4. विदाई-संभाषण - Vidai Sambhashan - Class 11 - Aroh
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Author: बालमुकुंद गुप्त
1. लेखक परिचय (Literary Profile)
साहित्यिक विशेषताएँ (Literary Traits): बालमुकुंद गुप्त को भारतेंदु-युग और द्विवेदी-युग के बीच की 'कड़ी' के रूप में देखा जाता है। वे एक निर्भीक पत्रकार और प्रखर व्यंग्यकार थे। पत्रकारिता उनके लिए स्वाधीनता संग्राम का हथियार थी। उनके लेखन में हास्य-विनोद के साथ तीखा कटाक्ष मिलता है।
प्रमुख रचनाएँ (Key Works): शिवशंभु के चिट्ठे, चिट्ठे और खत, खेल तमाशा।
संदर्भ: प्रस्तुत पाठ लेखक की सर्वाधिक लोकप्रिय कृति 'शिवशंभु के चिट्ठे' का एक अंश है। यह तत्कालीन वायसराय लॉर्ड कर्जन के शासनकाल (1899-1905) की नीतियों पर एक करारा व्यंग्य है।
2. पाठ का सार (Executive Summary)
प्रतिपाद्य (Central Theme): यह पाठ लॉर्ड कर्जन के भारत से विदाई के समय लिखा गया एक व्यंग्यात्मक लेख है। लेखक ने कर्जन की तानाशाही, भारतीय जनता की उपेक्षा और अंत में उनकी बेइज्जती भरी विदाई के माध्यम से यह दिखाया है कि निरंकुश शासन का अंत बुरा ही होता है।
English Summary: 'Vidai-Sambhashan' is a satirical essay addressed to Lord Curzon on his departure from India. The author critizes Curzon’s autocratic rule, his suppression of Indian aspirations, and his ultimate failure despite his arrogance. Using the metaphorical character 'Shivshambhu', Gupta highlights the contrast between the British rulers' pride and the suffering of the Indian masses.
Key Points:
बिछड़ना हमेशा कष्टदायक होता है, चाहे वह शत्रु ही क्यों न हो।
लॉर्ड कर्जन ने दो बार भारत पर शासन किया, पर दोनों ही बार उनका उद्देश्य केवल ब्रिटिश वर्चस्व स्थापित करना था।
कर्जन की ज़िद और अहंकार: उन्होंने 'काउंसिल' में अपनी मर्जी चलाने की कोशिश की, पर अंत में उन्हें खुद ही इस्तीफा देना पड़ा।
भारतीय प्रजा की दयनीय स्थिति: यहाँ की जनता ने कर्जन के शोषण को चुपचाप सहा।
3. कठिन शब्दार्थ (Glossary)
शब्द | हिंदी अर्थ | English Context |
विषाद | दुख / शोक | Sorrow / Grief |
आविर्भाव | प्रकट होना | Manifestation / Appearance |
पायमाल | नष्ट किया हुआ / पैरों तले रौंदा हुआ | Trampled / Ruined |
अलिफ़ लैला | अरबी कहानियों का प्रसिद्ध संग्रह | Arabian Nights |
सूत्रधार | नाटक का मुख्य संचालक | Narrator / Facilitator |
कृतज्ञता | उपकार मानना | Gratitude |
4. साहित्यिक विश्लेषण (Literary Analysis)
मूल संवेदना (Core Sentiment): सत्ता के मद (अहंकार) का पराभव और भारतीय जनता की सहनशीलता।
व्यंग्य की धार: लेखक ने कर्जन की तुलना 'केसर' (जर्मन तानाशाह) और 'ज़ार' (रूस के तानाशाह) से की है, यह बताने के लिए कि कर्जन उनसे भी अधिक जिद्दी थे।
भाषा-शैली: भारतेंदु युगीन हिंदी का प्रभाव, जिसमें उर्दू और तत्सम शब्दों का सुंदर समन्वय है। शैली रक्षात्मक न होकर आक्रामक (व्यंग्यात्मक) है।
5. गद्यांश आधारित प्रश्न (Extract-Based Competency)
Extract 1: "बिछड़न समय बड़ा करुणोत्पादक होता है। आपको बिछड़ते देख आज हृदय में बड़ा दुख है।"
Interpretation: लेखक ने कर्जन की विदाई को 'करुणोत्पादक' क्यों कहा है? (उत्तर: क्योंकि भारतीय संस्कृति में बिछड़ना हमेशा दुखद माना जाता है, चाहे वह शत्रु ही क्यों न हो)।
Author's Intent: इस कथन में छिपा व्यंग्य क्या है? (उत्तर: लेखक वास्तव में कर्जन के जाने से खुश हैं, पर वे उनकी विदाई की बेइज्जती पर तंज कस रहे हैं)।
Inference: कर्जन के शासनकाल का अंत कैसा रहा? (उत्तर: घोर दुखांत (Tragic), क्योंकि जिस जिद्द के कारण उन्होंने दूसरों को दुखी किया, अंत में वे स्वयं उसके शिकार हुए)।
6. पाठ्यपुस्तक प्रश्नोत्तर (Textbook Q&A)
1. 'शिवशंभु की दो गायों' की कहानी के माध्यम से लेखक क्या कहना चाहता है?
उत्तर: इस कहानी के माध्यम से लेखक यह बताना चाहता है कि भारत में बिछड़ते समय जीव-जंतु भी भावुक हो जाते हैं। जब एक बलशाली गाय के जाने पर दूसरी गाय (जिसे वह मारती थी) ने चारा नहीं खाया, तो मनुष्य के हृदय की कोमलता का अंदाज़ा लगाया जा सकता है। यह कर्जन की पत्थर-दिली पर प्रहार है।
2. लॉर्ड कर्जन के शासनकाल का नाटक 'दुखांत' क्यों कहा गया है?
उत्तर: कर्जन ने भारत को अपनी इच्छा के अनुसार चलाना चाहा, पर अंत में उनकी एक न चली। उन्हें एक साधारण फौजी अफसर की नियुक्ति के मामले में मुँह की खानी पड़ी और बेइज्जत होकर इस्तीफा देना पड़ा। उनका सारा घमंड चूर-चूर हो गया।
3. "आपके शासनकाल में इस देश की प्रजा की क्या हालत हुई?"—पाठ के आधार पर उत्तर दें।
उत्तर: कर्जन के शासन में प्रजा का बहुत दमन हुआ। बंगाल का विभाजन (बंग-भंग) कर जनता की भावनाओं को कुचला गया। लोग दरिद्रता और भुखमरी के शिकार थे, फिर भी कर्जन ने दिल्ली दरबार जैसे फिजूलखर्ची वाले आयोजन किए।
7. अभिव्यक्ति और माध्यम (Creative Writing Connection)
Topic: "तानाशाही का अंत और लोकतांत्रिक मूल्य"
Key Points:
सत्ता का अहंकार और उसका पतन।
जनता की आवाज का महत्व।
इतिहास से मिलने वाली सीख।
8. परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण कथन (Key Quotes)
"बिछड़न समय बड़ा करुणोत्पादक होता है।"
"आप आए थे किस काम को और क्या कर चले?"
"जिद्द का फल बुरा होता है।"
9. सामान्य त्रुटियाँ (Common Student Errors)
Spelling: 'चिरस्थायी', 'करुणोत्पादक' और 'लॉर्ड कर्जन' की वर्तनी पर ध्यान दें।
Conceptual: छात्र सोचते हैं कि लेखक कर्जन के जाने पर सचमुच दुखी हैं। ध्यान रहे, यह एक व्यंग्य (Sarcasm) है; लेखक उनके द्वारा किए गए दमन की याद दिला रहे हैं।
10. विगत वर्षों के बोर्ड प्रश्न (PYQs)
Short Answer (2 marks): कर्जन ने इस्तीफा क्यों दिया था?
Model Answer: कर्जन अपनी पसंद के एक फौजी अफसर को कौंसिल में नियुक्त करना चाहते थे, पर ब्रिटिश सरकार ने उनकी बात नहीं मानी। इस विरोध स्वरूप उन्होंने इस्तीफा दे दिया जो स्वीकार कर लिया गया।
Long Answer (5 marks): "विदाई-संभाषण" पाठ में लेखक ने लॉर्ड कर्जन को 'कर्तव्य' (Duty) और 'प्रदर्शन' (Show) का मुकाबला करने के लिए क्यों कहा है?
Model Answer: लेखक का मानना है कि कर्जन ने केवल 'प्रदर्शन' (शान-शौकत) पर ध्यान दिया, जबकि वायसराय के रूप में उनका 'कर्तव्य' प्रजा का हित करना था। उन्होंने भारतीयों की शिक्षा, प्रेस की स्वतंत्रता और भावनाओं को कुचला। लेखक उन्हें याद दिलाते हैं कि इतिहास केवल उन्हीं शासकों को याद रखता है जो कर्तव्य निभाते हैं, न कि उन्हें जो केवल आडंबर करते हैं।
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