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    8 - बालगोबिन भगत (Balgobin Bhagat) -Class 10 Kshitij 2

    • Dec 13, 2025
    • 9 min read

    Updated: Dec 16, 2025

    बालगोबिन भगत (Balgobin Bhagat)

    Class 10 - Hindi Course A (Kshitij Bhag 2) | Author: रामवृक्ष बेनीपुरी (Ramvriksh Benipuri)


    1. पाठ का सार (Quick Revision Summary)

    • बालगोबिन भगत का व्यक्तित्व: बालगोबिन भगत 60 वर्ष से ऊपर के मँझोले कद के गोरे-चिट्टे व्यक्ति थे। उनके बाल पक चुके थे और वे बहुत कम कपड़े पहनते थे (केवल एक लंगोटी और सिर पर कनफटी टोपी)। वे माथे पर रामानंदी चंदन और गले में तुलसी की माला पहनते थे। वे गृहस्थ होते हुए भी गुणों से साधु थे।

      • English: Personality of Balgobin Bhagat: Balgobin Bhagat was a fair-complexioned man of medium height, over 60 years old. His hair had turned grey, and he wore very few clothes (only a loincloth and a torn cap on his head). He wore Ramanandi sandalwood paste on his forehead and a Tulsi garland around his neck. Despite being a householder, he was a saint by his virtues.

    • कबीर पंथी विचारधारा: वे कबीर को अपना 'साहब' (ईश्वर/गुरु) मानते थे। वे उन्हीं के गीत गाते और उन्हीं के आदेशों पर चलते थे। वे कभी झूठ नहीं बोलते थे और सबसे खरा व्यवहार करते थे। वे किसी की चीज़ बिना पूछे नहीं छूते थे।

      • English: Kabir Panthi Ideology: He considered Kabir as his 'Sahab' (God/Master). He sang his songs and followed his orders. He never lied and behaved straightforwardly with everyone. He never touched anyone's belongings without permission.

    • खेत में गायन: आषाढ़ के महीने में जब पूरा गाँव खेतों में धान की रोपनी कर रहा होता, तब बालगोबिन भगत का मधुर संगीत गूँज उठता था। उनके गीतों से बच्चे, औरतें और हलवाहे सभी झूम उठते थे। उनका संगीत जादू जैसा असर करता था।

      • English: Singing in the Fields: In the month of Ashadh, when the whole village was transplanting paddy in the fields, Balgobin Bhagat's melodious music would resonate. Children, women, and ploughmen would all start swaying to his songs. His music had a magical effect.

    • नित्य नियम और प्रभाती: भादो की अँधेरी रात हो या कार्तिक की सुबह, उनका संगीत हमेशा जारी रहता था। वे सुबह जल्दी उठकर नदी स्नान करते और 'प्रभाती' (सुबह के गीत) गाते। गर्मियों में वे अपने घर के आँगन में 'संझा' (शाम के गीत) गाते थे।

      • English: Daily Routine and Prabhati: Whether it was the dark night of Bhado or the morning of Kartik, his music always continued. He would wake up early, bathe in the river, and sing 'Prabhati' (morning songs). In summer, he used to sing 'Sanjha' (evening songs) in his courtyard.

    • पुत्र की मृत्यु और उत्सव: जब उनका इकलौता (मानसिक रूप से कमजोर) बेटा मरा, तो उन्होंने रोने के बजाय उत्सव मनाने को कहा। उन्होंने कहा कि "आत्मा परमात्मा के पास चली गई, विरहिनी अपने प्रेमी से जा मिली"। यह उनका चरम विश्वास था जो मृत्यु पर भी विजयी हुआ।

      • English: Son's Death and Celebration: When his only (mentally weak) son died, instead of crying, he asked to celebrate. He said that "the soul has gone to the Supreme Soul, the separated lover has met her beloved". This was his ultimate faith that triumphed even over death.

    • समाज सुधारक रूप: उन्होंने समाज की रूढ़ियों को तोड़ा। उन्होंने बेटे को मुखाग्नि (Funeral fire) अपनी पतोहू (बहू) से दिलवाई। श्राद्ध की अवधि पूरी होने पर उन्होंने पतोहू के भाई को बुलाकर उसकी दूसरी शादी करने का आदेश दिया, जबकि पतोहू उनकी सेवा करना चाहती थी।

      • English: Social Reformer: He broke social taboos. He made his daughter-in-law light his son's funeral pyre. After the mourning period, he called her brother and ordered him to get her remarried, even though she wanted to serve him.

    • अंतिम समय: उनकी मृत्यु भी उनके व्यक्तित्व के अनुरूप शांत तरीके से हुई। वे हर वर्ष गंगा स्नान को जाते थे। अंतिम समय में भी वे अपने नियमों पर अटल रहे। एक सुबह जब लोगों ने उनका गीत नहीं सुना, तो जाकर देखा कि बालगोबिन भगत नहीं रहे, सिर्फ उनका पंजर (शरीर) पड़ा था।

      • English: Last Moments: His death was as peaceful as his personality. He used to go for Ganga bath every year. Even in his last moments, he remained firm on his rules. One morning when people did not hear his song, they went and saw that Balgobin Bhagat was no more, only his skeleton lay there.

    2. शब्द-संपदा (Vocabulary)

    शब्द (Word)

    अर्थ (Hindi Meaning)

    English Meaning

    मँझोला

    न बहुत लंबा, न छोटा (मध्यम कद)

    Medium height

    कमली

    कंबल

    Blanket

    पतोहू

    पुत्रवधू (बेटे की पत्नी)

    Daughter-in-law

    रोपनी

    धान की रोपाई

    Transplantation of paddy

    कलेवा

    सुबह का नाश्ता

    Breakfast

    पुरवाई

    पूरब की ओर से बहने वाली हवा

    East wind

    अधरतिया

    आधी रात

    Midnight

    खंजड़ी

    डफली जैसा छोटा वाद्य यंत्र

    Small tambourine

    निस्तब्धता

    सन्नाटा / चुप्पी

    Silence / Stillness

    लोही

    प्रातःकाल की लाली

    Redness of dawn

    कुहासा

    कोहरा

    Fog

    आवृत

    ढका हुआ

    Covered

    संबल

    सहारा

    Support

    बोदा

    कम बुद्धिवाला / सुस्त

    Dull / Mentally weak

    3. चरित्र चित्रण (Character Sketches)

    बालगोबिन भगत (Balgobin Bhagat)

    • सच्चे साधु (True Saint): वे वेशभूषा से नहीं, बल्कि अपने मानवीय व्यवहार और उच्च विचारों से साधु थे। वे कबीर के आदर्शों पर चलते थे, सत्य बोलते थे और निस्वार्थ भाव से जीते थे।

      • English: He was a saint not by his attire but by his humane behavior and high thoughts. He followed Kabir's ideals, spoke the truth, and lived selflessly.

    • समाज सुधारक और प्रगतिशील (Social Reformer & Progressive): उन्होंने विधवा विवाह का समर्थन किया और दाह-संस्कार के नियमों को बदलकर महिला (पतोहू) से मुखाग्नि दिलवाई। वे रूढ़िवादी परंपराओं के विरोधी थे।

      • English: He supported widow remarriage and changed the funeral rites by having a woman (daughter-in-law) light the pyre. He was opposed to orthodox traditions.

    पतोहू (Daughter-in-law)

    • सुशील और सेवाभावी (Virtuous & Service-oriented): वह घर के सारे कामकाज सँभालती थी। पति की मृत्यु के बाद वह बालगोबिन भगत को अकेले छोड़कर नहीं जाना चाहती थी क्योंकि उसे उनके बुढ़ापे की चिंता थी।

      • English: She managed all the household chores. After her husband's death, she did not want to leave Balgobin Bhagat alone because she was worried about his old age.

    4. योग्यता-आधारित प्रश्न (Competency-Based Questions)

    A. अभिकथन और तर्क (Assertion & Reasoning)

    प्रश्न 1:

    अभिकथन (A): बालगोबिन भगत साधु थे।

    तर्क (R): वे परिवार को छोड़कर जंगल में तपस्या करते थे और भिक्षा माँगकर खाते थे।

    उत्तर: (ग) A सही है, R गलत है। (वे साधु थे लेकिन वे गृहस्थ जीवन जीते थे, खेती करते थे और घर में रहते थे, जंगल में नहीं)।

    प्रश्न 2:

    अभिकथन (A): भगत ने अपनी पतोहू को उसके भाई के साथ भेज दिया।

    तर्क (R): वे चाहते थे कि उनकी पतोहू का दूसरा विवाह हो जाए और उसका जीवन सुखमय हो।

    उत्तर: (क) A और R दोनों सही हैं, तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

    B. स्थिति-आधारित विश्लेषण (Situation Analysis)

    स्थिति (Situation): किसी के घर में मृत्यु होने पर लोग रोते-बिलखते हैं, लेकिन बालगोबिन भगत गीत गा रहे थे।

    प्रश्न (Question): 'बालगोबिन भगत' पाठ के आधार पर बताइए कि उनका यह व्यवहार किस जीवन-दर्शन को दर्शाता है?

    उत्तर (Answer): उनका यह व्यवहार 'आत्म-विनाश और अमरता' के दर्शन को दर्शाता है। वे मानते थे कि मृत्यु दुख की बात नहीं है, बल्कि यह तो 'आत्मा का परमात्मा से मिलन' है। यह विरहिनी (आत्मा) के अपने प्रेमी (ईश्वर) से मिलने का उत्सव है। यह उनकी कबीरपंथी आध्यात्मिक गहराई को दिखाता है।

    C. आशय स्पष्टीकरण (Intent/Inference)

    प्रश्न 1: "तू जा, नहीं तो मैं ही इस घर को छोड़कर चल दूँगा।"

    उत्तर: इस पंक्ति का आशय यह है कि बालगोबिन भगत अपनी पतोहू के भविष्य को लेकर बहुत दृढ़ थे। जब पतोहू ने उन्हें छोड़कर जाने से मना किया, तो उन्होंने यह अंतिम दलील दी ताकि वह विवश होकर मायके चली जाए और दूसरी शादी कर ले। यह उनके निस्वार्थ प्रेम और त्याग को दर्शाता है।

    प्रश्न 2: "अभी आसमान के तारों के दीपक बुझे नहीं थे।"

    उत्तर: इसका आशय यह है कि अभी सूर्योदय नहीं हुआ था और सुबह बहुत जल्दी थी (भोर का समय)। तारे अभी भी टिमटिमा रहे थे, यानी बालगोबिन भगत ब्रह्म मुहूर्त में ही उठकर अपनी साधना में लीन हो जाते थे।

    5. प्रश्न-उत्तर (Subjective Q&A)

    A. लघु उत्तरीय (Short Answer - 30-40 Words)

    प्रश्न 1: बालगोबिन भगत को 'साधु' क्यों कहा गया है, जबकि वे गृहस्थ थे?

    उत्तर: क्योंकि साधु की पहचान केवल वेशभूषा से नहीं, बल्कि आचरण से होती है। भगत सत्य बोलते थे, किसी से झगड़ा नहीं करते थे, कबीर के आदर्शों पर चलते थे और सांसारिक मोह-माया से दूर थे। उनका जीवन त्याग और पवित्रता का उदाहरण था।

    प्रश्न 2: भगत के गायन का श्रोताओं पर क्या प्रभाव पड़ता था?

    उत्तर: भगत का गायन इतना मधुर और प्रभावशाली था कि खेतों में काम करने वाले लोग झूम उठते थे। बच्चे खेलने लगते थे, औरतों के होंठ गुनगुनाने लगते थे और हलवाहों के पैर ताल से उठने लगते थे। वातावरण संगीतमय हो जाता था।

    प्रश्न 3: बालगोबिन भगत ने अपने बेटे की मृत्यु पर पतोहू को क्या समझाया?

    उत्तर: उन्होंने पतोहू को समझाया कि यह रोने का नहीं, बल्कि उत्सव मनाने का समय है। आत्मा शरीर छोड़कर परमात्मा से जा मिली है। यह विरहिनी के अपने प्रेमी से मिलने का आनंद है, इसलिए दुख नहीं करना चाहिए।

    प्रश्न 4: भगत की दिनचर्या लोगों के अचरज का कारण क्यों थी?

    उत्तर: वृद्ध होने के बावजूद भगत की दिनचर्या अत्यंत कठोर और नियमित थी। वे कड़ाके की ठंड में भी सुबह जल्दी उठकर नदी स्नान करते और गीत गाते थे। बीमारी और बुढ़ापे में भी उन्होंने अपने नियमों (नेम-व्रत) को नहीं छोड़ा, जिसे देखकर लोग हैरान रह जाते थे।

    प्रश्न 5: पाठ में 'कलेवा' का क्या अर्थ है और यह कब किया जाता है?

    उत्तर: 'कलेवा' का अर्थ है सुबह का जलपान (नाश्ता)। पाठ में जब किसान सुबह-सुबह खेतों में काम करने जाते हैं, तो घर की औरतें उनके लिए खेत की मेड़ पर बैठकर कलेवा लेकर आती हैं।

    B. दीर्घ उत्तरीय/मूल्यपरक (Long/Value-Based - 100 Words)

    प्रश्न 1: बालगोबिन भगत के व्यक्तित्व से हमें समाज सुधार की क्या प्रेरणा मिलती है? उदाहरण सहित स्पष्ट करें।

    उत्तर: बालगोबिन भगत एक सच्चे समाज सुधारक थे। उन्होंने अपने कार्यों से समाज की रूढ़ियों पर प्रहार किया।

    1. विधवा विवाह का समर्थन: उन्होंने अपनी विधवा पतोहू के भविष्य की चिंता की और उसे जबरदस्ती उसके भाई के साथ भेजकर दूसरी शादी करने का आदेश दिया, जो उस समय एक क्रांतिकारी कदम था।

    2. स्त्री-समानता: उन्होंने बेटे के दाह-संस्कार में पुरुष-प्रधान परंपरा को तोड़ते हुए पतोहू से मुखाग्नि दिलवाई।

    3. संतोषी स्वभाव: वे मेहनत की कमाई पर जीते थे और कबीरपंथी मठ में अपनी फसल दान कर प्रसाद रूप में जो मिलता, उसी से गुजारा करते थे। उनका जीवन सादगी, त्याग और सामाजिक न्याय की प्रेरणा देता है।

    प्रश्न 2: "मोह और प्रेम में अंतर होता है।" भगत के जीवन की किस घटना के आधार पर इस कथन को सिद्ध करेंगे?

    उत्तर: मोह में व्यक्ति स्वार्थ देखता है और दूसरे को बाँधकर रखना चाहता है, जबकि प्रेम में व्यक्ति दूसरे की भलाई और स्वतंत्रता चाहता है। पतोहू भगत से 'मोह' करती थी, इसलिए वह उनकी सेवा के लिए अपना जीवन वहीं बिताना चाहती थी (भले ही उसका अपना जीवन कष्टमय हो जाए)। लेकिन भगत पतोहू से सच्चा 'प्रेम' करते थे, इसलिए उन्होंने अपने बुढ़ापे के सहारे की चिंता न करके पतोहू के सुखद भविष्य (दूसरी शादी) को चुना। उन्होंने उसे घर से जाने के लिए मजबूर कर दिया। यह घटना सिद्ध करती है कि सच्चा प्रेम त्याग और दूसरे के हित में निहित है।

    प्रश्न 3: बालगोबिन भगत की संगीत साधना का चरम उत्कर्ष कब देखा गया?

    उत्तर: बालगोबिन भगत की संगीत साधना का चरम उत्कर्ष उस दिन देखा गया जिस दिन उनका इकलौता बेटा मरा। सामान्यतः पिता बेटे की मृत्यु पर टूट जाता है, लेकिन भगत ने बेटे के शव को फूलों से सजाया, सिरहाने दीया जलाया और उसके सामने बैठकर तल्लीनता से गीत गाते रहे। उनके स्वर में वही पुराना दम और मस्ती थी। उन्होंने मृत्यु को शोक का नहीं, बल्कि आनंद का विषय बना दिया। संगीत के माध्यम से वैराग्य और ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास का ऐसा प्रदर्शन उनकी साधना की पराकाष्ठा थी।

    6. व्याकरण (Integrated Grammar)

    (Based on Class 10 Hindi Course A Pattern)

    प्रश्न 1: पद-परिचय दीजिए: "बालगोबिन भगत मँझोले कद के आदमी थे।" (रेखांकित: बालगोबिन भगत)

    उत्तर: संज्ञा (व्यक्तिवाचक), पुल्लिंग, एकवचन, कर्ता कारक, 'थे' क्रिया का कर्ता।

    प्रश्न 2: वाच्य परिवर्तन कीजिए: "बालगोबिन भगत ने पतोहू से आग दिलाई।" (कर्मवाच्य में बदलिए)

    उत्तर: बालगोबिन भगत द्वारा पतोहू से आग दिलाई गई।

    प्रश्न 3: वाच्य पहचानिए: "अब चला जाए।"

    उत्तर: भाववाच्य (Bhav Vachya) - (यहाँ क्रिया भाव प्रधान है और अकर्मक है)।

    प्रश्न 4: पद-परिचय: "वे मधुर गीत गाते थे।" (रेखांकित: मधुर)

    उत्तर: विशेषण (गुणवाचक), पुल्लिंग, बहुवचन, 'गीत' विशेष्य की विशेषता बता रहा है।

    7. सामान्य त्रुटियाँ (Common Student Errors)

    1. साधु vs गृहस्थ:

      • त्रुटि: छात्र अक्सर लिखते हैं कि वे घर-बार छोड़कर साधु बन गए थे।

      • सुधार: वे घर नहीं छोड़े थे। वे गृहस्थ थे, खेती करते थे, परिवार के साथ रहते थे, लेकिन उनका आचरण साधुओं जैसा था।

    2. बेटे के प्रति भाव:

      • त्रुटि: छात्र सोचते हैं कि भगत अपने बेटे से प्यार नहीं करते थे क्योंकि वे रोए नहीं।

      • सुधार: वे अपने बेटे को और भी अधिक मानते थे क्योंकि वह सुस्त और बोदा था। उनका मानना था कि ऐसे लोगों को ज्यादा प्यार और निगरानी की जरूरत होती है। उनका न रोना उनकी आध्यात्मिक समझ थी, कठोरता नहीं।

    3. कबीर का संबंध:

      • त्रुटि: छात्र लिखते हैं कि वे तुलसीदास के भक्त थे (तुलसी माला के कारण)।

      • सुधार: वे कबीर के भक्त थे और उन्हें ही अपना 'साहब' मानते थे। तुलसी की माला वे गले में पहनते थे, लेकिन विचारधारा कबीर की थी।


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