2: "कालिदास सौंदर्य के बाह्य आवरण को भेदकर... अपना भाव-रस उस अनासक्त कृपीवल की भाँति खींच लेते थे।"
Interpretation: कालिदास को महान क्यों माना गया है?
Aesthetics: यहाँ 'अनासक्त कृपीवल' (किसान) का उदाहरण क्या स्पष्ट करता है?
Inference: कवि होने के लिए लेखक ने क्या शर्त अनिवार्य मानी है?
6. पाठ्यपुस्तक प्रश्नोत्तर (Textbook Q&A)
1. लेखक ने शिरीष को कालजयी अवधूत (संन्यासी) की तरह क्यों माना है?
उत्तर: जैसे एक सच्चा संन्यासी सुख-दुख, गर्मी-सर्दी में विचलित नहीं होता, वैसे ही शिरीष जेठ की जलती धूप और लू में भी लहलहाता रहता है. वह वायुमंडल से रस खींचकर जीवित रहता है और प्रतिकूलताओं में भी अपनी कोमलता नहीं खोता.
2. "जरा और मृत्यु, ये दोनों ही जगत के अतिपरिचित और अतिप्रामाणिक सत्य हैं।" लेखक ने ऐसा क्यों कहा?
उत्तर: शिरीष के पुराने फलों को देखकर लेखक को तुलसीदास की याद आती है कि जो फला है वह झरेगा और जो जला है वह बुझेगा. यह संसार का अटल नियम है कि परिवर्तन और अंत निश्चित है.
3. कवि के लिए अनासक्त योगी की स्थिर-प्रज्ञता और विदग्ध प्रेमी का हृदय एक साथ आवश्यक क्यों है? उत्तर: लेखक के अनुसार, केवल वही सच्चा साहित्य रच सकता है जो बाहरी दुनिया के दुख-सुख से तटस्थ (अनासक्त) रहे, लेकिन जिसके भीतर एक प्रेमी जैसी संवेदनशीलता (हृदय) हो. कालिदास और सुमित्रानंदन पंत इसके उदाहरण हैं.
7. अभिव्यक्ति और माध्यम (Creative Writing Connection)
Topic: "प्रतिकूल परिस्थितियों में जीवन-जीने की कला"
Key Points:
धैर्य और आत्मबल का महत्त्व.
पुराने के प्रति मोह छोड़ नए का स्वागत करना.
सामाजिक कोलाहल के बीच मानसिक शांति बनाए रखना.
8. परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण कथन (Key Quotes)
"जो फरा सो झरा, जो बरा सो बुताना!"
"जमे कि मरे!"
"हाय, वह अवधूत आज कहाँ है!" (गांधीजी के संदर्भ में)
9. सामान्य त्रुटियाँ (Common Student Errors)
Spelling: 'स्थिरप्रज्ञता', 'जिजीविषा' और 'पांडित्य' की वर्तनी (Spelling) पर ध्यान दें.
Conceptual: शिरीष को केवल एक कोमल फूल न समझें; लेखक के अनुसार इसका फल अत्यंत कठोर होता है. कोमलता और कठोरता का यह संतुलन ही इसे विशेष बनाता है.
10. विगत वर्षों के बोर्ड प्रश्न (PYQs)
Short Answer (2 marks): 'अमलतास' (आरग्वध) शिरीष की तुलना में क्यों छोटा पड़ता है?
Model Answer: अमलतास केवल 15-20 दिनों के लिए फूलता है और फिर ठूंठ हो जाता है, जबकि शिरीष वसंत से आषाढ़-भादों तक खिलकर अजेयता का संदेश देता है.
Long Answer (5 marks): "शिरीष के फूल" निबंध में गांधीवादी दर्शन की झलक कहाँ दिखाई देती है?
Model Answer: लेखक शिरीष को एक ऐसे अवधूत के रूप में देखते हैं जो बाहरी अग्निदाह के बीच भी सरस बना रहता है. गांधीजी ने भी समाज में व्याप्त हिंसा और लूटपाट के बीच आत्मबल से शांति और मानवता का रस खींचा था. दोनों ही बाह्य परिवर्तनों से ऊपर उठकर अपनी अजेय जिजीविषा सिद्ध करते हैं
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