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    6. खानाबदोश - Khanabadosh - Class 11 - Antra 1

    • 23 hours ago
    • 5 min read

    लेखक: ओमप्रकाश वाल्मीकि


    1. लेखक परिचय (Literary Profile)


    • साहित्यिक विशेषताएँ (Literary Traits): ओमप्रकाश वाल्मीकि हिंदी में दलित साहित्य के आधार स्तंभ माने जाते हैं। उनका लेखन उनके व्यक्तिगत अनुभवों और सामाजिक संघर्ष की उपज है। उन्होंने जातीय अपमान, उत्पीड़न और हाशिए के समाज की समस्याओं को बहुत ही आवेगमयी और तथ्यपरक भाषा में प्रस्तुत किया है। उनकी रचनाएँ समाज के अनछुए और कड़वे सच को पाठक के सामने लाती हैं।

    • प्रमुख रचनाएँ (Key Works): जूठन (आत्मकथा); सलाम, घुसपैठिये (कहानी संग्रह); सदियों का संताप, बस बहुत हो चुका, अब और नहीं (कविता संग्रह)।

    • संदर्भ: 'खानाबदोश' कहानी ईंट-भट्टे पर काम करने वाले मज़दूरों के शोषण, जातीय भेदभाव और उनके अपने घर के सपने के टूटने की एक दर्दनाक दास्ताँ है।

    2. पाठ का सार (Executive Summary)


    • प्रतिपाद्य (Central Theme): यह कहानी मज़दूर वर्ग के 'खानाबदोश' (Gipsy) जीवन की विडंबना को दर्शाती है। यह दिखाती है कि कैसे पूँजीवादी व्यवस्था और जातीय अहंकार एक गरीब मज़दूर के मेहनत से बनाए गए सपनों को कुचल देते हैं।

    • English Summary: 'Khanabadosh' revolves around Sukhiya and Maano, a labor couple working at a brick kiln. They dream of building their own small house with the bricks they mold. However, their dreams are shattered by the exploitation of the kiln owner (Mukhiya) and the supervisor (Asgar). The story highlights the intersection of caste discrimination and labor exploitation, where the marginalized are forced to live a nomadic life, never being able to settle in a 'home' of their own.

    • Key Points:

      • सुकिया और मानो का गाँव छोड़कर शहर के पास ईंट-भट्टे पर काम करने आना।

      • भट्टे पर मज़दूरों का कठिन जीवन और असगर ठेकेदार द्वारा उनका शोषण।

      • मानो का सपना: पक्की ईंटों का अपना एक छोटा सा घर बनाना।

      • सूबे सिंह (मालिक का बेटा) की गंदी नज़र और मज़दूरों के प्रति क्रूरता।

      • जसदेव का पात्र: जो ब्राह्मण होने के गर्व और मज़दूरों के प्रति लगाव के बीच द्वंद्व में है।

      • अंत में सुकिया और मानो का अपनी मेहनत की कमाई छोड़कर फिर से 'खानाबदोश' होने पर मजबूर हो जाना।

    3. कठिन शब्दार्थ (Glossary)

    शब्द

    हिंदी अर्थ

    English Context

    खानाबदोश

    जिसका कोई स्थाई घर न हो

    Nomad / Gypsy

    पाथना

    साँचे में ढालकर ईंट बनाना

    Molding bricks

    भट्ठा

    ईंटें पकाने की जगह

    Brick Kiln

    दबदबा

    प्रभाव / आतंक

    Dominance / Influence

    मजदूरी

    काम के बदले मिलने वाला पैसा

    Wages

    4. साहित्यिक विश्लेषण (Literary Analysis)


    • मूल संवेदना (Core Sentiment): विस्थापन और घर की चाहत। कहानी का शीर्षक 'खानाबदोश' उन मज़दूरों की नियति है जिन्हें बार-बार अपना आशियाना छोड़कर भागना पड़ता है।

    • जातीय संघर्ष: लेखक ने दिखाया है कि भट्टे पर भी जाति प्रथा मौजूद है। जसदेव का मानो के हाथ की रोटी न खाना और बाद में उसकी बेबसी, समाज की गहरी जड़ता को दर्शाती है।

    • पूँजीवादी शोषण: ईंटें मज़दूर पाथते हैं, लेकिन उन्हीं ईंटों से अपना घर बनाने का हक उन्हें नहीं है।

    5. गद्यांश आधारित प्रश्न (Extract-Based Competency)


    Extract 1: "अपने देस की सूखी रोटी भी परदेस के पकवानों से अच्छी होती है।"

    1. Interpretation: सुकिया ने यह बात क्यों कही? (उत्तर: क्योंकि परदेस (शहर/भट्टे) में पैसा तो था पर आत्म-सम्मान और सुरक्षा नहीं थी)।

    2. Author's Intent: 'परदेस के पकवान' यहाँ किसके प्रतीक हैं? (उत्तर: भट्टे पर मिलने वाली थोड़ी अधिक मज़दूरी के, जिसके बदले उन्हें शोषण सहना पड़ता था)।

    3. Inference: सुकिया और मानो ने अपना गाँव क्यों छोड़ा था? (उत्तर: गाँव में काम की कमी और सामंती उत्पीड़न के कारण वे बेहतर जीवन की तलाश में आए थे)।

    6. पाठ्यपुस्तक प्रश्नोत्तर (Textbook Q&A)


    • 1. मानो का सपना क्या था और वह कैसे टूट गया?

      • उत्तर: मानो का सपना पक्की ईंटों का अपना एक घर बनाने का था। वह अपनी मज़दूरी से बचाई गई ईंटों को इकट्ठा कर रही थी। लेकिन सूबे सिंह की गंदी आदतों और असगर की प्रताड़ना के कारण उन्हें अचानक काम छोड़कर भागना पड़ा, जिससे उसका सपना अधूरा रह गया।


    • 2. 'खानाबदोश' कहानी में आज के समाज की किन समस्याओं को रेखांकित किया गया है?

      • उत्तर: कहानी में मज़दूरों का शोषण, महिलाओं के प्रति पुरुषों की विकृत मानसिकता, जातिवाद और मज़दूरों के विस्थापन (Migration) की समस्याओं को उभारा गया है।


    • 3. जसदेव की चुप्पी का मानो पर क्या प्रभाव पड़ा?

      • उत्तर: मानो को जसदेव से सहानुभूति की उम्मीद थी क्योंकि वह उनके साथ काम करता था। लेकिन जब सूबे सिंह मानो के साथ बदतमीजी कर रहा था और जसदेव चुप रहा, तो मानो को अहसास हुआ कि जाति का अहंकार इंसानियत से बड़ा हो गया है।

    7. अभिव्यक्ति और माध्यम (Creative Writing Connection)


    • Topic: "मज़दूरों का विस्थापन: एक सामाजिक चुनौती"

    • Key Points:

      • ईंट-भट्टा मज़दूरों की दयनीय आर्थिक स्थिति।

      • मज़दूरों के बच्चों की शिक्षा में आने वाली बाधाएँ।

      • 'असंगठित क्षेत्र' के मज़दूरों के लिए सरकारी योजनाएँ।

    8. परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण कथन (Key Quotes)


    • "चल! ये लोग म्हारा घर ना बणने देंगे।" (सुकिया की हताशा)।

    • "ईंटें तो ईंटें हैं, वे किसी की जाति नहीं पूछतीं।"

    • "गाँठ में नहीं है पैसा, चले हाथी खरीदने।" (असगर का व्यंग्य)।

    9. सामान्य त्रुटियाँ (Common Student Errors)


    • Spelling: 'खानाबदोश', 'भट्ठा' और 'सुकिया' की वर्तनी पर ध्यान दें।

    • Conceptual: यह न समझें कि मानो और सुकिया 'कामचोर' थे; वे बहुत मेहनती थे, लेकिन व्यवस्था की क्रूरता ने उन्हें भागने पर मजबूर किया।

    10. विगत वर्षों के बोर्ड प्रश्न (PYQs)


    1. Short Answer (2 marks): सुकिया ने भट्टा मज़दूरों के जीवन की तुलना किससे की है?

      • Model Answer: सुकिया के अनुसार उनका जीवन उन ईंटों की तरह है जो साँचों में ढलती तो हैं पर उनका अपना कोई ठिकाना नहीं होता। वे हमेशा एक जगह से दूसरी जगह भटकते रहते हैं।


    2. Long Answer (5 marks): "खानाबदोश" कहानी समाज के शोषक और शोषित वर्ग के बीच की खाई को कैसे उजागर करती है?

      • Model Answer: यह कहानी दिखाती है कि शोषक वर्ग (सूबे सिंह, असगर) मज़दूरों को इंसान नहीं बल्कि केवल मुनाफे का साधन मानते हैं। वे मज़दूरों की भावनाओं और उनके सम्मान के साथ खिलवाड़ करते हैं। दूसरी ओर, शोषित वर्ग (मानो, सुकिया) अपनी पूरी शक्ति लगाकर भी एक बुनियादी घर तक नहीं बना पाता। लेखक ने स्पष्ट किया है कि जब तक जाति और वर्ग का यह भेदभाव रहेगा, तब तक मज़दूर 'खानाबदोश' ही बना रहेगा।


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