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    4. पर्वत प्रदेश में पावस - (Parvat Pradesh Mein Pavas) - Class 10 - Sparsh Bhag 2

    • Dec 7, 2025
    • 9 min read

    Updated: Dec 13, 2025

    पर्वत प्रदेश में पावस (Parvat Pradesh Mein Pavas)

    Class 10 - Hindi Course B (Sparsh Bhag 2) |

    Author: सुमित्रानंदन पंत (Sumitranandan Pant)


    1. पाठ का सार (Quick Revision Summary)


    • वर्षा ऋतु और प्रकृति का बदलता रूप: पर्वतीय क्षेत्र में वर्षा ऋतु का आगमन हो गया है। इस मौसम में प्रकृति का रूप पल-पल बदलता रहता है। कभी धूप खिलती है तो कभी घने बादल छा जाते हैं, जिससे दृश्य जादुई लगता है।

      • English: Monsoon and Nature's Changing Form: The rainy season has arrived in the mountainous region. In this season, nature's appearance changes every moment. Sometimes the sun shines, and sometimes dense clouds cover the sky, making the scene look magical.


    • पर्वत और तालाब: विशाल पर्वत एक करधनी (मेखला) के आकार में फैला हुआ है। उसके चरणों में एक विशाल तालाब है जो दर्पण (शीशे) जैसा लग रहा है। पर्वत अपने हजारों फूल रूपी आँखों (दृग-सुमन) से तालाब के पानी में अपना विशाल प्रतिबिंब निहार रहा है।

      • English: The Mountain and the Pond: The vast mountain is spread out in the shape of a girdle (Mekhala). At its feet lies a huge pond that looks like a mirror. The mountain is admiring its own reflection in the pond water with its thousands of flower-like eyes.


    • झरने और उनकी सुंदरता: पहाड़ों से गिरते हुए झरनों की आवाज़ ऐसी लगती है मानो वे पर्वत का गौरव गान कर रहे हों। सफ़ेद झाग से भरे ये झरने मोतियों की लड़ी जैसे सुंदर दिखाई देते हैं और नस-नस में उत्साह (मद) भर देते हैं।

      • English: Waterfalls and their Beauty: The sound of waterfalls cascading from the mountains seems as if they are singing the glory of the mountain. Filled with white foam, these waterfalls look beautiful like strings of pearls and fill every nerve with excitement.


    • पेड़ और उनकी आकांक्षाएँ: पर्वत के हृदय से उठकर ऊँचे-ऊँचे पेड़ शांत आकाश की ओर एकटक (अनिमेष) और चिंतित होकर देख रहे हैं। ये पेड़ मनुष्यों की उच्चाकांक्षाओं (ऊँचा उठने की कामना) का प्रतीक हैं।

      • English: Trees and their Aspirations: Rising from the heart of the mountain, tall trees are looking at the silent sky continuously and anxiously. These trees symbolize human aspirations (the desire to rise high).


    • अचानक बदलता मौसम: अचानक बादल उमड़ आते हैं और ऐसा लगता है मानो पूरा पर्वत पारे के समान चमकीले पंख फड़फड़ाकर उड़ गया हो। घना कोहरा छा जाता है जिससे शाल के पेड़ दिखाई नहीं देते, मानो वे डरकर धरती में धँस गए हों।

      • English: Suddenly Changing Weather: Suddenly clouds gather, and it seems as if the entire mountain has flown away flapping its mercury-like bright wings. Dense fog covers everything, making the Shaal trees invisible, as if they have sunk into the earth out of fear.


    • इंद्र का जादू: चारों ओर धुआँ उठने लगता है जैसे तालाब में आग लग गई हो। ऐसा लगता है मानो वर्षा के देवता इंद्र अपने बादल रूपी विमान में बैठकर जादू (इंद्रजाल) का खेल दिखा रहे हों।

      • English: Indra's Magic: Smoke starts rising all around as if the pond has caught fire. It seems as if Indra, the God of Rain, is sitting in his cloud-vehicle and displaying a magic show.


    2. शब्द-संपदा (Vocabulary)

    शब्द (Word)

    अर्थ (Hindi Meaning)

    English Meaning

    पावस

    वर्षा ऋतु

    Rainy Season

    मेखलाकार

    करधनी के आकार का (गोल)

    Girdle-shaped (Curved/Circular)

    दृग-सुमन

    नेत्र रूपी पुष्प

    Flower-like eyes

    महाकार

    विशाल आकार

    Huge shape / Gigantic

    मद

    मस्ती / नशा

    Intoxication / Joy

    उच्चाकांक्षा

    ऊँचा उठने की कामना

    High aspiration / Ambition

    नीरव

    शांत (रवरहित)

    Silent

    अनिमेष

    एकटक / बिना पलक झपकाए

    Unblinking / Garing

    भूधर

    पहाड़

    Mountain

    पारद के पर

    पारे जैसे चमकीले पंख

    Mercury-like wings

    रव-शेष

    केवल आवाज़ का रह जाना

    Only sound remaining

    जलद-यान

    बादल रूपी विमान

    Cloud-vehicle

    3. चरित्र चित्रण (Character Sketches)


    प्रकृति (Nature - Personified)

    • सजीव और परिवर्तनशील (Alive & Dynamic): इस कविता में प्रकृति को एक जीवित प्राणी की तरह चित्रित किया गया है जो पल-पल अपना वेश बदलती है, सजती-सँवरती है और अपनी सुंदरता पर मुग्ध होती है।

      • English: In this poem, Nature is portrayed as a living entity that changes its guise every moment, adorns itself, and is enchanted by its own beauty.

    पर्वत (Mountain - Personified)

    • आत्म-मुग्ध और गौरवशाली (Self-admiring & Majestic): पर्वत एक विशालकाय पुरुष की तरह है जो तालाब रूपी दर्पण में अपना प्रतिबिंब निहार रहा है। वह अपनी भव्यता और सुंदरता पर गर्व करता है।

      • English: The mountain is like a gigantic man admiring his reflection in the pond-mirror. He takes pride in his grandeur and beauty.


    4.योग्यता-आधारित प्रश्न (Competency-Based Questions)

    A. अभिकथन और तर्क (Assertion & Reasoning)

    प्रश्न 1:

    अभिकथन (A): कवि ने तालाब की तुलना 'दर्पण' (Mirror) से की है।

    तर्क (R): तालाब का पानी अत्यंत स्वच्छ और निर्मल है, जिसमें पर्वत अपना विशाल प्रतिबिंब देख पा रहा है।

    उत्तर: (क) A और R दोनों सही हैं, तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

    प्रश्न 2:


    अभिकथन (A): शाल के वृक्ष धरती में धँस गए हैं।

    तर्क (R): पर्वतीय प्रदेश में भूकंप आने के कारण धरती फट गई और वृक्ष उसमें समा गए।

    उत्तर: (ग) A सही है, R गलत है। (क्योंकि वृक्ष वास्तव में नहीं धँसे, बल्कि घने कोहरे/बादलों के कारण अदृश्य हो गए, जिससे लगा कि वे डरकर धँस गए हैं)।


    B. स्थिति-आधारित विश्लेषण (Situation Analysis)

    स्थिति (Situation): आप एक पहाड़ी स्टेशन पर हैं और अचानक घना कोहरा छा जाता है, जिससे सब कुछ अदृश्य हो जाता है।


    प्रश्न (Question): 'पर्वत प्रदेश में पावस' कविता की किन पंक्तियों के माध्यम से आप इस दृश्य का वर्णन करेंगे?

    उत्तर (Answer): मैं कहूँगा- "उड़ गया, अचानक लो, भूधर / फड़का अपार पारद के पर!" और "धँस गए धरा में सभय शाल!" क्योंकि कोहरे में पर्वत और पेड़ ऐसे गायब होते हैं मानो वे उड़ गए हों या धरती में समा गए हों।

    स्थिति (Situation): एक व्यक्ति जीवन में ऊँचा उठने के सपने देखता है लेकिन भविष्य की अनिश्चितता से चिंतित भी रहता है।


    प्रश्न (Question): कविता में कौन सा प्रतीक (Symbol) इस व्यक्ति की मनोदशा को दर्शाता है?

    उत्तर (Answer): कविता में 'पर्वत के उर से उठने वाले तरुवर (पेड़)' इस मनोदशा को दर्शाते हैं। वे ऊँचा उठने की 'उच्चाकांक्षा' रखते हैं और आकाश की ओर 'अनिमेष' (एकटक) देखते हैं, लेकिन साथ ही वे 'चिंतित' (चिंतापर) भी दिखाई देते हैं।


    C. आशय स्पष्टीकरण (Intent/Inference)

    प्रश्न 1: "है टूट पड़ा भू पर अंबर!"

    उत्तर: इस पंक्ति का आशय यह है कि अचानक इतनी मूसलाधार वर्षा होने लगी मानो पूरा आकाश ही धरती पर टूट पड़ा हो। बादलों के शोर और वर्षा की तीव्रता ने वातावरण को भयावह बना दिया।


    प्रश्न 2: "यो जलद-यान में विचर-विचर, था इंद्र खेलता इंद्रजाल।"

    उत्तर: इसका आशय है कि वर्षा के देवता इंद्र अपने बादल रूपी विमान में बैठकर प्रकृति के साथ जादू का खेल खेल रहे हैं। कभी धूप, कभी छांव, कभी बारिश, कभी कोहरा - यह सब इंद्र की जादूगरी (इंद्रजाल) जैसा प्रतीत होता है।


    5. प्रश्न-उत्तर (Subjective Q&A)

    A. लघु उत्तरीय (Short Answer - 30-40 Words)

    प्रश्न 1: कवि ने पर्वत की आँखों की तुलना किससे की है और क्यों?

    उत्तर: कवि ने पर्वत की आँखों की तुलना 'हजारों फूलों' (सहस्र दृग-सुमन) से की है। क्योंकि पर्वत पर खिले हुए अनगिनत फूल ऐसे लग रहे हैं मानो वे पर्वत की आँखें हों जिनसे वह अपना रूप निहार रहा है।


    प्रश्न 2: 'मेखलाकार' शब्द का प्रयोग पर्वत के लिए क्यों किया गया है?

    उत्तर: 'मेखला' का अर्थ है करधनी (कमरबंद)। पर्वत श्रृंखला दूर-दूर तक गोलाई में फैली हुई है, जो देखने में पृथ्वी की कमर पर बँधी करधनी जैसी लगती है। इसलिए उसे 'मेखलाकार' कहा गया है।


    प्रश्न 3: झरने पर्वत का गौरव गान कैसे कर रहे हैं?

    उत्तर: झरनों के बहने से जो 'झर-झर' की तेज ध्वनि उत्पन्न हो रही है, उसे कवि ने पर्वत का गौरव गान (स्तुति) माना है। ये झरने अपनी मस्ती में गाते हुए प्रतीत होते हैं।


    प्रश्न 4: पर्वत के हृदय से उठने वाले पेड़ किस बात का प्रतीक हैं?

    उत्तर: पर्वत के हृदय से उठने वाले ऊँचे पेड़ मानवीय मन की 'उच्चाकांक्षाओं' (Ambitions) का प्रतीक हैं। जैसे मनुष्य सदा ऊँचा उठना और प्रगति करना चाहता है, वैसे ही ये पेड़ भी आकाश को छूना चाहते हैं।


    प्रश्न 5: "उड़ गया, अचानक लो, भूधर" - ऐसा क्यों कहा गया है?

    उत्तर: जब अचानक घने बादलों ने पर्वत को पूरी तरह ढक लिया, तो पर्वत दिखाई देना बंद हो गया। इस दृश्य को देखकर कवि को लगा मानो पर्वत अपने चमकीले पंख फड़फड़ाकर कहीं उड़ गया हो।


    प्रश्न 6: तालाब में उठते धुएँ को देखकर कवि ने क्या कल्पना की?

    उत्तर: मूसलाधार वर्षा और कोहरे के कारण तालाब के ऊपर धुंध छा गई। इसे देखकर कवि ने कल्पना की कि मानो तालाब में आग लग गई हो और उससे धुआँ उठ रहा हो।


    प्रश्न 7: कविता में 'शाल' के वृक्षों की क्या दशा हुई?

    उत्तर: घने बादलों और धुंध के कारण शाल के विशाल वृक्ष दिखाई देना बंद हो गए। कवि ने कल्पना की कि वे बादलों के भयानक रूप से डरकर (सभय) धरती के अंदर धँस गए हैं।


    प्रश्न 8: 'रव-शेष' रह जाने का क्या अर्थ है?

    उत्तर: 'रव-शेष' का अर्थ है - केवल आवाज़ का रह जाना। जब कोहरे के कारण झरने दिखाई देना बंद हो जाते हैं, तो केवल उनके गिरने की आवाज़ सुनाई देती है। दृश्य अदृश्य हो जाता है, बस ध्वनि शेष रह जाती है।


    B. दीर्घ उत्तरीय/मूल्यपरक (Long/Value-Based - 100 Words)

    प्रश्न 1: सुमित्रानंदन पंत की कविता 'पर्वत प्रदेश में पावस' प्रकृति-प्रेम का उत्कृष्ट उदाहरण है। कविता के आधार पर सिद्ध कीजिए।

    उत्तर: सुमित्रानंदन पंत को 'प्रकृति के सुकुमार कवि' कहा जाता है, और यह कविता इस बात को सिद्ध करती है। कवि ने प्रकृति का मानवीकरण (Personification) अत्यंत सजीवता से किया है। पर्वत को एक नायक की तरह अपना रूप निहारते, तालाब को दर्पण की तरह, झरनों को मोती की लड़ियों की तरह और पेड़ों को उच्चाकांक्षी मनुष्यों की तरह चित्रित करना उनके सूक्ष्म प्रकृति-प्रेम को दर्शाता है। उन्होंने प्रकृति के पल-पल बदलते रूप - धूप, छांव, बारिश, कोहरा - को एक जादुई खेल (इंद्रजाल) के रूप में प्रस्तुत किया है, जो पाठक को प्रकृति के सौंदर्य में मंत्रमुग्ध कर देता है।


    प्रश्न 2: "प्रकृति हमारी सबसे अच्छी शिक्षिका है।" इस कविता में पेड़ हमें क्या जीवन मूल्य सिखाते हैं?

    उत्तर: इस कविता में पर्वत पर उगे शाल के वृक्ष हमें बहुत महत्वपूर्ण जीवन मूल्य सिखाते हैं। ये पेड़ 'उच्चाकांक्षाओं' का प्रतीक हैं, जो हमें सिखाते हैं कि जीवन में हमेशा ऊँचा उठने और प्रगति करने की कामना रखनी चाहिए। वे 'अटल' और 'एकटक' आकाश की ओर देखते हैं, जो हमें लक्ष्य के प्रति एकाग्रता और दृढ़ता का संदेश देते हैं। साथ ही, उनका 'चिंतित' होना यह बताता है कि सफलता की राह में चुनौतियां और चिंताएं स्वाभाविक हैं, लेकिन हमें स्थिर रहकर उनका सामना करना चाहिए। प्रकृति का यह मौन संदेश हमारे व्यक्तित्व विकास के लिए प्रेरणादायी है।


    प्रश्न 3: 'चित्रमयी भाषा' (Imagery) इस कविता की प्रमुख विशेषता है। उदाहरण सहित स्पष्ट करें कि यह पाठकों पर क्या प्रभाव डालती है?

    उत्तर: 'पर्वत प्रदेश में पावस' कविता में चित्रात्मकता कूट-कूट कर भरी है। कवि ने शब्दों के माध्यम से ऐसे चित्र खींचे हैं कि पाठक के सामने दृश्य सजीव हो उठता है। जैसे- "मोती की लड़ियों से सुंदर झरते हैं झाग भरे निर्झर" पंक्ति पढ़ते ही आँखों के सामने सफ़ेद झाग वाले झरनों का दृश्य उभर आता है। "फड़का अपार पारद के पर" से बादलों की सफेदी और चमक का आभास होता है। "दर्पण-सा फैला है विशाल" से तालाब की स्वच्छ सतह दिखाई देती है। यह चित्रमयी भाषा कविता को नीरस होने से बचाती है और पाठक को सीधे प्रकृति के बीच ले जाती है, जिससे उसे 'साक्षात्कार' की अनुभूति होती है।


    6. व्याकरण (Integrated Grammar)

    (Based on Class 10 Hindi Course B - Sparsh Pattern)


    प्रश्न 1: पदबंध पहचानिए: "नीचे जल में निज महाकार देख रहा है।" (रेखांकित: नीचे जल में)

    उत्तर: क्रिया-विशेषण पदबंध (स्थानवाचक)।


    प्रश्न 2: अलंकार पहचानिए: "सहस्र दृग-सुमन फाड़"

    उत्तर: रूपक अलंकार (दृग रूपी सुमन / आँखों रूपी फूल)।


    प्रश्न 3: मुहावरे का वाक्य प्रयोग: "इंद्रजाल फैलाना"

    उत्तर: जादूगर ने मंच पर आते ही अपना ऐसा इंद्रजाल फैलाया कि दर्शक दंग रह गए।


    7. सामान्य त्रुटियाँ (Common Student Errors)

    1. 'दृग-सुमन' का अर्थ:

      • त्रुटि: छात्र इसका अर्थ 'सुंदर आँखें' लिखते हैं।

      • सुधार: इसका सही अर्थ 'फूल रूपी आँखें' (Metaphor) है। पर्वत पर खिले हजारों फूल उसकी आँखों का काम कर रहे हैं।


    2. तालाब में आग लगने का कारण:

      • त्रुटि: छात्र लिखते हैं कि बिजली गिरने से आग लग गई।

      • सुधार: तालाब में आग नहीं लगी थी। मूसलाधार बारिश और कोहरे (धुंध) को देखकर कवि ने 'धुआँ उठने' और 'आग लगने' की कल्पना की है।


    3. पेड़ों का धँसना:

      • त्रुटि: छात्र इसे भूस्खलन (Landslide) समझ लेते हैं।

      • सुधार: यह भूस्खलन नहीं है। घने बादलों/कोहरे ने पेड़ों को ढक लिया, जिससे वे अदृश्य हो गए। कवि ने इसे काव्यात्मक रूप में 'डरकर धँसना' कहा है।


    End


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