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    4.वैज्ञानिक चेतना के वाहक चंद्रशेखर वेंकट रामन् - (Vaigyanik Chetna Ke Vahak Chandrashekhar Venkat Raman) - Class 9 - Sparsh Bhag 1

    • Dec 17, 2025
    • 9 min read

    Updated: Dec 22, 2025

    1. पाठ का सार (Quick Revision Summary)

    • समुद्र के नीले रंग का रहस्य: 1921 में जब रामन् समुद्री जहाज से लंदन से भारत लौट रहे थे, तो समुद्र के नीले रंग ने उन्हें आकर्षित किया। उस समय माना जाता था कि समुद्र का नीला रंग आकाश के प्रतिबिंब के कारण होता है। लेकिन रामन् ने इस सिद्धांत को नहीं माना और खोज की कि यह पानी के अणुओं द्वारा सूर्य के प्रकाश के प्रकीर्णन (Scattering) के कारण होता है।

      • English: Mystery of the Blue Sea: In 1921, while returning to India from London by ship, Raman was fascinated by the blue color of the sea. At that time, it was believed that the sea's blue color was due to the reflection of the sky. But Raman rejected this theory and discovered that it is caused by the scattering of sunlight by water molecules.

    • प्रारंभिक जीवन और शिक्षा: रामन् का जन्म 7 नवंबर 1888 को तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली में हुआ था। उनके पिता गणित और भौतिकी के शिक्षक थे। रामन् पढ़ाई में बहुत तेज थे। उन्होंने बहुत कम उम्र में इंटरमीडिएट और एम.ए. की परीक्षाएँ पास कर ली थीं। उनका झुकाव बचपन से ही विज्ञान की ओर था।

      • English: Early Life and Education: Raman was born on 7 November 1888 in Tiruchirappalli, Tamil Nadu. His father was a teacher of Mathematics and Physics. Raman was very bright in studies. He passed Intermediate and M.A. examinations at a very young age. He was inclined towards science since childhood.

    • सरकारी नौकरी और विज्ञान प्रेम: उस समय विज्ञान में करियर बनाने की सुविधाएँ नहीं थीं, इसलिए वे वित्त विभाग (Finance Department) में अफसर बन गए और कोलकाता में तैनात हुए। लेकिन उनका मन विज्ञान में ही रमा रहा। वे दफ्तर से छूटते ही 'इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टीवेशन ऑफ साइंस' (IACS) की प्रयोगशाला में चले जाते और घंटों शोध करते।

      • English: Government Job and Love for Science: At that time, there were no facilities to build a career in science, so he became an officer in the Finance Department and was posted in Kolkata. But his heart remained in science. As soon as he left the office, he would go to the laboratory of the 'Indian Association for the Cultivation of Science' (IACS) and conduct research for hours.

    • वाद्ययंत्रों पर शोध: रामन् ने केवल प्रकाश पर ही नहीं, बल्कि संगीत के वाद्ययंत्रों पर भी शोध किया। उन्होंने सिद्ध किया कि भारतीय वाद्ययंत्र (जैसे वीणा, तानपुरा, मृदंगम, तबला) विदेशी वाद्ययंत्रों (जैसे पियानो, वायलिन) से घटिया नहीं हैं। उन्होंने तबले और मृदंगम की ध्वनियों में भी गणितीय सामंजस्य खोज निकाला।

      • English: Research on Musical Instruments: Raman researched not only light but also musical instruments. He proved that Indian instruments (like Veena, Tanpura, Mridangam, Tabla) are not inferior to foreign instruments (like Piano, Violin). He found mathematical harmony even in the sounds of Tabla and Mridangam.

    • रामन् प्रभाव (Raman Effect): उन्होंने खोजा कि जब एकवर्णीय प्रकाश (Monochromatic light) किसी तरल या ठोस माध्यम से गुजरता है, तो उसके कुछ अंश का रंग बदल जाता है। प्रकाश की ऊर्जा में यह बदलाव माध्यम के अणुओं की कंपन ऊर्जा के कारण होता है। इस खोज को 'रामन् प्रभाव' कहा गया। इससे अणुओं की संरचना समझना आसान हो गया।

      • English: Raman Effect: He discovered that when monochromatic light passes through a liquid or solid medium, a part of it changes color. This change in light energy is due to the vibrational energy of the medium's molecules. This discovery was called the 'Raman Effect'. It made understanding molecular structure easier.

    • नोबेल पुरस्कार और सम्मान: 1930 में उन्हें भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला। वे यह पुरस्कार पाने वाले पहले एशियाई थे। उन्हें 'भारत रत्न' और लेनिन शांति पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। उन्होंने बैंगलोर में 'रामन् रिसर्च इंस्टीट्यूट' की स्थापना की।

      • English: Nobel Prize and Honours: In 1930, he received the Nobel Prize in Physics. He was the first Asian to receive this award. He was also honoured with 'Bharat Ratna' and Lenin Peace Prize. He established the 'Raman Research Institute' in Bangalore.

    • भारतीय विज्ञान को योगदान: रामन् ने हमेशा इस बात पर जोर दिया कि विज्ञान के लिए बड़े उपकरणों से ज्यादा 'स्वतंत्र सोच' और 'कठिन परिश्रम' की जरूरत है। उन्होंने भारतीय युवाओं में वैज्ञानिक चेतना जगाने का महान कार्य किया। 21 नवंबर 1970 को उनका निधन हो गया।

      • English: Contribution to Indian Science: Raman always emphasized that science needs 'independent thinking' and 'hard work' more than expensive equipment. He did a great job of awakening scientific consciousness among Indian youth. He passed away on 21 November 1970.


    2. शब्द-संपदा (Vocabulary)

    शब्द (Word)

    अर्थ (Hindi Meaning)

    English Meaning

    जिज्ञासा

    जानने की इच्छा

    Curiosity

    प्रकीर्णन

    फैलना / बिखरना

    Scattering

    एकवर्णीय

    एक रंग का

    Monochromatic

    रुझान

    झुकाव / दिलचस्पी

    Inclination / Interest

    उपाधि

    पदवी / सम्मान

    Title / Degree

    कदाचित

    शायद

    Perhaps

    अक्षुण्ण

    जो खंडित न हो / अखंड

    Intact / Unbroken

    ऊर्जा

    शक्ति

    Energy

    परिणति

    परिणाम / नतीजा

    Consequence / Result

    सृजित

    बनाया हुआ / रचा हुआ

    Created

    प्रतिभावान

    बुद्धिमान / गुणी

    Talented

    वाद्ययंत्र

    बाजा

    Musical Instrument

    3. चरित्र चित्रण (Character Sketches)

    चंद्रशेखर वेंकट रामन् (C.V. Raman)

    • जिज्ञासु और खोजी प्रवृत्ति (Curious & Explorer): रामन् के अंदर बचपन से ही प्रकृति के रहस्यों को सुलझाने की जिज्ञासा थी। समुद्र के नीले रंग को देखकर वे केवल उसे निहारते नहीं रहे, बल्कि उसके पीछे का वैज्ञानिक कारण खोज निकाला।

      • English: Raman had a curiosity to solve nature's mysteries since childhood. Seeing the blue color of the sea, he didn't just admire it but found the scientific reason behind it.


    • दृढ़ निश्चयी और परिश्रमी (Determined & Hardworking): सरकारी नौकरी की सुख-सुविधाओं और व्यस्तता के बावजूद उन्होंने विज्ञान के प्रति अपने समर्पण को कम नहीं होने दिया। वे दफ्तर के बाद भी प्रयोगशाला में पसीना बहाते थे।

      • English: Despite the comforts and busyness of a government job, he did not let his dedication to science diminish. He used to sweat in the laboratory even after office hours.


    • सच्चे देशभक्त (True Patriot): उन्होंने विदेशों में बसने के बजाय भारत में रहकर ही विज्ञान की सेवा की। उन्होंने साबित किया कि सीमित संसाधनों में भी विश्वस्तरीय खोज की जा सकती है और भारतीयों में आत्मसम्मान जगाया।

      • English: Instead of settling abroad, he served science while staying in India. He proved that world-class discoveries can be made even with limited resources and instilled self-respect in Indians.


    4. योग्यता-आधारित प्रश्न (Competency-Based Questions)

    A. अभिकथन और तर्क (Assertion & Reasoning)

    प्रश्न 1: अभिकथन (A): रामन् ने सरकारी नौकरी छोड़कर कलकत्ता विश्वविद्यालय में प्रोफेसर का पद स्वीकार कर लिया।

    तर्क (R): सरकारी नौकरी में उन्हें वेतन कम मिलता था और सुविधाएं भी नहीं थीं।

    उत्तर: (ग) A सही है, R गलत है। (उन्होंने नौकरी वेतन के कारण नहीं, बल्कि सरस्वती की साधना (विज्ञान) के लिए छोड़ी थी, जहाँ उन्हें कम वेतन और कम सुविधाएं मिलने वाली थीं)।


    प्रश्न 2: अभिकथन (A): 'रामन् प्रभाव' की खोज से पदार्थों की आणविक संरचना का अध्ययन आसान हो गया। तर्क (R): इस खोज ने बताया कि एकवर्णीय प्रकाश की किरणें जब किसी माध्यम से गुजरती हैं, तो उनके रंग (ऊर्जा) में परिवर्तन आ जाता है।

    उत्तर: (क) A और R दोनों सही हैं, तथा R, A की सही व्याख्या करता है।


    B. स्थिति-आधारित विश्लेषण (Situation Analysis)

    स्थिति (Situation): एक छात्र विज्ञान पढ़ना चाहता है लेकिन उसके पास महंगी प्रयोगशाला और उपकरण नहीं हैं। वह निराश है।

    प्रश्न (Question): सी.वी. रामन् के जीवन से उदाहरण देकर आप उस छात्र को कैसे प्रेरित करेंगे?

    उत्तर (Answer): मैं उसे सी.वी. रामन् का उदाहरण दूँगा जिन्होंने 'इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टीवेशन ऑफ साइंस' की साधारण सी प्रयोगशाला में, बहुत ही कम और साधारण उपकरणों के साथ दुनिया की महानतम खोज (नोबेल पुरस्कार विजेता) की। विज्ञान उपकरणों से नहीं, बल्कि 'दृढ़ इच्छाशक्ति' और 'स्वतंत्र सोच' से होता है।


    C. आशय स्पष्टीकरण (Intent/Inference)

    प्रश्न 1: "रामन् ने अनेक ठोस रवों और तरल पदार्थों पर प्रकाश की किरण के प्रभाव का अध्ययन किया।" उत्तर: इसका आशय यह है कि रामन् ने अपनी खोज को केवल एक चीज़ तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने अलग-अलग प्रकार के ठोस क्रिस्टल (रवों) और लिक्विड (तरल) पदार्थों में से प्रकाश गुजारकर देखा कि प्रकाश के स्वभाव में क्या बदलाव आता है। इसी व्यापक अध्ययन ने उन्हें 'रामन् प्रभाव' तक पहुँचाया।


    प्रश्न 2: "हमारे पास ऐसी कोई दलील नहीं थी जिसके आधार पर हम कह सकें कि हमारे पास भी विज्ञान की कोई परंपरा है।"

    उत्तर: रामन् से पहले भारत में आधुनिक विज्ञान की स्थिति बहुत कमजोर थी। दुनिया को लगता था कि भारत सपेरों और जादूगरों का देश है। रामन् की खोज ने पहली बार ठोस सबूत (दलील) दिया कि भारत भी विज्ञान के क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व कर सकता है और यहाँ भी विज्ञान की गौरवशाली परंपरा बन सकती है।


    5. प्रश्न-उत्तर (Subjective Q&A)

    A. लघु उत्तरीय (Short Answer - 30-40 Words)

    प्रश्न 1: रामन् के प्रारंभिक शोधकार्य किस विषय पर थे और वे किस संस्था में किए गए?

    उत्तर: रामन् के प्रारंभिक शोधकार्य वाद्ययंत्रों (जैसे वीणा, मृदंगम, पियानो) की ध्वनियों और कंपनों पर थे। ये शोधकार्य कोलकाता की 'इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टीवेशन ऑफ साइंस' (IACS) नामक संस्था में किए गए थे।


    प्रश्न 2: समुद्र को देखकर रामन् के मन में क्या जिज्ञासा उठी?

    उत्तर: 1921 में जहाज से यात्रा करते समय समुद्र के गहरे नीले रंग को देखकर रामन् के मन में सवाल उठा कि "समुद्र का रंग नीला ही क्यों होता है? कुछ और क्यों नहीं?" वे प्रचलित उत्तर (आकाश का प्रतिबिंब) से संतुष्ट नहीं थे।


    प्रश्न 3: 'रामन् प्रभाव' क्या है?

    उत्तर: जब एकवर्णीय (Monochromatic) प्रकाश की किरण किसी तरल या ठोस माध्यम से गुजरती है, तो उसके कुछ अंश का रंग (तरंगदैर्ध्य/Wavelength) बदल जाता है। प्रकाश के रंग में आए इस बदलाव को ही 'रामन् प्रभाव' कहते हैं।


    प्रश्न 4: रामन् को किन-किन पुरस्कारों से सम्मानित किया गया?

    उत्तर: रामन् को 1924 में 'रॉयल सोसाइटी' की सदस्यता, 1929 में 'सर' की उपाधि, 1930 में नोबेल पुरस्कार, 1954 में 'भारत रत्न' और 1957 में 'लेनिन शांति पुरस्कार' जैसे प्रतिष्ठित सम्मान मिले।


    प्रश्न 5: भारतीय वाद्ययंत्रों के बारे में रामन् ने क्या सिद्ध किया?

    उत्तर: उस समय पश्चिमी लोग भारतीय वाद्ययंत्रों को घटिया मानते थे। रामन् ने वैज्ञानिक ढंग से सिद्ध किया कि वीणा, तानपुरा, मृदंगम और तबला जैसे भारतीय वाद्ययंत्र ध्वनियों के मामले में पश्चिमी वाद्ययंत्रों से कहीं अधिक वैज्ञानिक और श्रेष्ठ हैं।


    B. दीर्घ उत्तरीय/मूल्यपरक (Long/Value-Based - 100 Words)


    प्रश्न 1: "विज्ञान के क्षेत्र में रामन् का योगदान केवल एक खोज तक सीमित नहीं था, उन्होंने एक नई चेतना जगाई।" इस कथन की पुष्टि कीजिए।

    उत्तर: सी.वी. रामन् का योगदान केवल 'रामन् प्रभाव' की खोज तक सीमित नहीं था। उन्होंने भारत में विज्ञान को एक नई दिशा दी। जिस समय भारत गुलाम था और भारतीयों में हीनता की भावना थी, उस समय उन्होंने विश्वस्तरीय खोज करके भारतीयों का आत्मसम्मान बढ़ाया। उन्होंने बैंगलोर में 'रामन् रिसर्च इंस्टीट्यूट' की स्थापना की और 'इंडियन जर्नल ऑफ फिजिक्स' नामक शोध पत्रिका शुरू की। उन्होंने सैकड़ों छात्रों को विज्ञान के लिए प्रेरित किया। उन्होंने सिद्ध किया कि हम अपनी प्रतिभा के बल पर दुनिया में शीर्ष स्थान प्राप्त कर सकते हैं। वे भारत में वैज्ञानिक संस्कृति के जनक थे।


    प्रश्न 2: रामन् के जीवन से छात्र क्या प्रेरणा ले सकते हैं?

    उत्तर: रामन् का जीवन छात्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

    1. जिज्ञासा: छात्रों को अपने आसपास की घटनाओं (जैसे आकाश का नीला होना) के प्रति जिज्ञासु होना चाहिए, रट्टू तोता नहीं।

    2. समय प्रबंधन: जैसे रामन् नौकरी के साथ-साथ शोध करते थे, वैसे ही छात्रों को समय का सदुपयोग करना चाहिए।

    3. संसाधनों का रोना न रोएं: रामन् ने साधारण प्रयोगशाला में महान खोज की। छात्रों को भी अभावों की शिकायत करने के बजाय उपलब्ध साधनों में सर्वश्रेष्ठ करने का प्रयास करना चाहिए।

    4. प्रकृति प्रेम: प्रकृति ही विज्ञान की सबसे बड़ी प्रयोगशाला है, उससे जुड़ना चाहिए।


    प्रश्न 3: सरकारी नौकरी छोड़ने का निर्णय रामन् के लिए कितना कठिन रहा होगा और यह उनके किस गुण को दर्शाता है?

    उत्तर: उस समय (ब्रिटिश काल में) वित्त विभाग की सरकारी नौकरी बहुत प्रतिष्ठित और मोटी तनख्वाह वाली थी। उसे छोड़कर विश्वविद्यालय की कम वेतन वाली नौकरी चुनना एक बहुत बड़ा जोखिम था। यह निर्णय दर्शाता है कि रामन् के लिए भौतिक सुख-सुविधाओं और पैसों से कहीं बढ़कर 'ज्ञान' और 'विज्ञान' का महत्व था। वे 'सरस्वती' के सच्चे साधक थे, 'लक्ष्मी' के नहीं। यह उनके साहस, त्याग और विज्ञान के प्रति अटूट समर्पण का प्रमाण है।


    6. व्याकरण (Integrated Grammar)

    (Based on Class 9 Hindi Course B - Sparsh Pattern)


    प्रश्न 1: संधि विच्छेद कीजिए:

    • प्रायोगिक: प्रयोग + इक

    • वैज्ञानिक: विज्ञान + इक

    • अन्वेषण: अनु + एषण

    • पुरस्कार: पुरः + कार


    प्रश्न 2: समास विग्रह और भेद बताइए:

    • वाद्ययंत्र: वाद्य के लिए यंत्र (संप्रदान तत्पुरुष)

    • चंद्रशेखर: चंद्र है शिखर पर जिसके (बहुव्रीहि - शिव/रामन् का नाम)

    • यथासंभव: जैसा संभव हो (अव्ययीभाव)


    प्रश्न 3: विलोम शब्द लिखिए:

    • उन्नति: अवनति

    • कृत्रिम: प्राकृतिक

    • सार्थक: निरर्थक


    प्रश्न 4: प्रत्यय अलग कीजिए:

    • भारतीय: भारत + ईय

    • भौतिकी: भौतिक + ई


    7. सामान्य त्रुटियाँ (Common Student Errors)


    1. रामन् प्रभाव की समझ:

      • त्रुटि: छात्र लिखते हैं कि रामन् ने बताया समुद्र नीला क्यों दिखता है (आकाश की परछाई)।

      • सुधार: रामन् ने परछाई वाले सिद्धांत का खंडन किया और बताया कि यह प्रकीर्णन (Scattering) के कारण होता है।


    2. नोबेल पुरस्कार का वर्ष:

      • त्रुटि: छात्र वर्ष गलत लिख देते हैं।

      • सुधार: उन्हें नोबेल पुरस्कार 1930 में मिला था। (याद रखें: 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस इसी खोज के उपलक्ष्य में मनाया जाता है)।


    3. जन्म स्थान:

      • त्रुटि: छात्र बैंगलोर या कोलकाता लिख देते हैं।

      • सुधार: उनका जन्म तिरुचिरापल्ली (तमिलनाडु) में हुआ था, काम कोलकाता और बैंगलोर में किया।

    End


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