4. गूँगे - Gunge - Class 11 - Antra 1
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लेखक: रांगेय राघव
1. लेखक परिचय (Literary Profile)
साहित्यिक विशेषताएँ (Literary Traits): रांगेय राघव हिंदी के उन विलक्षण रचनाकारों में से हैं जिन्होंने बहुत कम आयु (39 वर्ष) में विशाल साहित्य रचा। उनकी कहानियों और उपन्यासों में शोषित, पीड़ित और समाज के हाशिए पर पड़े लोगों के प्रति गहरी सहानुभूति मिलती है। वे ऐतिहासिक और सामाजिक यथार्थ को पूरी नग्नता और ईमानदारी के साथ चित्रित करने के लिए जाने जाते हैं।
प्रमुख रचनाएँ (Key Works): घरौंदा, विषाद-मठ, मुर्दों का टीला (उपन्यास); रामराज्य का वैभव, देवदासी, अंगारे न बुझे (कहानी-संग्रह)।
संदर्भ: 'गूँगे' कहानी समाज के संवेदनशून्य व्यवहार और एक दिव्यांग बालक के आत्म-सम्मान की मार्मिक अभिव्यक्ति है।
2. पाठ का सार (Executive Summary)
प्रतिपाद्य (Central Theme): यह कहानी एक मूक-बधिर (गूँगे-बहरे) अनाथ बालक के संघर्ष की है। लेखक ने दिखाया है कि दिव्यांग व्यक्ति केवल दया या सहानुभूति का पात्र नहीं बनना चाहता, बल्कि वह अपनी गरिमा और समानता का अधिकार चाहता है। समाज का संवेदनहीन व्यवहार उसे 'गूँगे' से 'विद्रोही' बना देता है।
English Summary: 'Gunge' tells the poignant story of an orphaned deaf and mute boy who is treated as a burden and an object of ridicule by society. Despite his disability, the boy possesses deep emotions and self-respect. He works hard but is met with physical and verbal abuse. The story highlights the irony that while the boy is physically mute, the society is 'emotionally mute' towards his suffering.
Key Points:
गूँगे बालक का बुआ और फूफा के घर पर आश्रय लेना और वहाँ जानवरों जैसा व्यवहार सहना।
गूँगे की संवाद करने की छटपटाहट: वह संकेतों के माध्यम से अपने दिल का हाल सुनाना चाहता है।
चमेली (बुआ) का उसके प्रति कभी करुणा तो कभी कठोरता भरा व्यवहार।
गूँगे का विद्रोह: जब उसे बिना कारण पीटा जाता है, तो वह भागने या मरने के बजाय मूक प्रतिरोध करता है।
अंत में गूँगे का भाग जाना, जो समाज की संवेदनहीनता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न है।
3. कठिन शब्दार्थ (Glossary)
शब्द | हिंदी अर्थ | English Context |
यातना | अत्यधिक कष्ट / पीड़ा | Torment / Agony |
तिरस्कार | अपमान / उपेक्षा | Scorn / Disdain |
संवेदना | हमदर्दी / अनुभूति | Sensitivity / Sympathy |
मूक | जो बोल न सके | Mute |
अपरिहार्य | जिसे टाला न जा सके | Inevitable |
4. साहित्यिक विश्लेषण (Literary Analysis)
मूल संवेदना (Core Sentiment): संवेदनहीनता बनाम आत्म-सम्मान। 'गूँगे' शीर्षक केवल उस बालक के लिए नहीं है, बल्कि उस समाज के लिए है जो दूसरों का दुख देखकर भी 'गूँगा' बना रहता है।
मनोवैज्ञानिक पक्ष: लेखक ने गूँगे की अंतर्वेदना (Internal Agony) को बहुत गहराई से पकड़ा है—"कैसी यातना है कि वह अपने हृदय को उगल देना चाहता है, किंतु उगल नहीं पाता।"
प्रतीकात्मकता: गूँगे का मंदिर की मूर्ति की तरह चुप रहना यह दर्शाता है कि भगवान की तरह वह भी इंसानों के जुल्मों का मूक गवाह है।
5. गद्यांश आधारित प्रश्न (Extract-Based Competency)
Extract 1: "गूँगा दया या सहानुभूति नहीं, अधिकार चाहता था। वह माँगता था वह बराबरी, जो उसे समाज में नहीं मिल पा रही थी।"
Interpretation: गूँगे को 'दया' क्यों पसंद नहीं थी? (उत्तर: क्योंकि दया उसे लाचार महसूस कराती थी, जबकि वह मेहनती था और अपने स्वाभिमान के साथ जीना चाहता था)।
Author's Intent: लेखक ने समाज को 'गूँगा' क्यों कहा है? (उत्तर: क्योंकि समाज दिव्यांगों की भावनाओं और उनकी जरूरतों को समझने में असमर्थ और संवेदनहीन है)।
Inference: गूँगे के रोने और चिल्लाने का क्या कारण था? (उत्तर: वह अपनी पीड़ा व्यक्त करना चाहता था पर शब्द न होने के कारण केवल चीत्कार कर पाता था)।
6. पाठ्यपुस्तक प्रश्नोत्तर (Textbook Q&A)
1. गूँगे ने अपनी पीड़ा को संकेतों के माध्यम से कैसे व्यक्त किया?
उत्तर: वह अपने गले के छेदों की ओर इशारा करता था, अपनी छाती पीटता था और मुँह खोलकर यह बताने की कोशिश करता था कि वह बोलना चाहता है पर असमर्थ है। उसकी आँखों में पानी भरा होता था जिसमें शिकायत और तिरस्कार का भाव था।
2. चमेली ने गूँगे को क्यों मारा और बाद में उसे क्यों दुख हुआ?
उत्तर: चमेली ने अपने बच्चों की शिकायतों और गूँगे की 'ढीठता' (जिद्द) को देखकर उसे मारा। बाद में जब उसने देखा कि गूँगा चुपचाप मार सह रहा है और उसकी आँखों में अपमान के आँसू हैं, तो चमेली का हृदय करुणा से भर गया।
3. कहानी के अंत में गूँगे के पलायन का क्या अर्थ है?
उत्तर: गूँगे का घर छोड़कर भाग जाना यह सिद्ध करता है कि एक सीमा के बाद अपमान सहना संभव नहीं है। वह समाज की उस झूठी दया से तंग आ गया था जहाँ उसे भरपेट रोटी तो मिलती थी पर इंसान का दर्जा नहीं।
7. अभिव्यक्ति और माध्यम (Creative Writing Connection)
Topic: "दिव्यांगजनों के प्रति हमारा सामाजिक दायित्व"
Key Points:
सहानुभूति के बजाय 'समान अवसर' (Inclusion) की आवश्यकता।
स्किल इंडिया जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से स्वावलंबन।
समाज में संवेदनशीलता बढ़ाने के उपाय।
8. परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण कथन (Key Quotes)
"कैसी यातना है कि वह अपने हृदय को उगल देना चाहता है, किंतु उगल नहीं पाता।"
"जैसे मंदिर की मूर्ति कोई उत्तर नहीं देती, वैसे ही उसने भी कुछ नहीं कहा।"
"जिंदगी और ये गूँगे... जैसे जी जान से लड़ रहे हों।"
9. सामान्य त्रुटियाँ (Common Student Errors)
Spelling: 'संवेदना', 'तिरुमल्लै' (लेखक का नाम) और 'मूक' की वर्तनी पर ध्यान दें।
Conceptual: छात्र सोचते हैं कि गूँगा 'बुरा' लड़का था क्योंकि वह मार-पीट करता था। ध्यान रहे, उसका व्यवहार समाज के अन्यायपूर्ण व्यवहार की प्रतिक्रिया था।
10. विगत वर्षों के बोर्ड प्रश्न (PYQs)
Short Answer (2 marks): कहानी का शीर्षक 'गूँगे' (बहुवचन) क्यों रखा गया है?
Model Answer: कहानी में पात्र तो एक ही गूँगा है, पर शीर्षक बहुवचन में है क्योंकि यह उन सभी लोगों की ओर इशारा करता है जो अन्याय को देखकर भी चुप रहते हैं या जो मानसिक रूप से संवेदनशून्य हैं।
Long Answer (5 marks): "गूँगे" कहानी के आधार पर गूँगे के चरित्र की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
Model Answer: गूँगा अनाथ और दिव्यांग होने के बावजूद स्वाभिमानी है। वह मेहनत करके खाना चाहता है। उसमें गहरी संवेदनशीलता है—वह प्यार और डाँट के अंतर को समझता है। जब उसे बार-बार अपमानित किया जाता है, तो उसके भीतर का 'मानव' विद्रोह कर उठता है। वह मूक है, पर उसका मौन समाज पर सबसे तीखा व्यंग्य है।
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