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    5. कबीर के दोहे - (Kabir Ke Dohe)- Class 8 - Malhar

    • Dec 28, 2025
    • 8 min read

    Updated: Jan 2

    Poet: कबीरदास (Kabir Das)

    1. पाठ का सार (Quick Revision Summary)

    • सत्य और ईश्वर: कबीर कहते हैं कि सत्य (सच) के बराबर कोई तपस्या नहीं है और झूठ के बराबर कोई पाप नहीं है। जिसके हृदय में सत्य का निवास होता है, उसके हृदय में साक्षात ईश्वर (गुरु/भगवान) बसते हैं।

      • English: Truth and God: Kabir says that there is no penance equal to truth and no sin equal to lying. God himself resides in the heart of the one who holds truth.

    • बड़प्पन की परिभाषा: केवल शरीर या धन से बड़ा होने का कोई महत्व नहीं है, यदि आप दूसरों के काम न आ सकें। खजूर का पेड़ बहुत ऊँचा होता है, लेकिन न तो वह राहगीर (पंथी) को छाया देता है और न ही उसके फल आसानी से तोड़े जा सकते हैं (फल बहुत दूर लगते हैं)। कबीर ऐसे बड़प्पन को व्यर्थ मानते हैं।

      • English: Definition of Greatness: Being big in size or wealth is meaningless if you cannot be of use to others. The date palm tree is very tall, but it neither provides shade to the traveler nor are its fruits easily accessible. Kabir considers such greatness useless.

    • गुरु का स्थान: कबीर के सामने गुरु और गोविंद (ईश्वर) दोनों खड़े हैं। वे दुविधा में हैं कि पहले किसके चरण स्पर्श करें। वे निर्णय लेते हैं कि गुरु महान हैं क्योंकि गुरु ने ही उन्हें ईश्वर तक पहुँचने का मार्ग बताया है। अतः वे गुरु पर न्योछावर (बलिहारी) जाते हैं।

      • English: Position of Guru: Guru and God (Govind) both are standing before Kabir. He is in a dilemma whose feet to touch first. He decides that the Guru is greater because it is the Guru who showed him the path to God. Hence, he dedicates himself to the Guru.

    • अति का निषेध (संतुलन): कबीर कहते हैं कि किसी भी चीज़ की अधिकता (Excess) बुरी होती है। न तो बहुत अधिक बोलना अच्छा है, न बहुत अधिक चुप रहना। जैसे बहुत अधिक बारिश भी नुकसानदेह है और बहुत अधिक धूप भी। जीवन में संतुलन ज़रूरी है।

      • English: Prohibition of Excess (Balance): Kabir says that excess of anything is bad. Neither speaking too much is good, nor staying too silent. Just as too much rain is harmful and so is too much scorching sun. Balance is essential in life.

    • मधुर वाणी: हमें ऐसी वाणी बोलनी चाहिए जिससे हमारा अपना अहंकार (आपा) मिट जाए। मीठी बोली बोलने से दूसरों को शीतलता (शांति/सुख) मिलती है और हमारा अपना मन भी शीतल (शांत) रहता है।

      • English: Sweet Speech: We should speak such words that our own ego dissolves. Speaking sweetly gives peace/coolness to others and keeps our own mind calm as well.

    • निंदक का महत्व: कबीर सलाह देते हैं कि अपनी निंदा (बुराई) करने वाले को अपने पास (आँगन में कुटिया बनाकर) रखना चाहिए। निंदक बिना साबुन और पानी के ही हमारे स्वभाव को निर्मल (साफ) कर देता है, यानी हमारी कमियाँ बताकर हमें सुधार देता है।

      • English: Importance of Critic: Kabir advises keeping the critic close (by building a hut in the courtyard). The critic cleanses our nature without soap and water, meaning he helps us improve by pointing out our flaws.

    • साधु का स्वभाव (सूप जैसा): सच्चा सज्जन या साधु 'सूप' (Winnowing fan) जैसा होना चाहिए। सूप अनाज के सार (अच्छे भाग) को अपने पास रख लेता है और थोथा (कचरा/भूसी) उड़ा देता है। वैसे ही सज्जन को अच्छाई ग्रहण करनी चाहिए और बुराई त्याग देनी चाहिए।

      • English: Nature of a Saint (Like a Winnowing Fan): A true gentleman or saint should be like a 'Soop'. The Soop keeps the essence (grain) and blows away the chaff (waste). Similarly, a gentleman should accept goodness and discard evil.

    • संगति का फल: कबीर कहते हैं कि मन एक पक्षी की तरह है जो जहाँ चाहता है, उड़कर जाता है। लेकिन यह जैसा साथ (संगति) करता है, वैसा ही फल पाता है। अच्छी संगति से अच्छा और बुरी से बुरा परिणाम मिलता है।

      • English: Fruit of Company: Kabir says the mind is like a bird that flies wherever it wants. But it gets the fruit according to the company it keeps. Good company yields good results, and bad company yields bad.


    2. शब्द-संपदा (Vocabulary)

    शब्द (Word)

    अर्थ (Hindi Meaning)

    English Meaning

    साँच

    सत्य / सच

    Truth

    हिरदे

    हृदय / दिल

    Heart

    पंथी

    राहगीर / यात्री

    Traveler

    बलिहारी

    न्योछावर होना / समर्पित होना

    To sacrifice / Devote

    आपा

    अहंकार / घमंड

    Ego / Pride

    सीतल

    शीतल / ठंडा / शांत

    Cool / Peaceful

    निंदक

    निंदा (बुराई) करने वाला / आलोचक

    Critic

    नियरे

    निकट / पास

    Near / Close

    छवाय

    छाकर / बनवाकर

    By building / Thatching

    सुभाय

    स्वभाव

    Nature / Character

    सार

    मुख्य भाग / तत्व

    Essence / Substance

    थोथा

    व्यर्थ / खोखला / भूसी

    Hollow / Useless / Chaff

    गहि रहै

    ग्रहण करना / पकड़ना

    To accept / Hold

    3. केंद्रीय भाव (Central Theme)

    नैतिक मूल्य और व्यवहार (Moral Values and Behavior)

    • कबीर के दोहे हमें जीवन जीने की कला सिखाते हैं। इनका मुख्य विषय 'व्यावहारिक ज्ञान' है। कबीर पुस्तकीय ज्ञान के बजाय अनुभवों को महत्व देते हैं। वे सत्य, विनम्रता, गुरु-भक्ति, आत्म-सुधार और अच्छी संगति पर जोर देते हैं। वे दिखावे और अहंकार का खंडन करते हैं।

      • English: Kabir's dohas teach us the art of living. Their main theme is 'practical wisdom'. Kabir values experience over bookish knowledge. He emphasizes truth, humility, devotion to Guru, self-improvement, and good company. He refutes show-off and ego.


    4. योग्यता-आधारित प्रश्न (Competency-Based Questions)

    A. अभिकथन और तर्क (Assertion & Reasoning)

    प्रश्न 1: अभिकथन (A): कबीर ने निंदक को अपने पास रखने की सलाह दी है।

    तर्क (R): निंदक हमारी झूठी तारीफ करके हमें खुश रखता है।

    उत्तर: (ग) A सही है, R गलत है। (निंदक तारीफ नहीं करता, बल्कि हमारी कमियाँ बताता है जिससे हम अपना स्वभाव सुधार सकते हैं)।


    प्रश्न 2: अभिकथन (A): गुरु का स्थान गोविंद (भगवान) से ऊँचा माना गया है।

    तर्क (R): गुरु ही वह माध्यम है जो अज्ञान को दूर करके शिष्य को ईश्वर तक पहुँचने का रास्ता दिखाता है। उत्तर: (क) A और R दोनों सही हैं, तथा R, A की सही व्याख्या करता है।


    B. स्थिति-आधारित विश्लेषण (Situation Analysis)

    स्थिति (Situation): आपका एक मित्र बहुत अमीर है लेकिन वह किसी की मदद नहीं करता और सबसे रूखा व्यवहार करता है।

    प्रश्न (Question): कबीर के किस दोहे के माध्यम से आप उसे समझाएंगे?

    उत्तर (Answer): मैं उसे 'खजूर के पेड़' वाले दोहे से समझाऊँगा- "बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर। पंथी को छाया नहीं, फल लागै अति दूर।।" उसे यह समझना चाहिए कि धन-दौलत से बड़ा होना काफी नहीं है, यदि वह दूसरों के काम नहीं आ सकता तो उसका बड़प्पन व्यर्थ है।


    C. आशय स्पष्टीकरण (Intent/Inference)

    प्रश्न 1: "बिन पानी साबुन बिना, निर्मल करै सुभाय।"

    उत्तर: इस पंक्ति का आशय है कि आमतौर पर सफाई के लिए पानी और साबुन की ज़रूरत होती है। लेकिन 'निंदक' (आलोचक) एक ऐसा अनोखा 'सफाईकर्मी' है जो बिना किसी बाहरी वस्तु (साबुन-पानी) के केवल हमारी आलोचना करके हमारे मन और स्वभाव के मैल (दोषों) को साफ कर देता है।


    प्रश्न 2: "सार सार को गहि रहै, थोथा देइ उड़ाय।"

    उत्तर: कबीर का आशय है कि हमें विवेकशील (Wisdom) होना चाहिए। जैसे सूप अनाज (काम की चीज़) रख लेता है और भूसा (बेकार चीज़) उड़ा देता है, वैसे ही हमें संसार से अच्छी बातें ग्रहण करनी चाहिए और व्यर्थ की बातों या बुराइयों को छोड़ देना चाहिए।


    5. प्रश्न-उत्तर (Subjective Q&A)

    A. लघु उत्तरीय (Short Answer - 30-40 Words)

    प्रश्न 1: "साँच बराबर तप नहीं" से कबीर का क्या तात्पर्य है?

    उत्तर: कबीर का तात्पर्य है कि सत्य का पालन करना सबसे कठिन और श्रेष्ठ साधना (तपस्या) है। जो व्यक्ति सत्य बोलता है, उसे किसी अन्य दिखावटी पूजा-पाठ की आवश्यकता नहीं होती क्योंकि ईश्वर स्वयं उसके हृदय में निवास करते हैं।


    प्रश्न 2: कबीर ने 'बानी' (वाणी) के बारे में क्या शिक्षा दी है?

    उत्तर: कबीर ने शिक्षा दी है कि हमें अहंकार त्यागकर मीठी वाणी बोलनी चाहिए। मीठी वाणी एक औषधि की तरह है जो बोलने वाले के मन को शांत रखती है और सुनने वाले को भी सुख व शीतलता प्रदान करती है।

    प्रश्न 3: "अति का भला न बोलना" दोहे द्वारा कबीर क्या संदेश देना चाहते हैं?

    उत्तर: कबीर जीवन में 'संतुलन' (Balance) का संदेश देना चाहते हैं। वे कहते हैं कि किसी भी चीज़ की अति बुरी होती है। जैसे ज़रूरत से ज़्यादा बारिश या धूप फसल को खराब कर देती है, वैसे ही ज़रूरत से ज़्यादा बोलना या बिल्कुल चुप रहना भी हानिकारक होता है।


    प्रश्न 4: कबीर के अनुसार 'सूप' और 'साधु' में क्या समानता है?

    उत्तर: कबीर के अनुसार, सूप और साधु दोनों का स्वभाव 'सार-ग्राही' (Essence-seeker) होता है। सूप अनाज रखकर भूसा उड़ा देता है, उसी प्रकार साधु या सज्जन व्यक्ति गुणों को अपनाता है और दोषों या व्यर्थ की बातों को त्याग देता है।


    B. दीर्घ उत्तरीय/मूल्यपरक (Long/Value-Based - 100 Words)

    प्रश्न 1: "जो जैसी संगति करै, सो तैसा फल पाय।" इस कथन को कबीर के दोहे और अपने जीवन के उदाहरण से स्पष्ट कीजिए।

    उत्तर: कबीर कहते हैं कि हमारा मन एक पक्षी की तरह है। यह जहाँ बैठता है (जैसी संगति करता है), वैसा ही फल प्राप्त करता है। यदि हम अच्छे, परिश्रमी और सत्यवादी लोगों के साथ रहेंगे, तो हमारे विचार और कर्म भी अच्छे होंगे। यदि हम बुरों का साथ करेंगे, तो हम भी राह भटक जाएंगे। उदाहरण के लिए, एक छात्र यदि पढ़ने वाले बच्चों के साथ रहता है तो वह भी पढ़ाई में रुचि लेने लगता है, लेकिन शरारती बच्चों की संगति उसे भी अनुशासनहीन बना सकती है। अतः संगति का हमारे व्यक्तित्व निर्माण में सबसे बड़ा हाथ होता है।


    प्रश्न 2: निंदक हमारे लिए किस प्रकार हितकारी हो सकता है? क्या हमें आलोचना से डरना चाहिए? उत्तर: कबीर के अनुसार, निंदक हमारा सबसे बड़ा हितैषी (Well-wisher) होता है। वह हमारे दोषों को हमारे सामने लाता है, जिन्हें हम अक्सर देख नहीं पाते या अनदेखा कर देते हैं। उसकी आलोचना हमें आत्म-सुधार (Self-improvement) का अवसर देती है, वह भी बिना किसी खर्च के। इसलिए हमें आलोचना से डरना या चिढ़ना नहीं चाहिए, बल्कि आलोचक को अपने पास (आँगन में) रखना चाहिए और उसकी बातों को सकारात्मक रूप से लेकर अपनी कमियों को दूर करना चाहिए। यह हमारे व्यक्तित्व को निखारने का सबसे सरल उपाय है।


    6. व्याकरण (Integrated Grammar)

    (Based on the text of the chapter)

    प्रश्न 1: विलोम (विपरीतार्थक) शब्द लिखिए:

    • साँच: झूठ

    • पाप: पुण्य

    • शीतल: उष्ण / गरम

    • निंदक: प्रशंसक

    • भला: बुरा

    • प्रेम: घृणा


    प्रश्न 2: तद्भव शब्दों के तत्सम रूप (Standard Hindi) लिखिए:

    • हिरदे: हृदय

    • पाँय: पाँव / चरण

    • बानी: वाणी

    • सीतल: शीतल

    • सुभाय: स्वभाव

    • गहि: ग्रहण करना


    प्रश्न 3: तुकांत शब्द (Rhyming Words) छाँटिए:

    • पाप - आप

    • खजूर - दूर

    • पाँय - बताय

    • चूप - धूप

    • खोय - होय

    • छवाय - सुभाय


    7. सामान्य त्रुटियाँ (Common Student Errors)

    1. 'खजूर' का उदाहरण:

      • त्रुटि: छात्र सोचते हैं कि कबीर ने खजूर के पेड़ की बुराई की है।

      • सुधार: कबीर ने पेड़ की बुराई नहीं की, बल्कि उसका उदाहरण देकर 'परोपकार-हीन बड़प्पन' (Useless greatness) पर व्यंग्य किया है।


    2. गुरु और गोविंद:

      • त्रुटि: छात्र कंफ्यूज हो जाते हैं कि कबीर ने किसे बड़ा बताया है।

      • सुधार: कबीर ने गुरु को बड़ा बताया है क्योंकि गुरु ही ईश्वर तक पहुँचने का माध्यम है।


    3. 'आपा' का अर्थ:

      • त्रुटि: छात्र 'आपा' का अर्थ 'स्वयं' (Self) समझते हैं।

      • सुधार: यहाँ 'आपा' का अर्थ अहंकार (Ego) है ("मन का आपा खोय" = मन का अहंकार त्यागकर)।

    End


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