8 - पद (Pad) - Class 12 - Antara 2
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पद (Pad)
Class 12 - Hindi Elective (Antara Bhag 2) |
Poet: विद्यापति (Vidyapati)
1. कवि परिचय (Literary Profile)
साहित्यिक विशेषताएँ (Literary Traits): विद्यापति आदिकाल और भक्तिकाल के संधिकवि माने जाते हैं। वे 'मैथिल-कोकिल' (Maithil-Kokil) के नाम से प्रसिद्ध हैं। उनकी पदावली में भक्ति और श्रृंगार का अद्भुत समन्वय है। राधा-कृष्ण के प्रेम के माध्यम से उन्होंने लौकिक प्रेम के विभिन्न रूपों का चित्रण किया है।
प्रमुख रचनाएँ (Key Works):
कीर्तिलता (Kirtilata) और कीर्तिपताका (Kirtipataka): (दरबारी संस्कृति और अपभ्रंश काव्य)।
पदावली (Padavali): (यश का मुख्य आधार, मैथिली भाषा में जनसंस्कृति की अभिव्यक्ति)।
अन्य: पुरुष परीक्षा, भू-परिक्रमा, लिखनावली।
2. पाठ/कविता का सार (Executive Summary)
प्रतिपाद्य (Central Theme): इस पाठ में विद्यापति के तीन पद संकलित हैं जो 'वियोग श्रृंगार' (Separation Love) और 'प्रेम की गहराई' (Depth of Love) पर केंद्रित हैं। नायिका (राधा) अपने प्रियतम (कृष्ण) के वियोग में व्याकुल है। पहले पद में वह सावन मास में अपनी विरह वेदना का वर्णन करती है, दूसरे पद में प्रेम की अपृप्तता (Insatiability) और नवीनता का बखान करती है, और तीसरे पद में उसकी शारीरिक दुर्बलता का चित्रण है।
English Explanation: This chapter contains three 'Pads' (verses) by Vidyapati focusing on the pain of separation and the nature of true love.
Pad 1: The heroine expresses her intense grief in the rainy month of Sawan, sending a message to her beloved in Madhupur (Mathura).
Pad 2: She explains to her friend that true love is ever-new; no matter how much she sees or hears her beloved, her heart is never fully satisfied.
Pad 3: Describes the heroine's physical frailty due to separation; she faints looking at the blooming nature and is waiting for Krishna.
Key Points:
पद 1: सावन का महीना, अकेलापन और प्रियतम (कृष्ण) का गोकुल छोड़कर मधुपुर बस जाना। कार्तिक मास में वापसी की उम्मीद।
पद 2: प्रेम को परिभाषित करना असंभव है; वह 'तिल-तिल' (हर पल) नया होता है। जन्मों तक देखने पर भी तृप्ति नहीं मिलती।
पद 3: वसंत ऋतु (कुसुमित कानन) विरहिणी को कष्ट दे रही है। वह इतनी कमजोर हो गई है कि धरती पर बैठने के बाद उठ नहीं पाती।
2.1 पद्यांश अनुवाद (Line-by-Line Translation)
(1) पद 1
पंक्ति (Original Line) | हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning) | English Translation |
के पतिआ लए जाएत रे मोरा पिअतम पास। | हाय! मेरा पत्र (पतिआ) लेकर मेरे प्रियतम के पास कौन जाएगा? | Who will carry my letter (message) to my beloved? |
हिए नहि सहए असह दुख रे भेल साओन मास।। | सावन का महीना (वर्षा ऋतु) आ गया है, अब मेरा हृदय इस असहनीय (असह) दुख को नहीं सह पा रहा है। | The month of Sawan has arrived; my heart can no longer bear this unbearable sorrow. |
एकसरि भवन पिआ बिनु रे मोहि रहलो न जाए। | प्रियतम के बिना इस विशाल भवन (घर) में मुझसे अकेले (एकसरि) रहा नहीं जाता। | I cannot stay alone in this house without my beloved. |
सखि अनकर दुख दारुन रे जग के पतिआए।। | हे सखी! दूसरों (अनकर) के दारुण (कठोर) दुख पर इस संसार में कौन विश्वास (पतिआए) करता है? (मेरा दुख कोई नहीं समझेगा)। | O Friend! Who in this world believes/understands the severe pain of others? |
मोर मन हरि हर लए गेल रे अपनो मन गेल। | मेरे मन को हरि (कृष्ण) हर कर (चुरा कर) ले गए हैं, और उनके साथ मेरा मन भी चला गया है। | Hari (Krishna) has stolen my heart and taken it away; my mind has gone with him. |
गोकुल तेजि मधुपुर बस रे कन अपजस लेल।। | उन्होंने गोकुल को त्याग (तेजि) दिया और मधुपुर (मथुरा) में जा बसे; उन्होंने यह कैसा अपयश (अपजस) ले लिया है (प्रेम तोड़ने की बदनामी)। | He left Gokul to settle in Madhupur; why has he taken this infamy (of abandoning love)? |
विद्यापति कवि गाओल रे धनि धरु मन आस। | कवि विद्यापति गाते हुए कहते हैं कि हे स्त्री (धनि)! अपने मन में आशा (आस) धारण करो/धीरज रखो। | Poet Vidyapati sings: O lady! Keep hope in your heart. |
आओत तोर मन भावन रे एहि कातिक मास।। | तुम्हारे मन को भाने वाला (प्रियतम) इसी कार्तिक महीने में वापस आएगा। | Your beloved will return in this very month of Kartik. |
(2) पद 2
पंक्ति (Original Line) | हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning) | English Translation |
सखि हे, कि पुछसि अनुभव मोए। | हे सखी! तुम मुझसे मेरे प्रेम के अनुभव के बारे में क्या पूछती हो? | O Friend! What do you ask about my experience of love? |
सेह पिरिति अनुराग बखानिअ तिल तिल नूतन होए।। | उस प्रीति और अनुराग का क्या बखान करूँ (वर्णन नहीं हो सकता), वह तो हर पल (तिल-तिल) नया होता रहता है। | How can I describe that love and affection? It becomes new every moment. |
जनम अबधि हम रूप निहारल नयन न तिरपित भेल।। | मैंने जन्म भर (जीवन पर्यंत) उनका रूप निहारा है, फिर भी मेरी आँखें तृप्त (संतुष्ट) नहीं हुईं। | I have gazed at his beauty for a lifetime, yet my eyes are not satisfied. |
सेहो मधुर बोल स्रवनहि सूनल स्रुति पथ परस न गेल।। | मैंने उनके वही मधुर बोल अपने कानों से सुने हैं, फिर भी ऐसा लगता है कि वे कानों (श्रुति पथ) को स्पर्श करके गए ही नहीं (सुनने की प्यास बुझी नहीं)। | I have heard those sweet words with my ears, yet it feels as if they haven't truly touched my auditory path (craving remains). |
कत मधु-जामिनि रभस गमाओलि न बूझल कइसन केलि।। | कितनी ही वसंत की मधुर रातें (मधु-जामिनि) हमने प्रेम-क्रीड़ा (रभस) में बिता दीं, पर मैं अब तक नहीं समझ पाई कि वह प्रेम-केलि (क्रीड़ा) कैसी थी। | We spent so many sweet spring nights in passion, yet I couldn't understand what that play of love was like. |
लाख लाख जुग हिअ हिअ राखल तइओ हिअ जरनि न गेल।। | लाखों-लाखों युगों तक मैंने उसे (प्रिय को) अपने हृदय (हिये) में रखा, फिर भी मेरे हृदय की जलन (विरह/प्यास) शांत नहीं हुई। | I kept him in my heart for millions of ages, yet the burning sensation (longing) of my heart did not go away. |
कत बिदगध जन रस अनुमोदए अनुभव काहु न पेख।। | कितने ही रसिक और विद्वान (बिदगध) जनों ने प्रेम-रस का वर्णन/अनुमोदन किया है, पर मुझे लगता है कि उसका सही अनुभव किसी ने नहीं देखा/पाया। | Many wise men have analyzed love, but I feel no one has truly experienced/understood it. |
विद्यापति कह प्रान जुड़ाइते लाखे न मीलल एक।। | विद्यापति कहते हैं कि (सच्चे प्रेम में) प्राणों को शीतलता (तृप्ति) देने वाला लाखों में कोई एक भी नहीं मिलता। | Vidyapati says: To truly soothe the soul, not even one in a million is found. |
(3) पद 3
पंक्ति (Original Line) | हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning) | English Translation |
कुसुमित कानन हेरि कमलमुखि, मूदि रहए दु नयान। | फूलों से भरे वन (कुसुमित कानन) को देखकर वह कमलमुखी (राधा) अपनी दोनों आँखें बंद कर लेती है (क्योंकि सौंदर्य उसे विरह की याद दिलाता है)। | Seeing the blooming forest, the lotus-faced lady closes both her eyes. |
कोकिल-कलरव, मधुकर-धुनि सुनि, कर देइ झाँपइ कान।। | कोयल की कूक और भंवरों की गुंजन सुनकर वह अपने कानों को हाथों से बंद कर लेती है (ये आवाजें उसे कष्ट देती हैं)। | Hearing the cuckoo's call and the bee's hum, she covers her ears with her hands. |
माधब, सुन-सुन बचन हमारा। | (सखी कहती है) हे माधव (कृष्ण)! हमारे वचन सुनो। | O Madhav! Listen to my words. |
तुअ गुन सुंदरि अति भेल दूबरि- गुनि-गुनि प्रेम तोहारा।। | तुम्हारे गुणों और प्रेम को याद कर-करके (गुनि-गुनि) वह सुंदरी अत्यंत दुबली (दूबरि) हो गई है। | Remembering your qualities and love again and again, that beauty has become extremely thin. |
धरनी धरि धनि कत बेरि बइसइ, पुनि तहि उठइ न पारा। | वह स्त्री (धनि) धरती को पकड़कर कितनी ही बार बैठती है, पर (कमजोरी के कारण) फिर उठ नहीं पाती। | Holding onto the earth, she sits down many times, but then cannot get up again. |
कातर दिठि करि, चौदिस हेरि-हेरि, नयन गरए जल-धारा।। | वह कातर (दुखी) दृष्टि से चारों दिशाओं (चौदिस) में देखती रहती है (तुम्हारी राह) और उसकी आँखों से आंसुओं की धारा बहती रहती है। | With a distressed gaze, she looks in all four directions, and tears flow from her eyes. |
तोहर बिरह दिन छन-छन तनु छिन- चौदसि-चाँद-समान। | तुम्हारे विरह में उसका शरीर हर क्षण (छन-छन) वैसे ही क्षीण (कमजोर) होता जा रहा है जैसे चौदस का चाँद (घटता हुआ चाँद)। | In your separation, her body is wasting away every moment like the moon on the fourteenth day (waning moon). |
भनइ विद्यापति सिबसिंह नर-पति लखिमादेइ-रमान।। | विद्यापति कहते हैं कि राजा शिवसिंह और उनकी रानी लखिमा देवी इस भाव (प्रेम) को जानते/रमते हैं। | Vidyapati says that King Shivsingh and Queen Lakhima Devi understand/delight in this sentiment. |
3. कठिन शब्दार्थ (Glossary)
शब्द (Word) | अर्थ (Hindi Meaning) | English Context |
पतिआ (Patia) | पत्र / चिट्ठी | Letter / Message |
एकसरि (Eksari) | अकेली | Alone |
अनकर (Ankar) | दूसरों का | Others' |
अपजस (Apjas) | अपयश / बदनामी | Infamy / Disgrace |
जुड़ाइते (Judaite) | जुड़ाने के लिए / शीतलता देने के लिए | To soothe / To cool |
कुसुमित कानन (Kusumit Kanan) | फूलों से भरा वन | Blooming forest |
मधुकर (Madhukar) | भौंरा | Bumblebee |
दूबरि (Dubari) | दुबली / कमजोर | Thin / Weak |
कातर दिठि (Katar Dithi) | दुखी नज़र / व्याकुल दृष्टि | Distressed gaze |
छिन (Chhin) | क्षीण / कमजोर | Waning / Frail |
बिदगध (Bidagadh) | विदग्ध / चतुर / अनुभवी | Wise / Experienced person |
4. साहित्यिक विश्लेषण (Literary Analysis)
भाव पक्ष (Thematic Aspect):
वियोग और प्रकृति: पहले और तीसरे पद में प्रकृति (सावन, फूल, कोयल) नायिका के दुख को बढ़ाने वाला कारक (उद्दीपन) है। जो संयोग में सुखद था, वही वियोग में दुखद बन गया है।
प्रेम की परिभाषा: दूसरे पद में प्रेम को 'अनिर्वचनीय' (ineffable) और 'नित्य नूतन' (ever-new) बताया गया है। तृप्ति न होना ही सच्चे प्रेम की निशानी है।
कला पक्ष (Artistic Aspect):
भाषा: मैथिली (Maithili)। भाषा में कोमलता और संगीतात्मकता (Lyrical quality) है।
अलंकार:
उपमा: "चौदसि-चाँद-समान" (शरीर चौदस के चाँद जैसा क्षीण)।
पुनरुक्ति प्रकाश: "तिल-तिल", "लाख-लाख", "हेरि-हेरि", "गुनि-गुनि"।
अनुप्रास: "कुसुमित कानन", "कोकिल-कलरव", "कातर दिठि करि"।
व्यतिरेक/विरोधाभास: "जनम अबधि हम रूप निहारल नयन न तिरपित भेल" (देखने पर भी तृप्ति न होना)।
5. गद्यांश/काव्यांश आधारित प्रश्न (Extract-Based Competency)
संदर्भ 1 (पद 1):
"एकसरि भवन पिआ बिनु रे मोहि रहलो न जाए। सखि अनकर दुख दारुन रे जग के पतिआए।।"
नायिका को भवन में रहना कठिन क्यों लग रहा है?
उत्तर: सावन का महीना है और प्रियतम (पिआ) परदेस में हैं। उनके बिना नायिका को घर (भवन) सूना और काटने को दौड़ने जैसा लगता है, इसलिए वह अकेले नहीं रह पा रही।
'अनकर दुख' से नायिका का क्या आशय है?
उत्तर: 'अनकर दुख' का अर्थ है 'पराया दुख' या 'दूसरों का दुख'। नायिका कहना चाहती है कि संसार में लोग दूसरों के गहरे (दारुण) दुख को नहीं समझते या उस पर विश्वास नहीं करते।
इस पद में किस महीने का उल्लेख है और उसका क्या प्रभाव है?
उत्तर: यहाँ 'सावन' (साओन) महीने का उल्लेख है। वर्षा ऋतु विरह की अग्नि को और भड़का रही है, जिससे नायिका की पीड़ा असहनीय हो गई है।
संदर्भ 2 (पद 2):
"लाख लाख जुग हिअ हिअ राखल तइओ हिअ जरनि न गेल। कत बिदगध जन रस अनुमोदए अनुभव काहु न पेख।।"
नायिका ने प्रियतम को कहाँ रखा, फिर भी क्या नहीं गया?
उत्तर: नायिका ने प्रियतम को लाखों युगों तक अपने हृदय (हिये) में रखा, फिर भी उसके हृदय की जलन (मिलने की तड़प/प्यास) शांत नहीं हुई।
'बिदगध जन' के बारे में नायिका क्या कहती है?
उत्तर: नायिका कहती है कि बहुत से चतुर और रसिक लोगों (बिदगध जन) ने प्रेम का वर्णन किया है, लेकिन सच्चे प्रेम का जो अनुभव मुझे हुआ है, वैसा अनुभव किसी और ने नहीं पाया/देखा।
इन पंक्तियों का केंद्रीय भाव क्या है?
उत्तर: केंद्रीय भाव यह है कि सच्चा प्रेम कभी पुराना नहीं होता और प्रेमी को कभी पूर्ण तृप्ति (Satisfaction) नहीं मिलती; मिलन की चाह हमेशा बनी रहती है।
6. पाठ्यपुस्तक प्रश्नोत्तर (Textbook Q&A)
A. बोधात्मक प्रश्न (Short Answer)
प्रश्न 1: प्रियतमा के दुख के क्या कारण हैं?
उत्तर: प्रियतमा के दुख के मुख्य कारण हैं: (1) प्रियतम (कृष्ण) का गोकुल छोड़कर मधुपुर (मथुरा) चले जाना। (2) सावन के महीने में अकेलापन। (3) उम्मीद होने के बावजूद प्रिय का न लौटना।
प्रश्न 2: कवि 'नयन न तिरपित भेल' के माध्यम से विरहिणी नायिका की किस मनोदशा को व्यक्त करना चाहता है?
उत्तर: कवि यह व्यक्त करना चाहता है कि नायिका का प्रेम इतना गहरा है कि जन्म-जन्मांतर तक प्रियतम का रूप देखने के बाद भी उसकी आँखों की प्यास नहीं बुझती। उसे हर बार प्रिय का रूप नया और आकर्षक लगता है। यह 'तृप्ति में अतृप्ति' की दशा है।
प्रश्न 3: कोयल और भौरों के कलरव का नायिका पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर: संयोग अवस्था में जो कोयल की कूक और भंवरों की गुंजन मधुर लगती थी, वियोग में वही नायिका को कष्ट देती है। उसे ये आवाजें तीखी लगती हैं, इसलिए वह अपने कान बंद कर लेती है ताकि उन्हें सुन न सके।
B. विश्लेषणात्मक प्रश्न (Long Answer)
प्रश्न 4: 'सेह पिरित अनुराग बखानिअ तिल-तिल नूतन होए' से लेखक का क्या आशय है?
उत्तर: लेखक का आशय है कि प्रेम कोई स्थिर वस्तु नहीं है जिसे शब्दों में बाँधा जा सके। सच्चा प्रेम प्रतिक्षण परिवर्तनशील और नवीन होता है (तिल-तिल नूतन होए)। जैसे-जैसे समय बीतता है, प्रेम की गहराई और आकर्षण बढ़ता जाता है, उसमें बासीपन नहीं आता। यही प्रेम का वास्तविक स्वरूप है।
प्रश्न 5: कातर दृष्टि से चारों तरफ़ प्रियतम को ढूँढ़ने की मनोदशा को कवि ने किन शब्दों में व्यक्त किया है?
उत्तर: कवि ने तीसरे पद में इसका चित्रण किया है। नायिका धरती पर बैठ जाती है और उठ नहीं पाती। वह 'कातर दिठि' (व्याकुल नज़र) से चारों दिशाओं (चौदिस) में देखती है कि शायद प्रियतम आ जाएं। उसकी आँखों से लगातार आंसुओं की धारा (जल-धारा) बहती रहती है। यह उसकी असहायता और प्रतीक्षा की पराकाष्ठा है।
प्रश्न 6: विद्यापति की नायिका की शारीरिक दशा का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।
उत्तर: विरह की अग्नि में जलकर नायिका अत्यंत क्षीण हो गई है। वह 'कमलमुखी' अब मुरझा गई है। उसकी शारीरिक शक्ति इतनी क्षीण हो गई है कि एक बार बैठने पर दोबारा उठने का साहस नहीं जुटा पाती। उसका शरीर 'चौदस के चाँद' (अमावस्या के करीब का चाँद) जैसा पतला और निस्तेज हो गया है।
7. अभिव्यक्ति और माध्यम (Creative Writing Connection)
संबंधित आलेख विषय: "सच्चा प्रेम: तृप्ति या अतृप्ति?" या "साहित्य में सावन का महत्त्व"
मुख्य बिंदु:
प्रेम में कभी 'पूर्णविराम' नहीं होता; वह निरंतर प्रवाह है।
सावन का महीना विरह और मिलन दोनों का प्रतीक है (मेघदूत से लेकर विद्यापति तक)।
विद्यापति के प्रेम वर्णन में 'आध्यात्मिक' और 'लौकिक' का मिश्रण।
8. परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण कथन (Key Quotes)
"जनम अबधि हम रूप निहारल नयन न तिरपित भेल।।" (प्रेम की अतृप्ति पर लिखने के लिए)।
"एकसरि भवन पिआ बिनु रे मोहि रहलो न जाए।" (अकेलेपन की पीड़ा के लिए)।
"तोहर बिरह दिन छन-छन तनु छिन- चौदसि-चाँद-समान।" (शारीरिक दुर्बलता और उपमा अलंकार के लिए)।
9. सामान्य त्रुटियाँ (Common Student Errors)
भाषा: छात्र विद्यापति की भाषा को 'ब्रज' या 'अवधी' लिख देते हैं। सही उत्तर 'मैथिली' है।
संदर्भ: 'मधुपुर' का अर्थ 'शहद का नगर' नहीं, बल्कि 'मथुरा' है।
उपमा: 'चौदसि चाँद' का अर्थ 'पूरा चाँद' (पूर्णिमा) समझ लेते हैं, जबकि यहाँ संदर्भ 'कृष्ण पक्ष की चौदस' (घटता हुआ/डूबता हुआ चाँद) से है जो क्षीणता का प्रतीक है।
10. विगत वर्षों के बोर्ड प्रश्न (PYQs)
प्रश्न 1 (लघु - 2 अंक): विद्यापति की नायिका अपने कानों को क्यों बंद कर लेती है?
उत्तर: कोयल की कूक और भंवरों की गुंजन उसे प्रियतम की याद दिलाती है और वियोग के कष्ट को बढ़ाती है, इसलिए वह कानों को बंद कर लेती है।
प्रश्न 2 (लघु - 2 अंक): 'सावन' मास में नायिका की क्या स्थिति है?
उत्तर: सावन में घर सूना है और विरह असहनीय हो गया है। वह प्रिय के बिना घर में अकेले रहने में असमर्थ महसूस करती है।
प्रश्न 3 (दीर्घ - 5 अंक): विद्यापति के प्रेम वर्णन की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर: विद्यापति का प्रेम वर्णन सूक्ष्म और मनोवैज्ञानिक है। उन्होंने प्रेम को 'नित्य नूतन' बताया है। उनके वर्णन में संयोग और वियोग दोनों पक्षों की गहराई है। उन्होंने शारीरिक चेष्टाओं (जैसे गिरना, उठ न पाना) के माध्यम से आंतरिक पीड़ा को व्यक्त किया है। भाषा की लयात्मकता उनके पदों को विशेष बनाती है।
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