9- कवित्त / सवैया (Kavitt / Savaiya) - Class 12 - Antara 2
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कवित्त / सवैया (Kavitt / Savaiya)
Class 12 - Hindi Elective (Antara Bhag 2) |
Poet: घनानंद (Ghananand)
1. कवि परिचय (Literary Profile)
साहित्यिक विशेषताएँ (Literary Traits): घनानंद रीतिकाल की 'रीतिमुक्त' (Riti-mukt) या स्वच्छंद काव्यधारा के प्रतिनिधि कवि हैं। वे 'प्रेम की पीर' (Poet of Love's Agony) के कवि माने जाते हैं। उनके काव्य में प्रेम का अत्यंत गंभीर, निर्मल और आवेगमय रूप मिलता है। वे अपनी प्रेमिका 'सुजान' के विरह में काव्य रचना करते थे।
प्रमुख रचनाएँ (Key Works):
ग्रंथ: सुजान सागर, विरह लीला, कृपाकंड निबंध, रसकेलि वल्ली।
प्रसिद्धि: वे 'साक्षात रसमूर्ति' और 'ब्रजभाषा प्रवीण' माने जाते हैं।
2. पाठ/कविता का सार (Executive Summary)
प्रतिपाद्य (Central Theme): इस पाठ में घनानंद के दो कवित्त/सवैया संकलित हैं जो 'विरह-वेदना' और 'एकनिष्ठ प्रेम' को दर्शाते हैं।
पहले कवित्त में कवि अपनी प्रेमिका सुजान के दर्शन की तीव्र अभिलाषा व्यक्त करता है। वह बताता है कि उसके प्राण केवल सुजान के आने की आस में अटके हुए हैं।
दूसरे कवित्त में कवि अपनी प्रेमिका की निष्ठुरता और चुप्पी (मौन) को चुनौती देता है। वह कहता है कि कब तक तुम कानों में रुई डालकर मेरी पुकार नहीं सुनोगी? कभी तो मेरी पीड़ा तुम्हें पिघलाएगी।
English Explanation:
Verse 1: The poet expresses his desperate waiting for his beloved Sujan. He says his life breath is stuck in his throat, waiting just for a glimpse of her. He pleads with her not to be cruel and to come show herself before he dies.
Verse 2: The poet challenges Sujan's silence. He asks how long she will ignore him (as if wearing earplugs). He is determined that his cries of agony will eventually force her to listen.
Key Points:
प्रतीक्षा: प्राण कंठ में आ गए हैं, केवल दर्शन की प्यास ने उन्हें रोक रखा है।
उपालंभ (Complaint): कपटी और निष्ठुर आचरण छोड़कर दर्शन देने की विनती।
प्रेमी का हठ: प्रेमी ने मौन तोड़ने की प्रतिज्ञा (प्रण) कर ली है।
पुकार: मौन पुकार का असर जरूर होगा।
2.1 पद्यांश अनुवाद (Line-by-Line Translation)
(1) कवित्त 1
पंक्ति (Original Line) | हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning) | English Translation |
बहुत दिनान को अवधि आसपास परे, | बहुत दिनों से तुम्हारे आने की जो अवधि (समय) थी, वह अब बीतने को है/निकट आ गई है। | The period of waiting for many days has come close (to an end). |
खरे अरबरनि भरे हैं उठि जान को। | (मेरे प्राण) बहुत व्याकुल (अरबरनि भरे) होकर शरीर से निकलने (उठि जान) के लिए तैयार खड़े हैं। | My breaths are restless and ready to leave (the body). |
कहि कहि आवन छबीले मनभावन को, | तुम अपने आने की बात कह-कहकर (वादा करके) भी नहीं आए, हे छबीले मनभावन! | You kept promising to come, O beautiful beloved, but didn't. |
गहि गहि राखति ही दै दै सनमान को। | मैंने तुम्हारे आने के झूठे वादों और सम्मान (सनमान) को पकड़-पकड़ कर (गहि-गहि) ही अपने प्राणों को रोक रखा था। | I kept holding onto my life by respecting your promises (honoring your words). |
झूठी बतियानि की पत्यानि तें उदास ह्वै कै, | तुम्हारी झूठी बातों पर विश्वास (पत्यानि) करके अब मैं उदास हो गया हूँ। | Having trusted your false words, I have now become sorrowful. |
अब ना घिरत घन आनंद निदान को। | अब आनंद के बादल (घन आनंद) घिरकर मुझे सुख/समाधान (निदान) नहीं देते (अर्थात अब धैर्य नहीं रहता)। | Now the clouds of joy (Ghananand) do not gather to provide relief. |
अधर लगे हैं आनि करि कै पयान प्रान, | मेरे प्राण शरीर से प्रस्थान (पयान) करने के लिए होठों (अधर) तक आ गए हैं। | My life breaths have come to my lips, ready to depart. |
चाहत चलन ये संदेसो लै सुजान को। | ये प्राण अब शरीर छोड़ना चाहते हैं, बस सुजान का एक संदेश (या दर्शन) लेकर ही जाना चाहते हैं। | They want to leave, taking a message/glimpse of Sujan. |
(2) कवित्त 2
पंक्ति (Original Line) | हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning) | English Translation |
आनाकानी आरसी निहारिबो करौगे कोलौं, | तुम कब तक (कोलौं) दर्पण (आरसी) में अपना ही मुँह देखते रहोगे और मेरी ओर देखने में आनाकानी करोगे? | How long will you ignore me and keep looking at yourself in the mirror? |
कहा मो चकित दसा त्यों न दीठि डोलिहै? | क्या मेरी इस हैरान/चकित दशा को देखकर भी तुम्हारी दृष्टि (दीठि) मेरी ओर नहीं घूमेगी (डोलिहै)? | Will your gaze not turn towards me even after seeing my stunned condition? |
मौन हू सौं देखिहौं कितेक पन पालिहौ जू, | मैं भी मौन रहकर देखूँगा कि तुम कब तक अपने (मौन रहने के) प्रण (पन) का पालन करती हो। | Even in silence, I will see how long you can keep your vow (of ignoring me). |
कूकभरी मूकता बुलाय आप बोलिहै। | मेरी यह तड़प/कूक से भरी हुई खामोशी (मूकता) तुम्हें स्वयं बोलने पर मजबूर कर देगी। | My silence, filled with cries of pain, will call out and make you speak. |
जान घनआनंद यों मोहिं तुम्हें पैज परी, | हे सुजान (जान)! घनआनंद कहते हैं कि मुझमें और तुममें यह होड़/शर्त (पैज) पड़ गई है... | O Sujan! Ghananand says there is a wager/bet between you and me... |
जानियैगो टेक टरें कौन धौ मलोलिहै।। | ...कि अब जाना जाएगा कि किसकी टेक (जिद) टलती है और कौन हार मानता है (मलोलिहै)। | ...It will be known whose resolve breaks and who yields. |
रुई दिए रहौगे कहाँ लौं बहरायबे की? | तुम बहरे बनने का नाटक करने के लिए कब तक कानों में रुई डाले रहोगी? | How long will you keep cotton in your ears to act deaf? |
कबहूँ तौ मेरियै पुकार कान खोलिहै। | कभी न कभी तो मेरी यह करुण पुकार तुम्हारे कान खोल ही देगी (तुम्हें सुनना ही पड़ेगा)। | Sometime or the other, my cry will definitely open your ears. |
3. कठिन शब्दार्थ (Glossary)
शब्द (Word) | अर्थ (Hindi Meaning) | English Context |
अवधि (Avadhi) | समय सीमा | Period / Time limit |
अरबरनि (Arbarani) | घबराहट / व्याकुलता | Restlessness / Panic |
छबीले (Chhabile) | सुंदर / बांके | Beautiful / Handsome |
पत्यानि (Patyani) | विश्वास / भरोसा | Trust / Belief |
निदान (Nidan) | उपाय / अंत / समाधान | Solution / Remedy |
पयान (Payan) | प्रस्थान / जाना | Departure |
आनाकानी (Aanakani) | टालमटोल / अनसुना करना | Ignoring / Reluctance |
आरसी (Aarsi) | दर्पण / आईना (अंगूठे का गहना) | Mirror (Thumb ring) |
दीठि (Dithi) | दृष्टि / नज़र | Gaze / Sight |
मूकता (Mukta) | मौन / चुप्पी | Silence |
पैज (Paij) | होड़ / शर्त / जिद | Wager / Bet / Persistence |
बहरायबे (Bahraibe) | बहरा बनने की | Acting deaf |
4. साहित्यिक विश्लेषण (Literary Analysis)
भाव पक्ष (Thematic Aspect):
विरह की अतिशयोक्ति: कवि ने विरह का बहुत बढ़ा-चढ़ाकर वर्णन किया है (जैसे प्राणों का होठों तक आना)। यह 'प्रेम की पीर' का परिचायक है।
उपालंभ (Taunt): प्रेमी अपनी प्रेमिका को उलाहना दे रहा है कि वह निष्ठुर हो गई है।
एकनिष्ठता: सुजान की बेवफाई के बावजूद कवि का प्रेम अटूट है।
कला पक्ष (Artistic Aspect):
भाषा: साहित्यिक ब्रजभाषा। भाषा में लाक्षणिकता (लक्षणा शक्ति) और मुहावरों का प्रयोग है (जैसे- कान खोलना, आनाकानी करना)।
अलंकार:
अनुप्रास: "कहि कहि", "दै दै" (पुनरुक्ति प्रकाश भी), "टेक टरें"।
श्लेष/यमक: "घनआनंद" (कवि का नाम और आनंद के बादल)।
विरोधाभास: "कूकभरी मूकता" (पुकार से भरी चुप्पी)।
छंद: कवित्त/सवैया (मुक्तक शैली)।
5. गद्यांश/काव्यांश आधारित प्रश्न (Extract-Based Competency)
संदर्भ 1 (कवित्त 1):
"अधर लगे हैं आनि करि कै पयान प्रान, चाहत चलन ये संदेसो लै सुजान को।"
प्राण अधरों (होठों) तक क्यों आ गए हैं?
उत्तर: विरह की अधिकता के कारण कवि की मृत्यु निकट है। प्राण शरीर छोड़ने के लिए व्याकुल होकर गले से ऊपर होठों तक आ गए हैं।
प्राण क्यों रुके हुए हैं?
उत्तर: प्राण केवल इस आशा में अटके हुए हैं कि मरते समय सुजान के दर्शन हो जाएँ या उनका कोई संदेश मिल जाए।
कवि ने सुजान को क्या उलाहना दिया है?
उत्तर: कवि ने उलाहना दिया है कि सुजान ने आने का झूठा वादा करके उसे धोखे में रखा, जिसके भरोसे वह अब तक जीता रहा।
संदर्भ 2 (कवित्त 2):
"रुई दिए रहौगे कहाँ लौं बहरायबे की? कबहूँ तौ मेरियै पुकार कान खोलिहै।"
'कानों में रुई देना' मुहावरे का यहाँ क्या अर्थ है?
उत्तर: इसका अर्थ है जानबूझकर किसी की बात न सुनना या उपेक्षा करना। सुजान कवि की पुकार सुनकर भी अनसुना कर रही है।
कवि को किस बात का विश्वास है?
उत्तर: कवि को विश्वास है कि उसका मौन और उसकी अंतरात्मा की पुकार इतनी शक्तिशाली है कि एक दिन सुजान को उसकी बात सुननी ही पड़ेगी।
'कूकभरी मूकता' में कौन सा अलंकार है?
उत्तर: यहाँ विरोधाभास अलंकार (Paradox) है। 'मूकता' (चुप्पी) में 'कूक' (पुकार) नहीं हो सकती, लेकिन कवि की चुप्पी ही सबसे बड़ी पुकार है।
6. पाठ्यपुस्तक प्रश्नोत्तर (Textbook Q&A)
A. बोधात्मक प्रश्न (Short Answer)
प्रश्न 1: कवि ने 'चाहत चलन ये संदेसो ले सुजान को' क्यों कहा है?
उत्तर: कवि के प्राण कंठ तक आ गए हैं और निकलने ही वाले हैं। वे चाहते हैं कि जाते-जाते सुजान का कोई संदेश मिल जाए या वे सुजान को अपनी अंतिम स्थिति का संदेश दे सकें। यह विरह की चरम सीमा है जहाँ मरने से पहले मिलन की आस है।
प्रश्न 2: कवि मौन होकर प्रेमिका के कौन से प्रण पालन को देखना चाहता है?
उत्तर: कवि यह देखना चाहता है कि प्रेमिका ने जो 'निष्ठुरता' और 'बात न करने' का प्रण (पन) ले रखा है, वह उसे कब तक निभा पाती है। कवि भी मौन रहकर उसकी जिद की परीक्षा ले रहा है।
प्रश्न 3: कवि ने किस प्रकार की पुकार से 'कान खोलि है' की बात कही है?
उत्तर: कवि ने 'मौन पुकार' (कूकभरी मूकता) की बात कही है। जब प्रेमी खामोश हो जाएगा, तो उसकी पीड़ा की गूँज प्रेमिका के हृदय तक पहुँचेगी और उसे सुनने पर विवश कर देगी।
B. विश्लेषणात्मक प्रश्न (Long Answer)
प्रश्न 4: घनानंद की रचनाओं की भाषिक विशेषताओं को अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर: घनानंद की भाषा विशुद्ध और परिष्कृत ब्रजभाषा है। उनकी भाषा में 'लाक्षणिकता' (Lakshanikta) और 'वक्रोक्ति' (Vakrokti) की प्रधानता है। वे सीधे बात न कहकर घुमा-फिराकर और मुहावरों के जरिए बात कहते हैं (जैसे- कान खोलना, रुई देना)। अलंकारों का प्रयोग सहज और स्वाभाविक है।
प्रश्न 5: 'झूठी बतियानि की पत्यानि तें उदास ह्वै कै' - पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: कवि कहते हैं कि सुजान ने उनसे मिलने के जो भी वादे किए, वे सब झूठे निकले। पहले कवि उन झूठी बातों पर विश्वास (पत्यानि) करके जीता रहा, लेकिन अब बार-बार धोखा खाने के बाद उसका मन उदास और निराश हो गया है। अब उसे झूठे दिलासों से शांति नहीं मिलती।
7. अभिव्यक्ति और माध्यम (Creative Writing Connection)
संबंधित आलेख विषय: "एकतरफा प्रेम की पीड़ा" या "मौन की भाषा"
मुख्य बिंदु:
घनानंद का प्रेम 'सुजान' के प्रति एकनिष्ठ था, जबकि सुजान निष्ठुर थी।
मौन कभी-कभी शब्दों से ज्यादा असरदार होता है (कूकभरी मूकता)।
विरह में आशा और निराशा का द्वंद्व।
8. परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण कथन (Key Quotes)
"कूकभरी मूकता बुलाय आप बोलिहै।" (मौन की शक्ति और विरोधाभास के लिए)।
"अधर लगे हैं आनि करि कै पयान प्रान।" (मरणासन्न स्थिति और विरह की तीव्रता के लिए)।
"रुई दिए रहौगे कहाँ लौं बहरायबे की?" (प्रेमिका की निष्ठुरता और उपालंभ के लिए)।
9. सामान्य त्रुटियाँ (Common Student Errors)
कवि का नाम: छात्र अक्सर 'घनानंद' को 'धनानंद' लिख देते हैं। सही वर्तनी 'घनानंद' है।
प्रेमिका का नाम: सुजान (जो बाद में कृष्ण भक्ति में भी प्रयुक्त हुआ)।
अलंकार: 'कूकभरी मूकता' में विरोधाभास अलंकार को पहचानना अक्सर छात्र भूल जाते हैं।
10. विगत वर्षों के बोर्ड प्रश्न (PYQs)
प्रश्न 1 (लघु - 2 अंक): 'जानियैगो टेक टरें कौन धौ मलोलिहै' का क्या अर्थ है?
उत्तर: इसका अर्थ है कि अब यह पता चलेगा कि हम दोनों में से किसकी जिद (टेक) टूटती है और कौन हार मानकर (मलोलिहै) झुकता है—प्रेमिका की चुप्पी या प्रेमी की पुकार।
प्रश्न 2 (लघु - 2 अंक): घनानंद ने सुजान को 'बहरा' क्यों कहा है?
उत्तर: क्योंकि सुजान कवि की करुण पुकार सुनकर भी अनसुना कर रही है, मानो उसने कानों में रुई डाल रखी हो। यह उसकी संवेदनहीनता को दर्शाता है।
प्रश्न 3 (दीर्घ - 5 अंक): घनानंद के 'प्रेम की पीर' का वर्णन पाठ के आधार पर करें।
उत्तर: घनानंद का काव्य विरह-प्रधान है। उनके प्रेम में शारीरिक मिलन से ज्यादा मानसिक तड़प है। 'कवित्त' में प्राणों का होठों तक आना और 'मौन पुकार' का वर्णन यह सिद्ध करता है कि उनका प्रेम अत्यंत गहरा और दर्द से भरा है। वे अपनी पीड़ा में भी प्रिय का ही ध्यान करते हैं।
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