2.5B - जीवन - Jeevan - Class 7 - Sugambharati 1
- Nov 1, 2025
- 7 min read
Updated: Nov 5, 2025

पाठ का प्रकार: पद्य (गजल)
पाठ का शीर्षक: जीवन
लेखक/कवि का नाम: हस्तीमल 'हस्ती'
सारांश (Bilingual Summary)
हिन्दी: यह एक गजल है जिसमें कवि ने जीवन जीने का सही तरीका बताया है। कवि कहते हैं कि जब भी हम इस प्रेम रूपी संसार से गुजरें तो हमें सबसे प्रेम से मिलना चाहिए। जिस प्रकार अनगिनत बूँदों में से कुछ ही फूलों पर ठहर पाती हैं, उसी प्रकार हमें भी कुछ खास और अच्छा करना चाहिए। जीवन एक झरने के समान है, जिसमें उतार (गिरना) और चढ़ाव (बहना) दोनों हैं। कवि संदेश देते हैं कि हमें दुनिया की राहों पर चलते हुए भी अपनी मंजिल को हमेशा ध्यान में रखना चाहिए और अंत में, पर्वत, मिट्टी और पेड़ की तरह संसार में सबसे हिल-मिलकर रहना चाहिए।
English: This is a 'ghazal' in which the poet explains the right way to live life. The poet says that whenever we pass through this world full of love, we should meet everyone with affection. Just as only a few of the countless raindrops get to rest upon flowers, we too should do something special and good. Life is like a waterfall, which has both downs (falling) and ups (flowing). The poet gives the message that while walking on the paths of the world, we must always keep our destination in mind and finally, we should live in harmony with everyone in the world, just like the mountain, soil, and tree.
केंद्रीय भाव (Bilingual Theme / Central Idea)
हिन्दी: इस गजल का केंद्रीय भाव है- सभी के साथ स्नेहपूर्वक और हिल-मिलकर रहना। कवि यह संदेश देना चाहते हैं कि जीवन उतार-चढ़ाव से भरा है, लेकिन हमें अपनी मंजिल पर ध्यान केंद्रित रखना चाहिए। हमें दुनिया में रहते हुए भी दुनिया की चकाचौंध में खोना नहीं है, बल्कि पर्वत, मिट्टी और पेड़ जैसे प्राकृतिक तत्वों से प्रेरणा लेकर सबके साथ सामंजस्य बिठाकर चलना है।
English: The central theme of this ghazal is to live lovingly and harmoniously with everyone. The poet wants to convey that life is full of ups and downs, but we must stay focused on our destination. While living in the world, we should not get lost in its dazzle, but rather take inspiration from natural elements like mountains, soil, and trees, and live in harmony with all.
शब्दार्थ (Glossary)
शब्द (Word) | पर्यायवाची शब्द (Synonym) | विलोम शब्द (Antonym) |
स्नेह | प्रेम, प्यार | घृणा, नफरत |
अनगिन | असंख्य, अनगिनत | गिनत, गिने-चुने |
ठहरना | रुकना | चलना, गुजरना |
सागर | समुद्र, सिंधु | गागर, नदी |
अंदाज | शैली, ढंग | - |
बिखरना | फैलना | सिमटना |
जीवन | ज़िंदगी | मृत्यु, मरण |
मंजिल | लक्ष्य, गंतव्य | भटकाव |
राह | रास्ता, पथ | गुमराही |
जग | संसार, दुनिया | - |
पंक्तियों का सरल अर्थ लिखें (Simple Meaning of Lines)
१. सबको गले लगाते चलना,
स्नेह नगर से जब भी गुजरना ।
परिचय: इन पंक्तियों में कवि प्रेम भरे संसार में रहने का तरीका बता रहे हैं।
सरल अर्थ: कवि कहते हैं कि जब भी तुम इस प्रेम भरे संसार (स्नेह नगर) से गुजरो, तो तुम्हें सभी से प्रेमपूर्वक मिलना चाहिए और सबको गले लगाना चाहिए।
२. अनगिन बूँदों में कुछ को ही
आता है फूलों पे ठहरना ।
परिचय: यहाँ कवि कुछ खास लोगों या पलों की विशिष्टता बता रहे हैं।
सरल अर्थ: आसमान से अनगिनत बूँदें गिरती हैं, लेकिन उनमें से कुछ बूँदों को ही फूलों पर ठहरने का सौभाग्य मिलता है; वे ही मोती जैसी दिखती हैं।
३. बरसों याद रखें ये लहरें
सागर से यूँ पार उतरना ।
परिचय: इन पंक्तियों में कवि कुछ ऐसा करने की प्रेरणा दे रहे हैं जो यादगार बन जाए।
सरल अर्थ: हमें इस जीवन रूपी सागर को इस कुशलता से पार करना चाहिए कि हमारी सफलता की कहानी को लहरें भी बरसों तक याद रखें।
४. फूलों का अंदाज सिमटना,
खुशबू का अंदाज बिखरना ।।
परिचय: यहाँ कवि प्रकृति के दो अलग-अलग गुणों को दर्शा रहे हैं।
सरल अर्थ: यह प्रकृति का नियम है कि फूल का स्वभाव सिमटकर रहने (एक जगह खिलने) का है, जबकि खुशबू का स्वभाव चारों ओर बिखरने (फैलने) का है।
५. गिरना भी है बहना भी है
जीवन भी है कैसा झरना
परिचय: इन पंक्तियों में कवि ने जीवन की तुलना एक झरने से की है।
सरल अर्थ: कवि कहते हैं कि यह जीवन भी एक झरने के समान है, जिसमें गिरना (उतार) भी है और बहना (चढ़ाव या प्रवाह) भी है; अर्थात जीवन सुख-दुख से भरा है।
६. अपनी मंजिल ध्यान में रखकर
दुनिया की राहों से गुजरना ।
परिचय: यहाँ कवि जीवन जीने का एक महत्वपूर्ण सूत्र बता रहे हैं।
सरल अर्थ: हमें इस दुनिया के रास्तों पर चलते हुए अपनी मंजिल (लक्ष्य) को हमेशा अपने ध्यान में रखना चाहिए और उससे भटकना नहीं चाहिए।
७. पर्वत, मिट्टी, पेड़ ज्यों रहते
जग में सबसे हिलमिल रहना ।
परिचय: अंतिम पंक्तियों में कवि प्रकृति का उदाहरण देकर हिल-मिलकर रहने की सीख दे रहे हैं।
सरल अर्थ: जिस प्रकार पर्वत, मिट्टी और पेड़ इस संसार में एक साथ मिल-जुलकर रहते हैं, उसी प्रकार हमें भी इस संसार में सबसे हिल-मिलकर रहना चाहिए।
सही या गलत (कारण सहित) (True or False with Reason)
कथन १: कवि ने स्नेह नगर से गुजरते हुए सबको गले लगाने को कहा है।
उत्तर: सही। कारण, कवि कहते हैं, "सबको गले लगाते चलना, स्नेह नगर से जब भी गुजरना।"
कथन २: सभी बूँदों को फूलों पर ठहरना आता है।
उत्तर: गलत। कारण, कवि कहते हैं, "अनगिन बूँदों में कुछ को ही आता है फूलों पे ठहरना।"
कथन ३: जीवन की तुलना एक सागर से की गई है।
उत्तर: गलत। कारण, पाठ में जीवन की तुलना एक झरने से की गई है ("जीवन भी है कैसा झरना")।
कथन ४: खुशबू का अंदाज सिमटना है।
उत्तर: गलत। कारण, कविता में "फूलों का अंदाज सिमटना" और "खुशबू का अंदाज बिखरना" कहा गया है।
कथन ५: कवि ने पर्वत, मिट्टी और पेड़ की तरह हिलमिल रहने को कहा है।
उत्तर: सही। कारण, कवि कहते हैं, "पर्वत, मिट्टी, पेड़ ज्यों रहते, जग में सबसे हिलमिल रहना।"
पद विश्लेषण (Poetry Appreciation)
रचनाकार का नाम: हस्तीमल 'हस्ती'
रचना का प्रकार: गजल
पसंदीदा पंक्ति | पसंदीदा होने का कारण | रचना से प्राप्त संदेश |
सबको गले लगाते चलना... | यह पंक्ति प्रेम और भाईचारे का सरल और सुंदर संदेश देती है। | हमें सभी के साथ प्रेमपूर्वक व्यवहार करना चाहिए। |
अनगिन बूँदों में कुछ को ही... | यह पंक्ति हमें जीवन में कुछ खास और विशिष्ट करने की प्रेरणा देती है। | जीवन में सभी को सफलता नहीं मिलती, इसके लिए खास प्रयास चाहिए। |
गिरना भी है बहना भी है... | यह पंक्ति जीवन के उतार-चढ़ाव को एक झरने के सुंदर रूपक से समझाती है। | जीवन सुख और दुख दोनों का संगम है, हमें दोनों को स्वीकार करना चाहिए। |
अपनी मंजिल ध्यान में रखकर... | यह पंक्ति हमें अपने लक्ष्य पर केंद्रित रहने का एक महत्वपूर्ण सूत्र देती है। | दुनिया में रहते हुए भी हमें अपने लक्ष्य से भटकना नहीं चाहिए। |
जग में सबसे हिलमिल रहना । | यह पंक्ति प्रकृति का उदाहरण देकर सामाजिक सद्भाव का अंतिम संदेश देती है। | हमें समाज में सभी के साथ मिल-जुलकर रहना चाहिए। |
स्वमत (Personal Opinion)
प्रश्न १: "सबको गले लगाते चलना" से कवि का क्या आशय है?
उत्तर: "सबको गले लगाते चलना" से कवि का आशय है कि हमें सभी मनुष्यों के साथ प्रेम, अपनेपन और सद्भाव का व्यवहार करना चाहिए। हमें ऊँच-नीच, जाति-धर्म का भेदभाव किए बिना सभी को अपना समझना चाहिए और सबके प्रति मन में स्नेह रखना चाहिए।
उत्तर लिखने के लिए उपयोगी महत्वपूर्ण शब्द: प्रेम, सद्भाव, अपनापन, भाईचारा, भेदभाव रहित, स्नेह।
प्रश्न २: जीवन को "झरना" क्यों कहा गया है?
उत्तर: जीवन को "झरना" इसलिए कहा गया है क्योंकि दोनों के स्वभाव में समानता है। जिस प्रकार झरना ऊपर से नीचे "गिरता" है और फिर समतल भूमि पर निरंतर "बहता" रहता है, उसी प्रकार जीवन में भी उतार (दुख, असफलता) और चढ़ाव (सुख, प्रगति) आते रहते हैं। झरना इन दोनों अवस्थाओं में भी निरंतर चलता रहता है, वैसे ही जीवन भी सुख-दुख के बावजूद निरंतर चलता रहता है।
उत्तर लिखने के लिए उपयोगी महत्वपूर्ण शब्द: उतार-चढ़ाव, सुख-दुख, निरंतरता, प्रवाह, समानता, प्रगति, असफलता।
प्रश्न ३: "अपनी मंजिल ध्यान में रखकर दुनिया की राहों से गुजरना" का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: इसका अर्थ है कि हमें अपना लक्ष्य या उद्देश्य हमेशा याद रखना चाहिए, भले ही हम दुनिया में किसी भी परिस्थिति में हों। दुनिया के रास्ते हमें अपनी ओर खींच सकते हैं, हम भटक सकते हैं, लेकिन यदि हमारी नजर अपनी मंजिल पर टिकी रहेगी, तो हम व्यर्थ के भटकावों से बच जाएँगे और एक दिन अपने लक्ष्य को अवश्य प्राप्त कर लेंगे।
उत्तर लिखने के लिए उपयोगी महत्वपूर्ण शब्द: लक्ष्य केंद्रित, भटकाव, उद्देश्य, एकाग्रता, सफलता, संसार।
प्रश्न ४: इस गजल से आपको क्या प्रेरणा मिलती है?
उत्तर: इस गजल से मुझे सबके साथ प्रेम से रहने, जीवन के सुख-दुख को सहजता से स्वीकार करने और दुनिया में रहते हुए भी अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखने की प्रेरणा मिलती है। यह गजल सिखाती है कि हमें प्रकृति की तरह बनना चाहिए, जो बिना किसी भेदभाव के सबके साथ हिल-मिलकर रहती है और निरंतर अपना काम करती रहती है।
उत्तर लिखने के लिए उपयोगी महत्वपूर्ण शब्द: प्रेम, सद्भाव, लक्ष्य केंद्रित, सुख-दुख, प्रकृति, सामंजस्य, प्रेरणा।
प्रश्न ५: कवि ने पर्वत, मिट्टी और पेड़ का उदाहरण क्यों दिया है?
उत्तर: कवि ने पर्वत, मिट्टी और पेड़ का उदाहरण यह समझाने के लिए दिया है कि प्रकृति के ये सभी तत्व बिना किसी भेदभाव या शिकायत के एक-दूसरे के साथ "हिलमिल" कर रहते हैं। पर्वत मिट्टी को थामे रखता है, मिट्टी पेड़ को पोषण देती है, और पेड़ सबको छाया और फल देते हैं। वे सब मिलकर रहते हैं। कवि चाहते हैं कि इंसान भी इसी तरह प्रकृति से सीख लेकर समाज में सबके साथ हिल-मिलकर रहे।
उत्तर लिखने के लिए उपयोगी महत्वपूर्ण शब्द: सामंजस्य, प्रकृति, हिलमिल रहना, सद्भाव, आपसी सहयोग, भेदभाव रहित।
संभावित परीक्षा प्रश्न (Probable Exam Questions)
प्रश्न १: स्नेह नगर से गुजरते हुए कवि क्या करने को कहते हैं?
उत्तर: स्नेह नगर से गुजरते हुए कवि सभी को गले लगाने, अर्थात सबसे प्रेमपूर्वक और हिल-मिलकर रहने को कहते हैं।
प्रश्न २: किन बूँदों को फूलों पर ठहरना आता है?
उत्तर: अनगिनत बूँदों में से केवल कुछ (विशेष) बूँदों को ही फूलों पर ठहरना आता है।
प्रश्न ३: जीवन की तुलना किससे की गई है और क्यों?
उत्तर: जीवन की तुलना एक झरने से की गई है, क्योंकि जीवन में भी झरने की तरह "गिरना" (उतार) और "बहना" (चढ़ाव) होता रहता है।
प्रश्न ४: दुनिया की राहों से गुजरते समय हमें क्या ध्यान में रखना चाहिए?
उत्तर: दुनिया की राहों से गुजरते समय हमें अपनी मंजिल (लक्ष्य) को हमेशा ध्यान में रखना चाहिए।
प्रश्न ५: कवि ने किसके समान हिलमिल रहने को कहा है?
उत्तर: कवि ने पर्वत, मिट्टी और पेड़ के समान जग में सबसे हिलमिल रहने को कहा है।
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