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    6. रैदास के पद - (Raidas Ke Pad) - Class 9 - Sparsh Bhag 1

    • Dec 18, 2025
    • 8 min read

    Updated: Dec 22, 2025

    1. पाठ का सार (Quick Revision Summary)


    पहला पद: "अब कैसे छूटै राम नाम रट लागी"

    • भक्त और भगवान का अटूट संबंध: इस पद में रैदास जी कहते हैं कि उन्हें राम (ईश्वर) के नाम की रट लग गई है जो अब छूट नहीं सकती। उन्होंने अपनी और ईश्वर की तुलना विभिन्न प्राकृतिक उपादानों से की है ताकि यह दिखाया जा सके कि वे ईश्वर से अलग नहीं हैं।

      • English: Inseparable Bond: In this verse, Raidas says that he has got into the habit of chanting Ram's name, which cannot be broken now. He compares himself and God to various natural elements to show that he is inseparable from God.

    • विभिन्न उपमाएँ (Comparisons):

      1. चंदन और पानी: प्रभु चंदन हैं और भक्त पानी। जैसे पानी में चंदन मिलने से उसकी सुगंध पानी के कण-कण में समा जाती है, वैसे ही भक्त के अंग-अंग में ईश्वर की भक्ति समा गई है।

      2. घन और मोरा: प्रभु काले बादलों (घन) के समान हैं और भक्त जंगल में नाचने वाले मोर के समान है जो बादलों को देख खुश होता है।

      3. चंद और चकोरा: प्रभु चंद्रमा हैं और भक्त चकोर पक्षी है जो एकटक चाँद को निहारता रहता है।

      4. दीपक और बाती: प्रभु दीपक हैं और भक्त उसमें जलने वाली बत्ती (बाती) है जो दिन-रात जलकर प्रकाश फैलाती है।

      5. मोती और धागा: प्रभु मोती हैं और भक्त धागा है। जैसे धागे में मोती पिरोए जाते हैं, वैसे ही भक्त ईश्वर से जुड़ा है (या सोने में सुहागा मिलने जैसा पवित्र मिलन)।

      6. स्वामी और दासा: अंत में कवि कहते हैं कि प्रभु स्वामी हैं और मैं उनका दास हूँ।

      7. English: Metaphors: (1) Sandalwood & Water, (2) Cloud & Peacock, (3) Moon & Chakor bird, (4) Lamp & Wick, (5) Pearl & Thread (or Gold & Borax), (6) Master & Servant.


    दूसरा पद: "ऐसी लाल तुझ बिनु कउनु करै"

    • ईश्वर की उदारता (God's Generosity): इस पद में रैदास ईश्वर को 'लाल' (स्वामी) और 'गरीब निवाजु' (दीन-दुखियों पर दया करने वाला) कहते हैं। वे कहते हैं कि ईश्वर के बिना अछूतों और गरीबों का उद्धार कोई नहीं कर सकता।

      • English: God's Generosity: Raidas calls God 'Laal' (Master) and 'Garib Niwaju' (Protector of the poor). He says no one else can uplift the untouchables and the poor except God.


    • समदर्शिता और सामाजिक समानता: ईश्वर ने अछूत माने जाने वाले कवि के माथे पर राजाओं जैसा छत्र रख दिया है। जिन लोगों (निम्न जाति) को छूने से संसार के लोग डरते थे या दोष मानते थे, ईश्वर ने उन पर दया (द्रवित) करके उन्हें ऊँचा उठाया है। ईश्वर नीच को भी ऊँच (महान) बना देते हैं और किसी से नहीं डरते।

      • English: Equality: God has placed a crown on the poet's head. People whom society considered untouchable, God showed mercy on them and elevated them. God makes the low high and fears no one.


    • संतों का उदाहरण: कवि उदाहरण देते हैं कि नामदेव, कबीर, त्रिलोचन, सधना और सैनु जैसे निम्न जाति के संत भी ईश्वर की कृपा से इस संसार सागर को पार कर गए (मुक्त हो गए)।

      • English: Examples of Saints: The poet cites examples of saints like Namdev, Kabir, Trilochan, Sadhna, and Sainu who attained salvation through God's grace despite their low caste origins.


    2. शब्द-संपदा (Vocabulary)

    शब्द (Word)

    अर्थ (Hindi Meaning)

    English Meaning

    बास

    गंध / सुगंध

    Fragrance / Scent

    समानी

    समा गई / बस गई

    Absorbed / Imbued

    घन

    बादल

    Cloud

    चितवत

    देखना / निहारना

    To gaze / Look at

    चकोर

    तीतर जाति का एक पक्षी जो चाँद का प्रेमी माना जाता है

    A bird (Chakor) mythical for loving the moon

    बाती

    बत्ती (दीपक की)

    Wick (of a lamp)

    जोति

    ज्योति / लौ / प्रकाश

    Flame / Light

    बरै

    जलती है

    Burns

    सुहागा

    सोने को शुद्ध करने वाला द्रव्य

    Borax (Flux used for gold)

    दासा

    सेवक / दास

    Servant / Slave

    लाल

    स्वामी / ईश्वर

    Master / Beloved God

    गरीब निवाजु

    गरीबों पर दया करने वाला

    Protector/Benefactor of the poor

    गुसईआ

    स्वामी / मालिक (गोसाईं)

    Master / Lord

    छत्रु धरै

    मस्तक पर छत्र धारण करना (राजा बनाना)

    To hold a royal umbrella (crown) over head

    छोति

    छुआछूत / अस्पृश्यता

    Untouchability

    ढरै

    द्रवित होना / दया करना

    To melt (with pity) / Show mercy

    नीचहु ऊच करै

    नीच को भी ऊँचा पद देना

    Elevate the low


    3. चरित्र चित्रण (Character Sketches)

    रैदास (भक्त) (Raidas - The Devotee)

    • समर्पित और विनम्र (Dedicated & Humble): रैदास ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण भाव रखते हैं। वे स्वयं को पानी, धागा और दास मानते हैं, जो अपने स्वामी (चंदन, मोती, प्रभु) के बिना अस्तित्वहीन है।

      • English: Raidas is completely dedicated to God. He considers himself water, thread, and servant, implying he is incomplete without his Master.

    • सामाजिक चेतना वाले संत (Socially Conscious Saint): वे केवल भक्ति नहीं करते, बल्कि सामाजिक असमानता और छुआछूत के खिलाफ भी आवाज उठाते हैं। वे ईश्वर को समदर्शी मानते हैं जो जाति-पाति नहीं देखता।

      • English: He is not just a devotee but also voices against social inequality and untouchability. He believes God views everyone equally regardless of caste.


    ईश्वर (प्रभु/लाल) (God - As depicted by Raidas)

    • गरीब निवाजु (Saviour of the Poor): रैदास के राम/गोविंद गरीबों और दीन-दुखियों के रक्षक हैं। वे अछूतों को भी राजाओं जैसा सम्मान देते हैं।

      • English: Raidas's God is the protector of the poor. He gives king-like respect even to the untouchables.

    • निडर (Fearless): वे समाज की परवाह किए बिना नीच को ऊँच बनाते हैं ("काहू ते न डरै")।

      • English: He elevates the downtrodden without fearing societal norms.


    4. योग्यता-आधारित प्रश्न (Competency-Based Questions)

    A. अभिकथन और तर्क (Assertion & Reasoning)

    प्रश्न 1:

    अभिकथन (A): रैदास ने अपनी तुलना पानी से और ईश्वर की तुलना चंदन से की है।

    तर्क (R): क्योंकि पानी में चंदन मिलने पर पानी शीतल और सुगंधित हो जाता है, वैसे ही भक्त का जीवन ईश्वर के संपर्क से महक उठता है।

    उत्तर: (क) A और R दोनों सही हैं, तथा R, A की सही व्याख्या करता है।


    प्रश्न 2:

    अभिकथन (A): रैदास ने ईश्वर को 'गरीब निवाजु' कहा है।

    तर्क (R): ईश्वर केवल अमीर लोगों की ही प्रार्थना सुनते हैं और उन्हें और धनवान बनाते हैं।

    उत्तर: (ग) A सही है, R गलत है। ('गरीब निवाजु' का अर्थ है गरीबों पर दया करने वाला, न कि अमीरों का पक्ष लेने वाला)।


    B. स्थिति-आधारित विश्लेषण (Situation Analysis)

    स्थिति (Situation): समाज में किसी व्यक्ति को उसकी जाति या गरीबी के कारण मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया जाता।


    प्रश्न (Question): रैदास के दूसरे पद के आधार पर बताइए कि ईश्वर का दृष्टिकोण ऐसे व्यक्ति के प्रति क्या होगा?

    उत्तर (Answer): रैदास के अनुसार, ईश्वर ऐसे भेदभाव को नहीं मानते। वे 'नीचहु ऊच करै' वाले स्वामी हैं। जिस व्यक्ति से समाज घृणा करता है (जाकी छोति जगत कउ लागै), ईश्वर उसी पर द्रवित होते हैं और उसे सम्मान (छत्र) प्रदान करते हैं। ईश्वर के लिए भक्ति महत्वपूर्ण है, जाति नहीं।


    C. आशय स्पष्टीकरण (Intent/Inference)

    प्रश्न 1: "जैसे सोनहिं मिलत सुहागा।"

    उत्तर: सुहागा एक पदार्थ है जिसे सोने में मिलाने पर सोना और अधिक खरा और चमकदार हो जाता है। इसी प्रकार, भक्त (सुहागा) जब ईश्वर (सोना) के संपर्क में आता है, तो उसका अस्तित्व शुद्ध और मूल्यवान हो जाता है। यह भक्त और भगवान के पवित्र मिलन का प्रतीक है।


    प्रश्न 2: "जाकी छोति जगत कउ लागै ता पर तुहीं ढरै।"

    उत्तर: इसका आशय है कि जिन अछूत लोगों की छाया पड़ने से भी संसार के लोग खुद को अपवित्र मानते हैं और उनसे दूर भागते हैं, उन पर केवल आप (ईश्वर) ही दया करते हैं और उन्हें अपनाते हैं। यह ईश्वर की असीम कृपा और सामाजिक रूढ़ियों के विरोध को दर्शाता है।


    5. प्रश्न-उत्तर (Subjective Q&A)


    A. लघु उत्तरीय (Short Answer - 30-40 Words)

    प्रश्न 1: पहले पद में भगवान और भक्त की जिन-जिन चीज़ों से तुलना की गई है, उनका उल्लेख कीजिए।

    उत्तर: भगवान की तुलना चंदन, घन (बादल), चाँद, दीपक, मोती और स्वामी से की गई है। वहीं भक्त की तुलना पानी, मोर, चकोर, बाती, धागा और दास से की गई है।


    प्रश्न 2: "जाकी जोति बरै दिन राती" का क्या आशय है?

    उत्तर: इसका आशय है कि प्रभु दीपक हैं और भक्त उस दीपक की बाती है। ईश्वर की भक्ति रूपी ज्योति भक्त के हृदय में दिन-रात जलती रहती है, जिससे उसका अंतर्मन प्रकाशित रहता है और अज्ञान का अंधकार मिट जाता है।


    प्रश्न 3: रैदास ने अपने स्वामी को किन-किन नामों से पुकारा है?

    उत्तर: रैदास ने अपने स्वामी को 'राम', 'प्रभु', 'लाल', 'गरीब निवाजु', 'गुसईआ', 'गोबिंदु' और 'हरिजीउ' जैसे नामों से पुकारा है।


    प्रश्न 4: दूसरे पद में किन कवियों/संतों का उल्लेख किया गया है और क्यों?

    उत्तर: दूसरे पद में नामदेव, कबीर, त्रिलोचन, सधना और सैनु का उल्लेख किया गया है। ये सभी निम्न जातियों से थे, लेकिन ईश्वर की भक्ति और कृपा से ये संसार सागर से तर गए (मुक्त हो गए) और महान संत बने।


    B. दीर्घ उत्तरीय/मूल्यपरक (Long/Value-Based - 100 Words)

    प्रश्न 1: रैदास के पदों में व्यक्त 'भक्ति-भावना' का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।

    उत्तर: रैदास की भक्ति 'दास्य भाव' की भक्ति है। वे ईश्वर को स्वामी और खुद को दास मानते हैं। उनकी भक्ति में समर्पण और तल्लीनता है। वे ईश्वर से अलग अपना कोई अस्तित्व नहीं मानते (जैसे पानी चंदन के बिना गंधहीन है)। उनकी भक्ति में दिखावा या आडंबर नहीं है, बल्कि एक सहज अपनापन है। वे मानते हैं कि ईश्वर को प्राप्त करने के लिए मंदिर जाने की जरूरत नहीं, वे घट-घट में वैसे ही समाए हैं जैसे बास (सुगंध) फूलों में समाई होती है।


    प्रश्न 2: "रैदास के पद सामाजिक समरसता (Social Harmony) का संदेश देते हैं।" सिद्ध कीजिए।

    उत्तर: रैदास के पद तत्कालीन समाज में व्याप्त छुआछूत और ऊँच-नीच के भेदभाव पर करारा प्रहार करते हैं। वे ईश्वर को 'गरीब निवाजु' कहकर यह संदेश देते हैं कि ईश्वर की नज़र में कोई छोटा या बड़ा नहीं है। उन्होंने अछूत संतों (कबीर, सैनु आदि) का उदाहरण देकर बताया कि भक्ति के बल पर कोई भी सर्वोच्च पद पा सकता है। वे कहते हैं "नीचहु ऊच करै मेरा गोबिंदु", जिससे समाज के वंचित वर्ग को आत्मसम्मान और बराबरी का दर्जा मिलने की प्रेरणा मिलती है।


    6. व्याकरण (Integrated Grammar)

    (Based on Class 9 Hindi Course B - Sparsh Pattern)


    प्रश्न 1: प्रचलित हिंदी रूप (खड़ी बोली) लिखिए:

    • मोरा: मोर (Peacock)

    • बाती: बत्ती (Wick)

    • राती: रात (Night)

    • छत्रु: छत्र / मुकुट (Crown/Umbrella)

    • धरै: रखता है / धारण करता है (Holds/Wears)

    • छोति: छुआछूत (Untouchability)


    प्रश्न 2: पर्यायवाची शब्द लिखिए:

    • चंदन: मलयज, गंधराज

    • घन: बादल, मेघ, जलद

    • चाँद: चंद्रमा, शशि, मयंक

    • जगत: संसार, विश्व, दुनिया


    प्रश्न 3: तुकांत शब्द (Rhyming Words) छाँटिए:

    • पानी - समानी

    • मोरा - चकोरा

    • बाती - राती

    • धागा - सुहागा

    • दासा - रैदासा


    7. सामान्य त्रुटियाँ (Common Student Errors)

    1. 'लाल' शब्द का अर्थ:

      • त्रुटि: छात्र इसे 'रंग' या 'बेटा' समझ लेते हैं।

      • सुधार: यहाँ 'लाल' का अर्थ स्वामी या ईश्वर है।

    2. 'गरीब निवाजु' का अर्थ:

      • त्रुटि: छात्र इसे 'गरीब व्यक्ति' समझते हैं।

      • सुधार: इसका अर्थ है गरीबों पर दया करने वाला (ईश्वर)।

    3. तुलना के जोड़े:

      • त्रुटि: छात्र जोड़ों को गलत मिला देते हैं (जैसे दीपक के साथ धागा)।

      • सुधार: सही जोड़े याद रखें: चंदन-पानी, घन-मोरा, चंद-चकोरा, दीपक-बाती, मोती-धागा, स्वामी-दास।

    End


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