2. दो गौरैया - (Do Gauraiya)- Class 8 - Malhar
- Dec 28, 2025
- 9 min read
Updated: Dec 31, 2025

Author: भीष्म साहनी (Bhisham Sahni)
1. पाठ का सार (Quick Revision Summary)
घर या सराय: लेखक के घर में केवल तीन लोग (माँ, पिताजी और लेखक) रहते थे, लेकिन पिताजी कहते थे कि यह घर 'सराय' (Inn) बन गया है। कारण यह था कि घर में अनगिनत जीव-जंतुओं ने डेरा डाल रखा था। आँगन के आम के पेड़ पर पक्षी, घर के अंदर चूहे, कबूतर, चमगादड़, छिपकलियाँ और चींटियों की फौज रहती थी। एक बिल्ली भी कभी-कभी झाँक जाती थी।
English: Home or Inn: Only three people (Mother, Father, and the Author) lived in the author's house, but the father used to say that the house had become an 'inn'. The reason was that countless creatures had camped there. Birds on the mango tree in the courtyard, and rats, pigeons, bats, lizards, and an army of ants lived inside the house. A cat also visited occasionally.
गौरैयों का आगमन: एक दिन दो गौरैयाँ घर के अंदर घुस आईं और मकान का निरीक्षण करने लगीं। जल्द ही उन्होंने बैठक (Drawing room) की छत पर लगे पंखे के गोले में अपना घोंसला बना लिया और मजे से रहने लगीं। यह पिताजी को बिल्कुल पसंद नहीं आया।
English: Arrival of Sparrows: One day two sparrows entered the house and started inspecting it. Soon, they made their nest in the sphere of the ceiling fan in the drawing room and started living happily. Father did not like this at all.
पिताजी का संघर्ष: पिताजी ने गौरैयों को भगाने के लिए कई प्रयास किए। उन्होंने ताली बजाई, 'शू-शू' किया, लाठी घुमाई और दरवाजे-खिड़कियां बंद किए। लेकिन गौरैयाँ किसी न किसी रास्ते (रोशनदान या दरवाजे के नीचे से) वापस आ जाती थीं। माँ इस पूरे नाटक का आनंद लेती थीं और पिताजी पर व्यंग्य (Sarcasm) करती थीं कि "चूहों को तो निकाल नहीं पाए, अब चिड़ियों को निकालेंगे।"
English: Father's Struggle: Father tried many ways to drive the sparrows away. He clapped, made shooing sounds, waved a stick, and closed doors and windows. But the sparrows would return through some way or the other (ventilator or under the door). Mother enjoyed this drama and sarcastically remarked, "You couldn't get rid of the rats, now you will remove the birds."
घोंसला तोड़ने का निर्णय: जब पिताजी की सहनशीलता जवाब दे गई, तो उन्होंने घोंसला तोड़ने का फैसला किया। वे स्टूल पर चढ़ गए और लाठी से घोंसले के तिनके निकालने लगे। माँ ने उन्हें रोकने की कोशिश की और कहा कि शायद उन्होंने अंडे दे दिए होंगे, लेकिन पिताजी नहीं माने।
English: Decision to Break the Nest: When Father's patience ran out, he decided to destroy the nest. He climbed on a stool and started removing straws from the nest with a stick. Mother tried to stop him saying they might have laid eggs, but Father did not listen.
हृदय परिवर्तन: जैसे ही पिताजी ने घोंसले के तिनके हटाए, अंदर से 'चीं-चीं' की आवाज़ आई। उन्होंने देखा कि दो नन्हे-नन्हे बच्चे सिर निकालकर अपने माँ-बाप को बुला रहे थे। यह देखकर पिताजी का दिल पिघल गया। वे चुपचाप स्टूल से उतर आए और लाठी रख दी।
English: Change of Heart: As soon as Father removed the straws, a 'Chee-Chee' sound came from inside. He saw two tiny babies peeping out and calling for their parents. Seeing this, Father's heart melted. He quietly got down from the stool and put away the stick.
सुखद अंत: माँ ने खुश होकर सारे दरवाजे खोल दिए। गौरैयों के माता-पिता तुरंत अंदर आए और बच्चों को चुग्गा (खाना) खिलाने लगे। पिताजी, जो पहले उन्हें भगाना चाहते थे, अब कुर्सी पर बैठकर मुसकराते हुए उन्हें देख रहे थे। घर में फिर से शोर था, लेकिन अब यह शोर पिताजी को परेशान नहीं कर रहा था।
English: Happy Ending: Mother happily opened all the doors. The sparrow parents immediately came in and started feeding the babies. Father, who wanted to drive them away earlier, was now sitting on the chair watching them with a smile. There was noise in the house again, but now this noise was not bothering Father.
2. शब्द-संपदा (Vocabulary)
शब्द (Word) | अर्थ (Hindi Meaning) | English Meaning |
सराय | यात्रियों के ठहरने का स्थान / धर्मशाला | Inn / Guest house |
डेरा डालना | रहने के लिए जम जाना | To camp / To settle |
धमा-चौकड़ी | उछल-कूद / शोर-शराबा | Romp / Commotion |
निरीक्षण | ध्यान से देखना / मुआयना | Inspection |
व्यंग्य | ताना / कटाक्ष | Sarcasm / Irony |
सहनशीलता | बर्दाश्त करने की क्षमता | Tolerance / Patience |
अवाक् | हैरान / चुप | Speechless / Stunned |
मल्हार | वर्षा ऋतु में गाया जाने वाला एक राग (यहाँ खुशी का प्रतीक) | A musical raga (Symbol of joy here) |
छावनी | पड़ाव / सेना का डेरा | Cantonment / Camp |
विस्मय | आश्चर्य | Surprise / Wonder |
3. चरित्र चित्रण (Character Sketches)
पिताजी (Father)
अनुशासनप्रिय लेकिन कोमल हृदय (Disciplined but Soft-hearted): पिताजी को घर में अव्यवस्था और जीव-जंतुओं का शोर पसंद नहीं था। वे जिद्दी थे और हार नहीं मानना चाहते थे ("मैं हार मानने वाला आदमी नहीं हूँ")। लेकिन नन्हे बच्चों को देखकर उनकी कठोरता पिघल गई और उनका संवेदनशील रूप सामने आया।
English: Father did not like chaos and noise of animals in the house. He was stubborn and did not want to accept defeat. But seeing the tiny babies, his hardness melted, and his sensitive side was revealed.
माँ (Mother)
हँसमुख और संवेदनशील (Cheerful & Sensitive): माँ पिताजी की चिढ़ का मज़ा लेती थीं और उन पर व्यंग्य करती थीं। लेकिन वे पक्षियों के प्रति दयालु थीं। उन्होंने ही पिताजी को चेताया था कि शायद चिड़ियों ने अंडे दिए हैं। अंत में दरवाजा खोलकर उन्होंने अपनी खुशी ज़ाहिर की।
English: Mother used to make fun of Father's irritation and passed sarcastic comments. But she was kind to birds. She was the one who warned Father that the birds might have laid eggs. In the end, she expressed her happiness by opening the door.
4. योग्यता-आधारित प्रश्न (Competency-Based Questions)
A. अभिकथन और तर्क (Assertion & Reasoning)
प्रश्न 1:
अभिकथन (A): पिताजी स्टूल से नीचे उतर आए और लाठी एक ओर रख दी।
तर्क (R): वे घोंसला तोड़ते-तोड़ते थक गए थे और उन्हें नींद आ रही थी।
उत्तर: (ग) A सही है, R गलत है। (वे इसलिए रुक गए क्योंकि उन्होंने घोंसले में नन्हे बच्चों को देख लिया था, जिससे उनके मन में दया आ गई थी)।
प्रश्न 2:
अभिकथन (A): पिताजी घर को 'सराय' कहते थे।
तर्क (R): घर में लेखक के परिवार के अलावा चूहे, कबूतर, चमगादड़ और अन्य जीव-जंतु भी रहते थे।
उत्तर: (क) A और R दोनों सही हैं, तथा R, A की सही व्याख्या करता है।
B. स्थिति-आधारित विश्लेषण (Situation Analysis)
स्थिति (Situation): आपके घर में मधुमक्खी ने छत्ता बना लिया है और घर वाले उसे जलाकर हटाना चाहते हैं।
प्रश्न (Question): 'दो गौरैया' पाठ के नैतिक मूल्यों के आधार पर आप घर वालों को क्या समझाएंगे?
उत्तर (Answer): मैं उन्हें समझाऊँगा कि जीवों के प्रति क्रूरता ठीक नहीं है। जैसे पाठ में पिताजी का मन बच्चों को देखकर बदल गया, वैसे ही हमें समझना चाहिए कि मधुमक्खियों का भी वह घर है। हम उन्हें बिना नुकसान पहुँचाए, विशेषज्ञों की मदद से सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करवा सकते हैं। सह-अस्तित्व (Co-existence) का भाव रखना जरूरी है।
C. आशय स्पष्टीकरण (Intent/Inference)
प्रश्न 1: "छोड़ो जी, चूहों को तो निकाल नहीं पाए, अब चिड़ियों को निकालेंगे!"
उत्तर: यह माँ का पिताजी पर एक व्यंग्य (Sarcasm) है। इसका आशय है कि पिताजी घर के अन्य जानवरों (चूहों) को नियंत्रित करने में असफल रहे हैं, इसलिए चिड़ियों को भगाने का उनका प्रयास भी बेकार जाएगा। यह माँ के विनोदी स्वभाव को दर्शाता है।
प्रश्न 2: "कमरे में फिर से शोर होने लगा था, पर अबकी बार पिताजी उनकी ओर देख-देखकर केवल मुसकराते रहे।"
उत्तर: पहले जिस शोर (चीं-चीं) से पिताजी चिढ़ते थे, अब वही शोर उन्हें सुखद लग रहा था। इसका कारण था 'वात्सल्य भाव'। नन्हे बच्चों और उनके माता-पिता के मिलन को देखकर उनका गुस्सा खत्म हो गया और उन्होंने उन पक्षियों को अपने परिवार का हिस्सा मान लिया।
5. प्रश्न-उत्तर (Subjective Q&A)
A. लघु उत्तरीय (Short Answer - 30-40 Words)
प्रश्न 1: पिताजी को गुस्सा क्यों आता था जब माँ हँसती थीं?
उत्तर: जब पिताजी गौरैयों को भगाने के लिए उछल-कूद करते थे, तो माँ उन पर हँसती थीं और व्यंग्य करती थीं। पिताजी को लगता था कि माँ उनका मज़ाक उड़ा रही हैं और उनकी मदद नहीं कर रही हैं, इसलिए उन्हें गुस्सा आता था।
प्रश्न 2: लेखक ने किस आधार पर कहा कि गौरैयों को घर पसंद आ गया था?
उत्तर: गौरैयों ने पहले घर का निरीक्षण किया। फिर उन्होंने बैठक के पंखे के गोले में अपना बिछावन (घोंसला) बनाना शुरू कर दिया और मजे से गाना गाने लगीं। उनके जम जाने के इस अंदाज़ से पता चला कि उन्हें घर पसंद आ गया है।
प्रश्न 3: पिताजी ने लाठी का सिरा घुमाते हुए क्या तर्क दिया?
उत्तर: जब पिताजी घोंसला तोड़ने के लिए स्टूल पर चढ़े, तो उन्होंने गुस्से में तर्क दिया कि "किसी को सचमुच बाहर निकालना हो, तो उसका घर तोड़ देना चाहिए।" उनका मानना था कि घर (घोंसला) टूटने पर गौरैयाँ मजबूर होकर चली जाएँगी।
प्रश्न 4: अंत में पिताजी और माँ के व्यवहार में क्या बदलाव आया?
उत्तर: अंत में पिताजी का हृदय परिवर्तन हो गया और उन्होंने पक्षियों को स्वीकार कर लिया। माँ ने भी खुशी-खुशी सारे दरवाजे खोल दिए ताकि पक्षी-माता-पिता अपने बच्चों तक पहुँच सकें। घर का माहौल तनावपूर्ण से खुशनुमा हो गया।
B. दीर्घ उत्तरीय/मूल्यपरक (Long/Value-Based - 100 Words)
प्रश्न 1: 'दो गौरैया' कहानी मनुष्य और प्रकृति (जीव-जंतुओं) के बीच के रिश्ते के बारे में क्या संदेश देती है?
उत्तर: यह कहानी संदेश देती है कि मनुष्य और जीव-जंतुओं का रिश्ता प्रेम और सह-अस्तित्व का होना चाहिए। शुरू में पिताजी पक्षियों को घुसपैठिया मानते हैं और अपनी सत्ता जमाना चाहते हैं। लेकिन नन्हे बच्चों की मासूमियत उनके भीतर की करुणा को जगा देती है। कहानी सिखाती है कि कठोर से कठोर व्यक्ति भी ममता और मासूमियत के आगे झुक जाता है। हमें अपने आसपास के मूक प्राणियों के प्रति संवेदनशील होना चाहिए और उनके जीने के अधिकार का सम्मान करना चाहिए। घर केवल ईंट-पत्थर का नहीं, बल्कि उसमें रहने वाले सभी जीवों का होता है।
प्रश्न 2: पिताजी द्वारा गौरैयों को भगाने के प्रयासों का वर्णन कीजिए और बताइए कि वे असफल क्यों रहे?
उत्तर: पिताजी ने गौरैयों को भगाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया।
शोर मचाना: उन्होंने ताली बजाई, 'शू-शू' किया और चिल्लाए।
शारीरिक प्रयास: वे बाहें झुलाकर कूदे और लाठी घुमाई।
रास्ते बंद करना: उन्होंने दरवाजे-खिड़कियां बंद किए और रोशनदान में कपड़े ठूँस दिए।
वे असफल इसलिए रहे क्योंकि गौरैयाँ बहुत ढीठ और चतुर थीं। वे किसी न किसी छोटे छेद या दरवाजे के नीचे की जगह से वापस आ जाती थीं। सबसे बड़ा कारण यह था कि उन्होंने वहां अंडे दे दिए थे (जैसा माँ ने कहा था), और माता-पिता अपने बच्चों/अंडों को छोड़कर कभी नहीं जाते।
प्रश्न 3: 'हार न मानना' पिताजी का एक गुण था। क्या कहानी के अंत में उन्होंने हार मान ली? अपने विचार लिखिए।
उत्तर: पिताजी बार-बार कहते थे, "मैं हार मानने वाला आदमी नहीं हूँ।" कहानी के अंत में उन्होंने लाठी रख दी और गौरैयों को रहने दिया। इसे हम उनकी 'हार' नहीं कह सकते, बल्कि यह उनकी 'मानवता की जीत' है। उन्होंने गौरैयों की जिद के आगे घुटने नहीं टेके, बल्कि नन्हे बच्चों की पुकार सुनकर अपनी जिद छोड़ी। एक निर्बल और नन्हे जीव पर दया करना कायरता नहीं, बल्कि बड़प्पन है। इसलिए, यह उनकी नैतिक विजय थी, हार नहीं।
6. व्याकरण (Integrated Grammar)
(Based on the text of the chapter)
प्रश्न 1: क्रिया-विशेषण (Adverbs) छाँटिए:
पिताजी ने मुझे झिड़ककर कहा। (रीतिवाचक क्रिया-विशेषण)
माँ खिलखिलाकर हँस दीं। (रीतिवाचक क्रिया-विशेषण)
वे सीधा हमारे घर पहुँच जाते हैं। (स्थानवाचक/रीतिवाचक)
माँ ने गंभीरता से कहा।
प्रश्न 2: मुहावरे का अर्थ और वाक्य प्रयोग:
डेरा डालना: (जमकर बैठना/रहना) - मेरे घर के पेड़ पर बंदरों ने डेरा डाल रखा है।
कानों के पर्दे फटना: (बहुत तेज शोर होना) - डी.जे. की आवाज़ से कानों के पर्दे फट रहे थे।
धमा-चौकड़ी मचाना: (ऊधम मचाना) - बच्चों ने पार्क में खूब धमा-चौकड़ी मचाई।
पिल पड़ना: (पूरी ताकत से भिड़ जाना) - पिताजी गुस्से में गौरैयों पर पिल पड़े।
प्रश्न 3: शब्द-युग्म (Word Pairs):
पहाड़ियों-घाटियों
उड़-उड़कर
चीं-चीं
नन्हीं-नन्हीं
7. सामान्य त्रुटियाँ (Common Student Errors)
माँ का पक्ष:
त्रुटि: छात्र सोचते हैं कि माँ पक्षियों को भगाना चाहती थीं क्योंकि वे पिताजी को सुझाव दे रही थीं (दरवाजा बंद करो)।
सुधार: माँ केवल पिताजी पर व्यंग्य (मज़ाक) कर रही थीं। वे वास्तव में पक्षियों के प्रति सहानुभूति रखती थीं और अंत में उन्होंने ही दरवाजे खोले।
पिताजी का परिवर्तन:
त्रुटि: छात्र लिखते हैं पिताजी हार गए इसलिए रुक गए।
सुधार: पिताजी हारे नहीं, बल्कि नन्हे बच्चों को देखकर द्रवित (Emotional) हो गए थे।
पक्षी का नाम:
त्रुटि: छात्र गौरैया को कबूतर समझ लेते हैं।
सुधार: पाठ का नाम ही 'दो गौरैया' (Sparrows) है।
End
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