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    4. मेरा छोटा-सा निजी पुस्तकालय - (Mera Chota Sa Niji Pustakalaya)- Class 9 - Sanchayan Bhag 1

    • Dec 26, 2025
    • 9 min read

    Updated: Dec 27, 2025

    1. पाठ का सार (Quick Revision Summary)

    • लेखक की गंभीर बीमारी: जुलाई 1989 में लेखक को तीन ज़बरदस्त हार्ट-अटैक आए। उनकी नब्ज़ और साँस बंद हो गई थी और डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था। लेकिन डॉ. बोर्जेस ने हिम्मत नहीं हारी और बिजली के झटके (Shocks) देकर उनके प्राण वापस लाए। हालांकि, उनका 60% हृदय नष्ट हो चुका था।

      • English: Author's Critical Illness: In July 1989, the author suffered three massive heart attacks. His pulse and breathing stopped, and doctors declared him dead. However, Dr. Borges did not lose hope and revived him using electric shocks. Though his life was saved, 60% of his heart was damaged.


    • किताबों वाले कमरे में रहने की ज़िद: अस्पताल से घर लौटने पर लेखक ने ज़िद की कि उन्हें बेडरूम के बजाय उनके 'किताबों वाले कमरे' में लिटाया जाए। उन्हें लगता था कि किताबों के बीच रहकर वे बेहतर महसूस करेंगे। वे चलना-बोलना मना होने पर अपनी प्रिय किताबों को निहारते रहते थे।

      • English: Insistence on Staying in the Library: Upon returning home from the hospital, the author insisted on lying in his 'library room' instead of the bedroom. He felt he would feel better amidst books. Forbidden to walk or talk, he would just gaze at his beloved books.


    • बचपन और किताबों का शौक: लेखक का बचपन इलाहाबाद (प्रयागराज) में बीता। उनके पिता सरकारी नौकरी में थे और उन्हें किताबों का बहुत शौक था। घर में 'आर्यमित्र', 'सरस्वती', 'गृहलक्ष्मी' जैसी पत्रिकाएँ और बाल-सखा, चमचम जैसी बाल-पत्रिकाएँ आती थीं। लेखक को बचपन से ही कोर्स की किताबों से ज्यादा बाहरी किताबें पढ़ने का चस्का लग गया था।

      • English: Childhood and Love for Books: The author spent his childhood in Allahabad. His father was in a government job and loved books. Magazines like 'Aryamitra', 'Saraswati', 'Grihalakshmi' and children's magazines like 'Bal-Sakha', 'Chamcham' used to come home. Since childhood, the author was more fond of reading outside books than course textbooks.


    • पहली पुस्तकें और अपना पुस्तकालय: पाँचवीं कक्षा में फर्स्ट आने पर लेखक को स्कूल से इनाम में दो अंग्रेज़ी किताबें मिलीं- एक पक्षियों की जानकारी पर और दूसरी 'वॉटर बेबीज़'। पिता ने अलमारी का एक खाना (Shelf) खाली करके लेखक को दिया और कहा, "आज से यह तुम्हारा अपना पुस्तकालय है।" यहीं से उनके निजी पुस्तकालय की शुरुआत हुई।

      • English: First Books and Own Library: When the author stood first in the 5th grade, he received two English books as a prize from school - one on birds and another 'Water Babies'. His father cleared a shelf in the almirah and said, "From today, this is your own library." This marked the beginning of his personal library.


    • आर्थिक तंगी और पिता का प्रोत्साहन: पिता की मृत्यु के बाद आर्थिक संकट आया, लेकिन किताबों का शौक कम नहीं हुआ। लेखक पुराने सिलेबस की किताबें बेचकर नई किताबें और कोर्स की किताबें खरीदते थे। इसी तरह उन्होंने शरतचंद्र चट्टोपाध्याय के उपन्यास 'देवदास', 'परिणीता' आदि खरीदे।

      • English: Financial Crisis and Father's Encouragement: After his father's death, there was a financial crisis, but the passion for books did not diminish. The author used to sell old syllabus books to buy new books and course materials. In this way, he bought Sarat Chandra Chattopadhyay's novels like 'Devdas', 'Parineeta', etc.


    • पुस्तकालय का विस्तार: धीरे-धीरे लेखक का पुस्तकालय बड़ा होता गया। उसमें हिंदी, अंग्रेजी के उपन्यास, नाटक, कविता संग्रह और आलोचना की हजारों किताबें जमा हो गईं। टॉलस्टॉय, दोस्तोवस्की, शेक्सपियर, निराला, महादेवी वर्मा जैसे महान लेखकों की कृतियाँ उनके पास थीं।

      • English: Expansion of Library: Gradually, the author's library grew. Thousands of books including novels, plays, poetry collections, and criticism in Hindi and English were accumulated. Works of great authors like Tolstoy, Dostoevsky, Shakespeare, Nirala, Mahadevi Verma were in his collection.


    • किताबें: जीवनदात्री शक्ति: जब लेखक मृत्यु के मुँह से लौटे, तो मराठी कवि 'विंदा करंदीकर' उनसे मिलने आए। उन्होंने कहा, "भारती, ये सैकड़ों महापुरुष जो पुस्तक रूप में तुम्हारे चारों ओर विराजमान हैं, इन्हीं के आशीर्वाद से तुम बचे हो।" लेखक भी मानते हैं कि किताबों ने ही उन्हें पुनर्जीवन दिया।

      • English: Books: Life-giving Force: When the author returned from the jaws of death, Marathi poet 'Vinda Karandikar' came to visit him. He said, "Bharati, these hundreds of great men present around you in the form of books, you have survived only by their blessings." The author also believes that books gave him a new life.


    2. शब्द-संपदा (Vocabulary)

    शब्द (Word)

    अर्थ (Hindi Meaning)

    English Meaning

    निजी

    अपना / व्यक्तिगत

    Private / Personal

    सहेजकर

    संभालकर

    With care / Preserved

    हरकारा

    डाकिया / संदेशवाहक

    Messenger / Postman

    आवाहन

    पुकारना / बुलाना

    Call / Invocation

    अवरोध

    रुकावट

    Blockage / Obstacle

    नब्ज़

    नाड़ी

    Pulse

    रिवाइव

    पुनर्जीवित करना

    Revive

    विराजमान

    उपस्थित / बैठे हुए

    Present / Seated

    कृतियाँ

    रचनाएँ

    Works / Creations

    जुझारू

    संघर्ष करने वाला

    Fighter / Resilient

    अदम्य

    जिसे दबाया न जा सके

    Indomitable


    3. चरित्र चित्रण (Character Sketches)

    लेखक (धर्मवीर भारती)

    • पुस्तकों के प्रेमी (Bibliophile): लेखक का जीवन किताबों के इर्द-गिर्द घूमता है। बचपन से लेकर वृद्धावस्था तक, किताबें ही उनकी सबसे अच्छी दोस्त रहीं। वे किताबों को केवल कागज का पुलिंदा नहीं, बल्कि 'जागते-बोलते इंसान' मानते थे।

      • English: The author's life revolves around books. From childhood to old age, books remained his best friends. He considered books not just bundles of paper but 'living, speaking humans'.

    • जुझारू और सकारात्मक (Resilient & Positive): गंभीर बीमारी और मौत को करीब से देखने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी। किताबों के प्रति उनके प्रेम ने उन्हें जीने की इच्छाशक्ति (Willpower) दी।

      • English: Even after facing critical illness and near-death, he did not give up. His love for books gave him the willpower to live.


    लेखक के पिता (Author's Father)

    • प्रेरक और दूरदर्शी (Inspiring & Visionary): उन्होंने लेखक के बाल-मन में पढ़ने की बीज बोए। उन्होंने बेटे की उपलब्धि (फर्स्ट आना) पर मिठाई या खिलौने देने के बजाय 'किताबें' और 'अपनी लाइब्रेरी' का तोहफा दिया, जिसने लेखक का भविष्य संवारा।

      • English: He sowed the seeds of reading in the author's young mind. Instead of giving sweets or toys for his son's achievement (coming first), he gifted 'books' and 'his own library', which shaped the author's future.


    4. योग्यता-आधारित प्रश्न (Competency-Based Questions)


    A. अभिकथन और तर्क (Assertion & Reasoning)

    प्रश्न 1: अभिकथन (A): लेखक ने बीमारी के बाद अपने बेडरूम में लेटने से मना कर दिया और लाइब्रेरी में रहने की ज़िद की।

    तर्क (R): उन्हें डर था कि बेडरूम में उन्हें दोबारा हार्ट-अटैक आ जाएगा।

    उत्तर: (ग) A सही है, R गलत है। (उन्होंने लाइब्रेरी इसलिए चुनी क्योंकि वहाँ किताबों का साथ उन्हें सुकून और जीवन-शक्ति देता था, न कि डर के कारण)।


    प्रश्न 2: अभिकथन (A): लेखक की माँ को स्कूली पढ़ाई को लेकर चिंता रहती थी।

    तर्क (R): लेखक अपना सारा समय कोर्स की किताबों के बजाय बाहरी किताबें और पत्रिकाएँ पढ़ने में बिताते थे, जिससे माँ को लगता था कि वे क्लास में फेल हो जाएंगे।

    उत्तर: (क) A और R दोनों सही हैं, तथा R, A की सही व्याख्या करता है।


    B. स्थिति-आधारित विश्लेषण (Situation Analysis) स्थिति (Situation): आज के बच्चे वीडियो गेम्स और मोबाइल में व्यस्त रहते हैं और किताबें नहीं पढ़ते।

    प्रश्न (Question): 'मेरा छोटा-सा निजी पुस्तकालय' पाठ से प्रेरणा लेकर आप बच्चों को किताबों की ओर कैसे मोड़ेंगे?

    उत्तर (Answer): पाठ में लेखक के पिता ने जबरदस्ती किताबें नहीं थोपीं, बल्कि घर में पत्रिकाओं का माहौल बनाया और छोटी उम्र में ही उनकी 'अपनी लाइब्रेरी' बनवा दी। इसी तरह, आज भी हमें बच्चों को उपहार में गैजेट्स के बजाय रोचक किताबें देनी चाहिए और घर में एक छोटा 'रीडिंग कॉर्नर' बनाना चाहिए। जब बच्चे किताबों को अपनी संपत्ति समझेंगे, तो वे उन्हें जरूर पढ़ेंगे।


    C. आशय स्पष्टीकरण (Intent/Inference)

    प्रश्न 1: "किताबें नहीं, ये महापुरुष हैं जो तुम्हारे चारों ओर विराजमान हैं।"

    उत्तर: विंदा करंदीकर के इस कथन का आशय है कि किताबें निर्जीव वस्तुएँ नहीं हैं। उनमें महान लेखकों और विचारकों (जैसे कबीर, टॉलस्टॉय, गांधी) के विचार, अनुभव और आत्मा बसती है। जब हम किताबों के बीच होते हैं, तो हम वस्तुतः उन महान आत्माओं के सानिध्य (Company) में होते हैं, जो हमें सकारात्मक ऊर्जा और आशीर्वाद देते हैं।


    प्रश्न 2: "आज से यह खाना (Shelf) तुम्हारी अपनी लाइब्रेरी है।"

    उत्तर: यह वाक्य लेखक के जीवन का 'टर्निंग पॉइंट' था। पिता ने केवल जगह नहीं दी, बल्कि लेखक को स्वायत्तता (Autonomy) और जिम्मेदारी दी। इससे लेखक को लगा कि किताबों पर उनका निजी अधिकार है, जिससे उनका जुड़ाव किताबों से गहरा हो गया।


    5. प्रश्न-उत्तर (Subjective Q&A)


    A. लघु उत्तरीय (Short Answer - 30-40 Words)

    प्रश्न 1: लेखक के घर में कौन-कौन सी पत्रिकाएँ आती थीं?

    उत्तर: लेखक के पिता नियमित रूप से 'आर्यमित्र' (साप्ताहिक), 'सरस्वती' (मासिक) और 'गृहलक्ष्मी' पत्रिकाएँ मँगवाते थे। बच्चों के लिए 'बालसखा' और 'चमचम' जैसी बाल-पत्रिकाएँ भी आती थीं।


    प्रश्न 2: लेखक को पहली बार कौन सी दो किताबें इनाम में मिलीं?

    उत्तर: पाँचवीं कक्षा में प्रथम आने पर लेखक को दो अंग्रेज़ी की किताबें इनाम में मिलीं। एक किताब में पक्षियों की जातियों और उनकी आदतों का वर्णन था, और दूसरी किताब 'वॉटर बेबीज़' (Water Babies) थी जो बच्चों के लिए एक प्रसिद्ध कहानी थी।


    प्रश्न 3: माँ को लेखक की पढ़ाई को लेकर क्या डर था?

    उत्तर: माँ देखती थीं कि लेखक हर समय कहानियों की किताबें और पत्रिकाएँ पढ़ता रहता है। उन्हें डर था कि अगर यह कोर्स की किताबें नहीं पढ़ेगा, तो इम्तिहान में पास कैसे होगा। वे चाहती थीं कि लेखक पाठ्यपुस्तकों पर ध्यान दे।


    प्रश्न 4: 'देवदास' उपन्यास लेखक ने कैसे खरीदा?

    उत्तर: लेखक को अपनी पुरानी पाठ्यपुस्तकें बेचकर नई कक्षा की किताबें लेनी थीं। पुरानी किताबें बेचने पर उनके पास दो रुपये बच गए। उसी पैसे से उन्होंने शरतचंद्र चट्टोपाध्याय का प्रसिद्ध उपन्यास 'देवदास' खरीदा।


    B. दीर्घ उत्तरीय/मूल्यपरक (Long/Value-Based - 100 Words)

    प्रश्न 1: "बचपन में मिले संस्कारों का प्रभाव जीवन भर रहता है।" लेखक के जीवन के संदर्भ में इस कथन की पुष्टि कीजिए।

    उत्तर: लेखक के पिता ने बचपन में ही घर में साहित्यिक माहौल बनाया था। उन्होंने लेखक को पत्रिकाओं से परिचित कराया और इनाम में किताबें दीं। उन्होंने बचपन में ही लेखक की एक छोटी सी लाइब्रेरी बनवा दी। इन्हीं संस्कारों का परिणाम था कि लेखक जीवन भर किताबों से जुड़े रहे। आर्थिक तंगी में भी उन्होंने सिनेमा देखने या कपड़े खरीदने के बजाय किताबें खरीदीं। अंत समय में जब वे मृत्यु के करीब थे, तब भी यही बचपन का संस्कार (किताब प्रेम) उनका संबल बना। यह सिद्ध करता है कि बचपन की नींव पर ही व्यक्तित्व का निर्माण होता है।


    प्रश्न 2: लेखक ने अपने पुस्तकालय के विस्तार का वर्णन किस प्रकार किया है?

    उत्तर: लेखक के पुस्तकालय की शुरुआत एक छोटे से शेल्फ से हुई थी, जिसमें दो इनामी किताबें थीं। धीरे-धीरे लेखक ने अपनी पॉकेट मनी और पुरानी किताबें बेचकर बचाए पैसों से उपन्यास और नाटक खरीदना शुरू किया। बाद में जब वे प्राध्यापक और संपादक बने, तो प्रकाशकों द्वारा भेंट की गई किताबें भी जमा होने लगीं। उनके पुस्तकालय में हिंदी और अंग्रेजी के महान साहित्यकारों की कृतियाँ, इतिहास, दर्शन और कला की हजारों किताबें भर गईं। वह छोटा शेल्फ एक विशाल और समृद्ध पुस्तकालय में बदल गया जो पूरे घर में फैल गया था।


    प्रश्न 3: 'मेरा छोटा-सा निजी पुस्तकालय' पाठ से हमें क्या संदेश मिलता है?

    उत्तर: यह पाठ हमें किताबों के महत्व और पठन-पाठन (Reading) की संस्कृति का संदेश देता है। यह बताता है कि:

    1. किताबें हमारी सच्ची मित्र और मार्गदर्शक होती हैं।

    2. घर में पढ़ाई का माहौल बच्चों के विकास के लिए आवश्यक है।

    3. विपरीत परिस्थितियों और बीमारी में भी साहित्य हमें मानसिक बल (Mental Strength) देता है।

    4. ज्ञान का संग्रह धन के संग्रह से कहीं अधिक मूल्यवान है। हमें अपनी कमाई का एक हिस्सा अच्छी किताबों पर जरूर खर्च करना चाहिए।


    6. व्याकरण (Integrated Grammar)

    (Based on the text of the chapter)


    प्रश्न 1: शब्द-युग्म (Word Pairs) छाँटिए:

    • हिलते-डुलते

    • रोते-गाते

    • पढ़े-लिखे

    • चलना-बोलना


    प्रश्न 2: उपसर्ग अलग कीजिए:

    • अवरोध: अव + रोध

    • निर्जीव: नि: + जीव

    • पुनर्जीवन: पुनः + जीवन

    • विख्यात: वि + ख्यात


    प्रश्न 3: मुहावरे का अर्थ और वाक्य प्रयोग:

    • प्राण सूखना: (डर जाना) - डॉक्टरों की बात सुनकर घरवालों के प्राण सूख गए।

    • हिम्मत न हारना: (साहस बनाए रखना) - डॉ. बोर्जेस ने हिम्मत नहीं हारी और इलाज जारी रखा।


    7. सामान्य त्रुटियाँ (Common Student Errors)

    1. किताबों के नाम:

      • त्रुटि: छात्र इनाम में मिली किताबों के नाम भूल जाते हैं या गलत लिखते हैं।

      • सुधार: इनाम में मिलीं: पक्षियों की जानकारी वाली किताब और 'वॉटर बेबीज़'। खरीदी गई पहली किताब: 'देवदास'


    2. पिता का रोल:

      • त्रुटि: छात्र सोचते हैं कि लेखक ने खुद ही लाइब्रेरी बनाई।

      • सुधार: शुरुआत पिता जी ने की थी, जिन्होंने अपनी अलमारी खाली करके दी थी।


    3. इलाहाबाद का माहौल:

      • त्रुटि: छात्र स्थान का उल्लेख नहीं करते।

      • सुधार: पाठ में इलाहाबाद (प्रयागराज) के साहित्यिक माहौल का वर्णन है, जो लेखक के बनने में सहायक था।


    End


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