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    3. टार्च बेचने वाले - Torche Bechne Wale - Class 11 - Antra 1

    • 1 day ago
    • 5 min read

    लेखक: हरिशंकर परसाई


    1. लेखक परिचय (Literary Profile)


    • साहित्यिक विशेषताएँ (Literary Traits): हरिशंकर परसाई हिंदी साहित्य के श्रेष्ठ व्यंग्यकार हैं। उन्होंने व्यंग्य को केवल मनोरंजन की विधा से ऊपर उठाकर उसे 'सामाजिक आलोचना' और 'चिंतन' का माध्यम बनाया। उनकी भाषा में मारक क्षमता है, जो समाज की विसंगतियों, अंधविश्वासों और पाखंडों पर सीधा प्रहार करती है।

    • प्रमुख रचनाएँ (Key Works): हँसते हैं रोते हैं, जैसे उनके दिन फिरे (कहानी संग्रह); रानी नागफनी की कहानी, तट की खोज (उपन्यास); तब की बात और थी, भूत के पाँव पीछे, सदाचार की तावीज़ (निबंध-संग्रह)।

    • संदर्भ: यह रचना 'व्यंग्य' विधा में है, जो धर्म के नाम पर किए जाने वाले व्यापार और आध्यात्मिक पाखंड को उजागर करती है।

    2. पाठ का सार (Executive Summary)


    • प्रतिपाद्य (Central Theme): यह कहानी दो दोस्तों के माध्यम से समाज में फैले 'डर' और 'अंधेरे' के व्यापार पर चोट करती है। एक दोस्त भौतिक रोशनी (टार्च) बेचता है और दूसरा आध्यात्मिक रोशनी (प्रवचन) बेचकर लोगों की जेबें काटता है। अंत में दोनों का धंधा एक ही निकलता है।

    • English Summary: 'Torch Bechne Wale' is a satirical story that critiques how fear and ignorance are exploited for profit. Two friends decide to separate and seek their fortune, promising to meet after five years. One sells 'Suraj Chhap' torches, while the other becomes a religious guru selling 'spiritual light'. The story highlights that both are essentially doing the same thing—exploiting the 'darkness' (fear) in people's minds for money.

    • Key Points:

      • दो दोस्तों का पाँच साल बाद मिलने का वादा करके अलग होना।

      • पहले दोस्त का 'सूरज छाप' टार्च बेचने का संघर्ष और लोगों को अंधेरे का डर दिखाना।

      • पाँच साल बाद दूसरे दोस्त को एक 'भव्य पुरुष' (साधु) के रूप में देखना।

      • आध्यात्मिक गुरु का यह कहना कि "भीतर के अंधेरे को दूर करो", जो वास्तव में पैसा कमाने का एक 'आधुनिक धंधा' है।

      • लेखक का निष्कर्ष: चाहे टार्च कंपनी की हो या धर्म की, दोनों ही 'अंधेरे' का डर दिखाकर अपना सामान बेचते हैं।

    3. कठिन शब्दार्थ (Glossary)

    शब्द

    हिंदी अर्थ

    English Context

    लिप्सा

    लालच / पाने की इच्छा

    Greed / Lust for gain

    प्रवचन

    उपदेश देना

    Preaching / Sermon

    विवशता

    मजबूरी

    Helplessness

    आत्मा का अंधेरा

    अज्ञानता / डर

    Spiritual ignorance

    भव्य पुरुष

    प्रभावशाली व्यक्ति (साधु)

    Majestic person / Sage

    4. साहित्यिक विश्लेषण (Literary Analysis)


    • मूल संवेदना (Core Sentiment): धर्म और अध्यात्म का व्यवसायीकरण। परसाई जी ने दिखाया है कि कैसे 'आत्मा' और 'परमात्मा' जैसे शब्दों का उपयोग पैसा कमाने के लिए किया जाता है।

    • व्यंग्य का स्वरूप: लेखक ने 'सूरज छाप टार्च' को एक प्रतीक बनाया है। जैसे टार्च बेचने वाला रात के अंधेरे का डर दिखाकर सेल (Battery) बेचता है, वैसे ही गुरु जी नरक और पाप का डर दिखाकर दान-दक्षिणा वसूलते हैं।

    • भाषा-शैली: सरल, बोलचाल की लेकिन अत्यंत धारधार। संवादों में छिपा कटाक्ष पाठक को सोचने पर मजबूर करता है।

    5. गद्यांश आधारित प्रश्न (Extract-Based Competency)


    Extract 1: "धंधा वही करूँगा, यानी टार्च बेचूँगा। बस कंपनी बदल रहा हूँ।"

    1. Interpretation: 'कंपनी बदलने' से दूसरे दोस्त का क्या तात्पर्य था? (उत्तर: इसका अर्थ है कि वह अब प्लास्टिक की टार्च नहीं, बल्कि धर्म और अध्यात्म की 'टार्च' बेचेगा)।

    2. Author's Intent: लेखक ने धंधे को 'वही' (सेम) क्यों कहा है? (उत्तर: क्योंकि दोनों ही मामलों में लोगों के 'डर' का फायदा उठाकर पैसा कमाया जा रहा है)।

    3. Inference: 'भीतर के अंधेरे' का क्या अर्थ गुरु जी ने बताया? (उत्तर: गुरु जी के अनुसार मनुष्य की आत्मा अज्ञान के अंधेरे में है जिसे उनके (सशुल्क) प्रवचन की रोशनी ही दूर कर सकती है)।

    6. पाठ्यपुस्तक प्रश्नोत्तर (Textbook Q&A)


    • 1. पहला दोस्त मंच पर किस रूप में था और वह किस अँधेरे को दूर करने के लिए टार्च बेच रहा था?

      • उत्तर: पहला दोस्त एक साधु (भव्य पुरुष) के रूप में था। वह लोगों के 'मन और आत्मा' के अंधेरे को दूर करने का दावा कर रहा था ताकि वे उसके धार्मिक धंधे से जुड़ सकें।


    • 2. 'सवाल के पाँव ज़मीन में गहरे गड़े हैं। यह उखड़ेगा नहीं।'—इस कथन में मनुष्य की किस प्रवृत्ति की ओर संकेत है?

      • उत्तर: यहाँ मनुष्य की उस जिज्ञासा और आर्थिक तंगी की ओर संकेत है जो उसे बार-बार सवाल पूछने पर मजबूर करती है कि वह 'सुखी' कैसे हो। धर्म गुरु इसी बुनियादी सवाल का फायदा उठाकर अपना व्यापार चलाते हैं।


    • 3. लेखक ने 'सूरज छाप' टार्च की पेटी को नदी में क्यों फेंक दिया?

      • उत्तर: लेखक (या पहले दोस्त) को अहसास हो गया कि भौतिक टार्च बेचने में बहुत मेहनत है और मुनाफा कम, जबकि 'धर्म की टार्च' बेचने में लोग खुद खिंचे चले आते हैं और मान-सम्मान के साथ पैसा भी मिलता है।

    7. अभिव्यक्ति और माध्यम (Creative Writing Connection)


    • Topic: "अंधविश्वास और उपभोक्तावाद"

    • Key Points:

      • धर्म के नाम पर बढ़ता आडंबर।

      • मार्केटिंग की तकनीकें और आम जनता का शोषण।

      • वैज्ञानिक दृष्टिकोण (Scientific Temper) विकसित करने की आवश्यकता।

    8. परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण कथन (Key Quotes)


    • "प्रकाश बाहर नहीं है, उसे अंतर में खोजो।" (गुरु जी का मार्केटिंग संवाद)।

    • "जहाँ अंधकार है वहीं प्रकाश है।"

    • "पैसा कमाने की लिप्सा ने आध्यात्मिकता को भी एक व्यापार बना दिया है।"

    9. सामान्य त्रुटियाँ (Common Student Errors)


    • Spelling: 'लिप्सा', 'आध्यात्मिकता' और 'भव्य' की वर्तनी पर ध्यान दें।

    • Conceptual: यह न समझें कि लेखक रोशनी के विरोधी हैं; वे रोशनी के नाम पर ठगने वालों के विरोधी हैं।

    10. विगत वर्षों के बोर्ड प्रश्न (PYQs)


    1. Short Answer (2 marks): 'टार्च बेचने वाले' कहानी में 'अंधेरा' किसका प्रतीक है?

      • Model Answer: अंधेरा मनुष्य के भीतर के अज्ञान, भविष्य के प्रति अनिश्चितता और उस 'डर' का प्रतीक है, जिसका फायदा उठाकर व्यापारी और पाखंडी गुरु अपना स्वार्थ सिद्ध करते हैं।


    2. Long Answer (5 marks): परसाई जी ने समाज की किन विसंगतियों पर इस पाठ में प्रहार किया है?

      • Model Answer: लेखक ने समाज में बढ़ती व्यावसायिक मानसिकता पर चोट की है। उन्होंने दिखाया है कि कैसे धर्म को एक 'प्रोडक्ट' बना दिया गया है। गुरुओं द्वारा शब्दाडंबर (जैसे- अंतःकरण की ज्योति) का प्रयोग कर भोली-भाली जनता को मानसिक रूप से गुलाम बनाया जाता है। यह कहानी शोषण के बदलते रूपों का पर्दाफाश करती है।


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